There was an error in this gadget

Friday, April 30, 2010

रात के सुकून भरे कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 29-4-10

रात में हवामहल कार्यक्रम के बाद 8:15 बजे से क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है फिर हम 9 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।

4 अप्रैल से कार्यक्रमों में हुए परिवर्तनों से यह सभा भी प्रभावित रही। 9 बजे के ग़ैर फ़िल्मी रचनाओं के कार्यक्रम गुलदस्ता के स्थान पर अब हिट सुपर हिट कार्यक्रम का प्रसारण हो रहा हैं।

शुक्रवार और बुधवार को यह कार्यक्रम केवल 15 मिनट ही सुनने को मिला। 15 मिनट के लिए क्षेत्रीय प्रायोजित कार्यक्रम प्रसारित हुआ जो हिन्दी में था।

शुक्रवार को यह कार्यक्रम केन्द्रित रहा अभिनेत्री डिम्पल कपाडिया पर। क्षेत्रीय प्रायोजित कार्यक्रम के कारण हम शुरू में 15 मिनट ही यह कार्यक्रम सुन पाए। सुन कर लगा अभिनेत्री डिम्पल कपाडिया के बारे में ठीक से जानकारी नही हैं। उन्हें अस्सी के दशक की अभिनेत्री बताया गया जबकि डिम्पल सत्तर के दशक की सनसनीखेज नायिका हैं। बौबी फिल्म का झूठ बोले कौआ काटे गीत सुनवाया और इस फिल्म को उनके करिअर का मील का पत्थर बताया, यह नही बताया कि यह उनकी पहली फिल्म हैं जो 1973 के आसपास रिलीज हुई थी। कई मायनों में यह फिल्म सिनेमा के इतिहास में उस समय की ख़ास फिल्म रही थी। यह डिम्पल की पहली और आखिरी फिल्म मानी गई थी क्योंकि उन्होंने इस फिल्म के बाद राजेश खन्ना से विवाह के बाद फिल्मे न करने का निर्णय लिया था पर लम्बे समय के बाद 1986 में सागर फिल्म से फिर से अभिनय शुरू किया। सागर फिल्म की चर्चा किए बिना बंटवारा फिल्म का गीत सुनवा दिया। यह कहना भी ठीक नही लगा कि उन्होंने अस्सी के दशक में एक के बाद एक हिटसुपरहिट फिल्मे दी।

शनिवार को यह कार्यक्रम केन्द्रित रहा अभिनेता संजीव कुमार पर। संगीता (श्रीवास्तव) जी ने अच्छी जानकारी देते हुए संजीव कुमार पर फिल्माए गए चुनिन्दा गीत सुनवाए। राजा और रंक का गीत फिरकी वाली, आंधी, मौसम, नौकर के युगल गीत सुनवाए गए। अनामिका का लोकप्रिय गीत सुनवाया। उनके बेहतरीन अभिनय को दर्शाने वाली खिलौना फिल्म का गीत भी सुनवाया। बताया उनकी पहली फिल्म साठ के दशक की हम हिन्दुस्तानी हैं। प्रमुख फिल्मो के नाम बताए। उनके बेहतरीन अभिनय का एक रंग कामेडी भी हैं, मौसम को देखते हुए फिल्म पति पत्नी और वो के इस गीत की कमी खली जो अभिनय का यह रंग बखूबी दिखाता हैं -

ठंडे ठंडे पानी से नहाना चाहिए
गाना आए या न आए गाना चाहिए

उन्हें मिले पुरस्कारों की जानकारी दी। अच्छा लगा कार्यक्रम।

रविवार को यह कार्यक्रम केन्द्रित रहा अभिनेता शशि कपूर पर जिसे लेकर आए कमल (शर्मा) जी। सामान्य जानकारी दी जैसे असली नाम बलदेव हैं, पहली फिल्म धर्मपुत्र हैं। बाल कलाकार के रूप में भी काम किया। शुरूवात बेहतरीन गीत से की, फिल्म जब जब फूल खिले -

एक था गुल और एक थी बुलबुल

प्यार किए जा, आ गले लग जा, प्यार का मौसम, शर्मिली फिल्म का शीर्षक गीत और यह गीत -

एक रास्ता हैं जिन्दगी

इस तरह अलग-अलग मूड के गाने सुनना अच्छा लगा।

सोमवार को यह कार्यक्रम केन्द्रित रहा गायक सुरेश वाडकर पर। उनके गाए नए पुराने गीत सुनना अच्छा लगा -
ऐ जिन्दगी गले लगा ले

चांदनी, हिना, प्रेम रोग, यह नया गीत भी शामिल था - सपने में मिलती हैं कुडी मेरे सपने में मिलती हैं

मंगलवार को गीतकार शायर मजरूह सुल्तानपुरी के हिट सुपरहिट गीत सुनवाए गए। उनके बारे में कुछ जानकारी भी दी गई जिससे पता चला कि मूल रूप से वह यूनानी डाक्टर हैं और शायरी वास्तव में उनका शौक था। बताया कि उन्होंने हर मूड और विषय के गीत लिखे। उनके लोकप्रिय गीत सुनवाए गए - कारवां, इंकार, अभिलाषा, समाधि फिल्मो से और बुड्ढा मिल गया फिल्म का यह गीत -

भली भली सी सूरत भला सा एक नाम

बुधवार को फिल्मकार हृषिकेश मुखर्जी की फिल्मो के हिट सुपरहिट गीत सुनवाए गए। ख़ूबसूरत, मिली, आशीर्वाद फिल्मो के गीत सुनवाए गए और आनंद फिल्म से यह गीत -

मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने

यह भी बताया कि उनकी फिल्मे साफ़-सुथरी मनोरंजक होती हैं और सन्देश भी देती हैं। 9:15 बजे शुरू हुआ यह कार्यक्रम।
9:15 बजे तक दृष्टिहीनो के लिए प्रायोजित कार्यक्रम प्रसारित हुआ।

गुरूवार को फिल्मकार मणिरत्नम की फिल्मो के हिट सुपरहिट गीत सुनवाए गए। रोज़ा फिल्म से, मधुश्री का गाया यह गीत भी सुनवाया -

कभी नीम नीम कभी शहद शहद

उनका मूल नाम बताया - गोपाल रत्नम सुब्रह्मण्यम, उनकी पहली हिन्दी फिल्म हैं - दिल से, यह भी बताया की ऐ आर रहमान जैसी प्रतिभा उन्ही की फिल्म से मिली।

9:30 बजे आज के फनकार कार्यक्रम प्रसारित किया गया। लगातार यह कार्यक्रम सुनना अच्छा नही लग रहा है, विविधता होनी चाहिए। वैसे भी इसके पहले प्रसारित होने वाले हिट सुपर हिट कार्यक्रम के लगभग समान ही हैं यह कार्यक्रम, बारीक सा अंतर हैं।

शुक्रवार को अभिनेता मनोज वाजपेयी का जन्मदिन था, इस अवसर पर उन पर कार्यक्रम लेकर आए राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी। उनकी आवाज भी सुनी। उनकी प्रमुख फिल्मो सत्या, जुबेदा, बैंडिट क्वीन, एल ओ सी कारगिल की चर्चा हुई। यह महत्वपूर्ण बात भी बताई कि एन एस डी में भर्ती नही हो पाए तब भी कामयाब अभिनेता हैं। पुरस्कारों की भी चर्चा हुई। कार्यक्रम की प्रस्तुति में सहायक रहे पी के ऐ नायर जी।

शनिवार को ममता (सिंह) जी ने यह कार्यक्रम प्रस्तुत किया निर्देशक के आसिफ पर। यह नाम सुनते ही एक ही फिल्म का नाम याद आता हैं - मुगले आजम। यह कार्यक्रम भी ऐसा ही रहा। इस फिल्म के सीन पर सीन सुनवाए गए, लगा मुगले आजम फिल्म पर आधारित बाईस्कोप की बाते कार्यक्रम सुन रहे हैं। वैसे उनकी फिल्मे कम हैं - हलचल और एक दो नाम बताए गए, फिर जानकारी दी लव एंड गौड़ फिल्म की जिसे बनाने में बहुत समय लगा और परिवर्तन भी हुए पर रिलीज से पहले वो गुजर चुके थे। महत्वपूर्ण बात यह बताई कि सहायक से पहले निर्देशक बने फिर निर्माता बने।

रविवार को अभिनेता धर्मेन्द्र पर कार्यक्रम लेकर आए कमल (शर्मा) जी। गुड्डी, फूल और पत्थर और शोले फिल्मो के सीन सुनवाए। उनकी फिल्मो के चुनिन्दा गीत सुनवाए - देवर, अनुपमा, रेशम की डोरी, ड्रीम गर्ल। पहली फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे की चर्चा की। यह भी बताया कि फिल्म आई मिलन की बेला में वह उपनायक थे, हेमामालिनी के साथ उनकी जोडी खूब सराही गई। धर्मेन्द्र की रिकार्डिंग के अंश भी सुनवाए। अच्छा संतुलित लगा यह कार्यक्रम।

सोमवार को जन्मदिन के अवसर पर अभिनेत्री मौसमी चटर्जी पर प्रस्तुत किया गया यह कार्यक्रम। बताया कि 66 में उन्होंने फिल्मो में प्रवेश लिया फिल्म बालिका वधु से। दूसरी फिल्म का नाम बताया परिणीता पर यह नही बताया कि ये बंगला फिल्मे हैं। अनुराग फिल्म की चर्चा की लेकिन वास्तविक जानकारी नही दी। वास्तव में हिन्दी फिल्मो में उन्होंने प्रवेश लिया 1974 में फिल्म अनुराग से। इस फिल्म की लोकप्रियता के बाद बालिका वधु फिल्म हिन्दी में बनाई गई पर इसमे नायिका हैं - रजनी शर्मा

इस फिल्म में मौसमी चटर्जी की कोई भूमिका नही हैं। यह वही फिल्म हैं जिससे अमित कुमार ने हिन्दी पार्श्व गायन में पहला क़दम रखा इस गीत से -

बड़े अच्छे लगते हैं यह धरती, यह नदिया और तुम

हिन्दी फिल्म परिणीता का यह गीत भी सुनवा दिया -

गोरे गोरे हाथो में मेहंदी लगा के नैनो में कजरा डाल के
चलो दुल्हनिया पिया से मिलने छोटा सा घूंघट निकाल के

यह वास्तव में अशोक कुमार और मीना कुमारी की पुरानी फिल्म परिणीता का गीत हैं। एक बात अच्छी हुई कि उनकी फिल्म गुलाम बेगम बादशाह का यह गीत सुनवाया, वास्तव में यह फिल्म का नाम और गीत बहुत लम्बे समय बाद सुना -

घोड़ी पे होके सवार चला हैं दूल्हा यार
कमरिया में बांधे तलवार

मंगलवार को ममता (सिंह) जी ले आई अभिनेता निर्देशक फिरोज खान पर कार्यक्रम। शुरूवात की कुर्बानी फिल्म के गीत से जो उनकी अस्सी के दशक में बनाई गई लोकप्रिय फिल्म हैं। उनकी साठ के दशक की इन फिल्मो के गीत सुनवाए - आरजू, एक सपेरा एक लुटेरा, ऊँचे लोग। नागिन का लोकप्रिय गीत भी सुनवाया। बताया उन्होंने पहली फिल्म बनाई अपराध। इसके बाद सफल एक्शन फिल्मो से उनकी छवि बनी - धर्मात्मा, दयावान, जाबाज। बेटे को लांज करने बनाई फिल्म प्रेम अगन और ताजातरीन फिल्म वेलकम का भी गीत सुनवाया। अच्छा रहा यह कार्यक्रम।

बुधवार को कमल (शर्मा) जी ने प्रस्तुत किया अभिनेत्री तनुजा को। अच्छी जानकारी दी, बताया वयस्क रूप में पहली फिल्म हमारी याद आएगी हैं, इसके बाद सहनायिकाओ की भूमिका में बेहतरीन फिल्मे रही - ज्वैलथीफ, दो दुनी चार फिर नायिका के रूप में जीने की राह फिल्म से लोकप्रियता मिली और उसका यह प्यारा सा गीत भी सुनवाया -आप मुझे अच्छे लगने लगे, सपने सच्चे लगने लगेनैन सारी रैन जगने लगे उनकी बतौर नायिका सफल फिल्मो की चर्चा की और पुरस्कार की भी जानकारी दी - पवित्र पापी, मेरे जीनव साथी, हाथी मेरे साथी, एक बार मुस्कुरा दो, अनुभव और उन नई फिल्मो के नाम भी बताए जिनमे उन्होंने चरित्र भूमिकाएं की पर एक महत्वपूर्ण फिल्म का नाम नही बताया, यह फिल्म हैं - गुस्ताखी माफ़, बढ़िया कामेडी फिल्म हैं और शायद यह एक ही फिल्म हैं जिनमे उनका डबल रोल हैं। फिल्मी पारिवारिक पृष्ठभूमि की भी चर्चा की जैसे बेटी काजोल, बहन नूतन, माँ शोभना समर्थ जिन्होंने फिल्म हमारी बेटी बनाई जिसमे पहली बार तनुजा ने बाल कलाकार के रूप में काम किया था। जहां तक मेरी जानकरी हैं शोभना समर्थ की माँ रत्नमाला हिन्दी फिल्मो की पहले बैच की नायिकाओं में से हैं - रत्नमाला, बनमाला, स्नेहलता, खुर्शीद।

