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Thursday, April 3, 2008

इश्क, आख़िर क्या है ये इश्क?

क्या ये गूंगे का गुड़ है या भूखे की रोटी? क्या ये अनंत आसमान है या अ-आयामी ब्लैक होल?

विविध भारती के जुबली झंकार कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित कवि सम्मेलन - 'प्यार की बातें प्यार के गीत' में इस बात को गहराई से बता रहे हैं देश के चुनिंदा कवि. जिनमें शामिल हैं - बालकवि बैरागी, निदा फ़ाज़ली, कुंवर बेचैन, राहत इंदौरी, और दीप्‍ती मिश्र. संचालन यूनुस खान का है. विवरण यहाँ और यहाँ दर्ज है.

कविसम्मेलन तीन घंटे चला, जिसकी एक-एक घंटे की रेकॉर्डिंग (प्रत्येक कोई 7 मेगाबाइट एमपी3 मात्र.) आपके लिए नीचे लाइफ़लॉगर प्लेयर की कड़ी के रूप में दी जा रही है. पर, अच्छा ये होगा कि आप इन्हें डाउनलोड कर रखें, और फुरसत के समय सुनें-सुनाएं. आपके मोबाइल एमपी3 प्लेयर के लिए भी यह शानदार संग्रह होगा - किसी लंबी बोरियत भरी यात्रा में इसे चालू कर लें, प्यार के सागर में गोते खाते आपका सफर कैसे कटेगा आपको यकीनन पता ही नहीं चलेगा.





प्यार की बातें प्यार के गीत भाग 1



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प्यार की बातें प्यार के गीत भाग 2



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प्यार की बातें प्यार के गीत भाग 3



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