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Friday, October 3, 2008

विविध भारती के स्‍वर्ण जयंती समारोह का समापन है आज । दिन भर होंगे विशेष कार्यक्रम ।

रेडियोनामा पर विविध भारती के स्‍वर्ण जयंती समारोहों का ना सिर्फ साल भर जिक्र होता आया है बल्कि उनके अंश भी अपलोड किये जाते रहे हैं । और उनकी समीक्षाएं भी होती रही हैं ।

आज तीन अक्‍तूबर है । आज ही के दिन सन 1957 में विविध भारती की स्‍थापना हुई थी  । पूरे साल भर विविध भारती ने अपनी स्‍वर्ण जयंती पर विशेष कार्यक्रम किए । और आज स्‍वर्ण जयंती समारोह का समापन हो रहा है ।

आज सबेरे छह बजे से पौने आठ बजे तक जाने माने गायक अनूप जलोटा ने विशेष वंदनवार प्रस्‍तुत किया ।

अगला विशेष शो है दिन में बारह बजे  । जिसमें जानी मानी पार्श्‍वगायिका सुनिधि चौहान बन जायेंगी रेडियोजॉकी । और यूनुस खान के संग वो प्रस्‍तुत करेंगी जुबली झंकार कार्यक्रम । इस कार्यक्रम में उनके कई गानों के बनने की कहानी है । सुनिधि के मन की बातें हैं । और हैं वो गाने जो उनके दिन के क़रीब हैं चाहे वो उनके हों या दूसरों के । बहुत ही अंतरंग और आत्‍मीय होगा ये कार्यक्रम ।

इसके बाद दिन में दो बजे दूसरा शो शुरू होगा--गोल्‍डन जुबली मनचाहे गीत । इसे प्रस्‍तुत कर रहे हैं राजेंद्र त्रिपाठी और शहनाज़ अख्‍तरी ।

दिन में तीन बजे से एक और नया शो होगा । जिसे पेश करेंगे जाने माने ग़ज़ल गायक तलत अज़ीज़ । ये दरअसल गैरफिल्‍मी ग़ज़लों, गीतों और क़व्‍वालियों का गुलदस्‍ता होगा । तलत अज़ीज़ अपनी शीरीं ज़बान में बयां करेंगे किस्‍से । और याद करेंगे कुछ कालजयी रचनाओं को ।

इसके बाद एक हस्‍ती आयेगी और कहेगी ख़ामोश । जी हां । जाने माने अभिनेता शत्रुघ्‍न सिन्‍हा विशेष जयमाला कार्यक्रम पेश करेंगे । आज उनकी अदाकारी का एक नया रंग सुनने को मिलेगा आपको ।

और फिर रात नौ बजे से होगा आज का आखिरी शो । ये है गोल्‍डन जुबली छायागीत । जिसमें संगीतकार रवि यादों के झरोखों में झांकेंगे ।

इस तरह होगा गोल्‍डन जुबली आयोजनों का समापन ।

वैसे आपको बता दें कि रेडियोनामा पर पंडित नरेंद्र शर्मा की सुपुत्री और जानी मानी ब्‍लॉगर लावण्‍या जी खासतौर पर एक आलेख तैयार कर रही हैं । ये आलेख आप रेडियोनामा पर पढ़ पायेंगे ठीक डेढ़ बजे के बाद  ।

Saturday, May 3, 2008

हा हा हा हा हा हा हा हा ही ही ही हे हे हे हे हे

जहां चार व्यंग्यकार मिल जाएं तो क्या होगा?
वही होगा जो ऊपर शीर्षक में लिखा है. और क्या होगा.

विविध भारती के जुबली झंकार में देश के नामी व्यंग्यकार मिले और फ़िल्में आह फ़िल्में वाह के नाम पर हा हा ही ही हू हू हे है की बारहखड़ी बिखेर दी. लीजिए सुनें पहली किश्त.

डाउनलोड यहां से करें

ऑनलाइन प्लेयर पर सुनने के लिए नीचे दिए प्लेयर के प्ले बटन पर क्लिक करें.


