आदरणिय पाठक गण,
आज रेडियो श्रीलंका (सिलोन)-हिन्दी सेवा की निवृत और इन दिनो केझ्यूअल श्री पद्दमिनी परेरा की जनम तारीख़ है । तो इस गुजराती अवसर पर रेडियोनामा और रेडियो श्रीलंका हिन्दी सेवा की तरफ़ से उनको लम्बे और स्वस्थ आयु की शुभ: कामना प्रस्तूत है ।
इन दिनों वे भारते के दौरे पर है ।
पिछ्ली दि. 1 मे, 2011 के दिन रविवार होने के कारण सुबह 11 बजे और रात्री 9 बजे पुन: प्रसारण के साथ रेडियो सिटी 91.1 मेगा हट्झ पर इस चेनल के तय किये हुए सभी शहरोमें श्री अमीन सायानी साहब के कार्यक्रम संगीत के सितारों की मेहफ़ील अंतर्गत स्व. संगीत कार वसंत देसाई पर किस्त आनी थी । पर उस दिन सुरत और पूना जैसे शहरोमें इसके स्थान पर इन राज्यों के स्थापना दिन की सेलिब्रेसन के अंतर्गत स्थानिय प्रस्तूती अंतर्गत क्षेत्रीय भाषा के कार्यक्रम पूरे दिन प्रस्तूत हुए तो इस वसंत देसाई वाले कार्यक्रम के बारेमें जब श्री अमीन सायानी साहब के सुपुत्र श्री राजीलजी को बताया गया तो उन्होंनें चेनल की हेड ओफीस से पूछताछ करके बताया कि इस कार्यक्रमको आज यानि 7 तारीख़ के दिन प्रस्तूत किया जायेगा पर आज रेडियो लगाया तो पिछली 1 तारीख़ के दिन जहाँ इस कार्यक्रम अपने नियत समय पत्रक अनुसार प्रस्तूत हुआ था, उन केन्दों की तरह आज भप्पी लहरी जी का कार्यक्रम आया । तो क्या सुरत और पूणे के लोगो को वसंत देसाई साहब वाला कार्यक्रम गँवाना ही रहेगा ? आज एक फेशन हो गई है कि सरकारी रेडियो और टीवी की ही गलतियाँ हाईलाईट करने की तो निज़ी चेनल का इस प्रकार का प्रसारण क्या सराहनिय है । क्षेत्रीय सेलिब्रेसन के दौरान दो घंटे बाहर से पाये गये कार्यक्रम के लिये सोच नही सकता था %
पियुश महेता
सुरत-395001.
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Sunday, May 8, 2011
Wednesday, March 30, 2011
रेडियो श्रीलंका-हिन्दी सेवा और आकाशवाणी सुरत को स्थापना दिन की बधाईयाँ
आज यानि 30 मार्च रेडियो श्रीलंका हिन्दी सेवा का स्थापना दिन है और आकाशवाणी सुरत का भी स्थापना दिन है । रेडियो श्री लंका का प्रसारण समय दिन ब दिन कम होते होते इन दिनों सुबह 2 घंटे और 5 मिनीट का और सिर्फ़ मंगलवार केदिन 15 मिनीट ज्यादा रहता है । पर एक बात जरूर कि आज भी कई पूराने अलभ्य गानो को कुछ हद तक़ प्रसारित करता है और फिल्मी वादक कलाकारों के जनम दिन या मृत्यू दिन पर समय संजोग आधारित एक या ज्यादा धूनो के विषेष कार्यक्रमो को प्रसारित करता है । जब कि रात्री प्रसारण 1 घंटे के दौरान इन्ग्लीश सेवा के अंतर्गत इन्ग्लीश-हिन्दी का मिला-जूला रहता है ।
जब कि आकाशवाणी सुरत सवा तीन घंटे के सांध्य प्रसारण से एफ एम लोकल के रूपमें शुरू हो कर 9 साल से विविघ भारती की विज्ञापन प्रसारण सेवाके रूपमें कार्यरत है । पर यहाँ के भूतपूर्व और आज सेवा-निवृत केन्द्र निर्देषक श्री भगीरथ पंड्या साहब के अलग अलग कार्यकाल को छोड कर मनोरंजन चेनल होते हुए भी स्थानिय कार्यक्रमोको काफ़ी हद तक़ प्रायमरी चेनल के कार्यक्रमो जैसा बनाया है । और राजकोट विविध भारती पर जैसे स्व. मूकेश साहब की पूण्य तिथी पर जाने माने रेडियो श्रोता