सबसे नए तीन पन्ने :

Tuesday, March 3, 2009

महिला दिवस पर याद आ रहा है यह गीत

महिला दिवस आ रहा है। यूँ तो महिलाओं के विभिन्न रूपों पर कई फ़िल्मी गीत है जो रेडियो से हम सुनते रहते है पर आज जिस गीत की हम चर्चा कर रहे है वो महिला की वास्तविक स्थिति बताता है ख़ासकर उसकी बरसों पहले की स्थिति।

यह गीत शायद औरत फ़िल्म का है जिसमें मुख़्य भूमिकाओं में थे राजेश खन्ना और पद्मिनी। यह फ़िल्म सत्तर के दशक के शुरूवाती सालों की है शायद… पद्मिनी वही दक्षिण भारतीय अभिनेत्री है जिसने राजकपूर के साथ मेरा नाम जोकर में काम किया था।

इस गीत को गाया है लता मंगेशकर ने। इसके अलावा और कोई जानकारी मेरे पास नहीं है। होगी भी कैसे, किसी समय रेडियो से बहुत बजने वाला यह गीत अब बजना बन्द जो हो गया है। कुछ बोल मुझे याद है जो इस तरह है -

औरत ने जन्म दिया मर्दों को
मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला
जब जी चाहा दुत्कार दिया
औरत ने जन्म दिया मर्दों को

तुलती है कहीं दीनारों में
बिकती है कहीं बाज़ारों में
नंगी नचवाई जाती है
अय्याशों के दरबारों में
-----------

------------
जिस कोख में इनका जिस्म ढला
उस कोख का कारोबार किया

मर्दो के लिए …
औरत के लिए जीना भी गुनाह

इसमें उर्दू लफ़्ज़ बहुत है, पता नहीं किस शायर ने लिखे है।

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

अपनी राय दें