दूसरी किश्त डाउनलोड यहां से करें

और ऑनलाइन प्लेयर पर यहाँ सुनें-


तीसरी किश्त डाउनलोड यहाँ से करें

ऑनलाइन प्लेयर पर यहाँ सुनें -


और चौथी, और अंतिम किश्त -

हा हा ही ही हे हे हू हू .... बिजली गोल हो गई! भई, मेरे शहर में बिजली बड़ी मंहगी है. ऊपर से बहुत आंख मिचौली खेलती है. ले दे कर मिलती है, थोड़ी थोड़ी और जब तब गोल होते रहती है... हा हा हा.... बू हू हू ... (ज्यादा हंसने से आंखों में आंसू आ ही जाते हैं,)

# अद्यतन - यूनुस खान ने इस कार्यक्रम के बचे भाग की अविकल रेकॉर्डिंग दो भागों में आर्काइव.ऑर्ग पर अपलोड किया है. इसकी एमपी 3 फ़ाइलें यहाँ से डाउनलोड करें -

पहला भाग यहाँ से डाउनलोड करें




दूसरा भाग यहाँ से डाउनलोड करें

ऑनलाइन प्लेयर पर यहाँ बजाने के कोड में कुछ त्रुटि आ रही है. त्रुटियों को दूर कर उन्हें शीघ्र ही यहाँ लगाया जाएगा.

फ़िल्में आह और फ़िल्में वाह के बीच व्यंग्यकारों की अपनी फ़िल्में

आप सबों को तो पता ही है कि आज विविध भारती अपनी स्वर्ण जयंति के उपलक्ष्य में जुबिली झंकार कार्यक्रम पेश कर रही है. आज का उसका मुख्य आकर्षण रहा " फ़िल्में आह, फ़िल्में वाह ". इसके बारे में यूनुस जी ने आपको कल ही जानकारी दे दी थी.

आपलोगों ने इस प्रोग्राम को सुना ही होगा. पाँच व्यंग्यकारों - प्रकाश पुरोहित, यज्ञ जी, ज्ञान चतुर्वेदी जी, और हमारे अगड़म बगड़म आलोक जी, यशवंत व्यास जी - ने इसमे शिरकत की थी. सबने तीखे, चुटीले, कँटीले व्यंग्यबाण हमारी फ़िल्मों के ऊपर छोड़े, जो हमें अंदर तक गुदगुदा गये.

सबकी अपनी अलग style थी, अपना एक लहज़ा था.

बातें गुरुदत्त की प्यासा, महबूब खान की मदर इंडिया से लेकर आमिर की तारे जमीं पर तक की हुई. नायिकाओं की तो खूब चर्चा हुई, देविका रानी से लेकर राखी सावंत तक.

कालजयी फ़िल्म शोले की चीड़ फ़ाड़ तक की गयी.

पर देखिये, इन व्यंग्यकारों की भी अपनी अभिलाषायें होती हैं. आखिर फ़िल्में सबको आकर्षित करती हैं. तो इन दिग्गजों नें भी अपनी इच्छा जाहिर कर ही दी कि आखिर ये होते तो कैसी फ़िल्में बनाते. अब ये हैम तो व्यंग्यकार, इनकी फ़िल्मों मेम चुटीलापन ना हो , ये तो हो ही नही सकता है ना. तो आईये , उन्हीं की जुबानी सुने कि वे कैसी फ़िल्में बनाते.

सबसे पहले हाज़िर है डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी जी की अदभुत सोच-

एक साधरण आदमी, एक डॉक्टर, एक कलेक्टर, एक नेता. किसी जमाने में ये चारो अपने दोस्त हुआ करते थे, निश्चय ही बचपन के स्कूली दिनों में ही होते होंगे.

वक़्त चारों को एक ही जगह मिलाता है, साधारण आदमी की किसी तरह मौत हो जाती है.

अब पोस्ट्मार्टम रिपोर्ट बनाने में डॉक्टर की जो मज़बूरियात होती है, वो अपने किस दोस्त की बात माने इसे देखने के लिये तो उनकी फ़िल्म के आने तक का इंतजार करना पड़ेगा. :)

अब देखिये यशवंत व्यास जी की सोच :

वो ध्यान पैसों पर भी रखते हैं. अगर उनके पास कुछ लाख रुपये हुए तो एक low budget की मल्टीप्ले़क्स फ़िल्म बनायेंगे, जिसमें कला और व्यावसायिकता के सारे मसाले होंगे.