श्री मधूसूदन भट्ट को सजीव प्रसारण में आमंत्रीत किया गया था, वैसी तो क्या पूर्व ध्वनि-मूद्रीत कार्यक्रममें भी किसी आम श्रोता को बूलाया जाय वैसी स्थानिय निती रही ही नहीं है । और सरकार और प्रसार भारती तो सुरत को प्रायमरी चेनल देने के मामलेमें अपने दिमाग की ख़िडकीयाँ बंध करके बैठे है । सरकारी विभागो या सरकार प्रायोजीत निगमो द्रारा प्रायोजित कार्यक्रमो को स्थानिय प्रसारण अन्तर्गत शानिल करवाने के बजाय विविध भारती सेवा के कार्यक्रमो के सह-प्रसारण में काट छाट सहनी पड रही है । (यह बात सभी स्थानिय विविध भारती केन्द्रों को लागू होती आयी है ।) डीटीएच अभी मोबाईल में नहीं के बराबर मिल रहा है । आकाशवाणी चाहे स्थानिय विविध भारती केन्द्रों को आय का साधन माने पर आम श्रोता के लिये सबसे पहेले विविध भारती सेवा के कार्यक्रम सुनने सुस्पष्ट के साधन ही है ।
पियुष महेता ।
सुरत ।
जब कि आकाशवाणी सुरत सवा तीन घंटे के सांध्य प्रसारण से एफ एम लोकल के रूपमें शुरू हो कर 9 साल से विविघ भारती की विज्ञापन प्रसारण सेवाके रूपमें कार्यरत है । पर यहाँ के भूतपूर्व और आज सेवा-निवृत केन्द्र निर्देषक श्री भगीरथ पंड्या साहब के अलग अलग कार्यकाल को छोड कर मनोरंजन चेनल होते हुए भी स्थानिय कार्यक्रमोको काफ़ी हद तक़ प्रायमरी चेनल के कार्यक्रमो जैसा बनाया है । और राजकोट विविध भारती पर जैसे स्व. मूकेश साहब की पूण्य तिथी पर जाने माने रेडियो श्रोता श्री मधूसूदन भट्ट को सजीव प्रसारण में आमंत्रीत किया गया था, वैसी तो क्या पूर्व ध्वनि-मूद्रीत कार्यक्रममें भी किसी आम श्रोता को बूलाया जाय वैसी स्थानिय निती रही ही नहीं है । और सरकार और प्रसार भारती तो सुरत को प्रायमरी चेनल देने के मामलेमें अपने दिमाग की ख़िडकीयाँ बंध करके बैठे है । सरकारी विभागो या सरकार प्रायोजीत निगमो द्रारा प्रायोजित कार्यक्रमो को स्थानिय प्रसारण अन्तर्गत शानिल करवाने के बजाय विविध भारती सेवा के कार्यक्रमो के सह-प्रसारण में काट छाट सहनी पड रही है । (यह बात सभी स्थानिय विविध भारती केन्द्रों को लागू होती आयी है ।) डीटीएच अभी मोबाईल में नहीं के बराबर मिल रहा है । आकाशवाणी चाहे स्थानिय विविध भारती केन्द्रों को आय का साधन माने पर आम श्रोता के लिये सबसे पहेले विविध भारती सेवा के कार्यक्रम सुनने सुस्पष्ट के साधन ही है ।
पियुष महेता ।
सुरत ।
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रेडियो श्रीलंका-हिन्दी
Saturday, May 1, 2010
1.श्री मन्ना डे साहब-जनमदिन की बधाईयाँ ।2. श्री एनोक डेनियेल्स साहब पर रेडियो श्री लंका-हिन्दी सेवा से 16 अप्रैल, 2010 के दिन प्रस्तूत कार्यक्रम
आज एक साथ दो नहीं पर तीन बल्कि चार बात करनी है ।
