आज यानि ता. 8 मार्च एक जमाने के प्रसिद्ध और अपनी निज़ी स्टाईल के इलेक्ट्रीक हवाईन गिटार और वायोलिन वादक स्व. वान शिप्ले को इनकी मृत्यू तारीख़ पर श्रद्धांजलि के रूपमें उनकी एक आज के दिनोंमें अप्राप्य धून फिल्म धून्ध के शिर्षक गीत की इलेक्ट्रीक हवाईन गिटार पर एक अंश के रूपमें प्रस्तूत है ।
आज स्व. मनोहरी सिंह का जनम दिन है पर उन पर पोस्ट उनकी मृत्यू तारीख़ पर होगी ।
पियुष महेता ।
सुरत ।
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Tuesday, March 8, 2011
आज वान शिप्ले को पूण्य तिथी पर श्रद्धांजलि
Tuesday, March 9, 2010
आज 9 मार्च-प्रसिद्ध गिटार और वायोलिन वादक वान शिप्ले को श्रद्धांजलि
आज यानि दि. 9 मार्च के दिन अपनी शैली के मशहुर विद्यूत हवाईन गिटार और वायोलिन वादक स्व. वान शिप्ले की पूण्यतिथी पर उनको श्रद्धांजलि देते हुए एक थोडा अलग रूप से उनकी एक ही गाने 'आईये मेहरबान (फिल्म : हवराह ब्रिज) की दो धूने, जो दोनों इलेक्ट्रीक हवाईन ग़िटार पर ही प्रस्तूत है, पर इन दोनोंमें सप्तक कहीं कहीं अलग है और वाद्यवंद भी अलग है ।
पहली धून जब यह फिल्म कुछ साल पहेले एलपी रेकोर्डमें उन्होंनें बजाई थी जिसमें स्टीरीयो असर है और वाद्यवृंद में विजाणू वाद्य सिंथेसाईझर शामिल है । यह धून विविध भारती के राष्ट्रीय प्रसारणमें कभी प्रस्तूत हुई है और रेडियो श्री लंका से भी बजती है ।
जब की दूसरी धून भी सुनिये, जो उस समय 78 आर पी एम रेकोर्डमें उस जमानेमें बजाई थी, जब की फिल्म हावरा ब्रिज नयी और ताझा थी तो स्वाभावीक है कि यह धून मोनो रेकोर्डिंग में है और उसमें वाद्यवृंद मे6 सिर्फ दो या तीन साज़िंदे थे । यह धून सिर्फ़ रेडियो श्री लंका से ही बजती है ।
तो आशा करता हूँ, कि यह दोनों धूने आपको पसंद आयेगी ।
इन दिब्नों इन वादक कलाकारों की जन्म तारीख या मृत्यू तारीख लगातार आने के कारण मेरी पोस्टॅ करीब रोज़ाना प्रस्तूत हो रही है और आनेवाले कल भी एक पोस्ट लिख़ी जायेगी । उसके बाद मार्च महिनेमें 24 तारीख़ को एक श्रदांजलि पोस्ट प्रस्तूत होगी । कुछ पाठको को भी यह पसंद आती है तो आनंद होता है ।
पियुष महेता ।
नानपूरा, सुरत-395001.
