आज मैं आपको मेरे द्वारा जारि सिने पहेली का हल लिख कर नहीं पर बोल कर बताऊँगा, जो मैने अभी नहीं पर करीब तीन या चार साल पहेले रेडियो पर हल्लो फरमाईशमें श्री रेणू बंसलजी के साथ बात चीत के दौरान बोला था और यह पूरा गाना भी आप सुन पायेंगे । यह कार्यक्रम उस समय में था जब कुछ अवधी के लिये पिटारा दोपहर १२ से १ में आता था । यह समय याद इस लिये रहा है, क्यों कि यह फरमाईश मैनें कडे बूखारके साथ की थी और इस की ध्वनि मुद्री भी वोकमेन पर अपने डों मित्र के दवाखाने में उसी बुखार के लिये दवाई लेनेके लिये गया था तब की थी ।
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दोस्तो, क्या गाना पसंद आया ? अगर हाँ भी या ना भी तो भी जरूर बताईए ।
धन्यवाद ।
पियुष महेता ।
