आज हिन्दी फिल्म संगीतमें एक जमाने के बहोत ही सक्रिय मेन्डोलिन वादक श्री महेन्द्र भावसार के जनम दिन पर उनकी इसी साझ पर बजाई हुई फिल्म 'मन मंदीर' के गीत 'जादूगर तेरे नैना' की धून का अंश नीचे प्रस्तूत है । 1933 में आज ही के दिन पैदा हुए श्री महेन्द्र भावसार को जनम दिन की ढेर सारी बधाई और स्वस्थ लम्बे आयु की शुभ: कामनाऐं ।
आज श्रीमती अन्नपूर्णाजी की पोस्ट के तूरंत बाद इस विषेष अवसर के कारण मेरी पोस्ट रख़नी पड रही है पर बहोत ही छोटी लिख़ाई के कारण उनकी पोस्ट भी नज़रमें पहेले पन्ने पर ही आयेगी । फ़िर भी उनसे क्षमा चाहता हूँ । और पाठको से अनुरोध है कि नीचे उनकी पोस्ट भी पढ़े ।
पियुष महेता ।
सुरत-395001.
ता.क. टिपणीकर्ता लोगों को याद रख़ कर पूरी धून निजी मेईल से भेज़ीने का प्रयास जरूर करूँगा ।
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Thursday, March 10, 2011
मेन्डोलिन वादक श्री महेन्द्र भावसार को जनम दिन बधाई
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MAHENDRA BHAVSAR,
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पियुष महेता,
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मेन्डोलिन
Wednesday, March 10, 2010
१० मार्च मेंडोलिन वादक महेन्द्र भावसार को जन्मदिन की बधाई
आदरणिय पाठक गण,
जैसे मैंनें कल की पोस्टमें वादा किया था, आज 10वी मार्च के दिन, एक और पोस्ट लिखनेका, उसको भारतिय फिल्मी दुनियाके एक महान मेन्डोलिन वादक श्री महेन्द्र भावसार का जन्म दिन है तो इस उपलक्षमें रेडियो श्री लंकाने मेरे संदेश के आधार पर मेरे नाम के साथ उनके लिये बधाई संदेश प्रस्तूत करते हुए उनकी बजाई हुई मेन्डोलिन पर फिल्म प्रिन्स (शंकर जयकिसन)के गीत मदहोश हुआ म्लवाली फिज़ा को प्रस्तूत किया । पर इनका नाम गलती से श्रीमती ज्योति परमारने महेन्द्र की जगह महेश्वर एक से अधिक बार बोल दिया । फिर उनकी सराहना इस लिये जरूरी बनी कि मेरे तूर्त ही कहने पर तूर्त ही क्षमा याचना के साथ सुधार संदेश भी प्रस्तूत कर दिया है । इस पुरी रेकोर्डिंग मेरे पास थी पर पूना के मेरे नौजवान पर फ़िर भी पुराने संगीत के शौख़ीन मित्र जो अपनी शादी के बाद अपनी श्रीमतीजी को ले कर श्रीलंका जा कर सजीव प्रसारणमें आमंत्रीत और प्रस्तूत हुए थे, वैसे श्री गिरीश मानकेश्वरजीने ई मेईल से भेजी जो मेरी रेकोर्डिंग से बहेतर होने के कारण गिरीशजी के प्रति घन्यवाद के साथ तथा श्री महेन्द्र भावसारजी को जन्मदिन कीशुभ:कामना और स्वस्थ दिर्धायु की भी कामना के साथ नीचे प्रस्तूत की है ।
पर उसमें वो सुधार शामिल नहीं था, इस लिये मेरी रेकोर्डिंगमें से काट-छाट करके नीचे प्रस्तूत की है जो गुणवत्ता में उत्तम नहीं है पर घ्यान से सुनने पर सुनाई देती है ।
पियुष महेता ।
नानपुरा, सुरत ।
दि. 10 मार्च, 2010.