गुरूवार को फिल्मकार केदार शर्मा की पुण्य तिथि पर यह कार्यक्रम प्रस्तुत किया अमरकांत जी ने। उनके जीवन वृत्त को संक्षिप्त में बताया। जानकारी मिली कि कालेज के समय में ही ड्रामाटिक एसोसिएशन की स्थापना की थी। बावरे नैन, पुजारिन, इंक़लाब फिल्मो की चर्चा हुई। राजकपूर उनके चौथे सहायक की तरह काम करते रहे जैसी महत्वपूर्ण बाते भी बताई गई। चुनिन्दा गीत सुनवाए गए -सुन बैरी बलम कुछ बोल दे इब क्या होगाराजकुमारी के गाए इस गीत के अलावा बच्चो का एक गीत बहुत अच्छा लगा। पी के ऐ नायर जी के तकनीकी सहयोग से इसे विजय दीपक छिब्बर जी ने प्रस्तुत किया। बढ़िया प्रस्तुति के लिए पूरी टीम को बधाई।

10 बजे का समय छाया गीत का होता है। कार्यक्रम शुरू करने से पहले कभी-कभार अगले दिन प्रसारित होने वाले कुछ मुख्य कार्यक्रमों के बारे में बताया गया।

शुक्रवार को प्रस्तुत किया कमल (शर्मा) जी ने। रात, चाँद, यादो की बात की। गाने अच्छे सुनवाए, वक़्त फिल्म से आगे भी जाने न तू, ये गीत भी शामिल थे -

आइए मेहरबान

शोख नजर की बिजलियाँ

शनिवार को प्रस्तुत किया अशोक जी ने। मोहब्बत की बात कही और सुनवाए ऐसे ही गीत - अनुपमा, रजनीगन्धा फिल्म का शीर्षक गीत और यह गीत भी सुनवाया -

आपसे प्यार हुआ आप खफा हो बैठे

बढ़िया गीत सुनवाए।

रविवार को प्रस्तुत किया युनूस (खान) जी ने, पुरानी फिल्मो के गीत सुनवाए - एक ऐसा गीत भी शामिल था जो बहुत कम सुना जाता हैं -

तक़दीर दीवाना हो गए
अपना बेगाना हो जाए

और समापन का अंदाज हमेशा की तरह बढ़िया रहा जिसमे गानों की झलक के साथ विवरण बताया जाता है। थोड़ी सी गड़बड़ भी हुई, दो दिल फिल्म के गीत में गायिका का नाम लताजी बताया जबकि यह गीत आरती मुखर्जी ने गाया हैं।

सोमवार को अमरकान्त जी ने प्यार का राग छेड़ा, शुरूवात की -

दिल का भंवर करे पुकार
प्यार का राग सुनो रे

आराधना का रूप तेरा मस्ताना, जूली का भूल गया सब कुछ और ऐसे ही गीत गूंजे - समापन किया चौदहवीं का चाँद शीर्षक गीत से।

मंगलवार को प्रस्तुत किया निम्मी (मिश्रा) जी ने। चाँद पर आलेख और प्रस्तुति अच्छी थी, गीत इस बार भी पुराने रहे - चाँद को देखो जी

चांदनी आई बनके प्यार ओ साजना ओ साजना

एकाध कम सुना गीत भी था।

बुधवार को प्रस्तुत किया राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने। नए अच्छे गीत सुनवाए जैसे - तुम दिल की धड़कन में रहते हो

गुरूवार को रेणु (बंसल) जी ने शायराना प्रस्तुति दी। पुराने अच्छे गीत सुनवाए -

तुम ही तुम हो मेरे जीवन में

तारो की जुबा पर हैं मोहब्बत की कहानी

10:30 बजे कार्यक्रम प्रसारित हुआ आपकी फ़रमाइश जो प्रायोजित था इसीलिए प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए। इसमें श्रोताओं ने पुराने लोकप्रिय गीत सुनने की फ़रमाइश अधिक की। शुक्रवार को ज्वैल थीफ, आप आए बहार आई जैसी फिल्मो के साथ यह गीत भी शामिल था -

चाँद फिर निकला मगर तुम न आए

शनिवार को तेरे घर के सामने, पासपोर्ट, पोस्ट बौक्स नंबर 999, सीमा और यह गीत शामिल था -

कहे झूम झूम रात ये सुहानी

रविवार को असली नक़ली, काला पानी, लाजवंती, माया फिल्मो के गीतों के साथ यह गीत भी शामिल था -

बदली से निकला हैं चाँद

सोमवार को चोरी-चोरी, सूरज, प्रोफ़ेसर, नई दिल्ली, दिल एक मंदिर फिल्मो के गीतों के साथ एक थोड़ा नया गीत भी सुनवाया गया -

तेरा साथ हैं तो मुझे क्या कमी हैं
अंधेरो से भी मिल रही रोशनी हैं

मंगलवार को धर्मात्मा, काली टोपी लाल रूमाल, आदमी और इंसान फिल्मो के गीतों के साथ ये गीत भी शामिल थे -

जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला

सुन ऐ बहारे हुस्न मुझे तुमसे प्यार हैं

बुधवार को एक ख़ास गीत सुनकर आनंद आ गया, अनमोल घड़ी फिल्म से - आवाज दे कहाँ हैं

इसके अलावा एक कलि मुस्काई, बारादरी फिल्मो के गीतों के साथ यह गीत भी सुना -

जादूगर तेरे नैना दिल जाएगा बच के कहाँ

गुरूवार को नागिन, उजाला के गीत सुनवाए गए, शुरूआत की हसते जख्म फिल्म के इस बढ़िया गीत से -

तुम जो मिल गए हो तो ये लगता हैं के जहां मिल गया

गीत लंबा हैं पर सुनने में अच्छा लगता हैं, क्योंकि इसका सन्गीत संयोजन अलग तरह का हैं। समापन भी अच्छा रहा डान के बनारसी पान गीत से।

बुधवार और गुरूवार को ईमेल से प्राप्त फ़रमाइशें पूरी की जाती है अन्य दिन पत्र देखे जाते है। देश के अलग-अलग भागों से बहुत से पत्रों से गानों की फ़रमाइश भेजी गई और हर पत्र में भी बहुत से नाम रहे जबकि ई-मेल की संख्या कम ही रही।
इस कार्यक्रम में एक ख़ास बात रही। जो उदघोषक छाया गीत प्रस्तुत नही करते वे इस कार्यक्रम को हल्का सा छाया गीत का रूप दे देते हैं। कार्यक्रम का मूल स्वरूप आहत होता हैं, पर चलता हैं...

प्रसारण के दौरान अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए और संदेश भी प्रसारित किए गए जिसमें विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताया गया।

11 बजे अगले दिन के मुख्य कार्यक्रमों की जानकारी दी जो केन्द्रीय सेवा से ही दी गई जिससे केन्द्रीय सेवा के उन कार्यक्रमों की भी सूचना मिली जो क्षेत्रीय कार्यक्रमों के कारण यहाँ प्रसारित नही होते। 11:05 पर दिल्ली से प्रसारित 5 मिनट के समाचार बुलेटिन के बाद प्रसारण समाप्त होता रहा।

Tuesday, April 27, 2010

कागज़ की नाव फिल्म के गीत

1976 के आस-पास एक फिल्म रिलीज हुई थी - कागज़ की नाव

सामाजिक विसंगतियों पर बनी इस फिल्म को लोगो ने बहुत सराहा था। खूब चली थी यह फिल्म, सो इसके गाने भी खूब चले। दो या तीन गाने हैं इसमे। एक गीत अरूणा इरानी पर फिल्माया गया हैं जो मुजरा गीत हैं, उनकी महत्वपूर्ण भूमिका हैं इस फिल्म में।

इस फिल्म के नायक नायिका हैं राजकिरण और सारिका। राजकिरण की यह पहली फिल्म हैं। सारिका की ख़ूबसूरत नीली आँखों का अच्छा प्रयोग किया गया हैं इस फिल्म में।

इन दोनों पर फिल्माया गया एक युगल गीत बहुत लोकप्रिय रहा। विविध भारती समेत सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाया जाता था। बहुत लम्बे समय से इसे नही सुना। अब तो बोल भी याद नही आ रहे। इस युगल गीत में स्वर शायद आशा भोंसले और सुरेश वाडकर के हैं।

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Friday, April 23, 2010

शाम बाद के पारम्परिक कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 22-4-10

शाम 5:30 बजे गाने सुहाने कार्यक्रम की समाप्ति के बाद क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है, फिर हम शाम बाद के प्रसारण के लिए 7 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।

4 अप्रैल से कार्यक्रमों में हुए परिवर्तनों से यह सभा बहुत प्रभावित रही। 7:45 से 15 मिनट के लिए प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में ही परिवर्तन किया गया और बड़ा परिवर्तन हुआ। सप्ताह में दो बार प्रसारित होने वाले पत्रावली और राग-अनुराग कार्यक्रम अब एक ही बार प्रसारित हो रहे हैं, यह ठीक हैं लेकिन बड़ा धक्का लगा यह देख कर कि बज्मे क़व्वाली और लोकसंगीत कार्यक्रम गायब हो गए हैं। पिछले परिवर्तन के दौरान दोपहर के प्रसारण से शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम अनुरंजनी बंद कर दिया गया था। आशा थी कि इस परिवर्तन में अनुरंजनी को कही स्थान मिलेगा पर दो और महत्वपूर्ण गैर फिल्मी संगीत के कार्यक्रम बंद हो गए। इतना ही नही अन्य गैर फिल्मी संगीत के कार्यक्रमों में भी फिल्मी घुसपैठ नजर आई। नतीजा यह हैं कि आज की तारीख में हैदराबाद में सुने जाने वाले केन्द्रीय प्रसारण के सभी कार्यक्रमों में से गैर फिल्मी संगीत का शुद्ध कार्यक्रम एक भी नही हैं जो ठीक नही लग रहा। महत्वपूर्ण बात यह हैं कि इस तरह के कार्यक्रमों के लिए यह एक ही चैनल हैं। अनुरोध हैं कि इन तीनो कार्यक्रमों के प्रसारण की ऐसे समय व्यवस्था करे जो क्षेत्रीय कार्यक्रमों का समय न हो ताकि सभी इसका आनंद ले सके और ऐसे अन्य कार्यक्रमों में कृपया फिल्मी घुसपैठ रोक दीजिए।

7 बजे दिल्ली से प्रसारित समाचारों के 5 मिनट के बुलेटिन के बाद शुरू हुआ फ़ौजी भाईयों की फ़रमाइश पर सुनवाए जाने वाले फ़िल्मी गीतों का जाना-पहचाना सबसे पुराना कार्यक्रम जयमाला। अंतर केवल इतना है कि पहले फ़ौजी भाई पत्र लिख कर गाने की फ़रमाइश करते थे आजकल ई-मेल और एस एम एस भेजते है। कार्यक्रम शुरू होने से पहले धुन बजाई गई ताकि विभिन्न क्षेत्रीय केन्द्र विज्ञापन प्रसारित कर सकें। एकाध दिन यहाँ भी क्षेत्रीय विज्ञापन प्रसारित हुए। फिर जयमाला की ज़ोरदार संकेत (विजय) धुन बजी जो कार्यक्रम की समाप्ति पर भी बजी। संकेत धुन के बाद शुरू हुआ गीतों का सिलसिला। फरमाइश में से हर दशक से गीत चुने गए। इस तरह नए पुराने सभी समय के गीत सुनने को मिले।

शुक्रवार को - मैंने प्यार किया, यादो की बारात, होटल जैसी नई पुरानी फिल्मे शामिल रही। रोमांटिक गीतों के साथ यह नया कुछ अलग भाव लिए गीत भी फरमाइश में से चुन कर सुनवाया गया, रेफ्यूजी फिल्म से -

पंछि नदिया पवन के झोके
कोई सरहद इन्हें न रोके

रविवार को हीरो, वांटेड, जो जीता वही सिकंदर फिल्मो से विभिन्न मूड के रोमांटिक गीत सुनवाए गए, यह गीत भी शामिल था -

खुदी से तुम प्यार करो कही न फिर मेल हो जाए

सोमवार को शुरूवात बड़ी अच्छी रही, फर्ज फिल्म का यह युगल गीत बहुत लम्बे समय बाद सुना -

हम तो तेरे आशिक हैं सदियों पुराने
चाहे तो माने चाहे न माने

इसके अलावा मिलन, ब्लैक कैट के साथ नई फिल्मो के गीत भी शामिल रहे जैसे फिल्म अजब प्रेम की गजब कहानी।

मंगलवार को भी शुरूवात जोरदार रही, गोपी फिल्म का भक्ति गीत बहुत दिन बाद और वो भी फरमाइश पर सुनना अच्छा लगा -

सुख के सब साथी दुःख में न कोई

इसके साथ पुरानी नई फिल्मो के गीत शामिल रहे - नागिन, गाइड, विवाह और धड़कन फिल्म का शीर्षक गीत।

