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Tuesday, May 10, 2011

फिल्म रामनगरी का मधुर युगल गीत

सत्तर के दशक के अंतिम वर्षो या अस्सी के दशक के आरंभिक वर्षो में अमोल पालेकर की एक फिल्म रिलीज हुई थी - रामनगरी। यह फिल्म शायद अमोल पालेकर ने ही बनाई थी। इसकी नायिका हिन्दी फिल्मो की लोकप्रिय नायिका नही हैं, मुझे नाम याद नही आ रहा। इतना याद हैं इसमे सुलभा देशपाण्डेय और नीलू फूले भी मुख्य भूमिकाओं में रहे। यह फिल्म शायद अधिक नही चली थी। पर इस फिल्म का एक युगल गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था जिसमे शायद सुरेश वाडकर की आवाज हैं, दूसरी आवाज मुझे याद नही आ रही। बहुत मधुर, रोमांटिक, श्रृंगारिक गीत हैं यह। बहुत दिन से नही सुना, अब तो इसका एक भी बोल याद नही आ रहा।


पता नही विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत...

Tuesday, April 26, 2011

मोरा लागे नाही चित्त

आज इस श्रृंखला के सौंवे गीत की मैं चर्चा कर रही हूँ। यह गीत भी सत्तर के दशक के शुरूवाती वर्षों का हैं। फिल्म का नाम हैं शायद... इन्तेजार जो राकेश पाण्डेय और रिंकू जायसवाल अभिनीत हैं। इस गीत को शायद वाणी जयराम ने गाया हैं। अपने बोलो के कारण यह गीत खूब चला था। अब लम्बे समय से नही सुना। कुछ-कुछ बोल मुझे याद आ रहे हैं -

मोरा लागे नाही चित्त, ढूँढू इत उत नित नित लूं मैं तेरा नाम
पल-पल छिन छिन ........

पता नही विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत....

Tuesday, April 12, 2011

रामायण की चौपाइयों की फिल्मी प्रस्तुति

रामायण की चौपाइयों को शायद राजश्री प्रो ने पहली बार फिल्मी भक्ति गीत के रूप में प्रस्तुत किया।


अपनी दो फिल्मो में यह प्रस्तुतियां दी - पहली बार फिल्म गीत गाता चल में जसपाल सिंह की आवाज में जिसे सचिन पर फिल्माया गया और दूसरी बार फिल्म दुल्हन वही जो पिया मन भाए फिल्म में हेमलता की आवाज में जिसे रामेश्वरी पर फिल्माया गया।


दोनों बार मुखड़े में एक ही चौपाई रही पर अंतरे में दोनों फिल्मो में चौपाइयां अलग रही। दोनों में एक ही धुन दी रविन्द्र जैन ने। पहले रेडियो से अक्सर सुनते थे, यहाँ तक कि विशेष अवसर के लिए फरमाइशी कार्यक्रम में भी पर अब लम्बे समय से नही सुना।


मुखड़े की चौपाई हैं मंगल भवन अमंगल हारी ------


राम सिया राम सिया राम जय जय राम


अंतरे की चौपाइयां हैं -


जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी


राम सिया राम ----------------------------


कैसी अनाथ पुरूष बिन नारी


राम सिया राम ---------------------


पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, April 5, 2011

फिल्म तीसरी क़सम का लाली लाली गीत

राजकपूर और वहीदा रहमान अभिनीत फिल्म तीसरी क़सम में लोकगीत पर आधारित गीत हैं। एक गीत बहुत लम्बे समय से रेडियो से नही सुना जिसे बहुत सारी गायिकाओं ने गाया हैं, शायद लताजी की भी आवाज हैं। इसके बोल मुझे ठीक से याद नही आ रहे, कुछ इस तरह हैं - लाली लाली ---- में लाली रे दुल्हनिया पिया की पियारी भोली भाली रे दुल्हनिया उत्तर प्रदेश के लोक गीत की छाप नजर आती हैं इस गीत में। पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, March 29, 2011

