आज यानि 30 मार्च रेडियो श्रीलंका हिन्दी सेवा का स्थापना दिन है और आकाशवाणी सुरत का भी स्थापना दिन है । रेडियो श्री लंका का प्रसारण समय दिन ब दिन कम होते होते इन दिनों सुबह 2 घंटे और 5 मिनीट का और सिर्फ़ मंगलवार केदिन 15 मिनीट ज्यादा रहता है । पर एक बात जरूर कि आज भी कई पूराने अलभ्य गानो को कुछ हद तक़ प्रसारित करता है और फिल्मी वादक कलाकारों के जनम दिन या मृत्यू दिन पर समय संजोग आधारित एक या ज्यादा धूनो के विषेष कार्यक्रमो को प्रसारित करता है । जब कि रात्री प्रसारण 1 घंटे के दौरान इन्ग्लीश सेवा के अंतर्गत इन्ग्लीश-हिन्दी का मिला-जूला रहता है ।
जब कि आकाशवाणी सुरत सवा तीन घंटे के सांध्य प्रसारण से एफ एम लोकल के रूपमें शुरू हो कर 9 साल से विविघ भारती की विज्ञापन प्रसारण सेवाके रूपमें कार्यरत है । पर यहाँ के भूतपूर्व और आज सेवा-निवृत केन्द्र निर्देषक श्री भगीरथ पंड्या साहब के अलग अलग कार्यकाल को छोड कर मनोरंजन चेनल होते हुए भी स्थानिय कार्यक्रमोको काफ़ी हद तक़ प्रायमरी चेनल के कार्यक्रमो जैसा बनाया है । और राजकोट विविध भारती पर जैसे स्व. मूकेश साहब की पूण्य तिथी पर जाने माने रेडियो श्रोता श्री मधूसूदन भट्ट को सजीव प्रसारण में आमंत्रीत किया गया था, वैसी तो क्या पूर्व ध्वनि-मूद्रीत कार्यक्रममें भी किसी आम श्रोता को बूलाया जाय वैसी स्थानिय निती रही ही नहीं है । और सरकार और प्रसार भारती तो सुरत को प्रायमरी चेनल देने के मामलेमें अपने दिमाग की ख़िडकीयाँ बंध करके बैठे है । सरकारी विभागो या सरकार प्रायोजीत निगमो द्रारा प्रायोजित कार्यक्रमो को स्थानिय प्रसारण अन्तर्गत शानिल करवाने के बजाय विविध भारती सेवा के कार्यक्रमो के सह-प्रसारण में काट छाट सहनी पड रही है । (यह बात सभी स्थानिय विविध भारती केन्द्रों को लागू होती आयी है ।) डीटीएच अभी मोबाईल में नहीं के बराबर मिल रहा है । आकाशवाणी चाहे स्थानिय विविध भारती केन्द्रों को आय का साधन माने पर आम श्रोता के लिये सबसे पहेले विविध भारती सेवा के कार्यक्रम सुनने सुस्पष्ट के साधन ही है ।
पियुष महेता ।
सुरत ।
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Wednesday, March 30, 2011
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