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Saturday, July 31, 2010

एक टिपिकल फरमाइशी पोस्ट

सागर नाहर साहब ने जों हुनर सिखाया है उसे सलाम करते हुए पेश करता हूँ ये पोस्ट
पहले एक प्लेयर क्लिक कीजियेगा फिर दूसरा





Thursday, July 29, 2010

प्यार-मोहब्बत के गानों की दुपहरियों की साप्ताहिकी 29-7-10

सवेरे के त्रिवेणी कार्यक्रम के बाद क्षेत्रीय प्रसारण तेलुगु भाषा में शुरू हो जाता है फिर हम दोपहर 12 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुडते है।

दोपहर 12 बजे का समय होता है इंसटेन्ट फ़रमाइशी गीतों के कार्यक्रम एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने का। हमेशा की तरह शुरूवात में 10 फ़िल्मों के नाम बता दिए गए फिर बताया गया एस एम एस करने का तरीका और इन संदेशों को 12:50 तक भेजने के लिए कहा गया ताकि शामिल किया जा सकें। अक्सर पहला गीत उदघोषक की खुद की पसन्द का सुनवाया गया ताकि तब तक संदेश आ सके। फिर शुरू हुआ संदेशों का सिलसिला। इस सप्ताह अस्सी नब्बे के दशक की फिल्मो का बोलबाला रहा।

शुक्रवार को लोकप्रिय फिल्मे लेकर आई मंजू (द्विवेदी) जी। शुरूवात की बेटा फिल्म के धक धक गीत से। फिल्मे रही - खुदा गवाह, खिलाड़ी, शोला और शबनम, जो जीता वही सिकंदर, बोल राधा बोल, दिल का क्या कसूर। सभी गीतों से रोमांटिक गीत श्रोताओं के संदेशो के अनुसार सुनवाए गए जैसे विश्वात्मा फिल्म से - सात समंदर पार मैं तेरे पीछे पीछे आ गई

शनिवार को निम्मी (मिश्रा) जी ले आई लोकप्रिय फिल्मे। श्रोताओं ने न सिर्फ रोमांटिक गीतों के लिए सन्देश भेजे बल्कि अलग तरह के गीतों के लिए भी जैसे रोजा फिल्म से छोटी सी आशा, अनाडी फिल्म का यह प्यार भरा गीत -

फूलो सा मुखड़ा तेरा कलियों सी मुस्कान हैं
रंग तेरा देख के रूप तेरा देख के कुदरत भी हैरान हैं

डर, दामिनी, खलनायक फिल्मो के गीत और बाजीगर फिल्म का शीर्षक गीत भी सुनवाया गया।

रविवार को राजुल (अशोक) जी ले आई कभी हाँ कभी ना, मैं खिलाड़ी तू अनाडी, हम आपके हैं कौन, रूदाली और श्रोताओं की फरमाइश पर विजयपथ फिल्म का यह गीत बहुत दिन बाद सुना -

राह में उनसे मुलाक़ात हो गई
जिससे डरते थे वही बात हो गई

इस दिन हमने क्षेत्रीय प्रायोजित कार्यक्रम के प्रसारण के कारण 12:15 बजे से सुना।

सोमवार को कमल (शर्मा) जी ने शुरूवात बड़ी मस्त की, रंगीला फिल्म के जोर लगा के नाचे रे गीत से, जो फिल्मे ले आए उसके बड़े मस्त गीत संदेशो के अनुसार सुनवाए। राजा का अंखियाँ मिलाऊँ, ये दिल्लगी का ओले ओले, जेंटलमैन का रूप सुहाना लगता हैं, गुद्दार फिल्म से तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ। दिलवाले, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएगे फिल्मो के गीत भी शामिल थे।

मंगलवार को बरसात, अकेले हम अकेले तुम, जीत, क्रिमिनल, बॉम्बे, राजा हिन्दुस्तानी और घातक फिल्मे लेकर आए युनूस (खान) जी जिनके ज्यादातर ऐसे गीतों के लिए श्रोताओं ने सन्देश भेजे जो बहुत लोकप्रिय नहीं हैं।

बुधवार को भी यही हाल रहा। मनीषा जी ले आई फिल्मे - अग्निसाक्षी, तेरे मेरे सपने, खामोशी, दिलजले, दरार, माचिस, इंग्लिश बाबू देसी मेम, अफलातून जिनके ज्यादातर ऐसे गीतों के लिए श्रोताओं ने सन्देश भेजे जो बहुत लोकप्रिय नहीं हैं।

आज अभिनेता संजय दत्त का जन्म दिन हैं इसीलिए उन्ही की अभिनीत फिल्मे चुनी गई। अमरकांत जी ने शुरूवात की मुन्नाभाई एम बी बी एस फिल्म के इस मजेदार गीत से -

चन्दा मामू सो गए सूरज चाचू जागे

लगे रहो मुन्ना भाई, साजन, दुश्मन, सड़क फिल्मो के गीतों के सुनवाए गए।

आधा कार्यक्रम समाप्त होने के बाद फिर से बची हुई फ़िल्मों के नाम बताए गए और फिर से बताया गया एस एम एस करने का तरीका। कार्यक्रम के अंत में अगले दिन की 10 फ़िल्मों के नाम बताए गए। बताए जाते हैं 10 फिल्मो के नाम पर सन्देश इतने अधिक होते हैं कि श्रोताओं की सूची पढ़ते-पढ़ते 8 गीत ही सुनने को मिलते हैं। आज एस एम एस इतने अधिक आए कि 6 ही गीत सुनवाए गए। देश के विभिन्न भागो से संदेश आए। आरम्भ, बीच में और अंत में बजने वाली संकेत धुन ठीक ही हैं। सप्ताह भर इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया विजय दीपक छिब्बर जी ने।

12:55 को झरोका में दोपहर और बाद के केन्द्रीय और क्षेत्रीय प्रसारण की जानकारी तेलुगु भाषा में दी गई।

1:00 बजे कार्यक्रम सुनवाया गया - हिट सुपर हिट। शुक्रवार को अभिनेत्री लीना चंदावरकर पर फिल्माए गए गीत सुनवाए गए। शुरूवात की एक महल हो सपनों का फिल्म के इस गीत से -

दिल में किसी के प्यार का जलता हुआ दिया
दुनिया की आँधियों से भला ये बुझेगा क्या

मनचली फिल्म का शीर्षक गीत, हमजोली, मैं सुन्दर हूँ, बैराग फिल्मो से और महबूब की मेहंदी फिल्म का यह गीत बहुत दिन बाद सुनना अच्छा लगा -

रातो में फिर नींद कहाँ आती हैं
जो लग जाती हैं महबूब की मेहंदी हाथो में

शनिवार को विशेष कार्यक्रम होता हैं। इस दिन ऐसे लोकप्रिय गीत सुनवाए गए जिनमे परदे पर गीत गाने वाले कलाकार का नाम था। शुरूवात की अमर अकबर अन्थोनी फिल्म के गीत से - माई नेम इज एंथोनी गोंजालविज

इसके बाद डान फिल्म का गीत - मैं हूँ डान

राजा जानी फिल्म से - दुनिया का मेला, मेले में लड़की, लड़की अकेली शन्नो नाम उसका

चांदनी फिल्म का शीर्षक गीत

रॉकी फिल्म का शीर्षक गीत - रॉकी मेरा नाम

हिना फिल्म का - मैं हूँ खुश रंग हिना

वाकई शीर्षक की तरह सैटरडे स्पेशल रहा यह कार्यक्रम। इस कार्यक्रम की परिकल्पना जिस किसी की भी हैं उसको सलाम ! गीत इस रूप में भी सुन सकते हैं, यह मैंने सोचा भी नही था। संयोजक का नाम बताना चाहिए था।

रविवार को भी विशेष आयोजन रहा। इस दिन किसी एक कलाकार से बात करते हुए उनके फेवरेट पांच गीत सुनवाए जाते हैं। कार्यक्रम का शीर्षक ही हैं फेवरेट फाइव। पार्श्व गायिका सुनिधि चौहान से फोन पर बातचीत की निम्मी (मिश्रा) जी ने और उनके फेवरेट फाई गीत सुने, पहला गीत सुना - फिर वही रात

लताजी की गाई हीर सुनवाई

सुखविंदर सिंह का गाया गीत - नशा ही नशा हैं

सोनू निगम का गीत - ओ साथिया

समापन किया मन्नाडे के गाए उपकार फिल्म के गीत से - कसमे वादे प्यार वफ़ा सब बाते हैं बातो का क्या

लताजी के साथ पहली मुलाक़ात की चर्चा की, फिर अपनी पसंद के गायक बताए, प्रमुखता से कविता कृष्णमूर्ति, श्रेया घोषाल और महालक्ष्मी को भी पसंद किया और संगीत के बारे में कहा शिक्षा जरूरी हैं। उनके गीतों की झलक के साथ परिचय दिया राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने। इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया कल्पना (शेट्टी) जी ने तेजेश्री (शेट्टे) जी के तकनीकी सहयोग से। अच्छा रहा कार्यक्रम।

सोमवार को सुनवाए गए बारिश के लोकप्रिय गीत। शुरूवात की मंजिल फिल्म के गीत से। अन्जाना फिल्म का यह बहुत दिन बाद सुनकर अच्छा लगा -

रिमझिम के गीत सावन गाए
भीगी भीगी रातो में

बात हो बारिश की और दो झूठ फिल्म का यह गीत शामिल न हो तो कैसा..

छतरी न खोल उड़ जाएगी

अभिनेत्री, प्यासा सावन फिल्मो के गीत सुन कर वाकई मन भीग गया।

मंगलवार को अभिनेता राज बब्बर पर फिल्माए गीत सुनवाए। शुरूवात की प्रेमगीत फिल्म के गीत से।

मोहब्बत अब तिजारत बन गई हैं

इस गीत की फिल्म का नाम नही बताया। निकाह, भीगी पलकें, वारिस फिल्मो के गीत सुनवाए।

बुधवार को पार्श्व गायक महेंद्र कपूर पर केन्द्रित रहा यह कार्यक्रम। शुरूवात की निकाह फिल्म के गीत से। इसी फिल्म का गीत पिछले दिन राजबब्बर पर केन्द्रित कार्यक्रम में भी सुनवाया गया था। हालांकि गीत अलग थे... जबकि महेंद्र कपूर के गाए गीतों की कमी नही हैं।

क्रान्ति, फकीरा, पेंटर बाबू, फिल्मो के गीत सुनवाए। आए दिन बहार के फिल्म से यह गीत भी सुनवाया गया -

ये कलि जब तलक फूल बनके खिले इन्तेजार करो

आज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर के गाए गीत सुनवाए गए। शुरूवात की पहचान फिल्म के गीत से जिसे बहुत दिन बाद सुन कर अच्छा लगा -

आया न हमको प्यार जताना

दिल एक मंदिर, राजकुमार, छोटी सी मुलाक़ात, सूरज फिल्मो के गीत सुनवाए गए।

उनके दो गानों की कमी खाली - एक उनका अति लोकप्रिय गीत, ब्रह्मचारी फिल्म से - आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे और दूसरा उनका शायद फिल्मो में अंतिम गीत हैं - सबक फिल्म से - बरखा बैरन ज़रा थम के बरसों।

1:30 बजे का समय रहा मन चाहे गीत कार्यक्रम का। इस सप्ताह कुछ पुरानी फिल्मो के गीत अधिक सुनवाए गए।

शुक्रवार को अमरकांत जी सुनवाने आए फरमाइशी गीत। हम आपके हैं कौन, आराधना फिल्म से मेरे सपनों की रानी, आन मिलो सजना फिल्म का शीर्षक गीत, और आई मिलन की रात फिल्म के इस गीत के लिए फरमाइश बहुत दिन बाद आई -

तुमने प्यार की बीन बजाई
मैं दौड़ी चली आई

दिल हैं तुम्हारा, बेताब, 1942 अ लव स्टोरी, मोहरा फिल्म से टिप टिप बरसा पानी भी सुनवाया और समापन किया हिना फिल्म के अनारदाना गीत से।

शनिवार को युनूस (खान) जी ने सुनवाए श्रोताओं की फरमाइश पर इन नए पुराने फिल्मो के गीत - गुप्त, हम आपके हैं कौन, भूल भुलैया, आसपास, शोर, क्रान्ति, चश्मेबद्दूर फिल्मो के गीत और धड़कन फिल्म का शीर्षक गीत भी शामिल था और आप आए बहार आई फिल्म के इस गीत के लिए श्रोताओं ने बहुत दिन बाद फरमाइश भेजी -

कोयल क्यों गाए बादल क्यों छाए

रविवार को राजुल (अशोक) जी ले आई राजा जानी, डान, अन्जाना, साजन, महबूब की मेहंदी और नई फिल्मो के गीतों में तेरे नाम फिल्म का शीर्षक गीत। अच्छा लगा एक फूल दो माली फिल्म का यह गीत बहुत दिन बाद सुनना -

ये पर्दा हटा दो ज़रा मुखड़ा दिखा दो

सोमवार को गीत सुनवाने आई निम्मी (मिश्रा) जी। शुरूवात की मौसम के अनुसार गीत से, पाकीजा फिल्म का - मौसम हैं आशिकाना। आ गले लग जा, मेरा गाँव मेरा देश, बाजीगर, जो जीता वही सिकंदर, रब ने बना दी जोडी, वारिस फिल्मो के गीत सुनवाए। नौकर फिल्म का पल्लो लटके गीत भी शामिल था।

मंगलवार को भी गीत सुनवाने आई निम्मी (मिश्रा) जी। नाईट इन लन्दन, कारवां, स्वर्ग-नरक, आपकी क़सम, प्रेम, अभिलाषा, रखवाला, लैला मजनूं फिल्मो के गीत सुनवाए गए और नई फिल्मो में अकेले हम अकेले तुम फिल्म से गीत और यह गीत भी शामिल था -