फिल्म जंगल में मंगल के गीत

सत्तर के दशक में एक फिल्म रिलीज हुई थी - जंगल में मंगल यह फिल्म कॉमेडी सस्पेंस हैं। यह शायद किरण कुमार की पहली फिल्म हैं। नायिका हैं रीना राय। इसमे किरण कुमार नायक हैं, आजकल नकारात्मक चरित्र भूमिकाओं में नजर आते हैं। इस फिल्म में प्राण की तिहरी भूमिका हैं, सोनिया साहनी भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। इसमे एक किशोर कुमार का गाया रोमांटिक गीत हैं और शायद एक समूह गीत। दोनों गीत पहले बहुत सुनवाए जाते थे, अब लम्बे समय से नही सुना। इसके बोल मुझे याद नही आ रहे। पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Wednesday, March 16, 2011

कुदरत फिल्म की गजल

सत्तर के दशक की मल्टीस्टार फिल्म हैं - कुदरत

इस फिल्म से किशोर कुमार का गाया गीत हमें तुमसे प्यार कितना अक्सर सुनवाया जाता हैं पर इस फिल्म में लताजी की गाई एक गजल भी हैं जिसे प्रिया राजवंश पर फिल्माया गया हैं। इसके बोल मुझे याद नही आ रहे। बहुत समय हो गया रेडियो से नही सुनी यह गजल।

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Wednesday, March 2, 2011

चले भोले बाबा ब्याह रचाने

आज महा शिवरात्री पर्व के अवसर पर सुबह भूले बिसरे गीत कार्यक्रम का आरम्भ अमरकांत (दुबे) जी ने मुनीमजी फिल्म से हेमंत कुमार और साथियो के गाए शिवजी की बरात के इस भक्ति गीत से किया जिसे हमने बहुत दिन बाद सुना -

शिवजी बिहाने चले पालकी सजा के भभूति लगाके

इसे सुनकर हमें एक और ऐसा ही गीत याद आया जो शायद कैलाशपति फिल्म का हैं और जिसे शायद (मोहम्मद) रफी साहब ने गाया हैं। यह दोनों गीत पहले रेडियो से बहुत सुना करते थे, अब लम्बे समय से नही सुना। वास्तव में फिल्मी भक्ति गीतों का कार्यक्रम ऐसे समय प्रसारित होता हैं जो क्षेत्रीय कार्यक्रमों का समय हैं इसीसे इस तरह के गीत हम सुन नही पा रहे।

इस गीत के कुछ बोल मुझे याद नही आ रहे हैं -

चले भोले बाबा चले शंकर बाबा
होके बैल पे सवार करके अनूठा सिंगार
चले भोले बाबा ब्याह रचाने को

पार्वती हैं मगन आज स्वागत की कर तैयारी
नाचत गावत धूम मचावत शिव आए ससुरारी
कितनी ही बाराते देखी यह बारात हैं न्यारी
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भांति भांति के आए बराती ले ले के उपहार
शिव का छोटा संसार बसाने को

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, February 22, 2011

फिल्म धड़कन के गीत

सत्तर के दशक के आरंभिक वर्षो में एक फिल्म रिलीज हुई थी - धड़कन

इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में हैं संजय और मुमताज़। रमेश देव की महत्वपूर्ण भूमिका हैं। अन्य महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं डेविड और हेलन। इस फिल्म में हेलन सिर्फ डांसर ही नही हैं बल्कि उनकी अच्छी भूमिका हैं।

यह पुनर्जन्म की कहानी हैं और एक अपराध कथा हैं। इस फिल्म के गाने बहुत ही लोकप्रिय हुए थे खासकर संजय और मुमताज़ पर फिल्माए गए युगल गीत जिसे शायद रफी साहब ने आशा जी के साथ गाया हैं। पहले रेडियो से बहुत सुना करते थे पर अब किसी भी गीत का एक भी बोल मुझे याद नही आ रहा हैं।