बुधवार को बेटा, क्रान्ति फिल्मो के गीतों के साथ नीलकमल का गीत बहुत दिन बाद सुनना अच्छा लगा और बार्डर तथा एकाध नई फिल्म के गीत भी शामिल थे।

गुरूवार को भी बार्डर फिल्म का गीत सुनवाया गया पर रोमांटिक गीत था। इसके साथ तेरे नाम फिल्म का शीर्षक गीत, दिलवाले, अपने, जानेमन फिल्मो के साथ पुरानी फिल्मे कटी पतंग और लैला मजनूं का गीत बहुत दिन बाद सुनवाया गया।

शनिवार को विशेष जयमाला प्रस्तुत किया ख्यात चरित्र अभिनेत्री बिन्दु ने। पुरानी रिकार्डिंग थी। बताया गया संग्रहालय से चुन कर सुनवाई जा रही हैं। पुरानी रिकार्डिग में अक्सर सम्पादन कर सुनवाया जाता हैं। इस बार कार्यक्रम सुन कर लगा शायद कुछ मुख्य अंश संपादित हो गए। जहां तक मुझे याद हैं पहले हमने सुना था कि बिन्दु ने बताया था कि उनकी पहली फिल्म दो रास्ते मानी जाती हैं पर वास्तव में उनकी पहली फिल्म हैं अनपढ़ जिसमे उन्होंने माला सिन्हा की बेटी की भूमिका की थी, उन पर एक गीत भी फिल्माया गया था जिस पर उनका नृत्य हैं, यह गीत भी शायद सुनवाया था -

जिया ले गयो जी मोरा सावरिया

बाद में लम्बे अंतराल के बाद दो रास्ते फिल्म में अलग भूमिका में आने पर यही पहली फिल्म मानी गई।

7:45 से परिवर्तित कार्यक्रमों का प्रसारण हुआ। रोज रात में 9 बजे प्रसारित होने वाले गैर फिल्मी रचनाओं के कार्यक्रम गुलदस्ता को अब यहाँ सप्ताह में तीन दिन शुक्रवार, रविवार और मंगलवार को प्रसारित किया जा रहा हैं और इसे गजलो का कार्यक्रम ही कर दिया गया हैं, यह अच्छा परिवर्तन हैं, क्योकि वैसे भी इसमे गजले ही ज्यादा सुनवाई जाती थी। कार्यक्रम का अंदाज भी बदला हैं। हर कार्यक्रम में एक ही गुलोकार की गाई गजले सुनवाई जा रही हैं। गैर फिल्मी
गजले लम्बी होती हैं इसीलिए दो ही गजले सुनवाई जा रही हैं। लेकिन एक कार्यक्रम फिल्मी गजलो का रहा जो ठीक नही लगा।

शुक्रवार को गुलोकार रहे गुलाम अली। शुरूवात बढ़िया हुई, परवेज शाकिर के कलाम से -

वो तो खुशबू हैं हवाओं में बिखर जाएगा
मसला फूल का हैं फूल किधर जाएगा

समापन हुआ नाजिर के कलाम से -

कोई रात ऎसी आए के ये मंजर देखूं
तेरी पेशानी हो और अपना मुकद्दर देखूं।

रविवार को गुलोकार रहे जगजीत सिंह। शुरूवात हुई - आपसे गिला आपकी कसम सोचते रहे कर सके न हम

दूसरी गजल भी अच्छी थी - समझते थे मगर फिर भी न थी दूरियां हममे

बढ़िया रहा चुनाव।

मंगलवार को मोहम्मद रफी की गाई फिल्मी गजले सुनवाई गई। पहली दो गजले साहिर लुधियानवी की थी -

इश्क के गरम जज्बात किसे पेश करूं (फिल्म गजल)
तुम एक बार मोहब्बत का इम्तिहान तो लो (फिल्म बाबर)
न किसी की आँख का नूर हूँ (फिल्म लाल किला - शायर बहादुर शाह जफ़र)
तुझे क्या सुनाउ ए दिलरूबा ( फिल्म आखिरी दांव - शायर मजरूह सुलतान पुरी)

ये सारी गजले सदाबहार नगमे कार्यक्रम सहित अन्य कार्यक्रमों में भी हम सुनते रहते हैं, यहाँ सुनवाने का कोई औचित्य नही लगा। अच्छा होता अन्य दो दिनों की तरह इस दिन भी दो गैर फिल्मी गजले सुनवाई जाती तो सप्ताह भर गुलदस्ता कार्यक्रम अच्छा हो जाता।

शनिवार को युनूस (खान) जी लेकर आए सामान्य ज्ञान का कार्यक्रम जिज्ञासा। खेल जगत से कबड्डी में विश्व कप जीतने वाले भारत की चर्चा हुई, क्रिकेट जगत में सहवाग को मिले सम्मान की चर्चा हुई। विज्ञान की चर्चा में सेटेलाईट की बाते हुई, .कॉम के सफ़र की बात बताई गई और इस मौसम के ख़ास फल आम की खासुलखास बाते हुई। कार्यक्रम को प्रस्तुत किया विजय दीपक (छिब्बर) जी ने पी के ऐ नायर जी के तकनीकी सहयोग से।

सोमवार को पत्रावली में पधारे निम्मी (मिश्रा) जी और कमल (शर्मा) जी। पूरा कार्यक्रम तारीफों का पुलिंदा था। श्रोताओं ने विभिन्न कार्यक्रमों की तारीफ़ की। एक जानकारी अच्छी दी गई, एक पत्र के उत्तर में बताया गया कि विविध भारती का इतिहास बताने का प्रयास किया जा रहा हैं जो जिज्ञासा या सखि-सहेली कार्यक्रम के माध्यम से बताया जाएगा।

बुधवार को इनसे मिलिए कार्यक्रम में सूफी गायिका कविता सेठ से रेणु (बंसल) जी की बातचीत प्रसारित हुई। सूफी गायिका से मिलना अच्छा लगा क्योंकि इस क्षेत्र में नई गायिकाएं शायद ही कोई हैं। बातचीत से पता चला कि कम उम्र से ही सूफी गायन से जुड़ी हैं, बरेली में पिता के साथ दरगाह पर सूफी गायन से प्रभावित हुई। बाद में अलग-अलग स्थानों से शिक्षा ली जैसे ग्वालियर घराना, गन्धर्व महाविद्यालय। अमीर खुसरो की पंक्तियाँ - छाप तिलक छब छीनी जब गुनगुना कर सुनाई तो आनंद आ गया। नई फिल्मो में भी उनके गीत हैं, वादा फिल्म के गीत की झलक सुनवाई -

जिन्दगी को संवार दे मौला

पिछले रविवार को ही यह फिल्म दोपहर में दूरदर्शन पर दिखाई गई थी। गैंगस्टर फिल्म के गीत की झलक भी सुनवाई। शायद गीतों की झलक इस कार्यक्रम में पहले नही सुनवाई जाती थी। इस कार्यक्रम के रिकार्डिंग इंजीनियर रहे विनायक (तलवलकर) जी और प्रस्तुति वीणा (राय सिंघानी) जी की रही। बातचीत जारी हैं, अगले सप्ताह अगला भाग प्रसारित होगा।

गुरूवार को प्रसारित हुआ कार्यक्रम राग-अनुराग। इस बार चयन अच्छा रहा। विभिन्न रागों की झलक लिए यह फ़िल्मी गीत सुनवाए गए -

राग पहाडी - मोहब्बत बड़े काम की चीज हैं (फिल्म त्रिशूल)
राग देसी में बहुत ही कम सुना जाने वाला गीत फिल्म हीर से - गले से लगा ले नजर झुक गई
राग चारुकेशी - कृष्ण कन्हैय्या बंसी बजैय्या (संत ज्ञानेश्वर)
बहुत ही कम प्रचलित राग जिसका नाम भी अलग हैं - राग मालगुंजी की झलक, यह अच्छा हुआ कि अमरकांत जी ने नाम दो बार बताया वरना राग का नाम पहली बार मैं नोट ही नही कर पाई थी। ऐसे राग पर आधारित हैं यह लोकप्रिय गीत, यह जान कर भी अच्छा लगा -
हम आज कही दिल खो बैठे (फिल्म अंदाज)

8 बजे का समय है हवामहल का जिसकी शुरूवात हुई गुदगुदाती धुन से जो बरसों से सुनते आ रहे है। यही धुन अंत में भी सुनवाई जाती है। शुक्रवार को सुनवाई गई झलकी - लखपति की मौत जिसके निर्देशक है दीनानाथ। घर सजाने के लिए खरीदी गई वस्तु वापस लेने आता हैं और कहता हैं यह उसके बुजुर्गो की निशानी हैं जिसके लिए वह एक लाख रूपये देने के लिए भी तैयार हैं। इन्हें लगता हैं उसमे हीरे जवाहरात हैं, तोड़ने पर कुछ नही मिलता यानि लखपति बन नही पाते। लेखक दिलीप सिंह की इस झलकी में रेस की घोड़ी का मजा नही आया। यह दिल्ली केन्द्र की प्रस्तुति थी।

शनिवार को डा शंकर शेष की लिखी नाटिका सुनवाई गई जो ऐतिहासिक घटना पर आधारित हैं, एक कुत्ते का नाम राणा सांगा रखकर महल के द्वार पर बाँध दिया जाता हैं जिसे छुडाने युद्ध होता हैं जिसमे वीरांगना रजिया मुकाबला करती हैं और शहीद होती हैं। इसके प्रस्तुतकर्ता हैं पुरूषोत्तम दारवेकर।

रविवार को ई एम रायजादा की लिखी झलकी सुनी - लोभी गुरू और लालची चेला। धोखेबाज गुरू चेला सट्टा बाजार से पहचाने जाते हैं। निर्देशक हैं कमल दत्त। यह दिल्ली केंद्र की प्रस्तुति रही।

सोमवार को सुनवाई गई नाटिका - शिकार जिसके लेखक है के एल यादव जीवहिंसा पर बढ़िया प्रस्तुति रही। पति दोस्तों के साथ शिकार पर जाने वाला हैं, पिछली रात सपने में शेर देखता हैं, उससे डरता भी हैं और सन्देश भी मिल जाता हैं फिर शिकार पर नही जाता। लखनउ केन्द्र की इस प्रस्तुति की निर्देशिका देखता चंद्रप्रभा भटनागर।

मंगलवार को सलाम बिन रज्जाक की लिखी नाटिका सुनी - शरारत जिसके निर्देशक है गंगा प्रसाद माथुर। एक नोट लेकर वह एक-एक के पास जाता हैं और कहता हैं यह ले लो। कोई समझता हैं वह जाली नोट का धंधा करता हैं, कोई कुछ और समझता हैं, चलता हैं.... मनोरंजन तो हुआ। मुम्बई केंद्र की यह प्रस्तुति रही।

बुधवार को प्रोफ़ेसर चन्द्र शेखर पाण्डेय की लिखी झलकी सुनी - उपचार जिसकी निर्देशिका हैं अनुराधा शर्मा। विविध भारती की यह प्रस्तुति आधुनिक समाज पर थी। पत्नी को लगता हैं पति का बाहर कुछ चक्कर हैं, वो भी किसी को घर में बुलाकर नाटक करती हैं।

गुरूवार को झलकी सुनी -दौरा। पति को दौरे पर जाना हैं। सभी अपनी-अपनी चीजे लाने के लिए कहते हैं और अंत में वह जरूरी फ़ाइल ले जाना ही भूल जाता हैं। दिल्ली केंद्र की इस प्रस्तुति के लेखक हैं के आर भटनागर और निर्देशक वी पी दीक्षित।

इस तरह हवामहल में विविधता रही - जीवहिंसा, साधु के भेष में ठगी जैसे मुद्दे उठाए गए, इतिहास से प्रेरणादायी प्रसंग लिए गए और मनोरंजन भी हुआ।

प्रसारण के दौरान संदेश भी प्रसारित किए गए, कार्यक्रमों के बारे में बताया। एकाध बार क्षेत्रीय विज्ञापन भी प्रसारित हुए।

रात में हवामहल कार्यक्रम के बाद 8:15 बजे से क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है फिर हम 9 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।

Tuesday, April 20, 2010

आशा भोंसले और तनुजा का मस्त बंजारा गीत

वर्ष 1972 के आस-पास रिलीज हुई थी एक फिल्म - दो चोर

इसमे नायक नायिका है धर्मेन्द्र और तनुजा। यह फिल्म और इसके गीत बहुत लोकप्रिय रहे। विविध भारती समेत रेडियो के सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाए जाते थे।

आज याद आ रहा हैं आशा भोसले का गाया मस्त गीत जिसे तनुजा पर बंजारा नृत्य शैली में फिल्माया गया हैं। इस गीत के कुछ बोल याद आ रहे हैं -

यारी हो गई यार से लग सुनो सुनो (या तुनो तुनो)
यार को काम क्या झूठे संसार से
यारी हो गई यार से लग सुनो सुनो (या तुनो तुनो)
उं उं उं उं उं उं उं यार से लग सुनो सुनो (या तुनो तुनो)