पर अगर उनके पास कुछ करोड़ रुपये हों तो वे अपने ही एक उपन्यास - कॉमरेड गॉडसे- पर फ़िल्म बनाना चाहेंगे, जिसमें अमिताभ, शाहरूख और बिपाशा को वे लेना पसंद करेंगे.

आलोक जी अपनी अगड़म बगड़म करते हुए कुछ ऐसा सोचते हैं -

उनकी फ़िल्म का शीर्षक होगा- देवदास इन स्विट्ज़र्लैंड. मुख्य बात इसमें होगी कि एक भूतनी के साथ देवदास का अफ़ेयर चलता होगा. और वो देवदास और कोई नहीं, इमरान हाशमी ही बनेगा.

फ़िल्म के अंत में इंट्री होगी अपने उसी पुराने देवदास दिलीप कुमार साहब की और वो अपना इतने दिनों से संजोकर रखा गया अनुभव जो वे शाहरूख खान को भी नही दे पाये थे, नये देवदास को देंगे, बल्कि पिलायेंगे. उसके बाद क्या होगा? आप उनकी भी फ़िल्म के आने का इंतजार करें.

अब यज्ञ जी की बात क्या करूँ.

वो जिस हीरो के पास अपनी स्टोरी लेकर गये उसे नकल से सख्त नफ़रत है. पर वो चाहता है कि उसकी फ़िल्म हॉलीवुड की मैट्रिक्स से किसी मामले में कम ना हो. हीरो उसे बिलकुल मैट्रिक्स की तरह एक्शन करता दिखे. हीरोइन भी मैट्रिक्स की तरह हो..... और भी मैट्रिक्स की तरह हो... पर नकल से उसे सख़्त नफ़रत है.

प्रकाश जी तो मुगले आज़म ही बनाना चाहते हैं.

वे बनायेंगे " मुग़ले आज़म, पार्ट- 2 ". इस फ़िल्म में पृथ्वीराज कपूर की जगह वो अमिताभ बच्चन को लेंगें. अब अमिताभ जी की कितने भी लंबे हो जायें, पृथ्वीराज कपूर के जितना कद की बराबरी नहीं कर सकते न. इसीलिये वो अमिताभ जी को तीन रोल में लेंगे. सारी फ़िल्मों में एक अंत होता है, पर इस फ़िल्म में अंत होगा छह. सिनेमा हॉल का गेट कभी बंद नहीं होगा, लोग आते रहेंगे और जाते रहेंगे.

............

जुबिली झंकार का पूरा कार्यक्रम ही मनोरंजक था. अगर किन्हीं गुणी जन ने इसे रिकॉर्ड किया है तो वो इसे आपके लिये हाज़िर होंगे ही. तब आप इसे अच्छे से मजे लेकर सुनियेगा.

Friday, May 2, 2008

कल विविध भारती पर होगा फिल्‍मों पर केंद्रित व्‍यंग्‍य सम्‍मेलन ' फिल्‍में आह फिल्‍में वाह' । आलोक पुराणिक भी इसमें शामिल हैं ।

मित्रो जैसा कि आप जानते हैं विविध भारती का ये स्‍वर्ण जयंती वर्ष है । और पूरे साल हर महीने की तीन तारीख़ को विविध भारती पर विशेष आयोजन किये जा रहे हैं । ये सिलसिला अक्‍तूबर में शुरू हुआ था और देखते देखते हम तीन मई तक आ पहुंचे हैं । मैंने सोचा तो ये था कि कल सुबह-सुबह इस आयोजन का विवरण देता, लेकिन फिर लगा कि अगर आज से बता दिया जाए तो लोगबाग अपना शेड्यूल व्‍यवस्थित कर लेंगे । जगह बना लेंगे विविध भारती के लिए अपने व्‍यस्‍त दिन में ।

हां तो तीन मई का विविध भारती का विशेष आयोजन है ‘फिल्‍में आह फिल्‍में वाह’ । ये फिल्‍मों पर केंद्रित एक व्‍यंग्‍य सम्‍मेलन है । इस व्‍यंग्‍य सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेंगे कुछ मशहूर व्‍यंग्‍यकार । ज़रा फेहरिस्‍त जांचिए-

भोपाल से ज्ञान चतुर्वेदी, जिनकी पुस्‍तक बारामासी पर्याप्‍त चर्चित है । नया ज्ञानोदय में आप इनका नियमित कॉलम भी पढ़ते हैं ।