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, February 1, 2011

मुकेश का गाया एक दर्द भरा शीर्षक गीत

साठ के दशक के अंतिम दौर में एक फिल्म रिलीज हुई थी - गुनाहों का देवता

इस फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में हैं जितेन्द्र, राजश्री और टुनटुन। इस फिल्म के गीत बहुत लोकप्रिय हुए थे और रेडियो से बहुत सुनवाए जाते थे। बहुत दिन हुए ये गीत नही सुने। आज मुकेश के गाए शीर्षक गीत के कुछ बोल याद आ रहे हैं -

चाहा था बनूंगा ------------- का देवता
मुझको बना दिया हैं गुनाहों का देवता

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, January 25, 2011

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश भक्ति गीत

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश भक्ति गीत याद आ रहा हैं। साठ के दशक के अंत में रिलीज हुई थी फिल्म - शतरंज

इसके मुख्य कलाकार हैं राजेन्द्र कुमार और वहीदा रहमान। इस फिल्म के गीत बहुत लोकप्रिय हुए थे। यह शीर्षक गीत शायद मुकेश का गाया हुआ हैं जिसमे देश भक्ति की भावना हैं। इसकी सिर्फ एक ही लाइन मुझे याद आ रही हैं -

शतरंज की चाल हमारी

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

आप सबको गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

Tuesday, January 18, 2011

फिल्म उस पार का गीत

सत्तर के दशक की फिल्म हैं - उस पार

फिल्म अच्छी हैं लेकिन फ्लाप रही। इसके गीत बहुत लोकप्रिय हुए थे और रेडियो से भी बहुत सुनवाए जाते थे पर अब बहुत दिन से यह गीत नही सुना।

मौसमी चटर्जी और विनोद मेहरा पर फिल्माया गया यह गीत लताजी ने या आशा जी ने गाया हैं। मुझे सिर्फ मुखड़ा याद आ रहा हैं -

ये जब से हुई जिया की चोरी

पतंग सा उड़े ये मन मेरा तेरे हाथो में डोरी

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, January 11, 2011

दो कलियाँ फिल्म का युगल गीत

साठ के दशक के अंतिम वर्षो की फिल्म हैं - दो कलियाँ जिसके नायक नायिका विश्वजीत और माला सिन्हा हैं। यह फिल्म बाल कलाकार के रूप में नीतू सिंह की पहली फिल्म हैं जिसमे उनकी दुहरी भूमिका हैं माला सिन्हा और विश्वजीत की बेटियों के रूप में।

यह फिल्म तेलुगु में भी बनी हैं जो नीतू सिंह की तरह श्रीदेवी की पहली फिल्म हैं।

इस फिल्म का नीतू सिंह पर फिल्माया गया बच्चो का गीत अक्सर सुनवाया जाता हैं पर यह युगल गीत नही सुने बहुत दिन हो गए। इसे महेंद्र कपूर और लताजी ने गाया हैं। इसके कुछ बोल मुझे याद आ रहे हैं -

तुम्हारी नजर क्यों खफा हो गई खता बक्श दो गर खता हो गई

हमारा इरादा तो कुछ भी न था तुम्हारी खता खुद सजा हो गई

सजा ही सही आज कुछ तो मिला हैं सजा में भी एक प्यार का सिलसिला हैं

मोहब्बत का अब कुछ भी अंजाम हो मुलाक़ात की इफतेदा हो गई

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, January 4, 2011

खुशियाँ ही खुशियाँ हो दामन में जिसके

1977 के आसपास राजश्री प्रो की एक फिल्म रिलीज हुई थी जिसका कथानक अलग तरह का था और इसी फिल्म से अभिनेत्री रामेश्वरी ने हिन्दी फिल्मो में क़दम रखा था। फिल्म हैं - दुल्हन वही जो पिया मन भाए

इस फिल्म के दो गीत फिल्म की ही तरह बहुत लोकप्रिय हुए थे और रेडियो के सभी केन्द्रों से सुनवाए जाते थे जिनमे से एक गीत अब भी अक्सर सुनवाया जाता हैं पर यह दूसरा गीत नही सुने बहुत दिन हुए।