जैसे मैंनें कल की पोस्टमें वादा किया था, आज 10वी मार्च के दिन, एक और पोस्ट लिखनेका, उसको भारतिय फिल्मी दुनियाके एक महान मेन्डोलिन वादक श्री महेन्द्र भावसार का जन्म दिन है तो इस उपलक्षमें रेडियो श्री लंकाने मेरे संदेश के आधार पर मेरे नाम के साथ उनके लिये बधाई संदेश प्रस्तूत करते हुए उनकी बजाई हुई मेन्डोलिन पर फिल्म प्रिन्स (शंकर जयकिसन)के गीत मदहोश हुआ म्लवाली फिज़ा को प्रस्तूत किया । पर इनका नाम गलती से श्रीमती ज्योति परमारने महेन्द्र की जगह महेश्वर एक से अधिक बार बोल दिया । फिर उनकी सराहना इस लिये जरूरी बनी कि मेरे तूर्त ही कहने पर तूर्त ही क्षमा याचना के साथ सुधार संदेश भी प्रस्तूत कर दिया है । इस पुरी रेकोर्डिंग मेरे पास थी पर पूना के मेरे नौजवान पर फ़िर भी पुराने संगीत के शौख़ीन मित्र जो अपनी शादी के बाद अपनी श्रीमतीजी को ले कर श्रीलंका जा कर सजीव प्रसारणमें आमंत्रीत और प्रस्तूत हुए थे, वैसे श्री गिरीश मानकेश्वरजीने ई मेईल से भेजी जो मेरी रेकोर्डिंग से बहेतर होने के कारण गिरीशजी के प्रति घन्यवाद के साथ तथा श्री महेन्द्र भावसारजी को जन्मदिन कीशुभ:कामना और स्वस्थ दिर्धायु की भी कामना के साथ नीचे प्रस्तूत की है ।
पर उसमें वो सुधार शामिल नहीं था, इस लिये मेरी रेकोर्डिंगमें से काट-छाट करके नीचे प्रस्तूत की है जो गुणवत्ता में उत्तम नहीं है पर घ्यान से सुनने पर सुनाई देती है ।
पियुष महेता ।
नानपुरा, सुरत ।
दि. 10 मार्च, 2010.
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महेन्द्र भावसार,
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रेडियो श्रीलंका
Tuesday, March 10, 2009
हिन्दी सिने-संगीत के एक समय के जानेमाने मेन्डोलिन वादक श्री महेन्द्र भावसार को जन्म दिन की बधाई
आज यानि दि. 10 मार्च, 2009 के दिन जानेमाने मेन्डोलिन वादक श्री महेन्द्र भावसारजी 76 साल पूरे करके 77वे सालमें प्रवेष कर चूके है । तो रेडियोनामा की और से ज्नको बधाई देते हुए फिल्म मेरा नाम जोकर के शिर्षक गीत की धून, जो उनके अंतीम (ईपी) रेकोर्ड पर थी, प्रस्तूत कर रहा हूँ । इस धूनमें अन्तराल संगीतमें एकोर्डियन मेरे उनके साथ दूरभाषी परिचय करवाने वाले श्री एनोक डेनियेल्स साहबने बजाया है । जाहिर है की ईपी रेकोर्द होने के कारण यह धून भी उस गीतके ईपी रेकोर्डमें प्रस्तूत मर्यादित स6गीत के अनुसार ही होगी । हाँ, श्री एनोक डेनियेल्स साहब की इस फिल्म के सभी गानोके धूनों की एल पी रेकोर्डमें मेंन्डोलिन वादन श्री महेन्द्र भावसार का ही है, जो किसी समय प्रस्तूत करूँगा ।
बिते कल सुरत एक स्टेज शॉ के सिलसिलेमें सुरत पधारे हुए जाने माने सेक्सोफोन और वेस्टर्न फ्ल्यूट वादक श्री श्यामराज कारजी से छोटा सा साक्षात्कार हुआ, उस समय का दृष्यांकन आने वाले दिनो प्रस्तूत होगा । पर आज का पोस्ट श्री महेन्द्र भावसारजी के नाम, जिनके साथ ख़ीचवाई हुई मेरी तसवीर पिछली 10 मार्च को इसी मंच पर प्रस्तूत की थी ।
पियुष महेता ।
नानपूरा, सुरत-395001.
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बिते कल सुरत एक स्टेज शॉ के सिलसिलेमें सुरत पधारे हुए जाने माने सेक्सोफोन और वेस्टर्न फ्ल्यूट वादक श्री श्यामराज कारजी से छोटा सा साक्षात्कार हुआ, उस समय का दृष्यांकन आने वाले दिनो प्रस्तूत होगा । पर आज का पोस्ट श्री महेन्द्र भावसारजी के नाम, जिनके साथ ख़ीचवाई हुई मेरी तसवीर पिछली 10 मार्च को इसी मंच पर प्रस्तूत की थी ।
पियुष महेता ।
नानपूरा, सुरत-395001.