चलो चले मितवा
इन मीठी मीठी राहों में

बुधवार को राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी आए गीत सुनवाने। नए पुराने फिल्मो के गीत सुनने के लिए ई-मेल आए। अधिकार, जेलर, उस्तादों के उस्ताद, खानदान, 3 इडियट, डर, आशिकी, राजा हिन्दुस्तानी, पगला कहीं का फिल्मो के गीत सुनवाए। रतन फिल्म से जोहरा बाई अम्बाले वाली की आवाज में इस गीत को सुन कर आनंद आ गया -

रून झुन बरसे बादरवा मस्त हवाएं छाई

आज गीत सुनवाने आई राजुल (अशोक) जी, शुरूवात पुरानी फिल्म से हुई, आए दिन बहार के फिल्म का शीर्षक गीत। एक महल हो सपनों का, वो लम्हे, राज, मुकद्दर का सिकंदर, एक मुसाफिर एक हसीना, बीवी नंबर 1, खानदान फिल्मो के गीत सुनवाए।

बड़ा आदमी फिल्म का शास्त्रीय गीत - अंखियन संग अंखिया लागे आज

दिल तो पागल हैं फिल्म से सावन राजा का गीत -

घोड़े जैसी चाल हाथी जैसी दुम
ओ सावन राजा कहाँ से आए तुम
चक दुम दुम

भी सुनवाया गया।

बुधवार और गुरूवार के ई-मेल मन चाहे गीत कार्यक्रम में इस सप्ताह मेल संख्या कम ही लगी। अधिकाँश गीत एक ही मेल पर सुनवाए गए। गाने नए पुराने दोनों ही शामिल थे।

इस कार्यक्रम में अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए और संदेश भी प्रसारित किए गए जिसमें विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताया गया। खासकर 31 जुलाई को रफी साहब को समर्पित होने वाले विशेष कार्यक्रम के प्रसारण के बारे में। बुधवार को आज के फनकार कार्यक्रम अभिनेता रवि वासवानी पर केन्द्रित था जिसकी सूचना भी दी गई, इस दिन उनके निधन का समाचार मिला था।

इस प्रसारण को राजीव (प्रधान) जी, निखिल (धामापुरकर) जी, सुधाकर (मटकर) जी, तेजेश्री (शेट्टे) जी, स्वाती (भंडारकर) जी के तकनीकी सहयोग से हम तक पहुँचाया गया और यह कार्यक्रम श्रोताओं तक ठीक से पहुँच रहा है, यह देखने (मानीटर) करने के लिए ड्यूटी रूम में ड्यूटी अधिकारी रहे रमेश (गोखले) जी।


दोपहर में 2:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम की समाप्ति के बाद आधे घण्टे के लिए क्षेत्रीय प्रसारण होता है जिसके बाद केन्द्रीय सेवा के दोपहर बाद के प्रसारण के लिए हम 3 बजे से जुड़ते है।

Tuesday, July 27, 2010

1. रेडियोनामा के पुनर्जनम के लिये सुचन 2. केन्द्रीय विविध भारती सेवासे श्री महेन्द्र मोदी साहब का दिल्ही प्रस्थान

डो. अजीतजी और अन्नपूर्णाजी,

अभी परिस्थिती इस प्रकार की है कि, मंगल और शुक्रवार दोनों अन्नपूर्णाजी के लिये बुक्ड जैसे ही है तो मेरे जैसे अन्य प्रासंगीक लेख़कोकी पोस्ट अगर सोमवार या गुरूवार रात्री रख़ने की होती है (यू-ट्यूब पर विडीयो अपलॉडींगमें लगने वाले समय के कारण) तो यहाँ बात स्वाभाविक होती है कि दूसरे दिन आनेवाली पोस्ट ही ज्यादा दर्शकोके सामने आयेगी और पिछले पोस्ट लेख़क की मेहनत ज्यादा तर बेकार जाती है । और उस पर एक भी टिपणी मिलती नहीं है । तो जिन लोगो के अपने निज़ी ब्लोग्स जानेमाने है, जैसे युनूसभाई, सागरभाई, संजयजी और इरफानभाई वे इस ब्लोग के लेखक सदस्य होटल हुए भी इस और मूडते भी नही है, जैसे भूल ही गये है कि वे यहाँ सदस्य है । इस लिये इस ब्लोग का दृष्य कुछ इस तरह बनाना जरूरी है, कि या तो जो पटेमें पहला पन्ना और अन्य टाईटल्स पढे जाते है वहाँ हर सदस्यों के नाम आ जाये जैसे युनूसजीने रेडियोवाणी पर दूसरा पन्ना पढ़ा जाता है, या तो पहेले पन्ने पर पूरी पोस्ट दिखाई देने की जगह जो हमारे दाहिने हाथ की और जो चालू माह की पोस्ट के शिर्षक दिख़ाई पडते है उनको पूरे पन्ने पर विस्तृत किया जाये और अगर जरूर लगे तो चालू माहकी उन सभी पोस्ट के सिर्फ शुरू के दो चार वाक्य को ही शिर्षक के हिसाबसे थोडे छोटे अक्षरमें दिख़ा कर अधूरा छोड दिया जाय और किसी भी पोस्ट को पूरा पढने के लिये दूसरी बार किल्क करना ही पडे वैसा हो, वैसे मैनें एक बार अन्नपूर्णाजी को सुचन किया था कि वे साप्ताहिकी और पूराने उनके हिसाबसे अलभ्य गानो कि चर्चा को एक ही पोस्टमें दो सब-टाईटल्स के साथ लिख़े पर मेरे कहने का मर्म वे पकड नहीं पायी या पकडना चाहा नहीं पर इसके अलावा उन्होंनें अन्य लेखको के रवैये के बारेमें जो बात कही है उसमें काफ़ी हद तक सच्चाई जरूर है । कहीं कोई विषेष ओडियो या विडीयो मेरे जैसा कोई रख़ता है तो अपने पीसी या लेप्टोप पे डाऊनलोड करना चूकते नहीं पर इसको सराहना जानबूज़ कर समयाभाव का थोडा सही या थोडा बढा-चढा कारण दिख़ा कर टाल देते है । कभी कभी पोस्ट लेख़क की तसवीर (प्रभावके संदर्भमें) शादगी पूर्ण बनती है या ग्लेमरस बनती है वो बात भी काम कर जाती है । हो सकता है, बल्की सही ही है, कि मेरी भाषा युनूसजी, संजयजी या इरफ़ानजी जैसी प्रभावक नहीं हो पर सीधी सादी हो और थोडी मेहनत कम हो, जैसे कोई गाने की बात हो तो पूरे गाने के लिरीक्स लिख़ना मेरे बसमें नहीं है । कभी कभी तो एक पोस्ट लिख़ना भी थोडा थकावट वाला काम बनाया जाता है मेरी शारिरीक प्रकृती के कारण, तो यह अन्नपूर्णाजी का रेडियोनामा और रेडियोवाणी की टिपणी संख्या का अंतर तूर्त ही दिलमें लगता है ।

श्री महेन्द्र मोदी साहब हमारे दिल से कहाँ जायेंगे ?

विविध भारती की वेबसाईट के जन्मदाता और संवर्धक सहायक केन्द्र निर्देषक श्री महेन्द्र मोदी साहबने उस साईट के सदश्यों को अपने दिल्ही तबादले केर बारेमें और 28 जूलाई , 2010 विविध भारती कार्यालयमें उनके हाल अंतिम दिन होने के बारेमें सुचित किया है । पत्रावलि के श्रोता उनकी आवाझ और स्टाईल याद रख़ेंगे । सदनसीबसे मेरे पास उनकी मेरे पत्र के दिये जानेवाले उत्तर की ध्वनिमूद्री संग्रहीत रही है । उनको नये स्थान के लिये शुभ: कामना और राजेष रेड्डी साहब की (दूसरी ) वापसी की तरह उनकी भी पहली वापसी विविध भारती पर हो ।
पियुष महेता ।
सुरत-395001.

Sunday, July 25, 2010

सभी सदस्यों से एक विनम्र निवेदन....

रेडियोनामा के हित में कुछ कड़े फैसले लेने का शायद वक़्त आ गया है. तकनीकी मार्गदर्शक सदस्य के रूप में मुझे कुछ फैसले लेने हैं जो रेडियोनामा को पुनर्जीवित कर सकते है. मैं सभी तकनीकी मार्गदर्शक सदस्यों से अपील करता हूँ कि मुझे मेल पर संपर्क करें. और सदस्यगण इसके लिए अपना दिमाग दौडाएं।
धन्यवाद.

Thursday, July 22, 2010

सुबह के पंचरंगी प्रसारण की साप्ताहिकी 22-7-10

सप्ताह के हर दिन परम्परा के अनुसार शुरूवात संकेत धुन से हुई जिसके बाद वन्देमातरम फिर बताए गए दिन और तिथि, संवत्सर तिथि भी बताई गई जिसके बाद मंगल ध्वनि सुनवाई गई। यह सभी क्षेत्रीय केंद्र से प्रसारित हुआ। इसके बाद 6 बजे दिल्ली से प्रसारित हुए समाचार, 5 मिनट के बुलेटिन के बाद मुम्बई से प्रसारण शुरू हुआ जिसकी शुरूवात में कभी-कभार कार्यक्रमों के प्रायोजकों के विज्ञापन प्रसारित हुए जिसके बाद पहले कार्यक्रम वन्दनवार की शुरूवात मधुर संकेत धुन से हुई, फिर सुनाया गया चिंतन।

चिंतन में इस बार शामिल रहे कथन - आचार्य चाणक्य के दो कथन बताए गए - विद्वानों के समूह में अनपढ़ तिरस्कृत होते हैं जैसे हंसों के झुण्ड में बगुला। दूसरा कथन - वही सुभार्या हैं जो पवित्र, चतुर और सत्य बोलने वाली हैं और जिस पर पति की प्रीति हैं। गांधी जी के दो कथन बताए गए - वास्तविक सौन्दर्य हृदय की पवित्रता में हैं। दूसरा कथन - जो अपना कर्तव्य पूरा नहीं करते उन्हें अधिकारों का उपयोग करते समय सोचना चाहिए कि क्या वे उचित कर रहे हैं। संत तुकाराम का कथन - आवश्यकता से अधिक बोलना व्यर्थ हैं। स्वामी विवेकानंद का कथन - झूठ और पाखण्ड कितना ही ठोस क्यों न हो यथार्थ के धरातल से टकराकर चूर-चूर हो ही जाता हैं। कबीर का दोहा अर्थ सहित बताया गया - तिनके को छोटा समझने की भूल न करे क्योंकि जब वह आँखों में जाता हैं तो बहुत कष्ट होता हैं।

वन्दनवार कार्यक्रम में इस बार भी फिल्मी घुसपैठ जारी रही। विनम्र अनुरोध है कृपया फिल्मी भक्ति गीतों और फिल्मी देश भक्ति गीतों का अलग कार्यक्रम रखिए, ऐसे समय जहां क्षेत्रीय कार्यक्रमों का समय न हो ताकि हम इन फिल्मी भक्ति गीतों और फिल्मी देश भक्ति गीतों का आनंद ले सके। वन्दनवार में इन गीतों से कार्यक्रम की गरिमा को धक्का लगता हैं।

सप्ताह भर विविध भक्ति गीत सुने -

साकार रूप के भक्ति गीतों में यह नया गीत -

एकदन्तया वक्रतुंडया श्री गणेशाय धीमहि

निराकार रूप के भक्ति गीत शामिल रहे - मैं एक दिया हूँ तू रोशनी हैं

पुराने लोकप्रिय भजन सुनवाए गए -

राम रमैय्या जपा करो कृष्ण कन्हैया जपा करो
भक्ति से मिल जाए दोनों नाम उन्ही का लिया करो

यह बहुत पुराना भजन सुन कर अच्छा लगा - भजमन रामचरण सुखदायी

एक नया भक्ति गीत सुना हालांकि रचना पुरानी हैं - श्री रामचंद्र कृपालु भजमन

शास्त्रीय पद्धति में ढला भक्ति गीत - आनंदमयी, चैतन्यमयी, सस्यमयी परमे

भक्तों के भक्ति गीत - मीरा का भजन - माने चाकर राखो जी गिरिधारी

कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा, लोकप्रिय देशभक्ति गीत सुनवाए गए -

हम अपने सतकर्मो से मिले जुले सब धर्मो से
तेरी उतारे आरती जय जननि जय भारती

मिल के चलो, चलो भाई मिल के चलो

हमको इस माटी से बेहद प्यार हैं

यह देशगान शायद मैंने पहली बार सुना, अच्छा लगा - वन्देमातरम का नारा हम लगाएगे

शनिवार को क्षेत्रीय केंद्र में शायद कोई तकनीकी समस्या थी। प्रसारण थोड़ी देर से शुरू हुआ, मंगल ध्वनि के बाद केन्द्रीय प्रसारण से जुड़ने पर समाचार शुरू हो चुके थे। इसीसे लगातार 8 बजे तक केन्द्रीय प्रसारण चला जिससे हमें युगल गीतों का कार्यक्रम तेरे सुर और मेरे गीत सुनने का अवसर मिला। शुरूवात हुई इस गीत से - संभल ऐ दिल

फिर रात और दिन, दिल देके देखो, वक़्त फिल्मो के गीत सुनवाए गए, यह गीत भी सुना -

कभी तेरा दामन न छोड़ेगे हम

अच्छे गीत सुनवाए गए।

शेष हर दिन 6:30 बजे से क्षेत्रीय प्रसारण में तेलुगु भक्ति गीत सुनवाए गए जिसके बाद 6:55 को झरोका में केन्द्रीय और क्षेत्रीय प्रसारण की जानकारी तेलुगु भाषा में दी गई।

7 बजे का समय रहा भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम का जो प्रायोजित रहा। अच्छा संतुलन रहा। लोकप्रिय गीत और कम सुने जाने वाले गीत सुनवाए गए। साथ ही हर दिन भूली-बिसरी आवाजे भी गूंजी।

शुक्रवार को हम पंछी एक डाल के और हम हिन्दुस्तानी फिल्मो के शीर्षक गीत सुनवाए गए। लोकप्रिय गीत सुनवाए गए हातिमताई फिल्म से और सहगल साहब का गाया करोड़पति फिल्म से। कम सुने जाने वाले गीत भी शामिल रहे जैसे फिल्म माँ-बाप से -