पहली धून जब यह फिल्म कुछ साल पहेले एलपी रेकोर्डमें उन्होंनें बजाई थी जिसमें स्टीरीयो असर है और वाद्यवृंद में विजाणू वाद्य सिंथेसाईझर शामिल है । यह धून विविध भारती के राष्ट्रीय प्रसारणमें कभी प्रस्तूत हुई है और रेडियो श्री लंका से भी बजती है ।
जब की दूसरी धून भी सुनिये, जो उस समय 78 आर पी एम रेकोर्डमें उस जमानेमें बजाई थी, जब की फिल्म हावरा ब्रिज नयी और ताझा थी तो स्वाभावीक है कि यह धून मोनो रेकोर्डिंग में है और उसमें वाद्यवृंद मे6 सिर्फ दो या तीन साज़िंदे थे । यह धून सिर्फ़ रेडियो श्री लंका से ही बजती है ।
तो आशा करता हूँ, कि यह दोनों धूने आपको पसंद आयेगी ।
इन दिब्नों इन वादक कलाकारों की जन्म तारीख या मृत्यू तारीख लगातार आने के कारण मेरी पोस्टॅ करीब रोज़ाना प्रस्तूत हो रही है और आनेवाले कल भी एक पोस्ट लिख़ी जायेगी । उसके बाद मार्च महिनेमें 24 तारीख़ को एक श्रदांजलि पोस्ट प्रस्तूत होगी । कुछ पाठको को भी यह पसंद आती है तो आनंद होता है ।
पियुष महेता ।
नानपूरा, सुरत-395001.
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PIYUSH MEHTA-SURAT
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Monday, March 9, 2009
हवाईन गिटार और वायोलिन वादक स्व. वान सिप्ले को प्रथम पूण्य तिथी पर श्रद्धांज्ली
आज यानि दि. 9 मार्च के दिन ह्वाईदो धूनें :न ग़िटार और वायोलिन वादक स्व वान सिप्ले को उनकी प्रथम पूण्य तिथी पर श्रद्धांजली के रूपमें प्रस्तूनत है दो धूने :
प्रथम धून इलेक्ट्रीक हवाईन गिटार पर फिल्म शोर से है और गाने के बोल है एक प्यार का नग्मा है । यह धून उन्होंने बाद में वायोलिन पर दो बार प्रस्तूत की थी, जिसमें से एक कभी प्रस्तूत करूंगा । यह धून 45 आर पी एम ई पी रेकोर्ड पर आयी थी, इस लिये बीच वाले संगीत या मेलोडी वादन का पुनरावर्तन उन्होंने टाल दिया है, जो रेकोर्ड की दायरे के बाहर हो सकता था ।
यह दूसरी धून वायोलिन पर है जो फिल्म चोरी चोरी से और गाने के बोल है 'ये रात भीगी भीगी, जो उनकी अंतीम एल पी बेलेंस्ड ब्रास से है जिन्में वाद्यवृंद संयोजन सुरेन्द्र सोंढी का है और ज्यादा साझ नाम के मुताबिक ट्रम्पेट, ट्रम्बोन जैसे है और सेक्सोफोन और वेस्टर्न फ्ल्यूट को श्री श्याम राज कारने बजाया है, जिनसे पिछली दि 21 को बिल्लीमोरामें उनके प्रसिद्ध पियानो एकोर्डियन और पियानो वादक श्री एनोक डेनियेल्स के साथ एक लाईव शॉ में देख़ा और सुना था, जो वहाँ कि कला संस्था गुंजन कला निकेतन और उसके संचालक श्री नरेश मिस्त्री के सौजन्य से था । और जैसे की श्री एनोक डेनियेल्स साहब तो 10 साल से पहचानते है उन्होंने श्याम राज कारजी से भी मूलाकात करवाई थी । एक बात और है कि आज शायम राजजी सुरतमें एक लाईव शॉ के लिये आये है और उनसे मिलना होगा तथा सुनना भी होगा । इन दोनों शॉ के बारेमें एक अलग पोस्ट लिख़ने वाला हूँ ।
पियुष महेता ।
नानपूरा, सुरत ।
