विविध-भारती की स्थापना दरअसल रेडियो सीलोन के बढ़ते प्रभुत्व का मुक़ाबला करने के लिए की गई थी । जिन दिनों विविध भारती को शुरू करने की तैयारियां चल रही थीं, पंडित नरेंद्र शर्मा इस नए और ऐतिहासिक रेडियो-चैनल की डिज़ायनिंग के काम में अपनी टोली के साथ जुटे हुए थे । ये तय पाया गया था कि विविध भारती की शुरूआत एक गीत से की जायेगी । पंडित जी ने ये गीत लिखा । इसके संगीत संयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गयी अनिल बिस्वास को और गायक के रूप में मन्ना दा का चुनाव किया गया ।
तीन अक्तूबर 1957 को जब उदघोषक शील कुमार ने विविध भारती के आग़ाज का ऐलान किया तो यही गीत बजाया गया था । विविध भारती का आरंभ इसी गीत से हुआ । इस मायने में ये बेहद खास है । सागर नाहर ने इस गाने को यूट्यूब पर खोज निकाला और हमने वहां से इसका ऑडियो निकाल लिया । ताकि मन्ना डे को जन्मदिन की बधाईयां भी दे सकें और विविध भारती के शुभारंभ से जुड़े इस ऐतिहासिक कालजयी अद्वितीय अदभुत गीत को रेडियोनामा पर आपके लिए संजो सकें ।
मुझे पता है कि आपकी इच्छा इसे अपने मोबाइल, आइ-पॉड, सी.डी.प्लेयर वग़ैरह पर संजोने की भी होगी । इससे पहले कि आप इसे चुराने का कोई और तरीक़ा खोजें ये रहा डाउनलोड लिंक ।
इस गाने के बारे में पंडित जी की सुपुत्री लावण्या जी ने जो लिखा है उसे यहां
पढिये ।
ये रहे इस गीत के बोल--
नाच रे मयूरा!
खोल कर सहस्त्र नयन,
देख सघन गगन मगन
देख सरस स्वप्न, जो कि
आज हुआ पूरा !
नाच रे मयूरा !
गूँजे दिशि-दिशि मृदंग,
प्रतिपल नव राग-रंग,
रिमझिम के सरगम पर
छिड़े तानपूरा !
नाच रे मयूरा !
सम पर सम, सा पर सा,
उमड़-घुमड़ घन बरसा,
सागर का सजल गान
क्यों रहे अधूरा ?
नाच रे मयूरा !
मन्ना डे को रेडियोनामा परिवार की ओर से जन्मदिन की बधाईयां ।।
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