लागे उनकी सूरतिया कुछ ऎसी भली
जैसे कौवे के चोंच में अनार की कलि

और सहारा फिल्म से सुधा मल्होत्रा का गाया गीत।

शनिवार को यह कार्यक्रम अच्छा लगा। अभिनेत्री गायिका कानन देवी की पुण्य स्मृति में समर्पित किया गया। कम चर्चित गीत भी सुनवाए जैसे विद्यापति फिल्म से - आन बसों बनवारी

जवाब फिल्म का यह लोकप्रिय गीत - ऐ चाँद छुप न जाना

और इसी फिल्म का बहुत लोकप्रिय गीत भी सुनवाया - तूफ़ान मेल दुनिया

शायद गीत कम हैं इसीलिए हॉस्पिटल फिल्म से भी दो गीत सुनवाए गए। वैसे कार्यक्रम का समापन रफी साहब के गाए गीत से हुआ।

रविवार को लोकप्रिय गीत सुनवाए गए देवदास, मैं नशे में हूँ फिल्म से और यह गीत -

कह दो कोई न करे यहाँ प्यार

एक गाँव की कहानी फिल्म से कम सुना मजेदार गीत सुनवाया -

काना, लंगडा, लूला, बुड्ढा डाक्टर आएगा
दवा देगा वो जालिम रोग लगाकर जाएगा

ललिता देवलकर की आवाज में भी गीत सुना नदिया के पार फिल्म से।

सोमवार को सारंगा, घूंघट, हम हिन्दुस्तानी फिल्मो के लोकप्रिय गीतों के साथ यह गीत भी शामिल था -

रूक जा ओ जाने वाली रूक जा

कम सुने जाने वाले गीतों में घर की लाज फिल्म का गीत और गीता दत्त का गाया कल हमारा हैं फिल्म से यह गीत भी सुनवाया -

आ आ मेरी ताल पे नाच ले बाबू

मंगलवार को गीता रॉय को समर्पित रहा यह कार्यक्रम उनकी पुण्य स्मृति में। उनके गाए लोकप्रिय गीत सुनवाए गए पंचायत, फैशन, डिटेक्टिव फिल्मो से और यह गीत -

तोरा मनवा क्यों घबराए रे
लाख दीन दुखियारे प्राणी जग में रोटी खाए
ऐ राम जी के द्वार पे

कम सुना जाने वाला गीत सुनना अच्छा लगा -

हौले हौले डोले धीरे धीरे बोले
दिल ये खाए हिचकोले

सहगल साहब का गीत भी सुनवाया गया।

बुधवार को संगीतकार सज्जाद हुसैन की पुण्य तिथि पर शुरूवात उन्ही की क़व्वाली से हुई -

हम न भूलेगे तुम्हे अल्ला क़सम

रूस्तम सोहराब फिल्म की यह एक ही क़व्वाली सुनवाई और बताया कि उनकी फिल्मे बहुत कम 7-8 ही हैं। इस दिन मुकेश की भी पुण्य तिथि थी, कार्यक्रम का समापन मुकेश के गाए चालीस दिन फिल्म के गीत से किया। साथ ही मुकेश को समर्पित अन्य प्रसारण की जानकारी दी। इस दिन गर्ल फ्रेंड, कल्पना, हम सब चोर हैं फिल्मो के गीत सुनवाए गए। इस तरह सभी लोकप्रिय गीत सुनने को मिले।

आज अक्सर सुने जाने वाले गीत सुनवाए गए - मैं नशे में हूँ, घर की लाज फिल्मो से और यह गीत -

सांवले सलोने आए दिन बहार के
कोई पुकारे नदी किनारे

कम सुनवाए जाने वाले गीत भी बजे, माँ-बाप फिल्म से और संतान फिल्म का यह शादी-ब्याह का गीत -

छोटी सी दुल्हनिया की शादी
प्यारी सी दुल्हनिया की शादी

इस कार्यक्रम में फिल्मो और फिल्मी गीतों के बारे में सामान्य जानकारी भी कभी-कभार दी गई जैसे रिलीज होने का वर्ष, बैनर आदि।

7:30 बजे संगीत सरिता में श्रृंखला आरम्भ हुई - विविध भारती के खजाने से। इसके अंतर्गत अस्सी के दशक में हर रविवार को प्रसारित होने वाले विशेष कार्यक्रम को उसी रूप में यानि पुरानी संकेत धुन के साथ प्रसारित किया जा रहा हैं।

शुक्रवार को गायक बंधु पंडित राजन मिश्रा और साजन मिश्रा से कुसुमलता सिंह की बातचीत सुनवाई गई। जानकारी मिली कि दोनों का सम्बन्ध बनारस घराने से हैं। हालांकि इस घराने में विभिन्न शैलियाँ हैं पर दोनों ख्याल ही गाते हैं। दोनों ने स्वाभाविक रूप से साथ ही गाना शुरू किया। उनकी गाई रचनाएं भी सुनवाई गई।

शनिवार को सेसवान घराने के गायक हाफीज अहमद खाँ से राम सिंह पवार की बातचीत सुनवाई गई। जानकारी मिली कि इस घराने में पहले धुपद धमाल गाया जाता था बाद में ख्याल भी गाया जाने लगा। इस घराने के गायकों की चर्चा चली जिनके बुजुर्गो का सम्बन्ध वाजिद अली शाह के दरबार से रहा। सितार के अलावा बीन के ख़ूबसूरत अंग हैं जो ख्याल गायकी में झलकते हैं। आजकल तैयार किये जा रहे नए रागों की चर्चा करते हुए बताया कि अगर सिद्धांतो का ध्यान रखते हुए नए राग बनाए जाए तो ठीक रहेगा। खाँ साहब से राग बिहाग में तराना भी सुनवाया गया।

दोनों कार्यक्रमों को विजय शंकर चटर्जी जी ने प्रस्तुत किया।

रविवार को गायक पंडित के जी गिन्ड़े से दिनकर कैकरी जी की बातचीत प्रसारित हुई। पता चला कि गिन्ड़े जी को संगीत का वातावरण बचपन से मिला। 5 साल की उम्र में कार्यक्रम दिया फिर 11 साल की उम्र से लम्बे अरसे तक शिक्षा ली। संगीत सरिता कार्यक्रम की भी प्रशंसा की कि इस कार्यक्रम से सामान्य श्रोता संगीत में रुचि ले रहे हैं। संगीत के व्यावसायीकरण पर कहा कि बेहतर होगा संगीत शिक्षक बने। राग चारुकेशी में उनका गायन भी सुनवाया गया।

सोमवार को युगल गायक सिंध बन्धु से राम सिंह पवार की बातचीत प्रसारित हुई। बताया कि दोनों ने आरंभिक शिक्षा अपने बड़े भाई से ली जिन्होंने पटियाला और किराणा घराने के उस्तादों से सीखा था। बाद में उस्ताद अमीर खाँ से शिक्षा ली। इस तरह तीनो घरानों की गायकी का असर नजर आता हैं वैसे इनका अपना गायन इंदौर घराने से प्रभावित हैं। पहले दोनों अलग-अलग गाते थे लेकिन बाद में एक-दूसरे की कमियों को देखते हुए युगल गायन शुरू किया। गायन में राग की शुद्धता और पूर्णता का ध्यान रखते हैं। राग नट भैरव में एक अंश सुनाया। अंत में राग मेघ में गायन सुनवाया गया।

मंगलवार को गायक पंडित मणि प्रसाद जी से राम सिंह पवार की बातचीत प्रसारित हुई। बताया कि गायन में वह परिवार की परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। 5 साल की उम्र से गा रहे हैं। 15 साल की उम्र में नागपुर में पहला कार्यक्रम प्रस्तुत किया। एक ही राग को विभिन्न घरानों की विभिन्न शैलियों में प्रस्तुत किये जाने पर चर्चा चली। जिस समय बातचीत रिकार्ड की गई उस समय वो आकाशवाणी दिल्ली केंद्र में कार्यरत थे। उनका गाया राग अहेरी तोडी में गायन भी सुनवाया गया।

बुधवार को सरोद वादिका जरीन दारूवाला शर्मा से कृष्ण शर्मा की बातचीत सुनवाई गई। बताया कि 4 साल कि उम्र में हारमोनियम सीखा, 6 साल की उम्र में गाना सीखा और 10 साल की उम्र से सरोद सीखा। बताया कि उस्ताद अली अकबर खाँ से प्रेरणा मिली। सितार से ज्यादा यह वाद्य पसंद होने से यही सीखा। वाद्य के बारे में भी हल्की सी जानकारी दी। बजा कर सुनाया। अंत में राग भटियार में सरोद वादन सुनवाया गया।

आज तार शहनाई वादक विनायक वोहरा से राम सिंह पवार की बातचीत सुनवाई गई। बताया कि पारिवारिक माहौल से बचपन से संगीत सीखा। पिताजी दिलरूबा बजाया करते थे। दिलरूबा में परिवर्तन करने से यह वाद्य तार शहनाई बना जिस पर विस्तृत जानकारी दी। अंत में राग कालिंगडा सुनवाया गया।

दो को छोड़कर सभी कार्यक्रमों को छाया गांगुली जी ने प्रस्तुत किया।

7:45 को त्रिवेणी कार्यक्रम का प्रसारण हुआ। यह कार्यक्रम प्रायोजित होने से शुरू और अंत में प्रायोजक के विज्ञापन प्रसारित हुए। इस कार्यक्रम की संकेत धुन अच्छी हैं जो शुरू और अंत में सुनवाई जाती हैं।

शुक्रवार को बताया कि आत्मविश्वास और अथक परिश्रम से सफलता अवश्य मिलती हैं। असंभव भी असंभव हो जाता हैं। प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटना भी बताई कि युद्ध से थके हारे राजा ने जब देखा कि एक मकडी बार-बार प्रयास करने के बाद ऊपर चढने में सफल हुई तब राजा ने भी उससे प्रेरणा ली और युद्ध में विजय पाई। गीत भी अच्छे सुनवाए - राही तू रूक मत जाना

कभी तो मिलेगी बहारो की मंजिल

यह पुराना ही अंक हैं फिर से प्रसारित किया गया।

शनिवार को भी पुराना ही अंक फिर से प्रसारित किया गया। सर्दी का मौसम समाप्त होने और गर्मी के शुरू होने पर पेड़ों की छाया की चर्चा चली और शाम के समय गाँव में चौपाल में बैठने और आपसी सुख-दुःख की चर्चा चली, समापन किया इस गीत से -

ऐसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरूवर की छाया

हालांकि गीतों के चुनाव में थोड़ी असावधानी हुई जैसे गाइड फिल्म का यह गीत सुनना -

वहां कौन हैं तेरा मुसाफिर जाएगा कहाँ

गर्मी के मौसम में ठीक हैं पर आजकल यह सुनना ठीक नहीं लगता। वैसे भी इस कार्यक्रम के लिए विषयो की कमी नहीं हैं। गीत भी विषय के अनुसार मिल ही जाते हैं। अगर इसका रूख थोड़ा बदल देते तो आज के माहौल में भी अच्छी प्रस्तुति हो जाती।

रविवार का अंक भी पुराना ही लगा। जीवन की व्यस्तता में मशीन बने हम कभी-कभी छुट्टिया बिताने प्रकृति के करीब जाते हैं और जीवन की ऊब मिटाते हैं। गाने नए-पुराने दोनों शामिल थे -

दिल ढूँढता हैं फिर वही फुरसत के रात दिन

कोलंबस छुट्टी हैं आई

सोमवार का भी अंक पुराना ही लगा। जीवन के रास्तो की चर्चा हुई। गाने शामिल रहे - मैं तो चला जिधर चले रास्ता

एक रास्ता हैं जिन्दगी

मंगलवार को वक़्त के साथ चलने पर चर्चा हुई। फिल्म एक बार मुस्कुरा दो का यह गीत बहुत दिन बाद सुनना अच्छा लगा -

सवेरे का सूरज तुम्हारे लिए हैं

वक़्त फिल्म का गीत और यह गीत भी शामिल था -

जिन्दगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मुकाम
वो फिर नही आते

बुधवार को लगा पुराने अंक को कुछ बदलाव के साथ प्रस्तुत किया। चर्चा चली कि जीवन में हर समय सफलता नहीं मिलती। कठिन राह पर भी चलना हैं। गीत थोड़े पुराने पर अच्छे सुनवाए - सफ़र, इम्तिहान और तपस्या फिल्म का गीत -

जो राह चुनी तूने उसी राह पे राही चलते जाना रे

आज विषय तो पुराना था पर प्रस्तुति नई रही। जिन्दगी को समझने की कोशिश की गई। नए पुराने गीत सुनवाए गए -

जिन्दगी कैसी हैं पहेली

कैसी पहेली हैं ये जिंदगानी

सवेरे के त्रिवेणी कार्यक्रम के बाद क्षेत्रीय प्रसारण तेलुगु भाषा में शुरू हो जाता है फिर हम दोपहर 12 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुडते है।

Tuesday, July 20, 2010

सावन के झूले पड़े तुम चले आओ

आज याद आ रहा हैं 1979 के आसपास रिलीज फिल्म जुर्माना का गीत।

इस फिल्म में शायद दो ही गीत हैं और दोनों ही लता जी के गाए हुए हैं। यह गीत बहुत ख़ास हैं, इसमे संगीत कम हैं और लता जी की आवाज बहुत उभर कर आई हैं।

फिल्म में राखी यह गीत रेडियो स्टेशन में लाइव गाती हैं और उसी को ढूंढ रहे अमिताभ कार में गाना सुनकर सीधे रेडियो स्टेशन पहुँचते हैं। इसमे विनोद मेहरा की भी महत्वपूर्ण भूमिका हैं।

पहले रेडियो से इस फिल्म के गीत बहुत सुनवाए जाते थे खासकर यह गीत, पर बहुत लम्बे समय से सुना नही। गीत के कुछ बोल याद आ रहे हैं -

सावन के झूले पड़े तुम चले आओ
आँचल न छोड़े मेरा पागल हुई हैं पवन
अब क्या करूँ मैं जतन
धड़के जिया जैसे पंछी उड़े
सावन के झूले पड़े तुम चले आओ