प्रथम धून इलेक्ट्रीक हवाईन गिटार पर फिल्म शोर से है और गाने के बोल है एक प्यार का नग्मा है । यह धून उन्होंने बाद में वायोलिन पर दो बार प्रस्तूत की थी, जिसमें से एक कभी प्रस्तूत करूंगा । यह धून 45 आर पी एम ई पी रेकोर्ड पर आयी थी, इस लिये बीच वाले संगीत या मेलोडी वादन का पुनरावर्तन उन्होंने टाल दिया है, जो रेकोर्ड की दायरे के बाहर हो सकता था ।
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यह दूसरी धून वायोलिन पर है जो फिल्म चोरी चोरी से और गाने के बोल है 'ये रात भीगी भीगी, जो उनकी अंतीम एल पी बेलेंस्ड ब्रास से है जिन्में वाद्यवृंद संयोजन सुरेन्द्र सोंढी का है और ज्यादा साझ नाम के मुताबिक ट्रम्पेट, ट्रम्बोन जैसे है और सेक्सोफोन और वेस्टर्न फ्ल्यूट को श्री श्याम राज कारने बजाया है, जिनसे पिछली दि 21 को बिल्लीमोरामें उनके प्रसिद्ध पियानो एकोर्डियन और पियानो वादक श्री एनोक डेनियेल्स के साथ एक लाईव शॉ में देख़ा और सुना था, जो वहाँ कि कला संस्था गुंजन कला निकेतन और उसके संचालक श्री नरेश मिस्त्री के सौजन्य से था । और जैसे की श्री एनोक डेनियेल्स साहब तो 10 साल से पहचानते है उन्होंने श्याम राज कारजी से भी मूलाकात करवाई थी । एक बात और है कि आज शायम राजजी सुरतमें एक लाईव शॉ के लिये आये है और उनसे मिलना होगा तथा सुनना भी होगा । इन दोनों शॉ के बारेमें एक अलग पोस्ट लिख़ने वाला हूँ ।
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पियुष महेता ।
नानपूरा, सुरत ।
Sunday, March 23, 2008
०८-०३-२००८ : अपने लहेजे के जानेमाने इलेक्ट्रीक हवाईन गिटार और वायोलिन वादक वान सिप्ले का निधन :

· इस तसवीरमें लेफ्ट पर गिटार के साथ स्व. वान शिप्ले, बीचमें गायक श्री तलत स्व. मेहमूद श्री राइट पर अपने एकोर्डियन के साथ उनके हर हमेंश के साथी रहे मीठी धूनो के प्रस्तूत कर्ता श्री एनोक डेनियेल्स है ।
कल सुबह प्रसिद्ध पियनो और पियानो एकोर्डियन वादक श्री एनोक डेनियेल्स साहबसे फोन सम्पक हुआ तो उनसे पता चला कि जिन्होंने उनको इस क्षेत्रमें बढावा दिया, वैसे श्री वान सिप्लेजीने दि. ०८-०३-०८ के दिन अपनी अन्तिम सांस ली और इस दूनिया से चल पडे । वे ८१ साल के थे और २० साल पहेले आये लकवा के हमले से उनकी वाचा तभी चली गयी थी ।
वे लख़नौ से मुम्बई आये थे । उन्होंने गिटार भारतीय शास्त्रीय पद्धतीसे और वायोलिन पाश्च्यात्य नोटेसन पद्धती से शीखा था । एच.एम.वी.ने उनके कई ७८ आरपीएम, ४५ आरपीएम (ईपीझ) तथा ३३ आरपीएम (एलपीझ और सुपर -७ ) रेकोर्ड्झ जारि किये थे । जो आज भी रेडियो श्री लंका और विविध भारती से बजते है (हालाकि विविध भारती श्री मनोहरी सिंह और ब्रियान सिलाझ के दे दो बार किये गये अपवाद को छोड़ किसी की भी धूनो को अन्तराल में बजाते समय उन धून के प्रस्तूत कर्ता को क्रेडिट नहीं देता है ।