इस गीत को यसुदास, बंसरी सेनगुप्ता और हेमलता ने गाया हैं। बंसरी सेनगुप्ता का शायद यह एक ही हिन्दी फिल्मी गीत हैं। गीत का मुखड़ा मुझे याद आ रहा हैं -

खुशियाँ ही खुशियाँ हो दामन में जिसके

क्यों न खुशी से वो दीवाना हो जाए

ऐसे मुबारक मौके पे साथी इश्क वालो का नजराना हो जाए

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, December 21, 2010

आ बता दे के तुझे कैसे जिया जाता हैं

1974 के आसपास रिलीज उस समय की लोकप्रिय फिल्म हैं - दोस्त जिसमे नायक नायिका हैं धर्मेन्द्र हेमामालिनी और शत्रुघ्न सिन्हा की भी महत्वपूर्ण भूमिका हैं।

पहले इसके गीत बहुत सुनवाए जाते थे। फिर लम्बे समय से सुना नही पर पिछले लगभग एक-दो महीने से गाड़ी बुला रही हैं गीत दो-चार बार सुना तो इसका एक और लोकप्रिय गीत याद आ गया जिसे नही सुने बहुत समय हो गया।

इस गीत को रफी साहब ने गाया हैं। बीच-बीच में शत्रुघ्न सिन्हा की आवाज में शेरो-शायरी हैं। एक अंतरा शायद लताजी ने भी गाया हैं। इसके जो बोल याद आ रहे हैं वो इस तरह हैं -

दिल पे सह कर सितम के तीर भी पहन कर पाँव में जंजीर भी

रश्क किया जाता हैं आ बता दे के तुझे कैसे जिया जाता हैं

(लता) चैन महलों में नही रंगरलियो में नही दे दो थोड़ी सी जगह अपनी गलियों में मुझे

झूम कर नाचने दो अपनी मस्ती में ज़रा

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, December 14, 2010

सांच को आंच नही फिल्म के गीत

वर्ष 1977 के आसपास राज्यश्री प्रोडक्शंस के बैनर तले एक फिल्म रिलीज हुई थी - सांच को आंच नही

राज्यश्री की अन्य फिल्मो की तरह यह फिल्म भी पारिवारिक हैं और मनोरंजक होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी हैं। इस फिल्म के गीत उन दिनों बहुत लोकप्रिय हुए थे, शायद एक शीर्षक गीत भी हैं। रेडियो से गाने बहुत सुनवाए जाते थे। अब बहुत दिनों से यह गीत नही सुने। अब तो एक बोल भी याद नही आ रहा।

न गीतों से सम्बंधित कोई नाम याद आ रहे हैं और न ही किसी कलाकार के नाम। शायद इसमे रामायण फेम अरूण गोविल हैं।

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, November 23, 2010

आएगी जरूर चिट्ठी मेरे नाम की

1974 के आसपास एक फिल्म रिलीज हुई थी - दुल्हन

इसमे नायक और नायिका हैं जितेन्द्र और हेमा मालिनी। यह शायद गुलज़ार की फिल्म हैं। बहुत लोकप्रिय हुई थी यह फिल्म और उसका यह गीत जिसे लताजी ने गाया हैं और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया हैं। पहले रेडियो से बहुत सुनते थे पर अब लम्बे समय से नही सुना। जो बोल याद आ रहे हैं वो इस तरह हैं -

आएगी जरूर चिट्ठी मेरे नाम की सब देखना

हाल मेरे दिल का ओ लोगो तब देखना

आएगी .....

फिर परदेसिया छाने लगा हैं, पलको पे गम का बादल छाने लगा हैं

बरस पड़ेगे आंसू सब देखना आएगी....

करो ऐतेबार मेरा बात नही झूठी टूटा हैं दिल मेरा आस नही टूटी

मानेगा मेरा रूठा रब देखना आएगी....