जब हम मिले थे पिया
तुम कितने अनजान थे
तुम कितने नादाँ थे
बाली उमरिया में नैना लड़े
सावन के झूले पड़े तुम चले आओ

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Saturday, July 17, 2010

मनोहारी दादा को पीयूष (मेहता) जी और युनूस (खान) जी की विनम्र श्रद्धांजलि देती पोस्टे

यह पोस्ट मैं युनूस जी से हाथ जोड़ कर क्षमा याचना सहित लिख रही हूँ।

मनोहारी दादा के निधन का शोक समाचार सबसे पहले पीयूष (मेहता) जी ने रेडियोनामा पर दिया 13 जुलाई को। उसके अगले दिन 14 जुलाई को युनूस जी ने अपने ब्लॉग रेडियोवाणी पर यह समाचार देते हुए पोस्ट लिखी। अपनी पोस्ट में युनूस जी ने लिखा कि मनोहारी दा से उनकी मुलाक़ात विविध भारती के दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हुई - संगीत सरिता और आज के मेहमान जिनमे से एक में युनूस जी ने खुद उनसे बातचीत की। बावजूद इसके युनूस जी ने इस पोस्ट को रेडियोनामा पर देना उचित नही समझा। हालांकि रेडियोनामा पर ऎसी कोई पाबंदी नहीं हैं कि एक ही विषय पर दो व्यक्ति दो पोस्ट नहीं लिख सकते। वैसे भी कुछ ही दिन पहले मैंने युनूस जी की एक पोस्ट पर टिप्पणी लिख कर उनकी रेडियोनामा से दूरी की चर्चा की थी।

अपनी पोस्ट पर युनूस जी ने उन गानों की फेहरिस्त भी दी जिसमे मनोहारी दादा का सेक्सोफोन गूंजता हैं। इन गीतों को लोकप्रिय बनाने में विविध भारती का कितना योगदान हैं यह युनूस जी बेहतर जानते हैं। कितना भावुक होकर उन्होंने यह पोस्ट लिखी इसका अंदाजा इसी से होता हैं कि आज के मेहमान को उन्होंने हमारे मेहमान लिखा और अमीर गरीब फिल्म के गीत की पंक्ति लिखी - मैं आया हूँ लेकर जाम हाथो में जबकि यह गीत जोशीला फिल्म का हैं और पंक्ति हैं - मैं आया हूँ लेकर साज हाथो में। यह साज हैं गिटार और इस साज के साथ जोशीला फिल्म के इस गीत की विस्तृत चर्चा रेडियोवाणी पर खुद ही की थी... खैर...

श्रद्धांजलि की पोस्ट पर पीयूष (मेहता) जी ने अपनी टिप्पणी में लिखा कि इस महान कलाकार को यहाँ सही सम्मान और श्रद्धांजलि हैं। टिप्पणियों की लम्बी कतार देखी और उसमे विविध भारती का जिक्र भी देखा, समझ में नहीं आया यह कलाकार के प्रति सम्मान हैं या युनूस जी की पोस्ट पर टिप्पणियाँ देने की आदत ? इस स्थिति में रेडियोनामा पर बहुत ही कम दी जाने वाली टिप्पणियों पर बहुत पहले लिखी गई डा अजीत कुमार जी की पोस्ट याद आ गई।

जिन गानों से इस कलाकार की पहचान हैं उन गीतों का गढ़ हैं विविध भारती और उसके अपने ब्लौग पर पहले दी गई श्रद्धांजलि पर टिप्पणी लिखना जरूरी नही समझा जाता जबकि व्यक्तिगत ब्लौग पर टिप्पणियों की लाइन लगती हैं, समझ में नही आता लोग पोस्ट पढ़ते हैं या ब्लौग ?

खुद रेडियोनामा के सदस्य ही इसे गंभीरता से नही लेते। हर सप्ताह मैं साप्ताहिकी लिखती हूँ जिसमे उन्ही कार्यक्रमों की चर्चा होती हैं जो हैदराबाद में प्रसारित होते हैं, ऐसे कार्यक्रम भी हैं जो हैदराबाद में प्रसारित नही होते पर दूसरे शहरों में होते हैं जिन पर कुछ लिखा जा सकता हैं जिससे विविध भारती के समूचे प्रसारण की जानकारी सबको मिल सकती हैं, सभी कार्यक्रमों पर चर्चा हो सकती हैं पर कोई ध्यान देना ही नही चाहता। मेरा लेखन मेरा अपना नजरिया हैं, अगर दूसरे लिखेगे तो एक ही कार्यक्रम पर अलग-अलग नजरिए से चर्चा हो सकेगी। एकाध बार सागर नाहर जी ने संगीत सरिता पर समीक्षा लिखी थी पर सिलसिला आगे नहीं बढ़ा। जब भी रेडियोनामा खोलो दो ही नाम नजर आते हैं, मेरा और पीयूष जी का।

आशा हैं युनूस जी सहित सभी सदस्य इस मुद्दे पर ध्यान देगे जिससे किसी कलाकार को लोकप्रिय बनाने वाली विविध भारती के धरातल पर ही सार्थक चर्चा हो सके।

Friday, July 16, 2010

रात के सुकून भरे कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 15-7-10

रात में हवामहल कार्यक्रम के बाद 8:15 बजे से क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है फिर हम 9 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।

9 बजे प्रसारित हुआ हिट-सुपरहिट कार्यक्रम। शनिवार और रविवार को विशेष आयोजन रहा और शेष हर दिन किसी एक कलाकार को केन्द्रित कर गीत सुनवाए गए। वैसे सप्ताह भर यह कार्यक्रम अच्छा रहा पर इस समय इस कार्यक्रम का दुबारा प्रसारण होता हैं। मूल रूप से यह कार्यक्रम दोपहर 1:00 बजे प्रसारित होता हैं। दो बार प्रसारण के बजाय एक बार कोई और कार्यक्रम प्रसारित किया जा सकता हैं।

शुक्रवार को अभिनेत्री टीना मुनीम पर फिल्माए गए लोकप्रिय गीत सुनवाए गए, उन पर हल्की सी जानकारी देते हुए। शुरूवात कर्ज फिल्म के गीत से हुई। मनपसंद फिल्म का यह गीत भी सुनवाया गया जिसमे उनकी आवाज में संवाद हैं -
लोगो का दिल अगर जीतना तुमको हैं तो बस मीठा-मीठा बोलो

बताया उन्हें देव आनंद ले आए अपनी फिल्म देस परदेस से अस्सी के दशक में। ऋषि कपूर के साथ उनकी जोडी हिट रही। सौतन, बातो बातो में, ये वादा रहा, रॉकी फिल्मो के गीत सुनवाए गए और बताया कि अलग-अलग तरह की फिल्मो में उन्होंने काम किया था। अब वो फिल्मो से दूर हैं।

शनिवार को प्रस्तुति कुछ ख़ास रही यानी सैटरडे स्पेशल शीर्षक से प्रस्तुति की गई और वाकई अशोक जी ने विशेष गीत सुनवाए - डिस्को गीत। ये अस्सी के दशक के वो गीत हैं जिनसे डिस्को की शुरूवात मानी जाती हैं। हथकड़ी फिल्म का शीर्षक गीत, कर्ज फिल्म से ओम शान्ति ओम और उस दौर की संगीत सनसनी उषा ऊथप के यह दो गीत बहुत लम्बे समय बाद सुन कर अच्छा लगा -

अरमान फिल्म से रम्बा ओ साम्बा ओ और प्यारा दुश्मन फिल्म से -हरी ओम हरी

रविवार को भी विशेष रहा आयोजन जिसका शीर्षक दिया - फेवरेट फाइव। इसमे आमंत्रित थे पार्श्व गायक कुमार शानू। बातचीत की रेणु (बंसल) जी ने। विकल्प दिया कि फेवरेट फाइव गीत सुनावाएगे या संगीतकारों से अनुभव बताएगे, उन्होंने फेवरेट फाइव गीत सुनवाने की इच्छा जताई। पहला गीत चुना जुर्म फिल्म से - जब कोई बात बढ़ जाए जिससे एक श्रोता के जुड़े अनुभव बताए।

साजन फिल्म का गीत सुनवाया - मेरा दिल भी कितना पागल हैं

सुभाष घई के साथ काम के पहले अनुभव को बताते हुए यह गीत सुनवाया जिसमे संगीत लगभग नहीं हैं -

दो दिल मिल रहे हैं मगर चुपके चुपके

आर डी बर्मन को याद करते हुए सुनवाया - कुछ न कहो कुछ भी न कहो

अंत में अपना सबसे पसंदीदा गीत सुनवाया जिसके बोल अच्छे हैं, सन्देश भी हैं -

जिन्दगी की तलाश में हम मौत के कितने पास आ गए
जब ये सोचा तो घबरा गए आ गए हम कहाँ आ गए

शुरू और अंत में उनके गाए गीतों की झलकियों से परिचय दिया और समापन किया कमल (शर्मा) जी ने। इस कार्यक्रम को स्वाति (भंडारकर) जी के तकनीकी सहयोग से प्रस्तुत किया कल्पना (शेट्टी) जी ने। बढ़िया प्रस्तुति। पूरी टीम को बधाई।

सोमवार को संगीतकार शांतनु मोइत्रा के स्वरबद्ध किए गीत सुनवाए गए। लगे रहो मुन्ना भाई, यहाँ, खोया खोया चाँद, फिल्मो के गीत सुनवाए। 3 इडियट्स फिल्म से जुबी जुबी और परिणीता का पीउं बोले गीत भी शामिल था। उनके बारे में हल्की-फुल्की जानकारी दी कि उनके कई शौको में से एक हैं किताबे पढ़ना, स्वानंद किरकिरे के साथ उन्होंने बहुत काम किया।

मंगलवार को पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति के गाए गीत सुनवाए गए। अग्नि साक्षी, दिल चाहता हैं, देवदास फिल्मो के गीत सुनवाए गए। मिस्टर इंडिया का हवाहवाई भी शामिल था। फिल्म हम दिल दे चुके सनम का शीर्षक गीत और यह गीत भी सुनवाया गया - प्यार हुआ चुपके से

बुधवार को सेक्सोफोन वादक मनोहारी सिंह के निधन पर उन्हें श्रृद्धांजलि दी गई। उनके गीत सुनवाए गए -

रे जा रे उड़ जा रे पंछी

उनकी बजाई धुनें सुनवाई गई - चलते चलते फिल्म का शीर्षक गीत

उनकी बजाई धुन और गीत की झलक सुनवाई - ओ मेरे दिल के चैन

नैय्यर साहब का - ये दुनिया उसी की

उनसे युनूस (खान) जी की बातचीत के अंश सुनवाए गए जिससे पता चला कि पढाई अधिक नही की। कलकत्ता आए, हेच एम वी से जुड़े। 1958 में सलिल चौधरी मुम्बई ले आए। पहली बार शंकर जयकिशन जोडी के जयकिशन से मिले और गीत था प्रोफ़ेसर फिल्म का -

आवाज देके हमें तुम बुलाओ मोहब्बत में इतना न हमको सताओ

एस डी बर्मन के साथ काम के अनुभव बताए। धुनें भी सुनवाई - गा मेरे मन गा

ख्यात संगीतकारों के आर्केस्ट्रा की जानकारी दी। सेना के उस मशहूर शो के अनुभव बताए जिसमे नेहरू जी थे और ऐ मेरे वतन के लोगो गीत में बाँसुरी बजाई।

गुरूवार को मनमोहन देसाई द्वारा निर्देशित फिल्मो के गीत सुनवाए। सभी गीत बढ़िया जोडी - गीतकार आनंद बक्षी और संगीतकार लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल द्वारा तैयार किए गए सुनवाए गए इन फिल्मो से - अमर अकबर एंथोनी, नसीब, शान और कुली
इस तरह सभी अस्सी की दशक की फिल्मो के और अमिताभ बच्चन की फिल्मो के गीत सुनने को मिले। यानि इस दिन एक टीम के लोकप्रिय गीत सुनवाए गए - मनमोहन देसाई, आनंद बक्षी, लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल और अमिताभ बच्चन, अच्छा लगा यह प्रयोग। ऎसी और भी टीमे हैं, आशा हैं यह क्रम जारी रहेगा।

9:30 बजे आज के फनकार कार्यक्रम प्रसारित किया गया। शुक्रवार को निर्माता निर्देशक और अभिनेता गुरूदत्त के जन्मदिन पर उन पर प्रस्तुत किया गया यह कार्यक्रम। अच्छी जानकारी दी संक्षिप्त में, बताया कि उनका जन्म बैंगलूर में हुआ, कलकत्ता में शिक्षा हुई। पहली नौकरी टेलीफोन ऑपरेटर की की। फिर जुड़े प्रभात टौकीस से, नृत्य निर्देशक की तरह काम किया। पहली फिल्म निर्देशित की बाजी उसके बाद जाल। गुरूदत्त के बारे में जानकारी देती दो रिकार्डिंग सुनवाई गई, प्रसारक और संगीतकार बृजभूषण ने कहा कि गुरूदत्त ब्लैक एंड व्हाईट फिल्मो से जुड़े थे, प्रकाश के प्रभाव का बहुत अच्छा प्रयोग उन्होंने किया था। वहीदा रहमान ने बताया उनके सम्बन्ध छोटे बड़े सभी कलाकारों से बहुत अच्छे थे। उनकी फिल्मो के गीत सुनवाए -साहब बीबी और गुलाम, कागज़ के फूल फिल्मो के गीत भी शामिल थे।

बढ़िया शोध और आलेख। इसे अशोक (सोनावणे) जी ने प्रस्तुत किया।

शनिवार को युनूस (खान) जी ने प्रस्तुत किया संगीतकार तिकड़ी शंकर अहसान लॉय को। शनिवार की रात के लिए यह प्रस्तुति अच्छी रही। मिशन काश्मीर फिल्म की चर्चा हुई। उन्हें मिले राष्ट्रीय पुरस्कार की चर्चा चली। धर्मा प्रोडक्शन से जुड़ने की बाते बताई। कभी अलविदा न कहना, बंटी और बबली से कजरारे के साथ उनके अन्य गीत सुनवाए जिसमे यह भी शामिल था -

