विविध भारती पर शास्त्रीय संगीत से परिचय कराने वाला सुन्दर कार्यक्रम आता है , सुबह ७.३० बजे से ७.४५ बजे तक - संगीत सरिता । आज इस कार्यक्रम की एक अत्यन्त सुन्दर कड़ी पूरी हुई । सरोद के उद्गम और विकास , उससे जुड़े घराने , उससे जुड़ीं बन्दिशें आदि पर विशद चर्चा हुई दो उस्तादों के द्वारा । सरोद वादक बुद्धदेव दासगुप्त से प्रख्यात सितारवादक उस्ताद अब्दुल हलीम जाफ़र खाँ ने इस कार्यक्रम के लिए बातचीत की थी । संगीत के दो धुरन्धरों की आपसी बातचीत में सहजता ,सरलता थी और प्रश्नों को ऐसे प्रस्तुत किया जा रहा था ताकि आम श्रोता का ज्ञान वर्धन हो। यह कार्यक्रम विविध भारती के लिए १९९५ में छाया गांगुलीजी ने तैय्यार किया था ।
विविध भारती और इस कार्यक्रम से जुड़े जो भी लोग जीवित हैं उन्हें युनुस ख़ान के जरिए मेरी पत्नी डॉ. स्वाति का 'आभार ' पहुँचे । स्वाति का जन्मस्थान ग्वालियर है इसलिए उन्हें लाजमीतौर पर शास्त्रीय संगीत में रुचि है ।
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Wednesday, May 21, 2008
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