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महेन्द्र भावसार,
मेन्डोलिन
Monday, March 10, 2008
विख्यात मेन्डोलिन वादक श्री महेन्द्र भावसार का ७६वां जन्मदिन
श्री महेन्द्र भावसार फिल्मी संगीत की दूनिया के जानेमाने मेन्डोलिन वादक रहे । हालाकी मैं रेडियो के अलावा फिल्म संगीत के अन्य कोई सोर्स से जूडा नहीं था । साझोमें हार्मोनियम, माऊथ ओर्गन, बांसूरी, और बेन्जो ( जिसको ट्रायसेकोटो या बूलबूल तरंग नाम से मैं ज्न दिनो जानता था ) , या शादीमें बजनेवाला एक अपने आपमें खाश़ किसमका क्लेरीनेट (जिसको शायद ग्राम्य गुजरातीमें पिपूडी बोलते थे ) त्क ही करीब सिमीत था । इन दिनों करीब १९६२ से रेडियो से बजने वाली फिल्मी धूनों पर मेरे कान ठहरने लगे और प्रथम घ्यान आकर्शित हुआ पियानो-एकोर्डियन पर जो श्री एनोक डेनियेल्स बजाते थे । तो वह स्वाभाविक है कि मूझे अच्छी खिसम के हार्मोनियम जैसा लगा । इसी तरह मेन्डोलिन सबसे पहेले श्री महेन्द्र भावसार का सुना , जो सुपर क्वोलिटी का बेन्जो लगा । पर श्री एनोक डेनियेल्स की धूने तो काफी मात्रामें आती थी । जब की करीब तीन या चार साल बाद फिल्में प्यार मोहोबत, तीसरी मंझील, तीसरी कसम, आयी । उन के एक एक गाने को तथा अन्य एक गाने को ले कर एक ई. पी. श्री महेन्द्र भावसार साहब की आयी । इसके कई एक साल बाद करीब १९६७में श्री मनोहर महाजन साहब रेडियो सिलोन गये तो उन्होंने श्री महेन्द्र भावसार साहब की आवारा (दो धूनें) फिल्म जिन्दगी (पहेले मिले थे सपनोमें – जो आज मेरी श्रीमती पद्दमिनी परेरा को फोन पर दी हुई इस सालगिराह की माहिती के आधार पर पद्दमिनी जीने आज सुबह ८ बजे प्रस्तूत की थी) तथा ससुराल ( तेरी प्यारी प्यारी सुरत को) पूराने सुस्त पडे खजाने से ढूंढ निकाली थी और प्रस्तूत करने लगे थे, जिसमें वाद्यवृन्दमें अन्य कोई वाद्य नहीं था, सिवाय की स्व. सुदर्शन अधिकारी के तबले ) ।
उन्होंनें श्री अनिल विश्वासजी से आनंद मिलींद तक फिल्मोंमें बजाया है ।
ज्नसे मेरा परिचय श्री एनोक डेनियेल्स साहबने करवाया था और बताया (दूसरी एक और मुलाकात के समय )था कि, एच. एम. वी. के सितारें कार्यक्रम के शिर्षक संगीत का शुरूआती हिस्सा भी श्री महेन्द्र भावसार साहब का बजाया हुआ है (एल. पी. सितार गोझ लेटिन-मूख्य साझ सितार पर श्री जयराम आचार्य-वाद्यवृन्द निर्देशन-श्री एनोक डेनियेल्स) ।
श्री महेन्द्र भावसार साहब को आज के दिन के लिये बहोत बधाईयाँ , और स्वस्थ तथा लम्बी आयु के लिये शुभ: कामना । इस बार मेरे समय अभाव की कमी के कारण उनसे मिलना नहीं हुआ । पर आज उन्हें फोन पर बधाई तो दी थी ।
मेरी मुम्बई यात्रा का अन्तिम पेरा रेडियो श्री लंका के १९७७ से १९८० तक उद्दघोषक रहे रिपूसुदन कुमार एइलाबादी के लिये है । जो मैंने लिखा तो था , पर निंद के समय कोई गलती से डिलीट हो गया था । इस लिये क्षमा प्रार्थी हूँ ।
उन्होंनें श्री अनिल विश्वासजी से आनंद मिलींद तक फिल्मोंमें बजाया है ।
ज्नसे मेरा परिचय श्री एनोक डेनियेल्स साहबने करवाया था और बताया (दूसरी एक और मुलाकात के समय )था कि, एच. एम. वी. के सितारें कार्यक्रम के शिर्षक संगीत का शुरूआती हिस्सा भी श्री महेन्द्र भावसार साहब का बजाया हुआ है (एल. पी. सितार गोझ लेटिन-मूख्य साझ सितार पर श्री जयराम आचार्य-वाद्यवृन्द निर्देशन-श्री एनोक डेनियेल्स) ।
श्री महेन्द्र भावसार साहब को आज के दिन के लिये बहोत बधाईयाँ , और स्वस्थ तथा लम्बी आयु के लिये शुभ: कामना । इस बार मेरे समय अभाव की कमी के कारण उनसे मिलना नहीं हुआ । पर आज उन्हें फोन पर बधाई तो दी थी ।
मेरी मुम्बई यात्रा का अन्तिम पेरा रेडियो श्री लंका के १९७७ से १९८० तक उद्दघोषक रहे रिपूसुदन कुमार एइलाबादी के लिये है । जो मैंने लिखा तो था , पर निंद के समय कोई गलती से डिलीट हो गया था । इस लिये क्षमा प्रार्थी हूँ ।
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