चाहे जितना जोर लगा लो हम हैं हिन्दुस्तानी

इस कार्यक्रम को विजय दीपक छिब्बर जी ने प्रस्तुत किया पी के ऐ नायर जी के सहयोग से।

रविवार को अभिनेता कुमार गौरव के जन्मदिन पर उन पर कार्यक्रम प्रस्तुत किया ममता (सिंह) जी ने। उनकी पहली फिल्म लव स्टोरी की बहुत सी बाते बताई। अन्य फिल्मो की भी चर्चा हुई जैसे नाम और बाद की फिल्मो के नाम बताए। उनकी रिकार्डिंग भी सुनवाई। पापा राजेन्द्र कुमार को याद किया जिन्हें जुबली कुमार का खिताब मिला था, साथ में यह भी बताया कि कुमार गौरव ने सफलता की एक छोटी सी अवधि ही देखी। बताया कि 11 साल की उम्र में पहली शूटिंग देखी, पापा की आरजू फिल्म की शूटिंग देखी। एक बात खटकी। जब रिकार्डिंग एक ही आवाज की हो तो एक बार सुनना अच्छा लगता हैं दूसरी बार सहन कर सकते उसके बाद बुरा लगता हैं। कम से कम दो व्यक्तियों की रिकार्डिंग ठीक लगती हैं। पूरा कार्यक्रम सुन कर ऐसा लगा कि उनकी की गई रिकार्डिंग से कुछ अंश सुनवाते हुए उनकी कही गई बाते बताते हुए उनके गीतों के साथ यह कार्यक्रम तैयार कर दिया गया। इस कार्यक्रम की सृजनशीलता नजर नहीं आई।

सोमवार को यह कार्यक्रम समर्पित किया गया फिल्मकार बिमल राय को, इस दिन उनका जन्मदिन था। प्रस्तुत किया कमल (शर्मा) जी ने। उनके जीवन से जुड़ी कई बाते बताई। करिअर की शुरूवात कलकत्ता से हुई, न्यू थियेटर से जुड़े, सिनेमैटोग्राफर बने। बड़ी दीदी फिल्म में उनका काम देखने को मिला। निर्देशन किया। बचपन में दुर्गा पूजा में नाटक किया था उसी पर फिल्म बनाई - यहूदी। बाम्बे टाकीज से जुड़ने पर परिणीता के साथ कुछ और फिल्मे निर्देशित की। फिर बना बिमल राय प्रोडक्शन और बनी पहली फिल्म - दो बीघा जमीन जिससे अंतर्राष्ट्रीय पटल पर स्थान मिला। फिर सफल फिल्मो का कारवाँ चला - देवदास, सुजाता, बंदिनी, मधुमती, परख, काबुलिवाला। चर्चा में आई सभी फिल्मो के गीतों की झलक सुनवाई। अच्छी जानकारी मिली। बढ़िया शोध परक आलेख और प्रस्तुति। धन्यवाद कमल जी !

मंगलवार को राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने प्रस्तुत किया निर्माता, निर्देशक और गीतकार प्रकाश मेहरा को। इस दिन उनका जन्मदिन था। इस दिन भी कार्यक्रम का वही हाल रहा। केवल प्रकाश मेहरा जी की रिकार्डिंग से अंश सुनवाए गए और उनके बारे में चर्चा करते हुए गीत सुनवाए उनकी फिल्मो से। जानकारी मिली कि उनके द्वारा निर्देशित पहली फिल्म हैं - हसीना मान जाएगी - वर्ष 1968 में। उसके बाद मेला फिर अमिताभ बच्चन के साथ सफ़र - जंजीर, मुकद्दर का सिकंदर, हेरा फेरी। नब्बे के दशक की फिल्म दरार की भी चर्चा हुई। उनके संघर्ष की गाथा उन्ही से सुनी। उनके लिखे गीतों की चर्चा हुई और सुनवाया यह गीत -

और इस दिल में क्या रखा हैं
तेरा ही दर्द छिपा रखा हैं

पी के ऐ नायर जी का प्रस्तुति सहयोग रहा।

बुधवार को संगीतकार मदन मोहन को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया गया। कार्यक्रम प्रस्तुत किया अशोक (सोनावणे) जी ने। उन्ही की गाई दस्तक फिल्म की रचना से शुरूवात की -

माई री मैं कासे कहूं पीर अपने जिया की

उनके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि फिल्मी माहौल उन्हें विरासत में मिला हैं। शास्त्रीय संगीत का माहौल मिलने से अपने गीतों को उन्होंने विभिन्न रागों में गहराई तक उतारा। सी रामचंद्र के साथ उनके संबंधो को बताया और यह भी जानकारी दी कि लता जी ने पहले उनके साथ काम करने के लिए मना किया था। उन्हें गजलो का बादशाह माना गया। रिकार्डिंग के समय वह बारीक नजर रखते थे, फिल्म मेरा साया के गीतों की रिकार्डिंग का किस्सा सुनाया। इस फिल्म का यह गीत सुनवाया - झुमका गिरा रे

उनकी फिल्मो के गीतों की झलक सुनवाई। यह ख़ास बात भी बताई कि उन्हें एक ही राष्ट्रीय पुरस्कार मिला दस्तक फिल्म के लिए।

कार्यक्रम सुनने के बाद मुझे एक बात अजीब लगी। एक भी रिकार्डिंग के अंश नही सुनवाए गए। मुझे याद आ रहा हैं कुछ ही समय पहले कमल (शर्मा) जी ने शायद उजाले उनकी यादो के कार्यक्रम के लिए किसी कलाकार (नाम मैं भूल रही हूँ) से बात करते समय मदन मोहन की चर्चा की थी।

गुरूवार को प्रस्तुत किया गया युवा अभिनेत्री बिपाशा बसु पर यह कार्यक्रम। शुक्र हैं उस दिन उनका जन्म दिन नही था। चूंकि अभिनेत्री नई हैं इसीलिए वर्ष के अनुसार उनकी फिल्मो की चर्चा की। कार्यक्रम की शुरूवात हुई बिल्लो रानी गीत से। बताया कि पढाई के साथ मॉडलिंग की फिर सिनेमा में आईं। उनके द्वारा अभिनीत विभिन्न भूमिकाओं की चर्चा की - कारपोरेट में गंभीर, जिस्म में नकारात्मक, ऑल द बेस्ट में कॉमेडी। उनकी चर्चित फिल्मो की चर्चा हुई - धूम, रेस, नो एंट्री। उन्हें मिले पुरस्कारों की चर्चा हुई। नई होने से, जानकारी कम होने से, गीतों की संख्या भी अधिक रही और अधिक भाग सुनवाया गया - बीडी जलईले
आपके प्यार में हम सँवरने लगे

शोध, आलेख और स्वर युनूस (खान) जी का, विजय दीपक छिब्बर जी ने प्रस्तुत किया पी के ऐ नायर जी के सहयोग से।

इस सप्ताह, इस कार्यक्रम में जन्मदिन के केक खूब कटे। इतना बड़ा फिल्म संसार, ढेर सारे कलाकार, हर दिन किसी न किसी का जन्मदिन होता ही हैं। अगर इस कार्यक्रम की दिशा यही बनी रही तो बहुत जल्द यह कार्यक्रम बर्थडे स्पेशल बन जाएगा। इस कार्यक्रम का यह स्वरूप क्या ठीक रहेगा ? मुझे तो नहीं जंचता। वैसे भी हर दिन यह कार्यक्रम सुनना अच्छा नही लग रहा है, विविधता होनी चाहिए।

10 बजे का समय छाया गीत का होता है। कार्यक्रम शुरू करने से पहले कभी-कभार अगले दिन प्रसारित होने वाले कुछ मुख्य कार्यक्रमों के बारे में बताया गया।

शुक्रवार को प्रस्तुत किया कमल (शर्मा) जी ने। रात के साथ ही आती यादे, फिर इन्तेजार की चर्चा की। शुरूवात की इस गीत से -

छुप गया कोई रे दूर से पुकार के

ऐसे गीत भी सुनवाए जो कम ही सुने जाते हैं -

दो अकेले चल रहे हैं रात अकेली चाँद अकेला

शनिवार को प्रस्तुत किया अशोक जी ने। मोहब्बत के कसीदे काढ़े। कुछ कम सुने गीत शामिल थे। अनपढ़, निकाह के साथ यह गीत भी सुनवाया -

अगर मुझसे मोहब्बत हैं
मुझे सब अपने गम दे दो

रविवार को प्रस्तुत किया युनूस (खान) जी ने, कार्यक्रम सुस्त रहा। एक ख़्वाब बुनते रहे और कुल चार गीत सुनवाए। एक लोकप्रिय गजल आहिस्ता आहिस्ता फिल्म से -

कभी किसी को मुकम्मिल जहां नही मिलता

दिल आखिर दिल हैं फिल्म का शीर्षक गीत भी शामिल था।

सोमवार को अमरकान्त जी का प्रस्तुत किया छाया गीत सुना जो पुरानी रिकार्डिंग थी जिसमे चर्चा हुई जाने क्यों लोग मोहब्बत किया करते हैं और इन्ही बोलो के गीत से शुरूवात हुई। त्रिशूल फिल्म का गीत और ये रास्ते हैं प्यार के फिल्म का शीर्षक गीत भी सुनवाया गया।

मंगलवार को प्रस्तुत किया निम्मी (मिश्रा) जी ने। बाते हुई बेवफाई की, यादों की फिर दास्ताँ छिड़ी आसूँओ की, अंदाज वही रहा चिरपरिचित - सुस्त। गीत शामिल रहे - हजारो रंग बदलेगा ज़माना

हमपे इल्जाम बेवफाई हैं और ऐसे ही गीत।

इस कार्यक्रम का यह सप्ताह का चौथा सुस्त दिन रहा, मेरी समझ में गीतों के चुनाव में प्रसारण समय का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

बुधवार को प्रस्तुत किया राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने। अच्छे गीत सुनवाए - ये मौसम आया हैं कितने सालों में

आपकी आँखों में कुछ महके हुए से ख़्वाब हैं
आपसे भी ख़ूबसूरत आपके अंदाज हैं

इन्तेकाम फिल्म से - हम तुम्हारे लिए तुम हमारे लिए

प्रस्तुति का काव्यात्मक अंदाज अच्छा रहा।

गुरूवार को रेणु (बंसल) जी ने शायराना प्रस्तुति दी। कुछ गीत अच्छे सुनवाए, कुछ कम सुने गीत सुनवाए -

कहता हैं दिल तुम हो मेरे लिए

लेकिन हमें तो एक ही गीत सुनकर पूरे कार्यक्रम का आनंद आ गया, अनमोल घड़ी फिल्म से - आवाज दे कहाँ हैं

10:30 बजे प्रसारित हुआ आपकी फ़रमाइश कार्यक्रम जो प्रायोजित था इसीलिए प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए। इसमें श्रोताओं ने पुराने लोकप्रिय गीत सुनने की फ़रमाइश अधिक की। शुक्रवार को शुरूवात में मन्नाडे का गाया दिल ही तो हैं फिल्म का यह गीत सुनवाया गया -

लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे

काली टोपी लाल रूमाल, प्यासा, बाजी फिल्मो के गीतों के साथ यह गीत भी सुना जो मौसम के अनुसार था -
छाई बरखा बहार पड़े अंगना फुहार

शनिवार को शुरूवात हुई कटी पतंग फिल्म के शाम मस्तानी गीत से। आई मिलन की बेला, दुलारी फिल्मो के गीतों के साथ यह पुराने गीत भी फरमाइश पर सुनवाए गए -

बस्ती बस्ती पर्वत पर्वत गाता जाए बंजारा

मेरे यार शब्बा खैर

रविवार को दिल्ली का दादा, आया तूफ़ान, पतंगा, ऊँचे लोग फिल्मो के गीत सुनवाए गए और यह गीत -

छुप छुप खड़े हो जरूर कोई बात हैं

सोमवार को अभिनेता राजेन्द्र कुमार की पुण्य तिथि पर फरमाइश में से उन्ही की फिल्मो के गीतों को छांट कर सुनवाया गया। लोकप्रिय फिल्मो के लोकप्रिय गीतों की फरमाइशे आई। गीत फिल्म के गीत से शुरूवात हुई और आरजू फिल्म के गीत से समापन। मिस मैरी, सन ऑफ इंडिया के गीतों के साथ सूरज फिल्म का सदाबहार गीत भी शामिल था -

बहारो फूल बरसाओ मेरा महबूब आया हैं

मंगलवार को श्री 420 फिल्म का रामय्या वस्तावय्या (तेलुगु भाषा हैं, रामय्या नाम हैं, अर्थ हैं - रामय्या आते हो क्या ) गीत के साथ मधुमती और थोड़ा आगे के समय की फिल्म घरौंदा के गीत के साथ यह गीत भी सुनवाया गया -

तुम्हे और क्या दूं मैं दिल के सवाय
तुमको हमारी उम्र लग जाए

बुधवार को एकदम पुराने और थोड़ा आगे के समय के गीत सुनवाए गए इन फिल्मो से - प्रेम गीत, नौशेरवाने आदिल, लव इन टोकियो, इज्जत और रजिया सुलतान फिल्म से - खुदा खैर करे गीत भी शामिल था।

गुरूवार को श्रोताओं के ईमेल के अनुसार बहुत पुरानी, पुरानी और बाद के समय के फिल्मी गीत सुनवाए गए - अंखियों के झरोखे से फिल्म के शीर्षक गीत के साथ शुरूवात की, पारसमणी, सीता और गीता फिल्मो के गीतों के साथ सुनवाया यह गीत भी -

ये तेरी सादगी ये तेरा बांकपन

बुधवार और गुरूवार को ईमेल से प्राप्त फ़रमाइशें पूरी की जाती है अन्य दिन पत्र देखे जाते है। देश के अलग-अलग भागों से बहुत से पत्रों से गानों की फ़रमाइश भेजी गई और हर पत्र में भी बहुत से नाम रहे जबकि ई-मेल की संख्या कम ही रही।
प्रसारण के दौरान अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए और संदेश भी प्रसारित किए गए जिसमें विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताया गया। इकाध बार क्षेत्रीय विज्ञापन भी प्रसारित हुए।