1. आज महान पार्श्वगायक श्री मन्ना डे यानि श्री प्रबोध चन्द्र डे साहब का जनमदिन है । तो इसके बारेमें विविध भारती और अन्य स्थानिय आकाशवाणी केन्द्रों से उनको बधाई देते हुए और उनकी जीवन-झरमर को प्रस्तूत करते हुए कई कार्यक्रम का सिलसिला जारि है, इस लिये मैं वो बातें इधर नहीं दोहराऊँगा पर मेरी कुछ निजी याद बताऊँगा । कई साल पहेले सुरतमें उनको एक मंच कार्यक्रममें सुनने का मौका मिला था । पर पिछले साल 9 मई के दिन सुरत के गाँधी स्मृती होममें वे फ़िर तसरीफ़ लाये थे और इस उम्रमें उनकी ताक़त भले थोड़ी कम हुई हो पर गाने की शास्त्रीयता पर कोई फरक नहीं आया था और लोगोने उनकी प्रस्तूती का मन भरके आनंद उठाया था । मध्यांतरमें कई लोग उनसे मिलने और उनके हस्ताक्षर पाने के लिये बंध परदे के पिछे गये, जिसमें एक मैं भी था और मेरी कोई अपना नाम बताते हुए निज़ी पहचान तो नहीं हुई और अगर होती तो शायद इतने लोगोमें से उनको याद रहने की कोई गुन्जाईश भी नहीं थी पर इतने बड़े और नामवर कलाकार को नज़दीक से देख़ने का एक आनंद था (श्री अमीन सायानी साहब के साथ भी 14 साल पहेले ऐसा ही वाक्या हुआ था और उसके कई साल बाद उनसे निज़ी परिचय और सम्बंध हुआ था ।)विविध भारती से उनसे आजके मेहमान कार्यक्रम अंतर्गत श्री कमल शर्माजी द्वारा की गई भेटवार्ता से उनका गुजराती सुगम-संगीत और ख़ास स्व. अविनाश व्यासजी प्रति उनके आदरभाव को याद रख़ते हुए मैंनें उनको नमस्कार करके पूछा था कि उनका श्री अविनास व्यासजी के संगीत निर्देषनमें गाया गीत चरा चरर मारुं चकडोळ चाले उस कार्यक्रममें प्रस्तूत करने की कोई गुन्जाईश थी या नहीं तो उन्हों ने एक मझेदार मंद हास्य बिख़ेरा और अपने ऑटोग्राफ़ मेरे कागज़ पर दिये । तो रेडियोनामा की और से उनको जनमदिन और स्वस्थ जिवनकी शुभ: कामनाएँ ।
2. 16 अप्रैल, 2010 के दिन मेरी दी हुई जानकारी के आधार पर रेडियो श्रीलंका से श्रीमती ज्योति परमारजीने जो कार्यक्रम प्रस्तूत किया था, जिसका जिक्र उस दिन की पोस्टमें किया था वह कार्यक्रम पुणे के श्रोता श्री गिरीशभाई मानकेश्वरजी के सौजन्य से इस मंच पर सुनिये । एक बात ख़ास बताना चाहता हूँ कि रेडियोनामा पर एक ही रसीक श्रोता श्री मयुर मल्हार यानि श्री मयुर बक्षी जी की ही टिपणी आयी और एक टिपणी जनदुनिया ब्लोग से औपचारिक रूपसे ही अपने ब्लोग के प्रचार के हेतु से आयी थी पर विषेष चर्चा इस विषय पर उसमें नहीं थी । पर रेडियो सिलोन के श्रोता ठाणे के श्री सुभाष कुलकर्णीजी ने कहीं से भी मेरा फोन नं प्राप्त करके मूझे सम्पर्क किया और अचरजकी बात यह थी कि उन्होंनें शुद्ध गुजरातीमें ही बात शुरू की और करते रहे और कार्यक्रम को सराहा और वे श्री अनोक डेनियेल्स को भी जनमदिन की बधाई दे चूके थे । वैसा दूसरा फोन इस ब्लोग को पढ कर राजस्थान के युवा श्रोता श्री रामस्वरूप सुथारजी का आया और इस जानकारी को सराहा था । युनूसजी और अन्नपूर्णाजी का तो पता नहीं । तो सुनिये रेडियो श्रीलंका की श्रीमती ज्योति परमार को फ़िर एक बार श्री एनोक डेनियेल्सजी के बारेमें (तीन भागोमें)।
3. आज विश्व मज़दूर दिन को भी याद करें ।
4. आज गुजरात और महाराष्ट्र के 51 सालमें प्रवेष करने पर उनके स्थापना दिनके लिये दोनों राज्य की जनता को बधाई और शुभ: कामाना ।
पियुष महेता ।
नानपुरा, सुरत ।
