रेडियोनामा के पाठक पंडित नरेंद्र शर्मा से अपरिचित नहीं हैं । हम रेडियोनामा पर कई बार जिक्र कर चुके हैं कि विख्यात कवि, गीतकार और ब्रॉडकास्टर पंडित नरेंद्र शर्मा विविध भारती के पितृपुरूष रहे हैं । विविध भारती की स्थापना, उसके कार्यक्रमों के स्वरूप और नामकरण में पंडित जी का अप्रतिम योगदान रहा है । ये हमारा सौभाग्य रहा है कि उनकी सुपुत्री लावण्या शाह रेडियोनामा से नियमित रूप से जुड़ी हैं और परदेस में रहते हुए भी रेडियोनामा के लिए नियमित आलेख लिखती और भेजती रही हैं । कल ई-मेल के ज़रिए उन्होंने अपने पिताजी का एक ऑडियो क्लिप भेजा है । मुझे लगता है कि ये जयमाला कार्यक्रम का अंश है । इस ऑडियो-क्लिप में पंडित नरेंद्र शर्मा कुछ कॉम्पेयरिंग करते हुए फिल्मी/गैरफिल्मी गीत बजा रहे हैं । आपको बता दूं कि इस ऑडियो-क्लिप में दो गीत भी शामिल हैं । एक फिल्म 'उत्सव' का 'सांझ ढले गगन तले' और दूसरा एक भजन है, छाया गांगुली की आवाज़ में---'तुम्हीं मेरे रसना' ।
मुझे विश्वास है कि रेडियोनामा के पाठकों के लिए ये एक दिव्य अनुभव होगा ।
पंडित नरेंद्र शर्मा की आवाज़--लावण्या जी के ख़ज़ाने से ।
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अरे हां एक सूचना देनी रह गयी थी । आज विविध भारती पर शाम चार बजे आप सुन सकते हैं युवा संगीतकार प्रीतम से रेडियो सखी ममता की लंबी बातचीत पर आधारित कार्यक्रम का पहला भाग । रेडियोनामा के पाठकों को बता दें कि इस कार्यक्रम में प्रीतम ने अपने कई गीतों की रचना प्रक्रिया की चर्चा की है । तो ज़रूर सुनिएगा ।