11 बजे अगले दिन के मुख्य कार्यक्रमों की जानकारी दी जो केन्द्रीय सेवा से ही दी गई जिससे केन्द्रीय सेवा के उन कार्यक्रमों की भी सूचना मिली जो क्षेत्रीय कार्यक्रमों के कारण यहाँ प्रसारित नही होते। 11:05 पर दिल्ली से प्रसारित 5 मिनट के समाचार बुलेटिन के बाद प्रसारण समाप्त होता रहा।

Tuesday, July 13, 2010

स्व. मनोहरी सिंह के आज हुए देहान्त पर श्रद्धांजलि

आदरणीय पाठकगण,

पिछले दि. 8 मार्च, 2010 के दिन जानेमाने अल्टो सेक्सोफोन और वेस्टर्न फ्ल्यूट वादक और एक जमाने में मेन्डोलीन और क्लेरिनेट वादक भी रह चूके (याद किजीये श्री युनूसजी द्वारा विविध भारती की केन्द्रीय सेवा के राष्ट्रीय प्रसारण में प्रस्तुत साक्षात्कार-आज के मेहमान अन्तर्गत ) श्री मनोहरी सिंहजी की जन्म तारीख पर उनको बधाई देती हुई पोस्ट प्रकाशीत की थी । उस समय मैंनें श्यामराज जी से उनका मोबाईल नं पा कर उनको बधाई भी दी थी । उस समय भी उनके नादूरस्त स्वास्थ्य का पता तो था पर इनको श्रद्धांजलि प्रस्तूत करने का अवसर इतनी ज़ल्दी आयेगा वह माननेको जी नहीं चाहता । तो इस अवसर पर रेडियोनामा की और से उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 'नाज' फिल्म के गीत आंखो में दिल है....तूम कहाँ हो तूम कहाँ (संगीत -स्व. अनिल विश्वास)'ए बजाई हुई धुन को फ़िर एक बार इस मंच पर प्रस्तूत किया है । यह धून कुछ साल पहेले नेट से प्राप्त हुई थी, जो लिन्क आज मूझे याद नहीं है और यह 78 RPM मोनो रेकोर्ड था, जिसका जिक्र भी युनूसजी के साथ उसी रेडियो मुलाकातमें मनोहरीदा ने किया ही था ।




पियुष महेता ।
(सुरत)
13 जूलाई-2010

शोभा गुर्टू की गाई फिल्मी ठुमरी - सैंया रूठ गए

1978 के आसपास एक फिल्म रिलीज हुई थी - मैं तुलसी तेरे आँगन की

आशा पारिख, नूतन और विनोद खन्ना अभिनीत यह फिल्म बहुत लोकप्रिय हुई थी और इसके सभी गीत रेडियो के सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाए जाते थे।

इस फिल्म के लिए जानी मानी उप शास्त्रीय गायिका शोभा गुर्टू जी ने एक ठुमरी गाई थी जिसे रेडियो से नही सुने बहुत समय हो गया। यहाँ तक कि संगीत सरिता जैसे कार्यक्रम में भी इसे नहीं सुनवाया गया हालांकि कई बार ठुमरी गायन पर चर्चा हुई।
इसके कुछ बोल मुझे याद आ रहे हैं -

सैंया रूठ गए मैं मनाती रही
श्याम जाने लगे मैं बुलाती रही
सैंया रूठ गए

मेरे सूने मधुबन में --- की कलियाँ
याद बन बन के ----- रही
सैंया रूठ गए

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Friday, July 9, 2010

शाम बाद के पारम्परिक कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 8-7-10

शाम 5:30 बजे गाने सुहाने कार्यक्रम की समाप्ति के बाद क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है, फिर हम शाम बाद के प्रसारण के लिए 7 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।

7 बजे दिल्ली से प्रसारित समाचारों के 5 मिनट के बुलेटिन के बाद शुरू हुआ फ़ौजी भाईयों की फ़रमाइश पर सुनवाए जाने वाले फ़िल्मी गीतों का जाना-पहचाना सबसे पुराना कार्यक्रम जयमाला। अंतर केवल इतना है कि पहले फ़ौजी भाई पत्र लिख कर गाने की फ़रमाइश करते थे आजकल ई-मेल और एस एम एस भेजते है। कार्यक्रम शुरू होने से पहले धुन बजाई गई ताकि विभिन्न क्षेत्रीय केन्द्र विज्ञापन प्रसारित कर सकें। फिर जयमाला की ज़ोरदार संकेत (विजय) धुन बजी जो कार्यक्रम की समाप्ति पर भी बजी। संकेत धुन के बाद शुरू हुआ गीतों का सिलसिला। फरमाइश में से हर दशक से गीत चुने गए। इस तरह नए पुराने सभी समय के गीत सुनने को मिले।

शुक्रवार को फरमाइश में से अलग-अलग मूड के गीत सुनवाए - पुरानी फिल्म आवारा से घर आया मेरा परदेसी, कुछ पुरानी फिल्म लाखों में एक से -

चन्दा ओ चन्दा किसने चुराई तेरी मेरी निंदिया

दिल, कहो न प्यार हैं, राम अवतार फिल्मो के गीत और तेरे नाम फिल्म का शीर्षक गीत भी सुनवाया। शेफाली (कपूर) जी ने शायराना अंदाज में गीत सुनवाए।

रविवार को संगीता (श्रीवास्तव) जी ने सुनवाए अलग-अलग मूड के गीत शायराना अंदाज में - दिलवाले दुल्हनिया ले जाएगे से मेहंदी लगा के रखना, हीरो फिल्म से रेशमा का गाया लम्बी जुदाई, अर्पण, दिलवाले, दिल का क्या कसूर फिल्म का शीर्षक गीत, फिल्म तीन देवियाँ का गीत सुनवाते समय शायद सीडी में गड़बड़ी हुई, मुखड़े के बाद कुछ हिस्सा ठीक से नही सुन पाए, बाद में गीत ठीक बजा।

सोमवार को राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने शुरूवात नई फिल्म से की - दे दना दन फिर मिलेजुले गीत सुनवाए गए - शहीद फिल्म से देश भक्ति गीत, विवाह फिल्म से शादी का गीत, अंदाज, जिद्दी और दिल ही तो हैं फिल्म से यह गीत जो कम ही सुनवाया जाता हैं, अच्छा लगा कि फ़ौजी भाइयो ने इस गीत की फरमाइश की -

चुरा ले न तुमको ये मौसम सुहाना खुली वादियों में अकेली न जाना
लुभाता हैं मुझको ये मौसम सुहाना मैं जाऊँगी तुम मेरे पीछे न आना

मंगलवार को राजुल (अशोक) जी ने शुरूवात की शोले फिल्म के गीत से, फिर हीरो नंबर 1, बीस साल बाद, हाउज फुल के नए पुराने गीतों के साथ देशप्रेमी फिल्म का देश भक्ति गीत और प्रेम रोग फिल्म का यह गीत भी शामिल था -

अब हम तो भए परदेसी

बुधवार को अशोक जी ने शुरूवात की जब जब फूल खिले फिल्म के इस बेहतरीन नगमे से -

एक था गुल और एक थी बुलबुल

जिसके बाद सोल्जर, दीवार, मेरा नाम जोकर फिल्मो के गीतों के साथ सनम तेरी क़सम फिल्म का शीर्षक गीत भी शामिल था।

गुरूवार को रेणु (बंसल) जी ने घायल फिल्म के गीत से शुरूवात की। हम दिल दे चुके सनम जैसी नई फिल्मो के गीत शामिल थे और यह गीत भी सुनवाया गया -

ये तो सच हैं के भगवान हैं

शनिवार को विशेष जयमाला प्रस्तुत किया ख्यात गजल गायक और संगीतकार जगजीत सिंह ने। शुरूवात में उन्ही के गाए गीतों की झलक सुनवाई गई। पूरा कार्यक्रम गीतों का महकता गुलदस्ता रहा। अच्छे गीत चुनकर सुनवाए मैंने प्यार किया, त्रिदेव फिल्मो से। अपने पुराने दिन याद करते हुए रूस्तम सोहराब का गीत सुनवाया। साथ-साथ फिल्म का गीत सुनवाते हुए संगीतकार कुलदीप सिंह को याद किया। चित्रा सिंह का गीत और खुद का गाया पंजाबी गीत भी सुनवाया। शास्त्रीय संगीत में ढला रजिया सुलतान फिल्म से ऐ दिले नादाँ सुनवाया और वो गजल भी शामिल थी जिससे उन्हें लोकप्रियता मिली -

सरकती जाए रूख से नकाब आहिस्ता आहिस्ता

संग्रहालय से अच्छी रही प्रस्तुति। संयोजन कल्पना (शेट्टी) जी का रहा।

7:45 को गुलदस्ता कार्यक्रम में शुक्रवार को शुरूवात हुई अहमद वसी के कलाम से -

जाने क्या हाल हो इस दिल का अगर तू आए
न तो जज्बात पे न तो खुद पे काबू आए

आवाज आशा भोंसले की रही।

इसके बाद छाया गांगुली की आवाज में असअद भोपाली का कलाम सुनवाया गया -

तुझे बेकरार करके तेरी नींद भी उड़ा दूं
अगर आऊं अपनी जिद पे तुझे क्या से क्या बना दूं

समापन बढ़िया रहा, गुलाम अलि की आवाज में अहमद फराज के कलाम से -

तेरी बाते ही सुनाने आए दोस्त दिल ही दुखाने आए

रविवार को भी कुछ आवाजे और शायर शुक्रवार के ही रहे। शुरूवात हुई छाया गांगुली की आवाज में अहमद वसी के इस कलाम से -

मेरी आँखों में ढूँढता क्या हैं आंसूं के सिवाय बचा क्या हैं

फिर गुलाम अली की गाई गजल सुनवाई गई, शायर का नाम ठीक से समझ में नहीं आया। बोल रहे -

कल रात बज्म में जो मिला गुलबदन सा था
खुशबू से उसके लफ्ज थे चेहरा चमन सा था

महफ़िल एकतेदाम को पहुंची फैज अहमद फैज के कलाम से, आवाज आबिदा परवीन की -

नही निगाह में मंजिल तो जुस्तजू ही सही
नही हैं साथ मयस्सर तो आरजू ही सही

मंगलवार को महफ़िल का आगाज बशीर बद्र के कलाम से हुआ -

रात आँखों में ढली पलकों पे जुगनू आए
हम हवाओं की तरह जाके उसे छू आए

आवाज जगजीत सिंह की। इसके बाद सुना हरिहरन की आवाज में ताहिर फराज का कलाम -

अक्स चहरे पे आफताब का हैं
किस इलाके में घर जनाब का हैं

मजा आ गया सुन कर। आखिर में चंदनदास की आवाज में इब्राहम अश्क को सुना -

जब मेरी हकीक़त जा जाकर सुनाई लोगो ने
कुछ सच भी कहा कुछ झूठ भी कहा कुछ बाते भी बनाई लोगो ने

इस तरह इस सप्ताह गुलदस्ता खूब महका। इस उम्दा पेशकश के लिए शुक्रिया !

शनिवार को सुना सामान्य ज्ञान का कार्यक्रम जिज्ञासा। टाइपराइटर का इतिहास बताया गया। अंत में बताया अब इसका चलन समाप्ति पर हैं और इसी की देन हैं आज मोबाइल पर एस एम एस। यहाँ इस गीत की झलक सुनवाई जो बहुत ही उचित लगी -

कभी तनहाइयों में हमारी याद आएगी

खेल जगत में साइना नेहवाल के हाल ही के खेल पर चर्चा हुई। नए आयाम में विज्ञान की चर्चा में आने वाले दिनों में रोशनी से चलने वाले कंप्यूटर और आई आई टी द्वारा गाँवों में भेजी जा रही ग्रीन ऊर्जा की बाते हुई। फिटनेस मंत्रा में मानसून से होने वाले बुखार की चर्चा हुई। बीच में एक बार सीडी रानी ने नखरे दिखाए, युनूस जी का कहा एक ही शब्द बारबार लगातार सुना गया। शोध और आलेख युनूस (खान) जी का रहा। कार्यक्रम को प्रस्तुत किया विजय दीपक (छिब्बर) जी ने।

सोमवार को पत्रावली में पधारे निम्मी (मिश्रा) जी और कमल (शर्मा) जी। इस बार पत्रावली सुन कर बड़ा अजीब लगा। हर पत्र में कार्यक्रमों की तारीफ़ थी। इस तरह सभी पत्र पढ़ते-पढ़ते लगभग सभी कार्यक्रमों की तारीफ़ हो गई। एक श्रोता ने त्रिवेणी का समय बढाने के लिए कहा जिसके लिए मना किया गया। एकाध श्रोता ने पत्र शामिल न होने की शिकायत की, बस हो गई पत्रावली। लगता हैं श्रोता ध्यान से कार्यक्रम नही सुनते या शिकायती पत्र शामिल नही किए गए।

बुधवार को इनसे मिलिए कार्यक्रम में पार्श्व गायक अनवर से निम्मी (मिश्रा) जी की फोन पर हुई सुरीली बातचीत सुनवाई गई। संगीत की शिक्षा, संघर्ष जैसे औपचारिक मुद्दों से दूर सहज स्वाभाविक बातचीत रही। जानकारी मिली कि पहली गजल मेरे गरीब नवाज फिल्म के लिए गाई। आजकल स्टेज शो करते हैं, एलबम निकाल रहे हैं और बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। यह भी बताया कि रफी साहब से आवाज मिलने से फ़ायदा भी हुआ और नुकसान भी। गुलाम अली और मेहदी हसन को पसंदीदा गायक बताया और बड़े गुलाम अली खाँ की गाई ठुमरी - का करूं सजनी गुनगुना कर सुनाई। खुद के गाए बहुत से गीत गुनगुनाए और निम्मी जी की इस बात से मैं भी सहमत हूँ कि उनके गुनगुनाए इन गीतों में और रिकार्ड किए गए गीतों में अंतर नहीं दिख रहा।

