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Friday, May 20, 2011

वेल कम टू विविध भारती ..महेंद्र मोदी

पिछले करीब 4-5 दिन पर विविध भारती सेवा पर सहायक केन्द्र निर्देशक के रूप में श्री महेन्द्र मोदी दिल्ली से लौट आये है। उनकी निवृती के कितने साल बाकी है और उनमें उनको कितनी छुट्टी लेनी है वह तो पता नहीं, पर एक काम उन्होंने अपने ही क्रिएशन विविध भारती की वेबसाईट को फ़िर से सक्रिय कर दिया है और इसी पर अपनी वापसी और इस साईट के सक्रिय होने की बात लिखी है। तो श्रोताओं की और से और रेडियोनामा की और से उनका स्वागत है और इस ख़बर को मुझे सबसे पहले अन्नपूर्णा जी ने मुझ तक पहुँचा कर मुझे ही इस पोस्ट लिख़ने के लिये कहा, अन्नपूर्णाजी का धन्यवाद ।

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लेम्यूअल हेरी साहब को श्रद्धाजंली
एक दु:खद समाचार यह है कि आकाशवाणी अमदावाद के स्पस्ट उच्चारण वाले और सुंदर आवाज के मालिक, जिसे मैं बचपन से सुन कर खुश होता था, वैसे गुजराती और अंग्रेजी समाचार वाचक श्री लेम्यूअल हेरी साहब का निधन अमदावाद में हुआ । इस पर रेडियोनामा की तरफ़ से ख़ेद प्रकट करता हूँ ।

उनसे मेरी फोन पर बात हुई थी और स्पीकर फोन पर बात उनकी आज्ञा से मेरे निजी संग्रह के लिये रेकोर्ड कर के रख़ने का भी सौभाग्य मुझे मिला है पर सैद्धांतिक रूप से मिलना तय होते हुए भी ईश्‍वर ने हमारी नहीं सुनी और उनसे मिलने का कोई मौका ही नहीं बना, इसका मुझे हमेशा अफ़सोस रहेगा।

मेरे रेडियो श्रवण के शुरूआती दिनोंमें हर बुधवार गीतमाला के बाद ऑल इन्डिया रेडियो के राष्ट्रीय अंग्रेजी समाचार के बाद श्री हैरी, समाचार दर्पण नामक गुजराती रेडियो न्यूज रील कार्यक्रम प्रवक्ता के रूप में करते थे, तो इस कार्यक्रम का आकर्षण सबसे ज्यादा उनकी आवाज ही थी और उनसे जब इस कार्यक्रम को अन्य वक्ता को दिया गया तब वे अच्छे होने पर भी उनका स्थान मेरे मन में नहीं पा सके थे।

कुछ समय वे दिल्ही राष्ट्रीय गुजराती समाचार पठन के लिये भी भेज़े गये थे। गीतो भरी कहानी उनका ही आविष्कार था। जो बाद में गीत-गाथा नाम से स्व. रजनी शास्त्रीजी प्रस्तुत करते थे, जो हिन्दी फिल्मी गीतों को पिरोये हुए गुजराती भाषामें कहानी के रूप में प्रस्तुत होते थे।

श्री लेम्यूअल हेरी साहब को विनम्र श्रद्धांजलि

पियुष महेता ।

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