ओस में भीगे भीगे -------- के तले
-----------------------------
-----------------------------
हमको जीवन मिल जाता हैं जहर के पीने से
जीते हैं प्यार से मरते हैं प्यार से
ओ यारी हो गई यार से लग सुनो सुनो (या तुनो तुनो)
उं उं उं उं उं उं उं यार से लग सुनो सुनो (या तुनो तुनो)

धर्म सदा अपना तो हंसना बोलना
लहराती बैय्या हैं और हैं चाल भी पायल सी
गूंजती हर गली प्रेम झंकार से
ओ यारी हो गई यार से लग सुनो सुनो (या तुनो तुनो)
उं उं उं उं उं उं उं यार से लग सुनो सुनो (या तुनो तुनो)

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Saturday, April 17, 2010

श्री एनोक डेनियेल्स और आकाशवाणी अहमदावाद को जनम दिन और स्थापना दिन की बधाईयाँ

आदरणिय पाठकगण, कल यानि 15 अप्रिलको मैंनें आपके लिये एक कुतूहल छोड़ दिया था कि मैं किस वादक कलाकार की बात करने वाला हूँ । तो इस पर सिर्फ और सिर्फ़ अन्नपूर्णाजी की टिपणी आयी तो अब इस का खुलासा करने की घड़ी आ पहोंची है कि आजआनि 16 अप्रैल को य् देश के महान पियानो और पियानो-एकोर्डियन वादक श्री एनोक डेनियेल्स की जनम तारीख़ है और वे अपनी आयु के 77 साल पुरे कर चुके है और अब भी वे मंच कार्यक्रमोमें और श्री ख़ैयाम साहब जैसे फिल्मी संगीत की दुनियामें सबसे लम्बा सफ़र तय करने वाले संगीत कार की गैर-फिल्मी रचनाओं के आल्बमके वाद्यवृंद संयोजक के रूपमें सक्रिय है । तो उनके लिये रेडियो श्रीलंका की हिन्दी सेवा की उद्दघोषिका श्रीमती ज्योति परमारजीने मेरे द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर मेरे नाम के साथ एक अनोख़ा कार्यक्रम प्रस्तूत किया, जिसमें उनकी पियानो-एकोर्डियन पर बजाई फिल्म ‘लाजवंती’ के गीत ‘कुछ: दिन पहेले एक साल...’ और फिल्म ‘सोलहवा साल’ के गीत ‘ए अपना दिल तु आवारा...’के गीत की 78 RPM records पर संग्राहित धूनें प्रस्तूत की और बादमें वे फिल्मी गाने प्रस्तूत किये गये जिसमें उन्होंनें पियानो या पियानो-एकोर्डियन पर अपनी कमाल दिख़ाई है ।
यह कार्यक्रम को सुन कर कुछ श्रोतालोगोने सुरत से और गुजरात तथा देश के अन्य भागोसे भी मेरा फोन पर सम्पर्क किया श्री एनोक डेनियेल्स साहब का नं. जानने के लिये जिसमें एक थे इन्दौर के श्री कैलास शुक्लाजी जिन्होंनें डेनियेल्स साहब को तो फोन किया ही पर उनके नं को रेडियो पर प्रसारित करवाया और बादमें डेनियेल्स साहब से मेरी बात हुई तो उन्होंनें बताया कि फोन से ही जूड़े रहना पड़ा है । ज्योतिजीने मूझे फोन पर धन्यवाद कहते हुए बताया कि भारत और पाकिस्तानसे भी उन्हें ऐसी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई कि जो लोग आंठ बजे घरसे निकल जाने वाले होते है उन लोगोंनें भी अपना निकलना आधा घंटा देरी से जाना तय करके कार्यक्रम सुना और बहोत सराहा ।

तो रेडियोनामा की और से श्री एनोक डेनियेल्स साहबको लम्बे, स्वस्थ, और संगीत के क्षेत्रमें सक्रियता बरकरार रहने वाली उम्र की शुभ:कामना देते हुए नीचे प्रस्तूत कर रहा हूँ, विविध भारती के एक बंध हो चूके फोन इन कार्यक्रम ‘हल्लो आप के अनुरोध पर’ का अंश जिसमें मैंनें प्रथम बार हिस्सा लिया था, हमारे रेडियोनामा के एक चहिते पोस्ट लेख़क श्री युनूस भाई और मीठी आवाझ वाली रेडियो सख़ी श्रीमती ममता सिंध के साथ जिसमें पूरे भारतसे किसी ख़ास वाद्य और वादक कलाकार की फिल्मी धूनका अनुरोध करने वाला पहला और आख़री श्रोता रहा हूँ । हाँ, विविध भारती संग्रहालयमें मेरे अनुरोध वाली धून होते हुए भी समय की कमी के कारण नहीं ढूँढ पाने के कारण मेरी सहमती के साथ एक अलग धून सुनवाई थी पियानो-एकोर्डियन पर ही श्री एनोक डेनियेल्स साहब की ही और यह रेकोर्डिंग सुनते हुए एक और सस्पेन्स खुलेगा ।

Get this widget | Track details | eSnips Social DNA


अब उपर के रेकोर्डिंगमें मैंनें जो वैकल्पीक अनुरोध किया था और जिस LP का जिक्र किया था वैसी एक माईल-स्टोन रूप आल्बम डान्स टाईम जो डेनियेल्स साहब की वाद्यवृंद रचना है, प्रस्तूत कर रहा हूँ, ‘ओ मेरे सोना...’ फिल्म ‘तीसरी मंझील’ से जो विविध भारती से अन्तरालमें आज से करीब तीन साल पहेले बार बार प्रसारित होती थी ।


अब यही धून को पियानो-एकोर्डियन वादन के रूपमें सुनिये, जिसमें भी वाद्यवृद संयोजन श्री डेनियेल्स साहबका ही है और यह आल्बम उपरकी अल्बम से पूराना है । पर विविघ भारती और रेडियो सिलोन दोनों के पास होते हुए भी सालों के सालों से प्रस्तूत नहीं हुआ है ।


आज के रेडियो श्री लंका के श्री डेनियेल्स साहब वाले कार्यक्रम की काफ़ी अच्छी रेकोर्डिंग पूणे के श्रोता श्री गिरीश मानकेश्वरजी ने की है जो मेरे द्वारा की गयी रेकोर्डिंग से बहेतर है मूझे इ-मेईल से भेजने वाले है तो वह प्राप्त होते ही इस मंच पर प्रस्तूत होगी ।
श्री एनोक डेनियेल्स साहब को विविध भारती के ‘आज के मेहमान’ में आमंत्रीत करने के लिये मेरे बार बार के अनुरोध को एक बार फ़िर दोहराता हूँ पर विश्वास है, कि यह एक बेकार की कवायत है और इसे सुना-अनसुना या पढ़ा-अनपढ़ा ही किया जायेगा ।

एक बात यह भी हुई है कि श्री युनूसजी रेडियोवाणी और फेसबूकमें तथा उनके अन्य ब्लोग्समें तथा अपने बेटे जादू के साथ इतने-इतने मशरूफ़ हो गये है कि फिल्मी धून के शोक़ीन होते हुए भी इस मंच पर की फिल्मी धूनों की पोस्ट पर कई वक्त से एक भी टिपणी दे नहीं पाये है, यहाँ तक, कि अपने चहीते साझ सेक्षोफोन की धूनो की पोस्ट पर भी और अपने चहीते कलाकार मनोहरीदा के जनम दिन पर भी ! इस बार देख़ते है क्या होता है ।
आज आकाशवाणी अहमदावाद का भी स्थापना दिन है, तो उनके केन्द्र निर्देषक श्री भगीरथभाई पंड्या साहब तथा पूरे कर्मचारी-गण को भी बधाई ।
पियुष महेता ।
सुरत ।

Friday, April 16, 2010

दोपहर बाद के जानकारीपूर्ण कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 15-4-10

दोपहर में 2:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम की समाप्ति के बाद आधे घण्टे के लिए क्षेत्रीय प्रसारण होता है जिसके बाद केन्द्रीय सेवा के दोपहर बाद के प्रसारण के लिए हम 3 बजे से जुड़ते है।

4 अप्रैल से कुछ कार्यक्रमों में परिवर्तन किया गया हैं, इस प्रसारण में कार्यक्रमों और प्रस्तुतकर्ताओ में परिवर्तन नजर आया। रविवार को रात में आधे घंटे के लिए प्रसारित होने वाले उजाले उनकी यादो के कार्यक्रम का प्रसारण समय बढ़ा कर एक घंटा कर दिया गया हैं और समय बदल कर शाम 4 बजे कर दिया गया हैं जहां पहले यूथ एक्सप्रेस प्रसारित होता था। इसके अलावा शाम 5:05 पर प्रसारित होने वाले नए फिल्मी गीतों के कार्यक्रम फिल्मी हंगामा की जगह अब गाने सुहाने कार्यक्रम प्रसारित हो रहा हैं जिसमे अस्सी के दशक के गीत सुनवाए जा रहे हैं।

3 बजे सखि सहेली कार्यक्रम में शुक्रवार को प्रसारित हुआ कार्यक्रम हैलो सहेली। फोन पर सखियों से बातचीत की रेणु (बंसल) जी ने। विभिन्न क्षेत्रो जैसे बिहार, इलाहाबाद के शहर, गाँव, जिलो से फोन आए। एक गाँव की सखि ने बताया कि उसके गाँव में स्कूल हैं पर कालेज के लिए दूर जाना पढ़ता हैं, उसने आगे पढाई कर अपना करिअर बनाने की बात कही। शाहजहाँपुर से एक किसान परिवार की सखि ने बात की और खेत-खलिहान की चर्चा की। सिलाई का काम करने वाली सखि ने अपने काम के बारे में बताया। एक घरेलु महिला ने बात की, उसे शायद घरेलु होने और कुछ काम न करने का मलाल था जिस पर रेणु जी ने एक पाठ पढ़ा दिया, अच्छी लगी यह बातचीत। एक सखि ने उस दिन जया बच्चन के जन्मदिन पर उन्हें बधाई देते हुए मिली फिल्म के गीत की फरमाइश की। सखियों ने विविध भारती के कार्यक्रमों को पसंद करने की भी बात कही। सखियों की पसंद पर नए-पुराने विभिन्न मूड के गाने सुनवाए गए। नए गीत भी शामिल रहे और पुराने गीत भी -

तू इस तरह से मेरी जिन्दगी में शामिल हैं (फिल्म आप तो ऐसे न थे)

तारो की जुबां पर हैं मोहब्बत की कहानी (बहुत पुरानी फिल्म नौशेरवानेआदिल)

इस कार्यक्रम को रीता (गोम्स) जी के तकनीकी सहयोग से कमलेश (पाठक) जी ने प्रस्तुत किया और प्रस्तुति सहयोग रमेश (गोखले) जी का रहा। फोन कालो का संयोजन अच्छा रहा, विभिन्न क्षेत्रो से विभिन्न विचारों का पता चला। अच्छी प्रस्तुति के लिए पूरी टीम को धन्यवाद।

सोमवार और मंगलवार को इस कार्यक्रम की प्रस्तुति में भी परिवर्तन नजर आया। सखि-सहेली कार्यक्रम जब शुरू हुआ था तब कांचन (प्रकाश संगीत) जी की लिखी झलकियाँ सुनवाई जाती थी जो बाद में बंद कर दी गई, अब फिर से सुनवाई जा रही हैं।

सोमवार को पधारे राजुल (अशोक) जी और चंचल (वर्मा) जी। यह दिन रसोई का होता है, इस दिन बात हुई आम की। व्यंजन बताया गया - बिना तेल का आम का अचार जिसे बताने आई सखी देवी (कुमार) जी और बताया कि यह उनके स्थान केरल की विधि हैं। बिना तेल का आम का अचार यहाँ हैदराबाद में भी बहुत बनाते हैं, हम भी अक्सर बना लेते हैं।

इस दिन एक झलकी सुनवाई गई जिसमे कांचन जी के साथ अमरकांत (दुबे) जी ने भाग लिया। अच्छी रही झलकी, पति-पत्नी की नोक-झोक से मनोरंजन भी अच्छा हुआ और सन्देश भी अच्छा था कि एक दूसरे की पसंद का सम्मान करना चाहिए।

सखियों की पसंद पर पुरानी फिल्मो के गीत सुनवाए गए - बाबुल. नया दौर, दिल्लगी फिल्मो के गीत और यह गीत -

कभी आर कभी पार लागा तीरे नजर

मंगलवार को पधारी सखियां शहनाज (अख्तरी) जी और उन्नति जी। यह करिअर का दिन होता है। इस दिन फोटो जर्नलिस्ट बनने के लिए जानकारी दी गई।

हमेशा की तरह सखियो के अनुरोध पर गाने नए ही सुनवाए गए जैसे मुस्कान, ग़दर - एक प्रेम कथा, रब ने बना दी जोडी, बागबान फिल्मो के गीत और यह सखियों का गीत - ससुराल गेंदा फूल

इस दिन सखियों के अनुरोध पर पानी के बचत पर झलकी - सुंदरिया और बंदरिया फिर से सुनवाई गई।