टेलीफोन पर बात हुई पर बहुत स्पष्ट रही आवाज। रिकार्डिंग इंजीनियर रहे सुनील (भुजबल) जी और प्रस्तुति वीणा (राय सिंघानी) जी की रही।

गुरूवार को प्रसारित हुआ कार्यक्रम राग-अनुराग। विभिन्न रागों पर आधारित फिल्मी गीत सुनवाए गए, शुरूवात बढ़िया रही, मीरा फिल्म से वाणी जयराम की गाई मीरा की एक ऎसी रचना सुनवाई गई जो कम प्रचलित हैं -

राग मल्हार - बादल देख डरी ओ श्याम

इसके अलावा यह गीत सुनवाए गए -

राग जौनपुरी - गुजरे हैं आज इश्क में हम उस मुकाम से (फिल्म दिल दिया दर्द लिया)
राग भीम पलास - ओ बेकरार दिल (कोहरा)
राग किरवानी - सुनो बजर क्या गाए (बाजी)

8 बजे का समय है हवामहल का जिसकी शुरूवात हुई गुदगुदाती धुन से जो बरसों से सुनते आ रहे है। यही धुन अंत में भी सुनवाई जाती है। शुक्रवार को मजा आ गया। वी एम आनंद की लिखी झलकी सुनी - वजन घटाओ। कुछ बाते पहली बार सुनी जैसे बरात आई, दुल्हन मोटे दूल्हे को देख कर बेहोश हो गई, नतीजा तुरंत वजन घटाने दूल्हा डाक्टर की क्लीनिक में पहुंचा। डाक्टर कहते हैं जितना गुड डालोगे उतनी मिठास, जितना पैसा उतनी जल्दी वजन कम, एक अन्य लड़की का पिता हिसाब लगा रहा हैं 25 तारीख तक वजन कम होगा, तो कार्ड छपवाए जा सकते हैं। दिल्ली केंद्र की इस झलकी के निर्देशक हैं कमल दत्त।

शनिवार को आशा मिश्रा की लिखी झलकी सुनी - अटरिया पे चोर। शादी के माहौल में संदेह होता हैं। दूल्हा चेहरे से सेहरा नही हटा रहा। शहर में बात फैली हैं कि चोरो का गिरोह शादी-ब्याह के घर में जाकर लूट-पाट कर रहा हैं। लाईट भी चली जाती हैं, चोर पकडे जाते हैं। पता चलता हैं प्यार-मोहब्बत का चक्कर हैं। मजेदार रही। भोपाल केंद्र की इस प्रस्तुति की निर्देशिका हैं सपना सक्सेना।

रविवार को अनिल सक्सेना की लिखी नाटिका सुनी - अब क्या होगा। घरेलू नौकरों की समस्या पर अच्छी प्रस्तुति रही। मुश्किल से ब्लैक में एक नौकर मिला, बेड टी न देने पर भाग गया। अखबार में विज्ञापन दिया गया, क्योंकि रेडियो में दे नही सकते। उम्मीदवार ने खुद मालिक का इंटरव्यू लिया। बाद के उम्मीदवार से मालिक ने सभी सुविधाए देने की बात कही तो उसने मालिक को पागल समझा जबकि वो खुद पागलखाने से भाग आया था, नौकरों पर रिसर्च करते हुए पागल हो गया था। निर्देशक हैं जयदेव शर्मा कमल। यह लखनऊ केंद्र की प्रस्तुति रही।

सोमवार को मुंशी प्रेमचंद की कहानी घर जमाई का बी एल व्यास द्वारा किया गया रेडियो नाट्य रूपांतर सुनवाया गया। निर्देशिका हैं रमा बावा। प्रेमचंद को पढ़ना-सुनना हमेशा से ही अच्छा लगता हैं। समय का चाहे कोई भी दौर हो सन्देश सार्थक रहता हैं। बढ़िया प्रस्तुति संग्रहालय से।

मंगलवार को कुमुद नागर की लिखी झलकी सुनी - सस्पेंस जिसकी निर्देशिका हैं चन्द्र प्रभा भटनागर। फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी जा रही हैं। हिट होने के लिए मसाले मिलाए जा रहे हैं। संस्पेंस में हॉरर सीन, कोई कहता हैं धार्मिक सीन डाल दो। अंत में बढ़िया सस्पेंस बनता हैं। बाथरूम से शेर का बच्चा निकलता हैं जिसे इस कॉमन बाथरूम के दूसरे कमरे से एक शिकारी ने रखा हैं चिड़िया घर भेजने के लिए। अच्छा मनोरंजन हुआ। प्रस्तुति लखनऊ केंद्र की रही।

बुधवार को झलकी सुनी - बुफे सिस्टम। जैसे कि शीर्षक से ही समझा जा सकता हैं भोजन की इस पद्धति में पारंपरिक लोग जिस दुविधा में फंसते हैं उससे अच्छा खासा तमाशा बन जाता हैं और नतीजा वही कि वह दावत में भोजन नहीं कर पाता हैं और घर में पत्नी ने भोजन बनाया नहीं हैं। व्यंग्य और हास्य - दोनों अच्छे रहे। बीकानेर केंद्र की इस प्रस्तुति के लेखक रविन्द्र कुमार श्रीवास्तव हैं और निर्देशक सरोज भटनागर हैं।

गुरूवार को परिवार नियोजन पर सन्देश देती झलकी सुनवाई गई - भूख हड़ताल जिसे दिनेश भारती ने लिखा। बच्चे भूख हड़ताल करते हैं, माता-पिता से उनकी कुछ मांगे हैं। जैसे-तैसे हड़ताल समाप्त होती हैं पर हड़ताल तोड़ने के लिए नीम्बू पानी के बजाय अंगूर के रस की मांग से पिता परेशान हो जाते हैं। प्रस्तुति इलाहाबाद केंद्र की रही।

इस तरह हवामहल में विविधता रही - सन्देश भी मिला और मनोरंजन भी हुआ। साथ ही अलग-अलग केन्द्रों की प्रतिभाओं को जानने समझाने का अवसर मिला।

प्रसारण के दौरान अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए, क्षेत्रीय विज्ञापन भी प्रसारित हुए। फ़ौजी भाइयो को एस एम एस करने का तरीका बताया गया।

रात में हवामहल कार्यक्रम के बाद 8:15 बजे से क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है फिर हम 9 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।

Tuesday, July 6, 2010

गोरी के हाथ में जैसे ये छल्ला

आज याद आ रहा हैं 1973 के आसपास रिलीज हुई फिल्म मेला का एक गीत।

यह फिल्म और इसके गीत बहुत लोकप्रिय रहे।

फिल्म में नायक हैं संजय खान और नायिका मुमताज और सहनायक फिरोज खान। रफी साहब, आशा भोंसले और साथियो का गाया यह गीत पहले रेडियो के सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाया जाता था। अब बहुत समय से नहीं सुना। इसके कुछ बोल याद आ रहे हैं -

गोरी के हाथ में जैसे ये छल्ला ऎसी हो किस्मत मेरी भी अल्ला (रफी)
छूने न दूंगी उंगली में बाबू बन जाओ चाहे चांदी का छल्ला (आशा)

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Friday, July 2, 2010

दोपहर बाद के जानकारीपूर्ण कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 1-7-10

दोपहर में 2:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम की समाप्ति के बाद आधे घण्टे के लिए क्षेत्रीय प्रसारण होता है जिसके बाद केन्द्रीय सेवा के दोपहर बाद के प्रसारण के लिए हम 3 बजे से जुड़ते है।

3 बजे सखि सहेली कार्यक्रम में शुक्रवार को प्रसारित हुआ कार्यक्रम हैलो सहेली। फोन पर सखियों से बातचीत की रेणु (बंसल) जी ने। पहला कॉल आंध्र प्रदेश के निजामाबाद से था, सखि ने यहाँ के सरस्वती मंदिर के बारे में बताया, उनकी हिन्दी का उच्चारण उतना अच्छा नहीं था पर उनके मुख से हिन्दी सुनना अच्छा लगा। एक और बातचीत भी अच्छी लगी, एक युवा सखि ने कहा कि उसे पढ़ने में अधिक रुचि नहीं हैं और वो सिलाई कढ़ाई सीख रही हैं और वही काम करना चाहती हैं। यह सच भी हैं कि करिअर बनाने, कुछ काम करने के लिए शिक्षा ही जरूरी नहीं हैं, अन्य काम भी किए जा सकते हैं। कुछ कॉलों से यह जानकारी भी मिली कि पढाई की सुविधा न होने से सखियाँ पढाई जारी नही रख पा रही हैं। एक सखि ने बताया वह बेकरी चलाती हैं, पाव जल्दी खराब होने के कारण बताए। घरेलु महिलाओं ने घर के कामकाज के बारे में बताया। सखियों ने विविध भारती के कार्यक्रमों को पसंद करने की भी बात कही। रेणु जी ने बातचीत से वातावरण भी बहुत सौम्य बनाए रखा।
सखियों की पसंद पर नए-पुराने विभिन्न मूड के गाने सुनवाए गए, बहुत पुराना गीत प्रदीप का गाया हुआ, चांदनी फिल्म का गीत -

लगी आज सावन की फिर वो झड़ी हैं

नई फिल्मे विरासत, मुस्कान के गीत भी सुनवाए।

शहर, गाँव, जिलो से फोन आए। लोकल काल भी थे। इस कार्यक्रम को तैयार करने में तकनीकी सहयोग तेजेश्री (शेट्टे) जी और प्रस्तुति सहयोग रेखा (जम्बुवार) जी का रहा।

सोमवार को पधारे रेणु (बंसल) जी और उन्नति जी। यह दिन रसोई का होता है, इस दिन आलू के पौष्टिक तत्वों की जानकारी दी। सामान्य जानकारी भी दी कि कब खेती शुरू हुई आदि। उसके लाभ और हानि दोनों की जानकारी दी। बारिश से होने वाले हल्के रोगों से बचाव और खाद्य सामग्री की सुरक्षा के उपाय बताए। सखियों के पत्रों से रॉयल रबड़ी लस्सी बनाना बताया और गरम मसालों के औषधीय उपयोग भी बताए।

बहुत दिन बाद अंदाज फिल्म का यह गीत सुनना अच्छा लगा, पता नहीं कैसे यह बच्चो का गीत सखियों ने पसंद किया -

सुन लो सुनाता हूँ तुमको कहानी
रूठो न हमसे ओ गुड़ियों की रानी

सखियों की पसंद पर पुरानी फिल्मो के गीत सुनवाए गए - काला बाजार, देवर, दो आँखे बारह हाथ फिल्मो से। कुछ गीत मौसम के अनुसार भी रहे जैसे -

रिमझिम बरसे बादरवा मस्त हवाएं आई पिया घर आ जा

मंगलवार को पधारी सखियां निम्मी (मिश्रा) जी और मधुवंती जी। यह करिअर का दिन होता है। इस दिन जीव प्रौद्योगिकी (बायो टैक्नौलोजी) के पाठयक्रम और नौकरी संबंधी जानकारी दी।

हमेशा की तरह सखियो के अनुरोध पर गाने नए ही सुनवाए गए जैसे 3 इडियट्स, काइट्स, सिंग इज किंग, किस्मत कनेक्शन, अजब प्रेम की गजब कहानी और कृष फिल्म का यह गीत -

आओ सुनाऊं प्यार की एक कहानी
एक था लड़का एक थी लड़की दीवानी

बुधवार को सखियाँ पधारीं - निम्मी (मिश्रा) जी और उन्नति (वोहरा) जी। इस दिन स्वास्थ्य और सौन्दर्य संबंधी सलाह दी जाती है्। बारिश में त्वचा की देखभाल की जानकारी दी गई। कांचन (प्रकाश संगीत) जी की लिखी एक झलकी भी सुनवाई गई जिसमे कांचन जी के साथ अमरकांत (दुबे) जी ने भाग लिया। लगता हैं कपडे धोने से पहले ठीक से देखा नही गया और सिनेमा के टिकटों की लुगदी बन गई पर बाद में पता चलता हैं कि वह बस के टिकट थे। चलिए छोटी सी काम की सलाह मिली। श्रोता सखियों की फरमाइश पर कुछ पुराने समय के लोकप्रिय गीत इन फिल्मो से सुनवाए गए - कामचोर, कारवां, भीगी पलकें, मोहरा और दिल तो पागल हैं फिल्म से यह सावन राजा का गीत सुनना अच्छा लगा -

घोड़े जैसी चाल हाथी जैसी दुम
चक दुम दुम चक दुम दुम

गुरूवार को सखियाँ पधारी रेणु (बंसल) जी और उन्नति (वोहरा) जी। इस दिन सफल महिलाओं के बारे में बताया जाता है। इस दिन किसी एक महिला के बारे में न बता कर सखियों के पत्रों से कुछ सफल महिलाओं की जानकारी दी गई जैसे कम उम्र में ही कर्नाटक संगीत में महारत हासिल करने वाली लावण्या और सुब्बालक्ष्मी। भावनगर की तरून बाला बेन जिन्होंने 70 साल की उम्र में खेलो में पदक जीते। बिहार की यशोदा जिन्होंने मधुबनी पेंटिंग में दक्षता पाई और लालू मणि देवी जिनकी गिनती मशरूम की खेती में एशिया के 25 उच्च किसानो में होती हैं। इसके अलावा पाण्डुवानी लोकगायक लक्ष्मी बाई के बारे में बताया। सखियों के अनुरोध पर लोकप्रय गीत सुनवाए - जूली, खोटे सिक्के, सरगम, परिचय फिल्मो से और दुल्हन फिल्म का यह गीत बहुत दिन बाद सुन कर अच्छा लगा -