निर्माता अभिनेता श्री चंद्रशिखर की फिल्म चा चा चा में उन्होंने अभिनय भी किया था जो शायद एक मात्र फिल्म उनकी अभिनेता के रूपमें थी । एक समय फिल्मी धूने सिर्फ़ रेडियो सिलोन पर सुबह ७ से ७.१५तक सभा की शुरूआतमें आती थी ९आज भी सुबह सिर्फ़ ६ से ६.०५ तक आती है ) । इस लिये इन वादक कलाकारों को मोर्निंग स्टार यानि सुबह का तारा कहा जाता था । एक अंग्रेजी अख़बारने उनके लिये फिल्म चा चा चा की रिलीझ के पहेले लिखा था, कि मोर्निंग स्टार इवनिंग स्टार बनने जा रहा है । एक और बात कि, रूपेरी परदे पर वे गिटार वादक वान सिप्ले के रूपमें शायद १९६० की फिल्म घर की लाज में प्रस्तूत हुए थे । फिल्म जो भी हो पर यह फिल्म दिल्ही दूर दर्शन और लघू शक्ति सह प्रसारण केन्द्रों से प्रस्तूत हुई थी, जिसमें स्पेशियल एपियरन्स देने वाले कलाकार के रूपमें शिर्षकमें उनके नाम को देख (पढ) कर इस गिटार वादन को मैंनें अपने निजी संग्रहमें रखा है ।
इस फिल्म के एक गीत इस चमेली के मन्डवे तले को उन्होंने हवाईन गिटार पर प्रस्तूत किया था , जो आज भी कभी कभी विविध भारती की केन्द्रीय सेवा अन्तरालमें बजाती है । मैनें करीब १९७२में सुरतमें उनको श्री एनोक डेनियेल्स साहब केर साथ एक स्टेज शोमें देखा और सुना था । (हालाकि उस समय भी मेरा मूख्य आकर्षण श्री एनोक डेनियेल्स का एकोर्डियन था ।)
वे अपनी स्टाईल के अनोखे वादक थे, वहाँ दूसरी और उनका स्टाईल कोन्ट्रावर्शियल भी था । उनका एक मक्स़द था अपनी अलग पहचान बनानेका और कायम रख़नेका । इस लिये एक और कई गानोंकी धूने उनकी स्टाईल के कारण गानो के हिसाबसे ज्यादा निखरती थी, वहाँ कई सुन्दर गानोंकी धूने थोडी थोडी इधर उधर भी होती कई लोगोको मेहसूस होती थी, यानिकी वे जान बूजकर करते थे । कोई भी धून उनकी सबसे पहेली बार सुनने पर भी इनकी स्टाईल से परिचीत श्रोता को पता चल ही जाता था, कि ये तो वान सिप्ले ही है ।
इधर इसमें से प्रथम प्रकारकी यानि गाने से भी ज्यादा निख़रने वाली एक धून फिल्म दिल दे के देखो के शिर्षक गीत की प्रस्तूत है इलेक्ट्रीक हवाईन गिटार पर उनको श्रद्धांजलि के रूपमें प्रस्तूत है, जो एक समय आजके हिसाबसे अलग रूपमें उस समय दो पहर तीन से साढे तीन के बीचमें श्री युनूस खान द्वारा प्रस्तूत किये गये विविध भारती की केन्द्रीय सेवा के इन्द्र धनुष कार्यक्रम से मैंनें प्राप्त कि थी । इस धूनमें मूल गानेमें जहाँ गिटार है, वहाँ, इस धूनमें श्री एनोक डेनियेल्स साहब का एकोर्डियन बजा है ।
कल सुबह प्रसिद्ध पियनो और पियानो एकोर्डियन वादक श्री एनोक डेनियेल्स साहबसे फोन सम्पक हुआ तो उनसे पता चला कि जिन्होंने उनको इस क्षेत्रमें बढावा दिया, वैसे श्री वान सिप्लेजीने दि. ०८-०३-०८ के दिन अपनी अन्तिम सांस ली और इस दूनिया से चल पडे । वे ८१ साल के थे और २० साल पहेले आये लकवा के हमले से उनकी वाचा तभी चली गयी थी ।