बुधवार को सखियाँ पधारीं - राजुल (अशोक) जी और चंचल (वर्मा) जी। इस दिन स्वास्थ्य और सौन्दर्य संबंधी सलाह दी जाती है्। श्रोता सखियों द्वारा भेजे गए नुस्के बताए गए जैसे सुन्दरता के लिए दही का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए चुकंदर का सेवन। श्रोता सखियों की फरमाइश पर कुछ पुराने समय के लोकप्रिय गीत इन फिल्मो से सुनवाए गए - आराधना, ख़ूबसूरत, राम तेरी गंगा मैली, आवारगी, मुद्दत और फिल्म चोर मचाए शोर के इस गीत के लिए बहुत दिनों बाद फरमाइश आई -

आगरे का घाघरा मंगवा दे रसिया
मैं तो मेला देखने जाउंगी

इस दिन आम्बेडकर जयंती के अवसर पर बताया कि अमेरिका में जहां बाबा साहेब ने शिक्षा ली थी, वही उसी विषय का विभाग शुरू किया गया हैं।

गुरूवार को सखियाँ पधारी शहनाज (अख्तरी) जी और कांचन (प्रकाश संगीत) जी। इस दिन सफल महिलाओं के बारे में बताया जाता है। इस दिन भारत की पहली महिला फोटोग्राफर होमाई यारावाला के बारे में बताया गया। सखियों के अनुरोध पर लोकप्रय गीत सुनवाए चितचोर, मेरा नाम जोकर, गोदान, दुल्हन वही जो पिया मन भाए, जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली का शीर्षक गीत और यह मौसम के अनुसार गीत -

धूप में निकला न करो रूप की रानी गोरा रंग काला न पड़ जाए

और यह नया गीत - कभी शाम ढले तो मेरे दिल में आ जाना

हर दिन श्रोता सखियों के पत्र पढे गए। कुछ पत्रों में कार्यक्रमों की तारीफ़ थी, कुछ सखियों ने अच्छे विचार भी भेजे जैसे जीवन में अपना लक्ष्य निर्धारित करे। राजस्थान की मरू भूमि के जन-जीवन की झलक मिली।

इस कार्यक्रम की दो परिचय धुनें सुनवाई गई - एक तो रोज़ सुनी और एक विशेष धुन हैलो सहेली की शुक्रवार को सुनी। इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया कांचन (प्रकाश संगीत) जी ने।

शनिवार और रविवार को प्रस्तुत हुआ सदाबहार नग़में कार्यक्रम जिसमे अच्छे सदाबहार नगमे सुनने को मिले -फिल्म आओ प्यार करे, गैम्बलर फिल्म से चूड़ी नही मेरा दिल हैं, संगम फिल्म से हर दिल जो प्यार करेगा, बहारे फिर भी आएगी फिल्म का शीर्षक गीत।

3:30 बजे नाट्य तरंग कार्यक्रम में शनिवार और रविवार को दो भागो में ग्रीक नाटक का सुरेन्द्र तिवारी द्वारा किया गया हिन्दी अनुवाद सुनवाया गया - एक और राजा। जुआ खेलने और हारने की कहानी हैं। अच्छा उद्येश्यपूर्ण नाटक रहा। निर्देशक है दीनानाथ। दिल्ली केन्द्र की प्रस्तुति।

शाम 4 से 5 बजे तक सुनवाया जाता है पिटारा कार्यक्रम जिसकी अपनी परिचय धुन है और हर कार्यक्रम की अलग परिचय धुन है।

शुक्रवार को प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम सरगम के सितारे जिसमे सितारे रहे ख्यात पार्श्व गायक भूपेन्द्र सिंह जिनसे बातचीत की रेणु (बंसल) जी ने और परिचय दिया युनूस (खान) जी ने। बचपन से शुरूवात की, बताया पिता संगीत शिक्षक हैं और बचपन में उन्ही से सीखा। मुम्बई में आने के बाद गिटार बजाना शुरू किया और अलग-अलग तरह के गिटार बजाए। पहला गीत हकीकत फिल्म से होके मजबूर मुझे फिर चेतन आनद के साथ आखिरी ख़त फिल्म फिर देव आनंद की फिल्म के लोकप्रिय गीत दम मारो दम में आरंभिक गिटार की बीट दी। आर डी बर्मन से दोस्ती, उनके साथ काम की चर्चा की, गजले निकालने की भी बात हुई। रेणुजी ने सामान्य बातचीत भी की जैसे पहले और अब की संगीत शिक्षा। अच्छी रही बातचीत जो अगले सप्ताह भी जारी रहेगी। इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया कल्पना (शेट्टी) जी ने।

रविवार की युनूस (खान) जी की गड्डी यूथ एक्सप्रेस अब ब्राडगेज से मीटरगेज हो गई। युवा श्रोता अब अपनी जिज्ञासा 15 मिनट में शांत कर लेगे जिसकी चर्चा अगले चिट्ठे में...

इस समय प्रसारित हुआ कार्यक्रम उजाले उनकी यादो के जिसमे पटकथा लेखन की ख्यात जोडी सलीम-जावेद के सलीम खान से युनूस (खान) जी की बातचीत की एक कड़ी सुनवाई गई। शुरूवात में पिछली कड़ी का अंश सुनवाया गया जिससे निरंतरता बनी रही। यह भी शुरूवाती कड़ी ही हैं। इसमे बताया कि पहले से ही मुकेश और रफी साहब पसंद हैं। अपने पहले प्यार को याद किया। यह सब इंदौर की बाते रही। मुम्बई आए और शुरू हुई अभिनय यात्रा। बरात, रामू दादा, लुटेरा, तीसरी मंजिल और बचपन फिल्म में अभिनय किया, यह सब पुरानी फिल्मे हैं पर तीसरी मंजिल बहुतो ने देखी हैं, वैसे उन्होंने कहा भी था कि छोटे रोल किए हैं, अगर युनूस जी इस फिल्म में उनके सीन के बारे में पूछते, तो उनके अभिनय की झलक मिल जाती।

बचपन फिल्म का गीत भी सुनवाया -

मुझे तुमसे मोहब्बत हैं मगर मैं कह नही सकता

यह जानकारी मेरे जैसे कई श्रोताओं के लिए नई हैं। उन पर फिल्माया यह गीत सरदार मालिक का हैं इस तरह उन्हें याद किया।

फिर अभिनय बंद हुआ और लिखना शुरू - पहली फिल्म लिखी दो भाई। पहले अकेले ही लिखते रहे। एक बात बड़ी अच्छी बताई - लिखने के लिए खूब पढ़ना चाहिए और उन्हें यह आदत इंदौर से ही हैं। साथ काम के पलो को याद करते हुए संगीतकार जोडी के प्यारेलाल जी को याद किया और नाम फिल्म का गीत सुनवाया। जोडी टूटने यानी जावेद साहब से अलग होने के कुछ पलो को भी याद किया। अपने रेडियो के शौक के बारे में बताया कि उनके पास तरह-तरह के पुरानी तकनीक के रेडियो हैं। अगले सप्ताह भी बातचीत जारी रहेगी जिसकी झलक अंत में सुनवाई जिसमे जंजीर फिल्म की चर्चा हैं। इस रोचक बातचीत के रिकार्डिंग इंजीनियर हैं - मंगेश (सांगले) जी और जे पी (महाजन ) जी, कार्यक्रम की प्रस्तुतकर्ता हैं कल्पना (शेट्टी) जी।

सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में डा निशा अहमद से रेणु (बंसल) जी की बातचीत सुनवाई गई, विषय रहा - पैथालोजी (रोग विज्ञान) और हमारा शरीर। हम सभी जानते हैं कि ब्लड, शुगर जैसे कई तरह के टेस्ट करवाए जाते हैं, इस पर विस्तार से बताया गया कि टेस्ट क्यों कराए जाते हैं, कैसे कराए जाते हैं और यह बताया कि कुछ रोग ऐसे भी हैं जैसे ब्रेन ट्यूमर जिसका पता टेस्ट से नही चलता। इस जानकारीपूर्ण कार्यक्रम की प्रस्तुतकर्ता हैं कमलेश (पाठक) जी।

बुधवार को आज के मेहमान कार्यक्रम में चरित्र अभिनेता, लेखक और निर्देशक सौरभ शुक्ला से कमल (शर्मा) जी की बातचीत सुनवाई गई। यह दूसरी और अंतिम कड़ी थी। कई मुद्दों पर प्रकाश डाला गया। सौरभ जी ने स्टेज और सिनेमा के फर्क को अपने अनुभव के आधार पर परिभाषित किया। बैंडिट क्वीन और स्लमडॉग के निर्माण के अनुभव बताए जिससे भारतीय और विदेशी निर्देशन का अंदाजा हुआ। ईरानी फिल्मो की भी चर्चा हुई। अपने आरंभिक दौर टेलीविजन की चर्चा की। विमल राय, गुरूदत्त, व्ही शांताराम को अपनी प्रेरणा बताया। चेतन आनद के साथ हुए चर्चा के पल याद किए। इस रोचक बातचीत ने विभिन्न पहलु छुए। प्रस्तुति कमलेश (पाठक) जी की रही।

हैलो फ़रमाइश कार्यक्रम में शनिवार को श्रोताओं से फोन पर बात की रेणु (बंसल) जी ने। पहला फोन काल आया पंजाब से और छा गया बैसाखी का रंग। अनुरोध पर आई बैसाखी गीत सुनवाया गया। विभिन्न क्षेत्रो से फोन आए जैसे असम और लोकल काल भी थे। ऐसे श्रोताओं ने भी फोन किया जो काम करने के लिए गाँव से मुम्बई आए हैं। एक युवा ने बताया वह पढ़ते भी हैं और खेती भी करते हैं। पढाई के बाद नौकरी न मिलने पर खेती करेगे। कुछ श्रोताओं ने अपने काम के बारे में भी बताया जैसे सिलाई का काम। एक रिटायर्ड प्रोफ़ेसर साहब ने बात की, दूकान चलाने वालो ने भी बात की यानी अलग-अलग तरह के श्रोताओं से बात हुई। सब की पसंद पर गाने अलग-अलग तरह के नए पुराने गीत सुनवाए जैसे हाथी मेरे साथी और यह गीत -

घुँघरू की तरह बजता ही रहा हूँ मैं

कार्यक्रम को प्रस्तुत किया महादेव (जगदाले) जी ने। तकनीकी सहयोग सुधाकर (मटकर) जी और प्रस्तुति सहयोग झरना (सोलंकी) जी का रहा।

मंगलवार को फोन पर श्रोताओं से बातचीत की राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने। अलग-अलग तरह की बातचीत अच्छी लगी। श्रोताओं से बातचीत से पता चला रायपुर में गरमी बहुत हैं, कश्मीर में अभी भी ठण्ड हैं। एक छात्र ने सीधे सपाट कहा कि वह रेडियो टाईमपास के लिए सुनता हैं। विभिन्न स्थानों से फोन आए और नए पुराने गीत उनके अनुरोध पर सुनवाए गए। गोरेगांव के श्रोता ने कहा गुमराह फिल्म उनके जीवन के करीब हैं और सुनवाया यह गीत -

इन हवाओं में इन फिजाओं में तुझको मेरा प्यार पुकारे

कुरूक्षेत्र से घरेलु महिला, सतारा से छात्र ने फोन किया। अंकुश फिल्म की प्रार्थना, देशा भक्ति गीत क्रान्ति फिल्म से और नए गीत भी सुनवाए गए।

कार्यक्रम को प्रस्तुत किया वीणा (राय सिंघानी) जी ने। तकनीकी सहयोग तेजेश्री (शेट्टी) जी और प्रस्तुति सहयोग परिणीता (नाईक) जी का रहा।

गुरूवार को श्रोताओं से फोन पर बातचीत की युनूस (खान) जी ने। विभिन्न स्थानों से फोन आए जैसे बिहार, छत्तीसगढ़, भोपाल का गाँव। अलग-अलग क्षेत्र के श्रोताओं ने बात की - छात्र, दुकानदार। कोई ख़ास संजीदा बातचीत नही हुई, हलकी-फुल्की चर्चाएँ रही पर पूरा कार्यक्रम रोचक रहा। एक श्रोता ने कर्ज फिल्म के गीत की फरमाइश की - तू कितने बरस का

जब युनूस जी ने उनकी उम्र पूछी तो कम बताई तब युनूस जी ने कहा कि आवाज से उमर बड़ी लग रही हैं..... हो सकता हैं युनूस जी यह श्रोता विज्ञापन के उसी सौन्दर्य साबुन का उपयोग करते होगे जिससे उनकी उम्र का पता ही नही चलता। मजा आ गया, ऐसे रोचक काल होने चाहिए। लगभग सभी श्रोताओं ने रोमांटिक गीतों की फरमाइश की... शायद युनूस जी से बातचीत का असर रहा.... गाने नए पुराने सभी शामिल थे - पुरानी फिल्म अप्रैल फूल, कुछ पुरानी फिल्म प्रेम रोग का शीर्षक गीत, नई फिल्म बागबान।

कार्यक्रम को प्रस्तुत किया महादेव (जगदाले) जी ने। तकनीकी सहयोग मंगेश (सांगले) जी और प्रस्तुति सहयोग रमेश (गोखले) जी का रहा।