आएगी जरूर चिट्ठी मेरे नाम की सब देखना

हर दिन श्रोता सखियों के पत्र पढे गए और चुटकुले भी सुनाए गए। कुछ पत्रों में कार्यक्रमों की तारीफ़ थी। लेकिन हर दिन बहुत सारी जानकारी दी गई, सुनते-सुनते नसें सूजने लगी। हर एक दिन दी गई जानकारी को आराम से तीन-चार कार्यक्रमों में प्रसारित किया जा सकता था जिससे सुनने, समझने और बाते याद रखने में आसानी होती क्योंकि बहुत सारी सुनी गई बाते याद रखना मुश्किल हो जाता हैं।

इस कार्यक्रम की दो परिचय धुनें सुनवाई गई - एक तो रोज़ सुनी और एक विशेष धुन हैलो सहेली की शुक्रवार को सुनी।

शनिवार और रविवार को प्रस्तुत हुआ सदाबहार नग़में कार्यक्रम जिसमे अच्छे सदाबहार नगमे सुनने को मिले। शनिवार को दोनों मूड के रोमांटिक गीत सुनवाए राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने, सूरज फिल्म से -

बहारो फूल बरसाओ मेरा महबूब आया हैं

आखिरी दांव, ग्यारह हजार लड़कियां, गुमराह, संघर्ष, जब जब फूल खिले और फुटपाथ फिल्म से -

शामे गम की क़सम

रविवार को यह कार्यक्रम संगीतकार आर डी बर्मन को समर्पित रहा। उनके स्वरबद्ध किए अलग-अलग मूड के सदाबहार गीत सुनवाए गए। मेरे जीवन साथी का ओ मेरे दिल के चैन, अमर प्रेम से रैना बीती जाए श्याम न आए, आशा जी का गाया संजीदा गीत - मेरा कुछ सामान, शोले का दोस्ती का गीत और महबूबा फिल्म का गीत भी सुनवाया गया। अच्छा रहा चयन।

3:30 बजे नाट्य तरंग कार्यक्रम में शनिवार और रविवार को रिफत फरोश का लिखा ऐतिहासिक नाटक सुनवाया गया - डगर पनघट की जिसका निर्देशन निर्मला अग्रवाल ने किया हैं। अमीर खुसरो के जीवन पर आधारित यह नाटक जलालुद्दीन खिलजी की फ़तेह के समय का हैं। अलाउद्दीन खिलजी के एक हाथ से सोना लुटाते दूसरे हाथ में तलवार लिए दिल्ली की ओर बढ़ने का समय दर्शाता हैं। यह सब देख कर अमीर खुसरो को लगता हैं कि सारा जीवन उन्होंने शासको की सेवा की, यह सेवा अगर वह प्रभु की करते...

इसमे ईरान और भारत के सांस्कृतिक समागम की भी चर्चा हैं। इसमे अमीर खुसरो की मुकरियाँ भी हैं। उनकी कव्वालियाँ भी हैं - छाप तिलक छब छीनी, बहुत कठिन हैं डगर पनघट की। दिल्ली केंद्र की बढ़िया प्रस्तुति।

शाम 4 से 5 बजे तक सुनवाया जाता है पिटारा कार्यक्रम जिसकी अपनी परिचय धुन है और हर कार्यक्रम की अलग परिचय धुन है।

शुक्रवार को प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम सरगम के सितारे जिसमे सितारे रहे ख्यात संगीतकार जोडी नदीम-श्रवण के श्रवण राठौर जिनसे बातचीत की रेणु (बंसल) जी ने। रेणुजी ने परिचय बहुत कलात्मक रूप से दिया, उन्ही की फिल्मो के नामों से। बताया कि पिता गायक हैं और आरंभिक शिक्षा उन्ही से मिली। स्टेज शो भी किए। बाद में सुगम संगीत भी सीखा। बचपन में कल्याण जी आनंद जी की रिकार्डिंग देख कर प्रभावित हुए। कॉलेज के समारोह में नदीम से मुलाक़ात हुई। 1973 जनवरी में जोडी बनी और दिसंबर में पहला गीत रिकार्ड किया जो भोजपुरी फिल्म के लिए था। बाद में समीर के साथ मिलकर बनी टीम और 17 साल के संघर्ष की बाते भी बताई जिसमे लगभग दस हजार गाने तैयार किए जो बाद में काम आए। लता जी के साथ रिकार्डिंग के अनुभव को याद किया। इस जोडी के लगभग सभी गीत लोकप्रिय हैं, बहुत से गीतों की झलक सुनवाई। अब पारिवारिक फिल्मे बनाना चाहते हैं और अपने बच्चो को भी संगीत का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस तरह अच्छी जानकारी पूर्ण बातचीत रही। इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया चित्रलेखा (जैन) जी ने तेजेश्री (शेट्टे) जी के तकनीकी सहयोग से।

रविवार को प्रसारित हुआ कार्यक्रम उजाले उनकी यादो के जिसमे फिल्म लेखक जावेद सिद्दीकी से युनूस (खान) जी की बातचीत की अगली कड़ी सुनवाई गई। शुरूवात में पिछली कड़ी का अंश सुनवाया गया जिससे निरंतरता बनी रही। इसमे ताल फिल्म के माध्यम से आनंद बक्षी, ऐ आर रहमान, अक्षय खन्ना, अनिल कपूर, ऐश्वर्य राय, सुभाष घई के साथ काम करने के अनुभव बताए। फिल्म की कहानी की चर्चा करते हुए बताया कि इसमे संगीत जगत की झलक ही ली हैं जिससे जटिलता नही हुई। इस फिल्म के गीत सुनवाए। फिर कोई मिल गया जैसी विशेष फिल्म की चर्चा शुरू हुई। वैज्ञानिक परिकल्पना की इस फिल्म के साथ लगता हैं अगली कड़ी रोचक रहेगी। इस रोचक बातचीत के रिकार्डिंग इंजीनियर हैं - विनय (तलवलकर) जी, कार्यक्रम की प्रस्तुतकर्ता हैं कल्पना (शेट्टी) जी। सम्पादन खुद युनूस जी ने किया हैं। सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में डा समीर पारिख से निम्मी (मिश्रा) जी की बातचीत सुनवाई गई, विषय रहा - पेट के रोग। विस्तार से जानकारी दी। बताया कि विभिन्न कारणों से पेट के रोग होते हैं। पीलिया, गुर्दे के रोग की भी जानकारी दी। सावधानी के लिए साफ़ पानी पीने की सलाह दी। अल्सर के बारे में भी अच्छी जानकारी दी। सबसे अच्छी दो बाते रही - एंडोस्कोपिक संबंधी पूरी जानकारी दी और अल्कोहल और धूम्रपान से संबंधी बाते बताई जिससे सावधानी बरतने में आसानी रहेगी और इलाज में हिचकिचाहट नही होगी। इस जानकारीपूर्ण कार्यक्रम की प्रस्तुतकर्ता हैं कमलेश (पाठक) जी। तकनीकी सहयोग तेजेश्री (शेट्टे) जी का रहा।

बुधवार को आज के मेहमान कार्यक्रम में गीतकार और संवाद लेखक प्रसून जोशी से युनूस (खान) जी की बातचीत सुनवाई गई। बताया कि बचपन से कविताओं का शौक रहा और रेडियो प्रोग्रामो में भी भाग लेते रहे। दिल्ली में विज्ञापन जगत में सृजन विभाग से जुड़े हालांकि पढाई एमबीऐ की। फिर मुम्बई आए जहां अधिक मुश्किल नही हुई। पहला गीत लज्जा फिल्म के लिए किया। अपने काम के बारे में बताया कि विज्ञापन के समय उत्पाद का अध्ययन करते हैं और गीत लेखन में जीवन को देखते हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि से संगीत की शिक्षा भी ली। फिल्म रंग दे बसंती, फिर मिलेंगे के गीत सुनवाए। फिल्म हम तुम के मिलने की बाते बताई। इस कार्यक्रम को कमलेश (पाठक) जी ने प्रस्तुत किया।

हैलो फ़रमाइश कार्यक्रम में शनिवार को श्रोताओं से फोन पर बात की अमरकांत जी ने। विभिन्न क्षेत्रो से फोन आए और लोकल काल भी थे। अलग-अलग तरह के श्रोताओं से बात हुई। छात्रो ने फोन किया, हॉस्टल से लड़कियों ने फोन किया। विभिन्न काम करने वालो ने बात की - खेती, पान का ठेला चलाने वाले श्रोता ने बताया कि लोग विविध भारती के पुराने गाने सुनने के लिए पान के बहाने ठेले पर आते हैं। एक छात्र ने कहा वह उच्च अधिकारी बनना चाहता हैं। एक कलाकार ने अपने कार्यक्रमों के बारे में बताया, गाना गाकर भी सुनाया। एक श्रोता ने बताया कि वह कलकत्ता से मुम्बई काम करने आया हैं।सबसे अच्छी बातचीत रही चंद्रपुर के एक श्रोता की जिन्होंने वहां फैक्ट्रियो के कारण फैल रहे प्रदूषण की चर्चा की। सब की पसंद पर गाने अलग-अलग तरह के नए पुराने गीत सुनवाए जैसे पुरानी फिल्म खानदान का गीत -

नील गगन पर उड़ाते बादल आ आ आ

गैम्बलर, हम दिल दे चुके सनम, राज फिल्मो के गीत। इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया वीणा (राय सिंहानी) जी ने रेखा (जम्बुवार) जी के सहयोग से।

मंगलवार को फोन पर श्रोताओं से बातचीत की राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने। छात्र, सिलाई, खेती करने वाले, दूकान चलाने वाले जैसे विभिन्न श्रोताओं ने अपने काम के बारे में बताया। इस बार अधिकतर फोन महाराष्ट्र के विभिन्न भागो से आए। जिले से एक श्रोता ने कहा कि बारिश का इतेजार हैं। नए पुराने गीत उनके अनुरोध पर सुनवाए गए। एक श्रोता ने भीगी पलके फिल्म का किशोर कुमार का गाया संजीदा गीत - जीवन बीत गया पसंद किया जो कम ही सुनवाया जाता हैं। इसी तरह एक श्रोता के अनुरोध पर आरजू फिल्म की क़व्वाली सुनवाई गई। नई फिल्म जैसे गजनी के गीत भी सुनवाए गए।

इस कार्यक्रम को तैयार करने में तकनीकी सहयोग तेजेश्री (शेट्टे) जी और प्रस्तुति सहयोग रेखा (जम्बुवार) जी का रहा। कार्यक्रम को प्रस्तुत किया महादेव (जगदाले) जी ने।

गुरूवार को श्रोताओं से फोन पर बातचीत की अशोक जी ने। एक श्रोता ने कहा बारिश का इन्तेजार हैं। एक श्रोता ने कहा वह खेत में कपास लगाना चाहता हैं।एक श्रोता ने नासिक शहर के बारे में बताया। एक श्रोता ने कहा कि वह वडा पाव का ठेला चलाता हैं और उसका चना बहुत मशहूर हैं और उसने गाना भी क्रान्ति का पसंद किया - चना जोरगरम। मौसम के अनुसार अनुरोध पर मंजिल फिल्म का यह गीत सुनवाया गया -

रिमझिम गिरे सावन

इस कार्यक्रम को तैयार करने में तकनीकी सहयोग स्वाति (भंडारकर) जी और प्रस्तुति सहयोग रेखा (जम्बुवार) जी का रहा। कार्यक्रम को प्रस्तुत किया महादेव (जगदाले) जी ने।

तीनो ही कार्यक्रमों में श्रोताओं ने विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों को पसंद करने की बात बताई। एक पुराने श्रोता ने बहुत ही पुराने कार्यक्रमों को याद किया। कुछ श्रोताओ ने बहुत ही कम बात की। कुछ ऐसे लोकल कॉल भी थे जिनमे श्रोताओं ने बताया कि उनका मूल निवास कहीं और हैं और वे काम के लिए मुम्बई आए हैं। अमरकांत जी ने सलाह दी कि मोबाइल से फोन करते समय यह जांच ले कि नेटवर्क ठीक हैं या नही वरना कभी लाइन कट जाती हैं और कभी आवाज साफ़ नही आती। अशोक जी ने कहा कि मुम्बई के बाहर के श्रोताओं के फोन कम ही आ रहे हैं। श्रोताओं से फोन करने का अनुरोध किया।
तीनो ही कार्यक्रमों और हैलो सहेली कार्यक्रम के बाद भी रिकार्डिंग के लिए फोन नंबर, दिन और समय बताया गया।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद गाने सुहाने कार्यक्रम प्रसारित हुआ जिसमे अस्सी के दशक और उसके बाद के गीत सुनवाए गए। लगभग सभी ऐसे गीत सुनवाए गए जो लोकप्रिय हैं।

शुक्रवार को तेरी क़सम, बगावत, हीरो और मुकद्दर का सिकंदर फिल्म का शीर्षक गीत सुनवाया गया।

शनिवार को बेताब, संगीत, क़यामत से क़यामत तक और तेज़ाब फिल्म का एक दो तीन गीत भी शामिल था।

रविवार को हवालात, मासूम, दिल वाले दुल्हनिया ले जाएगे और माचिस फिल्म का चप्पा चप्पा चरखा चले भी सुनवाया गया।

सोमवार को चांदनी, गंगा जमुना सरस्वती, शराबी और जुर्म फिल्म की मशहूर गजल, जब कोई बात बढ़ जाए भी शामिल थी।

मंगलवार को शुरूवात उन गजलो से हुई जो बहुत ही कम सुनवाए जाते हैं - गमन फिल्म से आपकी याद आती रही और उमराव जान फिल्म से तलत अजीज की गजल। इसके अलावा दादा, सात रंगों के सपने फिल्मो के गीत भी शामिल थे।

बुधवार को विरासत, करीब, अनाडी नम्बर 1, ताल और मन फिल्म का शीर्षक गीत सुनवाया गया।

गुरूवार को सिर्फ तुम, गुलाम, सत्या और आइना फिल्मो के गीत सुनवाए गए।

शाम 5:30 बजे गाने सुहाने कार्यक्रम की समाप्ति के बाद क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है, फिर हम शाम बाद के प्रसारण के लिए 7 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।
इस कार्यक्रम में फिल्म के विज्ञापन प्रसारित हुए।
पूरी सभा में प्रसारण के दौरान अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए और संदेश भी प्रसारित किए गए जिसमें विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताया गया।

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