सागर नाहर साहब ने जों हुनर सिखाया है उसे सलाम करते हुए पेश करता हूँ ये पोस्ट
पहले एक प्लेयर क्लिक कीजियेगा फिर दूसरा
सबसे नए तीन पन्ने :
Showing posts with label irfan. Show all posts
Showing posts with label irfan. Show all posts
Saturday, July 31, 2010
Saturday, October 27, 2007
रंग भेद, काली रे काली रे...और ये काली कलूटी के नखरे बड़े...
दो दिन पहले रेडियोवाणी पर यूनुस भाई ने अंतरा चौधरी का गाया एक गीत आपको सुनाया था--काली रे काली रे...
मैने उस गीत से जुड़ी अपनी एक बेवक़ूफ़ी का ज़िक्र किया तो उम्मीद थी कि आपमे से कोई मुझे सहारा देगा लेकिन लगता है कि हम अपनी ही बात लिखते और पढ़ते हैं या फिर वाह बहुत बढिया. बधाई का जुमला हमने अपने क्लिपबोर्ड में copy कर रखा है और उसे यहां वहां चिपकाते रहते हैं.
काले गोरे का मसला क्या इतना भी ग़ौर तलब नहीं है कि उस पर दो शब्द कहे जाएं?
पेश है अपने रंग हज़ार से ये गीत...
सोचिये रेडियो से उन दिनों हज़ार बार बजने वाले इस गीत पर काली बीवियां क्या बहुत खुश होती होंगी?
अपने_रंग_हजार, इरफान, मेरी_काली_कलूटी
मैने उस गीत से जुड़ी अपनी एक बेवक़ूफ़ी का ज़िक्र किया तो उम्मीद थी कि आपमे से कोई मुझे सहारा देगा लेकिन लगता है कि हम अपनी ही बात लिखते और पढ़ते हैं या फिर वाह बहुत बढिया. बधाई का जुमला हमने अपने क्लिपबोर्ड में copy कर रखा है और उसे यहां वहां चिपकाते रहते हैं.
काले गोरे का मसला क्या इतना भी ग़ौर तलब नहीं है कि उस पर दो शब्द कहे जाएं?
पेश है अपने रंग हज़ार से ये गीत...
सोचिये रेडियो से उन दिनों हज़ार बार बजने वाले इस गीत पर काली बीवियां क्या बहुत खुश होती होंगी?
अपने_रंग_हजार, इरफान, मेरी_काली_कलूटी
Subscribe to:
Posts (Atom)