तीनो ही कार्यक्रमों में श्रोताओं ने विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों को पसंद करने की बात बताई। कुछ श्रोताओ ने बहुत ही कम बात की।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद नए फिल्मी गीतों के कार्यक्रम फिल्मी हंगामा की जगह गाने सुहाने कार्यक्रम प्रसारित हुआ जिसमे अस्सी के दशक के गीत सुनवाए गए। फिल्मी हंगामा भी अच्छा था, यह थोड़ा ज्यादा अच्छा हैं।

शुक्रवार को शहनाज (अख्तरी) जी सुनवाने आई लोकप्रिय विविध गीत - शौकीन, अगर तुम न होते फिल्म का शीर्षक गीत, अर्थ फिल्म की गजल और बेताब फिल्म का यह रोमांटिक गीत - जब हम जवां होगे

शनिवार को राजुल (अशोक) जी ने सुनवाए बढ़िया रोमांटिक गीत - अवतार, रजिया सुलतान, रिश्ता कागज़ का और स्वीकार किया मैंने फिल्म का यह गीत -

चाँद के पास जो सितारा हैं वो सितारा हसीं लगता हैं

रविवार को अजेन्द्र (जोशी) जी ने सुनवाए वो सात दिन, सोहनी महिवाल फिल्मो के गीतों के साथ यह गीत भी - शाम हुई घिर आई रे बदरिया

सोमवार को राजुल (अशोक) जी ने सुनवाया यह नाजुक सा गीत - हुजुर इस क़दर भी न इतरा के चलिए

इसके अलावा मैंने प्यार किया, फासले और हीरो फिल्मो के गीत सुनवाए।

मंगलवार को शहनाज (अख्तरी) जी ने जो गीत सुनवाए उसमे फासले, रिश्ता कागज़ का फिल्मे शामिल रही। फासले फिल्म से लगातार दो दिन गीत सुनना ठीक नही लगा, हालांकि गाने अलग थे।

बुधवार को राजुल (अशोक) जी ने जिन फिल्मो के गीत सुनवाए उनमे अर्जुन, राजतिलक फिल्मे शामिल थी।

गुरूवार को शहनाज (अख्तरी) जी ने शुरू में दो ऐसे गीत सुनवाए को पहले बहुत सुनवाए जाते थे फिर रेडियो से यह गीत गायब हो गए थे और इस दिन सुनने को मिले - फिल्म साजन की सहेली का शीर्षक गीत और फिल्म नाखुदा का रोमांटिक गीत।

इस कार्यक्रम में पहले गीत के बाद लगातार लगभग 5-6 मिनट तक नई फिल्मो के विज्ञापन प्रसारित हुए। शेष गीत सुनवाते समय भी बीच-बीच में एकाध विज्ञापन प्रसारित हुए।

पूरी सभा में प्रसारण के दौरान अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए और संदेश भी प्रसारित किए गए जिसमें विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताया गया। दूरदर्शन के कार्यक्रमों के भी विज्ञापन थे।

शाम 5:30 बजे फ़िल्मी हंगामा कार्यक्रम की समाप्ति के बाद क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है, फिर हम शाम बाद के प्रसारण के लिए 7 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।

Thursday, April 15, 2010

कल सुनिये रेडियो श्रीलंका हिन्दी सेवा सुबह 8 बजे

कल सुबह पुरानी फिल्मो के गीतो के पश्चात रेडियो श्रीलंका हिन्दी सेवा पर सुनिये एक महान वादक कलाकार के जनम दिन पर एक विषेष कार्यक्रम जो प्रस्तूत करेंगी श्रीमती ज्योति परमार, जिसमें उन गानों का जिक्र भी होगा या गानों के उस अंश को सुनवाया भी जा सकता है जिनमें इस कलाकारनें बजाया हो । वैसे उस कालाकारके बारेमें इस मंच पर मैं कई बार कुछ न कुछ प्रस्तूत कर चूका हूँ । क्या आप इनके बारेमें बता सकते है ? नहीं तो सुनिये एस एल बी सी या इसी मंच पर इन्तेझार किजीये ?
पियुष महेता ।
सुरत-395001

Tuesday, April 13, 2010

श्री गोपाल शर्माजी और उनकी पत्नी श्रीमती शशीजी को शादीकी सालगिरह की बधाई

आज श्री गोपाल शर्माजी की शादी की साल गिरह के मोके पर और साथमें उनकी आत्मकथा आवाझकी दुनियाके दोस्तों के विमोचन के भी तीन साल पुरे होने पर उनको बधाई और इस मोके पर उस विमोचन समरोह के कुछ अंश जो समय मर्यादा के अंतर्गत मूझसे हो सका इधर प्रस्तूत कर रहा हूँ । अन्नपूर्णाजी से आज ही इसी पोस्ट को प्रकाशित करने के लिये क्षमा चाहता हूँ, पर यह तारीख़ की मजबूरी है और कम से कम आने वाले शुक्रवार को भी यही मजबूरी रहेगी ।



इस दूसरे विडीयोमें उनके भी गुरू श्री विजय किशोर दूबे साहब शर्माजी के लिये तारीफ़में संक्षिप्त बात करते है ।


पियुष महेता ।
नानपुरा, सुरत ।

सुलक्षणा पंडित की फिल्म सलाखें के गीत

1977 के आसपास एक फिल्म रिलीज हुई थी - सलाखें

यह सुलक्षणा पंडित अभिनीत अच्छी फिल्म हैं। इसमे नायक जितेन्द्र हैं या संजीव कुमार या इसमे दोनों ही हैं, मुझे ठीक से याद नही।

इसके गीत भी शायद सुलक्षणा पंडित ने ही गाए हैं जो विविध भारती सहित रेडियो के सभी केन्द्रों पर पहले बहुत सुनवाए जाते थे। अब लम्बे समय से नही सुनवाए जा रहे हैं। मुझे एक भी गीत का एक भी बोल याद नही आ रहा हैं।

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Monday, April 12, 2010

रेडियो श्रीलंका-हिन्दी सेवा की उद्दघोषिका श्री सुभाषिनीजी को जन्मदिन की बधाई

आदरणिय पाठकगण,

आज रेडियो श्री लंका की हिन्दी सेवाकी श्री लन्कन मुल की हिन्दी भाषाकी उद्दघोषिका श्री सुभाषिनी डि'सिल्वाजी की जनम तारीख़ है तो इस मोके पर उनको जनमदिन की बधाई और ढेर सारी शुभ: कामना । एक विषेष बात यह भी है कि वे भारतमें लख़नौमें दो साल रह कर भारतीय शास्त्रीय संगीतको एक हद तक शीख़ कर गयी है । भारतीय संगीत एक बहोत ही गहन विषय होने के कारण 'एक हद' शब्द-समूह को मैनें इस्तेमाल किया है ।
पियुष महेता ।
सुरत ।

Thursday, April 8, 2010

प्यार-मोहब्बत के गानों की दुपहरियों की साप्ताहिकी 8-4-10

सवेरे के त्रिवेणी कार्यक्रम के बाद क्षेत्रीय प्रसारण तेलुगु भाषा में शुरू हो जाता है फिर हम दोपहर 12 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुडते है।

4 अप्रैल से कुछ कार्यक्रमों में परिवर्तन किया गया हैं लेकिन इस प्रसारण में कोई परिवर्तन नही हैं।

दोपहर 12 बजे का समय होता है इंसटेन्ट फ़रमाइशी गीतों के कार्यक्रम एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने का। हमेशा की तरह शुरूवात में 10 फ़िल्मों के नाम बता दिए गए फिर बताया गया एस एम एस करने का तरीका और इन संदेशों को 12:50 तक भेजने के लिए कहा गया ताकि शामिल किया जा सकें। पहला गीत उदघोषक की खुद की पसन्द का सुनवाया गया ताकि तब तक संदेश आ सके। फिर शुरू हुआ संदेशों का सिलसिला। शुक्रवार को गुड फ्रायडे था पर एक भी फिल्म ऎसी नही चुनी गई जिसमे प्रार्थना हो। हालांकि पहला गीत उदघोषक की पसंद का होता हैं, यह गीत इस अवसर का सुनवाया जा सकता था, लेकिन नही, शुरूवात हुई वही प्यार-मोहब्बत की चिट्ठी के गीत कबूतर जा जा जा से जिसके साथ प्यार किया तो डरना क्या, 1942 अ लव स्टोरी, जो जीता वही सिकंदर, डर, करीब, रंगीला, कुछ कुछ होता हैं जैसी अस्सी नब्बे के दशक की फिल्मे लेकर आई निम्मी (मिश्रा) जी।

शनिवार को नन्द किशोर (पाण्डेय) जी लेकर आए कुछ ही पुरानी फिल्मे - राजा हिन्दुस्तानी, दिल से, फिजा, चलते-चलते, अकेले हम अकेले तुम फिल्मो के रोमांटिक गीतों के लिए सन्देश आए और साथ ही कुछ और पुरानी फिल्म राम तेरी गंगा मैली फिल्म का यह कुछ अलग गीत भी सुनवाया गया - हुस्न पहाडो का

रविवार को नन्द किशोर (पाण्डेय) जी लेकर आए नई फिल्मे - ओंकारा, दोस्ताना, जिस्म, नो एंट्री, धूम 2, आ देखे ज़रा, कारपोरेट, बचना ऐ हसीनो। लगभग सभी रोमांटिक गीत रहे जैसे राज फिल्म से -

आपके प्यार में हम संवरने लगे

सोमवार को अजेन्द्र (जोशी) जी ले आए हम तुम, गैगस्टर, हमराज, नमस्ते लन्दन, गुरू, दुश्मन जैसी नई फिल्मे। श्रोताओं ने ऐसे गीतों के लिए सन्देश भेजे जो कम लोकप्रिय हैं।

मंगलवार को सपने, हिना, बाजीगर, सोलजर, मन, ख़ूबसूरत जैसी कुछ पुरानी फिल्मे लेकर आए नन्द किशोर (पाण्डेय) जी।

बुधवार को अभिनेता जितेन्द्र का जन्मदिन था, इस अवसर पर उन्ही की चुनी हुई फिल्मे लेकर आए अमरकांत जी। अच्छी स्वाभाविक प्रस्तुति रही। यह जानकारी भी मिली कि जितेन्द्र को लौकी का हलवा पसंद है और हर साल जिसे बीजू खोटे भेजते हैं। फिल्मे भी अच्छी लोकप्रिय चुनी गई। श्रोताओं ने भी अलग-अलग मूड के गानों के लिए सन्देश भेजे - जीने की राह फिल्म का आँख मिचौली गीत, फर्ज का गीत - मस्त बहारो का आशिक, हमजोली, धर्मवीर, हिम्मतवाला फिल्मो के गीत सुनवाए गए और शुरूवात विविध भारती की ओर से तोहफा फिल्म के शीर्षक गीत से हुई।

आज नन्द किशोर (पाण्डेय) जी लेकर आए नई फिल्मे -रोमांटिक गीतों के अलावा अलग भाव के गीतों के लिए भी सन्देश आए - कभी खुशी कभी गम का शीर्षक गीत, सलाम नमस्ते, मोहब्बते, वीर जारा, चुरा लिया हैं तुमने, हम आपके दिल में रहते हैं फिल्मो के गीत शामिल रहे।

आधा कार्यक्रम समाप्त होने के बाद फिर से बची हुई फ़िल्मों के नाम बताए गए, साथ ही अगले दिन की फिल्मो के नाम भी बताए गए और फिर से बताया गया एस एम एस करने का तरीका। एक घण्टे के इस कार्यक्रम के अंत में और बीच में भी अगले दिन की 10 फ़िल्मों के नाम बताए गए। संदेशों की संख्या अधिक रही। देश के विभिन्न भागो से संदेश आए। सप्ताह भर इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया विजय दीपक छिब्बर जी ने।

1:00 बजे कार्यक्रम सुनवाया गया - हिट सुपर हिट। यह कार्यक्रम हर दिन एक कलाकार पर केन्द्रित होता है, उस कलाकार के हिट सुपरहिट गीत सुनवाए जाते है। शुक्रवार को यह कार्यक्रम अभिनेता फिरोज खान पर लेकर आई निम्मी (मिश्रा) जी। साठ सत्तर और अस्सी तीन दशको में इस अभिनेता ने हिट गीत दिए पर अस्सी के दशक के गीत ही अधिक सुनवाए गए - कुर्बानी, जांबाज, यलगार, दयावान। सत्तर के दशक की एक ही फिल्म शामिल रही - धर्मात्मा जबकि इस दशक में उनकी मुमताज के साथ जोडी बहत हिट रही थी, गाने भी हिट थे - अपराध, उपासना और नागिन फिल्म का युगल गीत। सफ़र फिल्म का यह गीत सुपरहिट रहा जो अक्सर सुनवाया जाता हैं -

जो तुमको हो पसंद वही बात कहेगे

यह गीत फिरोज खान पर फिल्माया गया और मुकेश ने गाया हैं। साठ के दशक की चर्चा ही नही हुई जबकि ऊँचे लोग फिल्म का रफी साहब का गाया हिट गीत अक्सर सुनवाया जाता हैं, इस समय की साधना अभिनीत आरजू फिल्म में भी फिरोज खान थे। पता नही क्यों, इस कार्यक्रम में ये प्रमुख गीत शामिल नही किए गए।