1. आज महान पार्श्वगायक श्री मन्ना डे यानि श्री प्रबोध चन्द्र डे साहब का जनमदिन है । तो इसके बारेमें विविध भारती और अन्य स्थानिय आकाशवाणी केन्द्रों से उनको बधाई देते हुए और उनकी जीवन-झरमर को प्रस्तूत करते हुए कई कार्यक्रम का सिलसिला जारि है, इस लिये मैं वो बातें इधर नहीं दोहराऊँगा पर मेरी कुछ निजी याद बताऊँगा । कई साल पहेले सुरतमें उनको एक मंच कार्यक्रममें सुनने का मौका मिला था । पर पिछले साल 9 मई के दिन सुरत के गाँधी स्मृती होममें वे फ़िर तसरीफ़ लाये थे और इस उम्रमें उनकी ताक़त भले थोड़ी कम हुई हो पर गाने की शास्त्रीयता पर कोई फरक नहीं आया था और लोगोने उनकी प्रस्तूती का मन भरके आनंद उठाया था । मध्यांतरमें कई लोग उनसे मिलने और उनके हस्ताक्षर पाने के लिये बंध परदे के पिछे गये, जिसमें एक मैं भी था और मेरी कोई अपना नाम बताते हुए निज़ी पहचान तो नहीं हुई और अगर होती तो शायद इतने लोगोमें से उनको याद रहने की कोई गुन्जाईश भी नहीं थी पर इतने बड़े और नामवर कलाकार को नज़दीक से देख़ने का एक आनंद था (श्री अमीन सायानी साहब के साथ भी 14 साल पहेले ऐसा ही वाक्या हुआ था और उसके कई साल बाद उनसे निज़ी परिचय और सम्बंध हुआ था ।)विविध भारती से उनसे आजके मेहमान कार्यक्रम अंतर्गत श्री कमल शर्माजी द्वारा की गई भेटवार्ता से उनका गुजराती सुगम-संगीत और ख़ास स्व. अविनाश व्यासजी प्रति उनके आदरभाव को याद रख़ते हुए मैंनें उनको नमस्कार करके पूछा था कि उनका श्री अविनास व्यासजी के संगीत निर्देषनमें गाया गीत चरा चरर मारुं चकडोळ चाले उस कार्यक्रममें प्रस्तूत करने की कोई गुन्जाईश थी या नहीं तो उन्हों ने एक मझेदार मंद हास्य बिख़ेरा और अपने ऑटोग्राफ़ मेरे कागज़ पर दिये । तो रेडियोनामा की और से उनको जनमदिन और स्वस्थ जिवनकी शुभ: कामनाएँ ।
2. 16 अप्रैल, 2010 के दिन मेरी दी हुई जानकारी के आधार पर रेडियो श्रीलंका से श्रीमती ज्योति परमारजीने जो कार्यक्रम प्रस्तूत किया था, जिसका जिक्र उस दिन की पोस्टमें किया था वह कार्यक्रम पुणे के श्रोता श्री गिरीशभाई मानकेश्वरजी के सौजन्य से इस मंच पर सुनिये । एक बात ख़ास बताना चाहता हूँ कि रेडियोनामा पर एक ही रसीक श्रोता श्री मयुर मल्हार यानि श्री मयुर बक्षी जी की ही टिपणी आयी और एक टिपणी जनदुनिया ब्लोग से औपचारिक रूपसे ही अपने ब्लोग के प्रचार के हेतु से आयी थी पर विषेष चर्चा इस विषय पर उसमें नहीं थी । पर रेडियो सिलोन के श्रोता ठाणे के श्री सुभाष कुलकर्णीजी ने कहीं से भी मेरा फोन नं प्राप्त करके मूझे सम्पर्क किया और अचरजकी बात यह थी कि उन्होंनें शुद्ध गुजरातीमें ही बात शुरू की और करते रहे और कार्यक्रम को सराहा और वे श्री अनोक डेनियेल्स को भी जनमदिन की बधाई दे चूके थे । वैसा दूसरा फोन इस ब्लोग को पढ कर राजस्थान के युवा श्रोता श्री रामस्वरूप सुथारजी का आया और इस जानकारी को सराहा था । युनूसजी और अन्नपूर्णाजी का तो पता नहीं । तो सुनिये रेडियो श्रीलंका की श्रीमती ज्योति परमार को फ़िर एक बार श्री एनोक डेनियेल्सजी के बारेमें (तीन भागोमें)।
3. आज विश्व मज़दूर दिन को भी याद करें ।
4. आज गुजरात और महाराष्ट्र के 51 सालमें प्रवेष करने पर उनके स्थापना दिनके लिये दोनों राज्य की जनता को बधाई और शुभ: कामाना ।
पियुष महेता ।
नानपुरा, सुरत ।
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