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Wednesday, November 17, 2010

किशोर कुमार का गाया और उन्ही पर फिल्माया एक मजेदार अक्षर गीत

साठ के दशक के शुरू में या पचास के दशक के अंत की फिल्म हैं - दिल्ली का ठग

इसमे नायक-नायिका हैं किशोर कुमार और नूतन। इसमे इन दोनों पर फिल्माया गया एक मजेदार गीत हैं जिसे किशोर कुमार के साथ शायद आशा भोंसले ने गाया हैं। यह गीत पहले रेडियो के सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाया जाता था पर अब बहुत लम्बे समय से नही सुना।

इस गीत के कुछ-कुछ बोल मुझे याद आ रहे हैं -

सी ऐ टी कैट, कैट मने बिल्ली, आर ऐ टी रेट, रेट मने चूहा (किशोर जी)

अरे मतलब इसका तुम कहो तो क्या हुआ

एम ऐ डी मेड, मेड मने पागल, बी ओ वाई ब्वाय, ब्वाय मने लड़का (आशा जी)

अरे मतलब इसका तुम कहो तो क्या हुआ

सी आर ओ डब्लू क्रो, क्रो मने कौआ , एन ओ एस इ नोज, नोज मने नाक

अरे मतलब इसका तुम कहो तो क्या हुआ

जी ओ ऐ टी गोट, गोट मने बकरी, एल आई ओ एन लाएन, लाएन मने शेर (किशोर जी)

अरे दिल हैं तेरे पंजे में तो क्या हुआ

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, November 9, 2010

फिल्म वो मैं नही का रोमांटिक युगल गीत

आज याद आ रही हैं 1975 के आसपास रिलीज एक बढ़िया सस्पेस फिल्म जिसका नाम शायद बहुत से लोग नही जानते, यह फिल्म हैं - वो मैं नही

इसमे नायक नवीन निश्चल की दुहरी या शायद तिहरी भूमिका हैं। इसमे नायिका हैं आशा सचदेव। इन दोनों पर फिल्माया गया एक रोमांटिक युगल गीत पहले रेडियो के सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाया जाता था पर अब वर्षो से नही सुना। इस गीत को शायद किशोर कुमार और आशा भोंसले ने गाया हैं। गीत के बोल मुझे याद नही आ रहे।

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Wednesday, November 3, 2010

आशा भोंसले का गाया लाल पत्थर फिल्म का गीत

सत्तर के दशक की फिल्म लाल पत्थर के कुछ गीत अक्सर सुनवाए जाते हैं पर रेडियो से यह गीत बहुत दिनों से नही सुना।

राखी पर फिल्माए गए इस गीत को आशा भोंसले ने गाया हैं। इस गीत में हल्का सा शास्त्रीय पुट हैं। वैसे इस गीत के कुछ बोल ठीक से समझ में नही आते पर सुनने में अच्छा लगता हैं।

इस गीत के जो बोल मुझे याद आ रहे हैं वो हैं -

सूनी-सूनी आसुंओं की धार ---- सपनों की --------

एक गीत सुना रही हैं जिन्दगी एक गीत गा रही हैं जिन्दगी

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

Tuesday, October 26, 2010

मैं पीतल की पायलियाँ भी पहनूं जो पाँव में सोने का भाव गिर जाए

आज मुझे अस्सी के दशक का एक गीत याद आ रहा हैं जिसे शायद रीना राय पर फिल्माया गया हैं। इस फिल्म में शायद शत्रुघ्न सिन्हा भी हैं। फिल्म का नाम शायद कालीचरण या विश्वनाथ या कोई और हैं।

लताजी के गाए इस फिल्म का केवल मुखड़ा ही मुझे याद आ रहा हैं। पहले रेडियो से बहुत सुनते थे पर अब लम्बे समय से नही सुना। जो बोल याद आ रहे वो इस तरह हैं -

मैं पीतल की पायलियाँ भी पहनूं जो पाँव में सोने का भाव गिर जाए

शीशे का भी नथ जो चढ़ा लूं नथनियां में हीरे का भाव गिर जाए

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

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