शनिवार को नन्द किशोर (पाण्डेय) जी ने अभिनेत्री जया (भादुड़ी) बच्चन पर प्रस्तुत किया यह कार्यक्रम। उनके लोकप्रिय गीत सुनवाए - मिली, नौकर, जंजीर, अनामिका, शोर फिल्मो से। इन सभी फिल्मो में उन्होंने जया भादुड़ी के नाम से काम किया क्योंकि यह सभी फिल्मे उनके विवाह के पहले की हैं, वैसे बतौर नायिका उनकी लोकप्रियता इसी नाम से हैं जबकि कार्यक्रम में एक बार भी यह नाम नही बताया गया और हर बार जया बच्चन ही कहा गया। उनकी बतौर नायिका पहली फिल्म और पहले सोलो गीत जिसकी गायिका वाणी जयराम का भी यह पहला गीत हैं, इस फिल्म और गीत की चर्चा ही नही हुई - गुड्डी फिल्म से बोले रे पपिहरा। फिल्म चुपके-चुपके का तो गीत ही गलत सुनवाया - बागो में - यह गीत शर्मिला टैगोर और धर्मेन्द्र पर फिल्माया गया हैं।

रविवार को नन्द किशोर (पाण्डेय) जी ने अभिनेत्री परवीन बाबी पर यह कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उन की हल्की-फुल्की चर्चा करते हुए उनके गीत सुनवाए इन फिल्मो से - नमक हलाल, शान, गुद्दार, कालिया, सुहाग।

सोमवार को अजेन्द्र (जोशी) जी ने अभिनेत्री आशा पारेख पर यह कार्यक्रम प्रस्तुत किया। उनके लोकप्रिय गीत सुनवाए कारवां, मैं तुलसी तेरे आँगन की, हीरा, आन मिलो सजना, मेरा गाँव मेरा देश, बहारो के सपने फिल्मो से। उनके काम और उन्हें मिले प्रतिष्ठित पुरस्कारों की भी चर्चा की। बढ़िया संतुलित कार्यक्रम।

मंगलवार को अभिनेता सनी देवोल के लिए नन्द किशोर (पाण्डेय) जी ने प्रस्तुत किया। शुरूवात की उनकी पहली फिल्म बेताब के गीत से, इसके बाद सोहनी महिवाल फिल्मो के रोमांटिक गीतों के साथ त्रिदेव का तिरछी टोपी वाले गीत, शरारती गीत भी शामिल थे - चालबाज फिल्म से और यह गीत -

मैं निकला गड्डी लेके एक मोड़ आया

गानों के चुनाव में अच्छी विविधता रही।

बुधवार को अमरकांत जी ले आए अभिनेता विनोद खन्ना के हिट सुपरहिट गीत। इस एक ही गीत से पूरे कार्यक्रम का आनंद आ गया जो एक लम्बे समय बाद सुनने को मिला, फिल्म हम तुम और वो से किशोर कुमार का गाया शुद्ध हिन्दी गीत -

प्रिय प्राणेश्वरी, हृदयेश्वरी
आप हमें आदेश करी तो प्रेम का हम श्रीगणेश करी

कुर्बानी. अमर अकबर एंथोनी, मैं तुलसी तेरे आँगन की, इम्तहान फिल्मो के गीत भी सुनवाए गए।

आज नन्द किशोर (पाण्डेय) जी ने संगीतकार विशाल भारद्वाज को प्रस्तुत किया। नए गीत सुनने को मिले। अधिकतर गुलज़ार के गीत ही सुनवाए गए। सभी गीत हिट-सुपरहिट नही लगे।

1:30 बजे का समय रहा मन चाहे गीत कार्यक्रम का। सप्ताह भर हर दिन नई पुरानी फिल्मो के मिलेजुले गीत सुनवाए गए। पत्रों पर आधारित फ़रमाइशी गीतों में शुक्रवार को एक भी गीत गुड फ्रायडे के अवसर का नही था। इस दिन राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने सुनवाए राम तेरी गंगा मैली, पत्थर के सनम, फकीरा, राकी फिल्मो के गीत और झील के उस पार, शरीफ बदमाश और इन्तेकाम फिल्म के इस गीत की फरमाइश श्रोताओं ने बहुत दिन बाद की -

गीत तेरे साज का तेरी ही आवाज हूँ

अंत में दो गीत नई फिल्मो के थे जैसे तेरे मेरे सपने।

शनिवार को शहनाज (अख्तरी) जी ने सुनवाए श्रोताओं की फरमाइश पर इन फिल्मो के गीत - इम्तहान, कामचोर, शराबी, जानी दुश्मन, अंत में दो गीत नई फिल्मो के थे जैसे फिल्म और प्यार हो गया। शराबी फिल्म के गीत के समय उर्दू खबरे भी सुनाई दे रही थी, शायद तकनीकी गड़बड़ी क्षेत्रीय केंद्र से रिले में हुई।

रविवार को संगीता (श्रीवास्तव) जी ले आई सत्तर के दशक की बेहतरीन फिल्मो के लोकप्रिय गीत - सावन भादों, हाथ की सफाई, प्रेम पुजारी, रूप तेरा मस्ताना और नूरी का शीर्षक गीत। जैसा कि होता हैं अंतिम दो गीत उसके आगे के समय के सुनवाए गए जैसे फिल्म आशिकी।

सोमवार को गीत सुनवाने आई निम्मी (मिश्रा) जी। मेहबूब की मेहंदी, आ गले लग जा, सनम तेरी कसम, जूनून, रेफ्यूजी, संगीत, खिलाड़ी, 100 डेस। इस तरह इस दिन नए पुराने गीत एक साथ सुनने को मिले।

मंगलवार को शहनाज (अख्तरी) जी लेकर आई विविध गीत नई पुरानी फिल्मो से - इज्जत, अनामिका, चांदनी, रंग, अकेले हम अकेले तुम फिल्मो के रोमांटिक गीत और विविध भावो के गीत - अनाडी, अमर अकबर एंथोनी की क़व्वाली, झूठा कही का फिल्म से यह गीत -

जीवन के हर मोड़ पर मिल जाएगे हमसफ़र
जो दूर तक साथ दे ढूंढें उसी को नजर

गीतों के चुनाव में अच्छी विविधता रही।

बुधवार को शहनाज (अख्तरी) जी ने शुरूवात की पुरानी फिल्म नाईट इन लन्दन से जिसके बाद कुछ नई फिल्मे शामिल हुई - कुली, रंग, धनवान, दिलवाले, आशिकी, बेताब और जब वी मेट फिल्म के इस कम सुने जाने वाले गीत के लिए भी मेल आया -

आओगे जब तुम साथ

आज रेणु (बंसल) जी आई गीत सुनवाने। आशिक हूँ बहारो का फिल्म के शीर्षक गीत से शुरूवात हुई। फिर इसके पीछे के समय के गीत सुनवाए गए। गीतों के चुनाव में अच्छी विविधता रही। संगम फिल्म की प्रेम पाती का गीत, कल आज और कल फिल्म का शरारती गीत, विश्वास फिल्म का यह गीत सुनना अच्छा लगा जिसकी फरमाइश कम आती हैं -

आपसे हमको बिछड़े हुए एक ज़माना बीत गया

खानदान फिल्म, फिर आगे के समय के गीतों का सिलसिला चला मन, क़यामत, सोलजर, कभी खुशी कभी गम, चाहत फिल्मो के गीत भी शामिल थे। अलग-अलग मूड के गीतों को लिए अच्छा संतुलन रहा आज।

बुधवार और गुरूवार के ई-मेल मन चाहे गीत कार्यक्रम में इस सप्ताह मेल संख्या बढी।

इस कार्यक्रम में अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए और संदेश भी प्रसारित किए गए जिसमें विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताया गया। दूरदर्शन धारावाहिक के विज्ञापन भी शामिल रहे।

इस सप्ताह भी इस समय के प्रसारण में एक भी कार्यक्रम प्रायोजित नहीं था। जबकि हिट सुपरहिट कार्यक्रम को प्रायोजित किया जा सकता है।

इस प्रसारण के लिए स्टूडियो से तकनीकी सहयोग रहा - गणेश (शिंदे) जी, तेजेश्री (शेट्टे) जी, राजीव (प्रधान) जी का और नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) से विनायक (रेणके) जी, सुमति (शिंघाडे) जी, सुभाष (कामले) जी ने इस प्रसारण के तकनीकी पक्ष को सम्भाला और यह कार्यक्रम श्रोताओं तक ठीक से पहुँच रहा है,यह देखने (मानीटर) करने के लिए ड्यूटी रूम में रहे आशा (नायकन) जी, मालती (माने) जी, कमला कुन्दर जी।

दोपहर में 2:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम की समाप्ति के बाद आधे घण्टे के लिए क्षेत्रीय प्रसारण होता है जिसके बाद केन्द्रीय सेवा के दोपहर बाद के प्रसारण के लिए हम 3 बजे से जुड़ते है।

Tuesday, April 6, 2010

मेरा जीवन फिल्म का शीर्षक गीत

वर्ष 1976 के आसपास एक फिल्म रिलीज हुई थी - मेरा जीवन

बहुत अच्छी उद्येश्यपूर्ण फिल्म थी। दूरदर्शन पर भी यह फिल्म दिखाई गई थी। इस फिल्म में नायक डाक्टर हैं। विद्यार्थी जीवन में ही एक दुर्घटना के शिकार व्यक्ति का आपरेशन करने से उसे निलंबित कर दिया जाता हैं।

नायक का नाम मुझे याद नही आ रहा, वैसे उन्हें अधिक लोकप्रियता नही मिली, कुछ ही फिल्मे की। नायिका और अन्य कलाकारों के बारे में भी याद नही आ रहा।

इस फिल्म का शीर्षक गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था जिसे किशोर कुमार ने गाया हैं। यह संजीदा गीत फिल्म कोरा कागज़ के शीर्षक गीत की तरह ही हैं।

पहले रेडियो से बहुत सुनवाया जाता था पर अब लम्बे समय से नही सुना। इस गीत का मुखड़ा मुझे याद हैं और कुछ शायद अंतरा भी जो इस तरह हैं -

मेरा जीवन कुछ काम न आया
जैसे सूखे पेड़ की छाया

(शायद अंतरा इस तरह हैं)
दिन का सूरज रात का चन्दा
एक बराबर दोनों एक ही .......
----------------------

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Thursday, April 1, 2010

सुबह के पंचरंगी प्रसारण की साप्ताहिकी 1-4-10

शुक्रवार को छोड़ कर सप्ताह के हर दिन परम्परा के अनुसार शुरूवात संकेत धुन से हुई जिसके बाद वन्देमातरम फिर बताए गए दिन और तिथि, संवत्सर तिथि भी बताई गई जिसके बाद मंगल ध्वनि सुनवाई गई। यह सभी क्षेत्रीय केंद्र से प्रसारित हुआ। इसके बाद 6 बजे दिल्ली से प्रसारित हुए समाचार, 5 मिनट के बुलेटिन के बाद मुम्बई से प्रसारण शुरू हुआ जिसकी शुरूवात में कभी-कभार सुबह के कार्यक्रमों के प्रायोजकों के विज्ञापन प्रसारित हुए जिसके बाद पहले कार्यक्रम वन्दनवार की शुरूवात मधुर संकेत धुन से हुई, फिर सुनाया गया चिंतन।

शुक्रवार को प्रसारण की शुरूवात देर से हुई, शायद तकनीकी कारण से। वन्देमातरम के बाद रिले प्रसारण शुरू हुआ और समाचार शुरू हो चुके थे। समाचार के बाद कुछ समय संगीत सुना फिर जब जुड़े तो चिंतन के अंतिम शब्द कानो में पड़े जिससे कथन का पता नही चला।

चिंतन में इस बार शामिल रहे कथन - व्यास जी का कथन - माता के रहते चिंता नहीं रहती। तुकाराम का कथन - मेघ वर्षा करते समय उसर और उपजाऊ भूमि को समान रूप से सींचते हैं और गंगा का जल सबको पवित्र करता हैं, इतना बढ़िया कथन किसी और दिन अच्छा लगता क्योकि इस दिन महावीर जयंती थी, अच्छा होता भगवान महावीर का कोई सन्देश बताते। महात्मा गांधी के दो कथन बताए गए - मीठी बोली मन की कड़वाहट मिटाती हैं। दूसरा कथन - जो अपने दायित्व का निर्वाह नही करता उसका अपने अधिकारों के लिए चिंता करना ठीक नही। सरदार वल्लभ भाई पटेल का कथन - कितना ही धन प्राप्त कर ले, साथ नही जाता, हम अपने पीछे कीर्ति ही छोड़ जाते हैं, यह कथन स्पष्ट नही बताया गया। आज स्वामी रामतीर्थ का कथन बताया गया - त्याग का अर्थ किसी व्यक्ति या वस्तु को छोड़ना नही हैं बल्कि उससे ऐसा सम्बन्ध बनाना हैं कि उसमे विविधता के दर्शन हो। अच्छा होता आज शिक्षा से सम्बंधित या बच्चो से सम्बंधित कोई विचार बताया जाता क्योंकि इस सन्दर्भ में देश में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया हैं और आज से लागू किया गया हैं।

