आज अंताक्षरी टेलीविजन चैनलों का एक लोकप्रिय कार्यक्रम बन गया है। जहां तक मेरी जानकारी है अंताक्षरी कार्यक्रम सबसे पहले विविध भारती से प्रसारित हुआ था।
यह सत्तर के दशक का समय था। वर्ष शायद 1975 या 76 या 77 हवामहल के बाद रात साढे नौ बजे प्रायोजित कार्यक्रम में अंताक्षरी होती थी जिसे प्रस्तुत करते थे शील कुमार।
पता नहीं कितनों को याद है प्रसारण जगत का यह नाम - शील कुमार जो रेडियो और दूरदर्शन पर कार्यक्रमों का संचालन करते थे।
अंताक्षरी कार्यक्रम कुल 15 मिनट का होता था। इसमें एक ही राउंड होता था अंताक्षरी राऊंड यानी एक अक्षर से गीत शुरू करना और उसके अंतिम अक्षर से अगला गीत।
यहां टीम नहीं थी। केवल दो कलाकार ही अंताक्षरी खेलते थे। इन दो कलाकारों में लड़का और एक लड़की होते थे। किसी अक्षर से गीत नहीं गा सकने पर हार जाते लेकिन दूसरा कलाकार भी नहीं गा पाता तो संचालन करने वाले शील कुमार एक नया अक्षर दे देतें। समय की समाप्ति पर दोनों बराबर होते तो दोनों को बराबर मान कर खेल समाप्त कर दिया जाता।
यह कार्यक्रम साप्ताहिक था। हर सप्ताह एक शहर के कलाकर आते। कार्यक्रम की रिकार्डिंग भी विभिन्न शहरों में हुई थी। हैदराबाद में भी हुई।
शील कुमार किसी एक शहर में जाते। विज्ञापन कैसे दिया जाता ये तो पता नहीं पर उस शहर के कलाकार जिनमें कालेज और विश्व विद्यालय के लड़के - लड़कियां भी शामिल होते, शील कुमार से संपर्क करते। फिर उनका आडिशन होता और केवल एक लड़का और लड़की चुने जाते। यही दोनों अंताक्षरी खेलते।
उन दिनों पता नहीं किस शहर से एक लड़के ने भाग लिया था जिसका नाम किशोर कुमार था। नाम असली था नकली ये तो पता नहीं चला लेकिन उसकी आवाज़ भी बहुत अच्छी थी और सुर भी सधा हुआ था। उसे जूनियर किशोर कुमार कहा जाने लगा था। उस दौर के अख़बारों में भी उस पर कुछ लेख लिखे गए। जैसा कि अक्सर होता है कुछ लोगों द्वारा कलाकारों को सब्ज़ बाग़ दिखाए गए।
कार्यक्रम लंबे समय तक नहीं चला। याद नहीं इस कार्यक्रम को कौन सा उत्पाद बनाने वाली कंपनी ने प्रायोजित किया था। कार्यक्रम का नाम भी मुझे ठीक से याद नहीं शायद अंताक्षरी या शील कुमार की अंताक्षरी या उस उत्पाद की अंताक्षरी था।