वे लख़नौ से मुम्बई आये थे । उन्होंने गिटार भारतीय शास्त्रीय पद्धतीसे और वायोलिन पाश्च्यात्य नोटेसन पद्धती से शीखा था । एच.एम.वी.ने उनके कई ७८ आरपीएम, ४५ आरपीएम (ईपीझ) तथा ३३ आरपीएम (एलपीझ और सुपर -७ ) रेकोर्ड्झ जारि किये थे । जो आज भी रेडियो श्री लंका और विविध भारती से बजते है (हालाकि विविध भारती श्री मनोहरी सिंह और ब्रियान सिलाझ के दे दो बार किये गये अपवाद को छोड़ किसी की भी धूनो को अन्तराल में बजाते समय उन धून के प्रस्तूत कर्ता को क्रेडिट नहीं देता है ।
निर्माता अभिनेता श्री चंद्रशिखर की फिल्म चा चा चा में उन्होंने अभिनय भी किया था जो शायद एक मात्र फिल्म उनकी अभिनेता के रूपमें थी । एक समय फिल्मी धूने सिर्फ़ रेडियो सिलोन पर सुबह ७ से ७.१५तक सभा की शुरूआतमें आती थी ९आज भी सुबह सिर्फ़ ६ से ६.०५ तक आती है ) । इस लिये इन वादक कलाकारों को मोर्निंग स्टार यानि सुबह का तारा कहा जाता था । एक अंग्रेजी अख़बारने उनके लिये फिल्म चा चा चा की रिलीझ के पहेले लिखा था, कि मोर्निंग स्टार इवनिंग स्टार बनने जा रहा है । एक और बात कि, रूपेरी परदे पर वे गिटार वादक वान सिप्ले के रूपमें शायद १९६० की फिल्म घर की लाज में प्रस्तूत हुए थे । फिल्म जो भी हो पर यह फिल्म दिल्ही दूर दर्शन और लघू शक्ति सह प्रसारण केन्द्रों से प्रस्तूत हुई थी, जिसमें स्पेशियल एपियरन्स देने वाले कलाकार के रूपमें शिर्षकमें उनके नाम को देख (पढ) कर इस गिटार वादन को मैंनें अपने निजी संग्रहमें रखा है ।
इस फिल्म के एक गीत इस चमेली के मन्डवे तले को उन्होंने हवाईन गिटार पर प्रस्तूत किया था , जो आज भी कभी कभी विविध भारती की केन्द्रीय सेवा अन्तरालमें बजाती है । मैनें करीब १९७२में सुरतमें उनको श्री एनोक डेनियेल्स साहब केर साथ एक स्टेज शोमें देखा और सुना था । (हालाकि उस समय भी मेरा मूख्य आकर्षण श्री एनोक डेनियेल्स का एकोर्डियन था ।)
वे अपनी स्टाईल के अनोखे वादक थे, वहाँ दूसरी और उनका स्टाईल कोन्ट्रावर्शियल भी था । उनका एक मक्स़द था अपनी अलग पहचान बनानेका और कायम रख़नेका । इस लिये एक और कई गानोंकी धूने उनकी स्टाईल के कारण गानो के हिसाबसे ज्यादा निखरती थी, वहाँ कई सुन्दर गानोंकी धूने थोडी थोडी इधर उधर भी होती कई लोगोको मेहसूस होती थी, यानिकी वे जान बूजकर करते थे । कोई भी धून उनकी सबसे पहेली बार सुनने पर भी इनकी स्टाईल से परिचीत श्रोता को पता चल ही जाता था, कि ये तो वान सिप्ले ही है ।
इधर इसमें से प्रथम प्रकारकी यानि गाने से भी ज्यादा निख़रने वाली एक धून फिल्म दिल दे के देखो के शिर्षक गीत की प्रस्तूत है इलेक्ट्रीक हवाईन गिटार पर उनको श्रद्धांजलि के रूपमें प्रस्तूत है, जो एक समय आजके हिसाबसे अलग रूपमें उस समय दो पहर तीन से साढे तीन के बीचमें श्री युनूस खान द्वारा प्रस्तूत किये गये विविध भारती की केन्द्रीय सेवा के इन्द्र धनुष कार्यक्रम से मैंनें प्राप्त कि थी । इस धूनमें मूल गानेमें जहाँ गिटार है, वहाँ, इस धूनमें श्री एनोक डेनियेल्स साहब का एकोर्डियन बजा है ।
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