वन्दनवार कार्यक्रम में इस बार भी फिल्मी घुसपैठ जारी रही। विनम्र अनुरोध है कृपया फिल्मी भक्ति गीतों का अलग कार्यक्रम रखिए ऐसे समय जहां क्षेत्रीय कार्यक्रमों का समय न हो ताकि हम इन फिल्मी भक्ति गीतों का आनंद ले सके।

सप्ताह भर विविध भक्ति गीत सुने - माँ सरस्वती की आरती सुनवाई गई।

साकार रूप के भक्ति गीत - जय भोला भंडारी शिव हैं

निराकार रूप के भक्ति गीत शामिल रहे - चदरिया झीनी रे

पुराने लोकप्रिय भजन सुनवाए गए -

तू ही दुर्गा तू ही भवानी
तू जननी तू जग कल्याणी

प्रार्थना भी शामिल रही -

परम पिता शिव परमात्मा
गाए जन जन की आत्मा

भक्तों के भक्ति गीत जैसे -

रंग रसिया मैं बावरिया जग भूली
मुझको लागी तेरी लगन

एकाध ऐसा भक्ति गीत भी शामिल रहा जो शायद नया हैं या कम सुनवाया जाता हैं -

जनम सफल होगा रे बन्दे मन में राम बसा ले

कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा, प्रसिद्ध साहित्यकारों जैसे सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रा नंदन पन्त जी के गीत सुनवाए -

भारत माता ग्राम वासिनी

भारती जय विजय करे

और यह नया गीत -

देश के बेटो सो न जाना
अभी तो मंजिल बाक़ी हैं

लोकप्रिय देशभक्ति गीत सुनवाए गए जैसे -

चलो देश पर मर मिट जाए
मिल कर भारत नया बनाए

ये देश हैं मेरा धरा मेरी गगन मेरा

केवल एक गीत सुनवाते समय विवरण बताया - सुरेश अनोखा की रचना और दर्शन सिंह का संगीत -

ऐ वतन ऐ वतन जिंदाबाद

6:30 बजे से क्षेत्रीय प्रसारण में तेलुगु भक्ति गीत सुनवाए गए जिसके बाद 6:55 को झरोका में केन्द्रीय और क्षेत्रीय प्रसारण की जानकारी तेलुगु भाषा में दी गई जिसमे शनिवार को अजीब बात हुई, शुक्रवार के कार्यक्रमों की जानकारी दी गई जैसे 3 बजे सखी सहेली, 7:45 पर लोक संगीत। सोमवार को पार्श्व संगीत जोर से बजता रहा जिससे विवरण सुनना कठिन हो गया।

7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम के दूसरे भाग से हम जुड़े। यह भाग प्रायोजित रहा। शुक्रवार को गुमनाम, जागते रहो, जबक फिल्मो के साथ जिन्दगी और हम फिल्म का यह गीत भी सुनवाया गया जो कम ही सुनवाया जाता हैं -

जा रे जा रे मोरी छोड़ चुनरिया

शनिवार को सुना तलत महमूद और सुरैया का लोकप्रिय गीत - राही मतवाले, इसके साथ एकाध और अपने समय के लोकप्रिय गीत शामिल रहे और साथ ही हमेशा से ही कम सुनवाए जाने वाले गीत भी सुनवाए गए उस्ताद, सूरत और सीरत फिल्म का यह गीत -

तुझे गीत मेरा सुलाए जगाए

रविवार को यह कार्यक्रम संगीतकार एस एन त्रिपाठी की पुण्यस्मृति में समर्पित किया गया। उनके विभिन्न रंगों के गीत सुनवाए जैसे -

लाल किला फिल्म की गजल - न किसी की आँख का नूर हूँ

वीर दुर्गादास फिल्म का लोकगीत - थाने काजलिया बना लूं

शास्त्रीत पद्धति में ढला मन्नाडे का गाया गीत - उड़ जा भंवर

अमृत मंथन फिल्म का शांत गीत - चाँद ढलने लगा आ भी जा पिया

इस तरह इस संगीतकार के सभी पहलू उभर कर आए, बढ़िया चुनाव।

सोमवार को छोटी छोटी बाते, दूज का चाँद, कैदी, एक गाँव की कहानी फिल्मो के गीतों के साथ सुरैया का शमा फिल्म का यह गीत भी शामिल था -

धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम

मंगलवार को गीतकार आनंद बक्षी को समर्पित रहा कार्यक्रम। उनके जीवन और काम की हलकी सी जानकारी दी। उनके कुछ लोकप्रिय गीत सुनवाए जैसे जुआरी फिल्म से - नींद उड़ जाए तेरी चैन से सोने वाले, मिस्टर एक्स इन बाम्बे का गीत और फिल्म फूल बने अंगारे से कम सुना जाने वाला गीत भी शामिल था।

बुधवार को यह कार्यक्रम अभिनेत्री मीनाकुमारी की पुण्यस्मृति में समर्पित किया गया। उनकी फिल्मो के विभिन्न मूड के गीत सुनवाए -

न जाओ सैय्या छुडा के बैय्या

दिल अपना प्रीत पराई का शीर्षक गीत, दिल एक मंदिर और बहू बेगम फिल्म से -

दुनिया करे सवाल तो हम क्या जवाब देगे

बैजूबावरा फिल्म का युगल गीत और उनकी लोकप्रिय फिल्म शरारत से रफी साहब का गाया गीत भी शामिल था। इस तरह गीतों के चुनाव में विविधता अच्छी लगी।

आज का दिन दो रूपों में महत्वपूर्ण हैं - शिक्षा का अधिकार नियम आज से लागू हुआ और आज पहली अप्रैल हैं, हंसने-हंसाने का दिन। यह दिन का पहला प्रसारण हैं और फिल्मी गीतों का यह पहला कार्यक्रम और वह भी गैर फरमाइशी गीतों का और इसमे इन सब बातो की झलक तक नही मिली। गीत सुनवाया गया -

अब क्या मिसाल दूं मैं तुम्हारे शबाब की

और ऐसे ही प्यार-मोहब्बत के गीत मेरी सूरत तेरी आँखे, एक फूल चार कांटे, घूंघट, एक राज फिल्मो से और दिल एक मंदिर फिल्म का शीर्षक गीत भी शामिल था। मानते हैं कि गीतों का चुनाव पहले ही हो जाता हैं इसीलिए शिक्षा और बच्चो संबंधी गीत नही चुने जा सके पर पहली अप्रैल को ध्यान में रखकर गीत चुने जा सकते थे। पुराने बहुत से मजेदार गीत हैं।

इस कार्यक्रम में फिल्मो और फिल्मी गीतों के बारे में सामान्य जानकारी भी दी जाती रही।

7:30 बजे संगीत सरिता में श्रृंखला प्रसारित हो रही हैं - पार्श्व गायन के रंगीन ताने-बाने जिसे प्रस्तुत कर रही हैं प्रसिद्ध सरोद वादिका जरीन शर्मा। बताया गया की गीत राग के आधार पर बनाए जाते हैं इसीलिए शास्त्रीय संगीत से अलग होते हैं और कभी अच्छे लगते हैं कभी अच्छे नही लगते। राग पर आधारित फिल्मी गीतो के साथ वाद्य संगीत भी सुनवाया गया।

शुक्रवार को सुनवाया फिल्म दिल एक मंदिर का गीत। शनिवार को हेमंत कुमार का तैयार किया गया नागिन फिल्म का गीत और सलिल चौधरी के संगीत की भी चर्चा हुई, परख फिल्म का गीत सुना - ओ सजना

रविवार की कड़ी में संगीतकार रवि द्वारा अप्रचलित राग में तैयार काजल फ़िल्म का गीत सुनवाया -

छू लेने दो नाजुक ओठो को

कुछ और गीत भी शामिल हुए जिनके संगीत पर चर्चा हुई -

मन्नाडे का गाया मेरे हुजुर फिल्म का गीत - झनक झनक तोरी बाजे पायलिया

बैजूबावरा फिल्म से - मन तड़पत हरी दर्शन को आज

सोमवार को चर्चा में रहे गीत - नौशाद का फिल्म दिल दिया दर्द लिया का गीत, जयदेव का गीत - तू चन्दा मैं चांदनी, सी रामचंद्र द्वारा तैयार लोरी - धीरे से आ जा रे अखियन में निंदिया

मंगलवार को चर्चा में रहे संगीतकार खैय्याम। राग पहाडी पर आखिरी ख़त फिल्म का गीत सुनवाया -

बहारो मेरा जीवन भी संवारो

बुधवार को एस डी बर्मन द्वारा राग अहीर भैरव पर आधारित फिल्म मेरी सूरत तेरी आँखे से यह गीत -

पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई

और आर डी बर्मन द्वारा राग मिश्र शिवरंजनी पर आधारित महबूबा फिल्म से यह गीत -

मेरे नैना सावन भादों

चर्चा में रहे।

इस श्रृंखला का फिर से प्रसारण हो रहा हैं जिसे तैयार किया था छाया (गांगुली) जी ने। वैसे भी नए कार्यक्रम कम ही प्रसारित होते हैं।

आज से शिक्षा का अधिकार क़ानून लागू हुआ हैं इस अवसर पर दिल्ली से प्रधानमंत्री का सन्देश हिन्दी और अंग्रेजी में प्रसारित हुआ जिसके बाद बच्चो के दो गीत सुनवाए गए -

बच्चो तुम तक़दीर हो कल के हिन्दुस्तान की

नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या हैं

7:45 को त्रिवेणी में शुक्रवार को अच्छा विचार रहा - जिन्दगी में छोटी- छोटी खुशिया भी बहुत मायने रखती हैं। आपकी कसम फिल्म के गीत के साथ सुनवाया गया यह गीत भी -

प्यार का समय कम हैं जहां
लड़ते हैं लोग कैसे वहां

शनिवार को भी बढिया विचार रहा - बहुत खराब लगता हैं जब पढ़े-लिखे लोग नियम क़ानून को ताक पर रख देते हैं। अच्छा आलेख और गीत -

पढोगे लिखोगे तो होगे नवाब
खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब

प्रकृति से छेड़-छाड़ की भी बात चली और महिलाओं पर किए जाने वाले अत्याचार की भी चर्चा हुई -

कोमल हैं कमजोर नही

रविवार का विषय था - जिन्दगी में क़दम-क़दम पर सवालों का सामना करना पड़ता हैं। गीत भी अच्छे चुने गए, पुराने गीत बहु बेगम फिल्म से और यह गीत -

एक सवाल मैं करूं एक सवाल तुम करो

नया गीत मैंने प्यार किया फिल्म से भी शामिल था।

सोमवार को मजा आ गया, रात में निकलने वाले महाशय चोर की चर्चा रही, ऐसे में जाहिर हैं चोरी मेरा काम फिल्म का गीत सुनवाया जाता, यह गीत भी शामिल रहा -

शहरों की गलियों में जब अन्धेरा होता हैं

चर्चा आगे बढ़ती गई और टैक्स चोरी की भी बात हुई।

मंगलवार को चर्चा चली कि श्रम भी करे और आराम भी। आलेख में बताया गया श्रम करे, आराम भी करे पर आलसी न बने, व्यायाम भी करे यानी सभी के लिए बाते बताई गई पर गीतों के चुनाव में असावधानी रही, केवल श्रमिक वर्ग के गीत सुनवाए -

साथी हाथ बढ़ाना

मेहनतकश इंसान जाग उठा

बुधवार को पुराने अंक का प्रसारण दुबारा किया गया जिसमे बताया गया कि जिन्दगी को देखने का सबका अपना नजरिया हैं। गीत भी उपयुक्त चुने गए -

जिन्दगी हैं खेल कोई पास कोई फेल

कभी सुख तो कभी दुःख हैं

पिया का घर फिल्म का गीत भी शामिल था। अच्छा अंक हैं इसीलिए दुबारा प्रसारण भी अच्छा लगा।

और आज चर्चा की गई उनकी जो दूसरो को प्रेरणा देते हैं। गीत सुनवाए गए -

मधुबन खुशबू देता हैं

पहचान और नई फिल्म का गीत भी शामिल था। ऎसी आदर्शवादी बातो के लिए तो पूरा साल पडा हैं कम से कम आज एक दिन कुछ हंसते-हंसाते तो अच्छा लगता।

प्रसारण के दौरान रविवार यानी 4 अप्रैल से कार्यक्रमों में किए जा रहे परिवर्तन की सूचना देते हुए रविवार को शाम 4 बजे एक घंटे के उजाले उनकी यादो के, कार्यक्रम के बारे में बताया।

इस प्रसारण को अशोक हमराही जी, निम्मी (मिश्रा) जी, युनूस (खान) जी ने शशांक (काटगरे) जी, राजीव (प्रधान) जी, जयंत (महाजन) जी, मंगेश (सांगले) जी के तकनीकी सहयोग से हम तक पहुँचाया गया और यह कार्यक्रम श्रोताओं तक ठीक से पहुँच रहा है, यह देखने (मानीटर) करने के लिए ड्यूटी रूम में ड्यूटी अधिकारी रहे आशा नायकम जी, वसुंधरा (अय्यर) जी।

सवेरे के त्रिवेणी कार्यक्रम के बाद क्षेत्रीय प्रसारण तेलुगु भाषा में शुरू हो जाता है फिर हम दोपहर 12 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुडते है।

अपनी राय दें