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Wednesday, June 22, 2011

सुनिए मन्‍‍ना डे को 'नाच रे मयूरा' के बारे में

विविध भारती का आरम्‍भ तीन अक्‍तूबर 1957 को हुआ था।
सभी जानते हैं कि पंडित नरेंद्र शर्मा विविध-भारती की स्‍थापना के मुख्‍य-आधार बने।

विविध-भारती पर जो पहला गीत बजा, वो कोई फिल्‍मी गाना नहीं था। उसे इस अवसर के लिए पंडित जी ने स्‍वयं लिखा था। बाद में एच.एम.वी. ने इसे अपने अलबम वर्षा-ऋतु का हिस्‍सा भी बनाया। एक बहुत संदर गीत है ये। राग है मियां की मल्‍हार।

मन्‍नादा इन दिनों बैंगलोर में रहते हैं। मई में मैंने उन्‍हें जन्‍मदिन की बधाई दी तो वो बड़े प्रसन्‍न हुए। तभी इस गाने का जिक्र भी चला। इसलिए उन्‍हीं दिनों दोबारा फोन करके मैंने अपने मोबाइल फोन पर मन्‍ना दा को रिकॉर्ड किया। मक़सद था ये जानना कि इस गाने की रिकॉर्डिंग से जुड़ी कौन सी यादें हैं उनकी।
ये रही इस रिकॉर्डिंग की ऑडियो फाइल। ये बातचीत केवल पांच मिनिट की है।




इस बातचीत को सुनकर इसका शब्‍दांकन किया है हमारे मित्र सागर नाहर ने।

यूनुस खान: दादा ये जो गाना  है नाच रे मयूरा, इसके बारे में आपको क्या बातें याद आती है?


मन्ना डे: अनिल दा, अनिल बिस्वास साहब,  उन दिनों में अनिल बिस्वास का नाम बहुत ज्यादा था और मेरे ख्याल से वो एक एसे म्युजिक डिरेक्टर थे जिनके लिए हर म्युजिक डिरेक्टर के दिल में एक बहुत बड़ी जगह होती  थी। तो अनिल दा ना जाने क्यूं मुझसे बहुत- बहुत खुश थे, मेरे गाने की जो स्टाइल है उससे और अनिल दा बोला (बोले ) कि जब अच्छी चीज बनेगी तब मैं तेरे को मैं बोलूंगा। और definitely उन दिनों में  अगर अनिल बिस्वास कहें  कि  " आओ  मेरे गाने के लिए आओ; it is to be an event...definitely सो, अनिलदा जब  वो गाना बनाया और रिहर्सल करने के लिए मैं उनके घर पर गया, नरेन्द्र जी वहां बैठे थे।  नरेन्द्र शर्मा जी।

एक छोटा कद का आदमी बहुत ही.. यानि बहुत ही क्या बताएं जैसे कि educated atmosphere was manna da there and  उन्होंने कहा...नरेन्द्रजी बोले.. मन्नाजी  पहली मर्तबा आप गा रहे हैं मेरे गाने...मैं कोशिश करूंगा आपको खुश करने के लिए... मैने कहा आप क्या खुश करेंगे, आप तो बुजुर्ग लोग हैं, और आप अनिल दा  के साथ काम कर रहे हैं। ये मेरे लिए बहुत है कि अनिल दा (ने) मुझे चुना।  इस गाने के लिए। तब गाना.......नरेन्द्र शर्मा जी vividh bharati में I think he was very powerful person in vividh bharati........so that was the occasion. तो गाना रिकॉर्ड किया, विविध-भारती के लिए। and that songs became talking subject in the industry also. 

I remember  (गीतकार) शैलेंद्र (ने) एक मर्तबा पूछसे पूछा कि, इन दिनों अच्छा क्या गाया मन्ना दा आपने? एक गाना प्राईवेट सोंग वो विविध भारती के लिए अनिल दा ने बनाया वो मुझसे गवाया उन्होने और फिर मैने सुनाया नाच  रे मयूरा, खोलकर सहस्‍त्र नयन, देख सघन मगन गगन देख सरस स्वप्न जो आज हुआ  पूरा । तो हमारे शैलेन्द्र जी बोले " मन्ना दा क्या अनुप्रास है, 'देख सघन गगन मगन'। ये नरेन्द्र शर्मा के अलावा कौन लिख सकता है!!!! तो उन्होंने शेलेन्द्र जी मुझसे लिखवा लिया वो गाना कि आप लिख दीजिए मुझे वो गाना.. हम अपने पास रख लेंगे।
 
मुझे ये हुआ कि  भई अनिल दा chose me and narendra sharma ji he was also happy with my singing and later on ... मेरी लड़की; बड़ी लड़की रमा  जिनका नाम है  जो अभी अमेरिका में है, वो कॉलेज में पढ़ती थी और उनके साथ एक लड़का पढ़ता था जिनका नाम था परितोष, परितोषजी थे नरेद्र  शर्मा जी के बेटा, रमा बोला कि डैडी आपने  गाया उनका गाना परितोष बोल रहा था। मैने कहा  नहीं भई.. तो  नरेन्द्रजी का लड़का है, उनका बेटा । तो मैने कहा क्यूं नहीं बुलाती तुम उनको। इस  सिलसिले में परितोष हमारे घर आना शुरु हुआ। और परितोष एक छोटी सी पिक्‍चर बनाने लगा। पिक्चर में नरेन्दर जी  लिख रहे थे.. द सब्जेक्ट वास नरेन्दर जी, एंड  गाने भी वो लिख रहे थे। मैने तीन चार भी गाने गाए थे उसमें। नरेन्द्र जी ने लिखे थे। और नरेन्द्रजी के बारे में मैं यह कहूंगा इतना याने.. ब्यूटीफुल पर्सनालिटी थी ; इतना छॊटा सा आदमी थे लेकिन जहाँ नरेन्दर जी कभी किसी जगह भी एन्टर लिया  तो बिल्कुल जैसे बल्ब जल जाता था, जो मुझे बहुत अच्छा लगता था। और उनकी जो ये है ना बात करने का तरीका इतना अच्छा इतना soft, इतना polished होता था कि उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।

यूनुस खान.. दादा बहुत बहुत शुक्रिया आपने ये बातें कीं।

ये रहा वो अनमोल गीत।

नाच रे मयूरा, नाच रे मयूरा
खोलकर सहस्र नयन, देख सघन गगन मगन
देख सरस स्वपन जो के आज हुआ पूरा
नाच रे मयूरा, नाच रे मयूरा

गूँजे दिशी\-दिशी मृदंग प्रति पल नव राग रंग
रिमझिम के सरगम पर, रिमझिम के सरगम पर
छिड़े तान पूरा
नाच रे मयूरा, नाच रे मयूरा

सम पर सम सा पर सा
aalaap
सम पर सम सा पर सा
रे प ग म रे प म प नि ध ध नि प प नि ध ध नि सा
म म रे सा नि सा रे स नि नि प म
ग म रे सा ग म रे सा ग म रे सा
सम पर सम सा पर सा
उमड़ घुमड़ घन बरसा, घन बरसा
सागर का सजल गान क्यों रहे अधूरा
नाच रे मयूरा, नाच रे मयूरा

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