जयपुर से आए यशवंत व्‍यास । जो 'अहा! जिंदगी' के संपादक भी हैं । इनकी पुस्‍तक 'कॉमरेड गोडसे' भी महाचर्चित और पुरस्‍कृत हो चुकी है ।

ग़ाजियाबाद से आए आलोक पुराणिक ब्रह्माण्ड के सबसे धांसू रचनाकार हैं । ब्‍लॉगिंग की दुनिया में सक्रिय लोगों तक आलोक का आलोक ना पहुंचा हो ऐसा कैसे हो सकता है ।

इंदौर से आए 'प्रभात किरण' के संपादक और बेहतरीन व्‍यंग्‍यकार प्रकाश पुरोहित । जिनकी बीस कम पचास और अटकल पंजे बारह जैसी पुस्‍तकें चर्चित हैं ।

मुंबई के यज्ञ शर्मा जो नवभारत टाइम्‍स मुंबई में खाली पीली नामक और दिल्‍ली संस्‍करण में निंदक नियरे नामक कॉलम लिखते हैं ।

इन दिग्‍गजों के बीच इस कार्यक्रम का संचालन आपके इस दोस्‍त यूनुस ख़ान और मेरे वरिष्‍ठ सहयोगी कमल शर्मा ने किया है ।

अब ज़रा समय भी नोट कर लीजिए ।

शनिवार को दिन में ढाई बजे से लेकर शाम साढ़े पांच बजे तक ।

भाई रवि रतलामी इस कार्यक्रम के लिए रेडियोनामा पर संभवत: वही करेंगे जो उन्‍होंने पिछली बार किया था ।

तो ज़रूर सुनिए विविध भारती का बंपर व्‍यंग्‍य सम्‍मलेन -' फिल्‍में आह- फिल्‍में वाह'

Thursday, April 3, 2008

इश्क, आख़िर क्या है ये इश्क?

क्या ये गूंगे का गुड़ है या भूखे की रोटी? क्या ये अनंत आसमान है या अ-आयामी ब्लैक होल?

विविध भारती के जुबली झंकार कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित कवि सम्मेलन - 'प्यार की बातें प्यार के गीत' में इस बात को गहराई से बता रहे हैं देश के चुनिंदा कवि. जिनमें शामिल हैं - बालकवि बैरागी, निदा फ़ाज़ली, कुंवर बेचैन, राहत इंदौरी, और दीप्‍ती मिश्र. संचालन यूनुस खान का है. विवरण यहाँ और यहाँ दर्ज है.

कविसम्मेलन तीन घंटे चला, जिसकी एक-एक घंटे की रेकॉर्डिंग (प्रत्येक कोई 7 मेगाबाइट एमपी3 मात्र.) आपके लिए नीचे लाइफ़लॉगर प्लेयर की कड़ी के रूप में दी जा रही है. पर, अच्छा ये होगा कि आप इन्हें डाउनलोड कर रखें, और फुरसत के समय सुनें-सुनाएं. आपके मोबाइल एमपी3 प्लेयर के लिए भी यह शानदार संग्रह होगा - किसी लंबी बोरियत भरी यात्रा में इसे चालू कर लें, प्यार के सागर में गोते खाते आपका सफर कैसे कटेगा आपको यकीनन पता ही नहीं चलेगा.





प्यार की बातें प्यार के गीत भाग 1



भाग 1 डाउनलोड यहाँ से करें



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प्यार की बातें प्यार के गीत भाग 2



भाग 2 डाउनलोड यहाँ से करें



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प्यार की बातें प्यार के गीत भाग 3



भाग 3 डाउनलोड यहाँ से करें



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Tuesday, October 9, 2007

सुनिये विविध भारती की स्वर्ण जयंति पर लताजी का ममता सिंह द्वारा लिया गया साक्षात्कार

A telephonic interview of Lata Mangeshaker by Radio Sakhi mamta Singh

विविध भारती की स्वर्ण जयंती पर हम सबने टीवी पर कई विशेष कार्यक्रम देखे हैं और कई किस्मत वालों ने रेडियो पर पूरा कार्यक्रम सुना भी है। यूनुस भाई ने रेडियो के जाने माने लोगों के फोटो भी रेडियोनामा पर हमें दिखाए हैं। इस सुअवसर पर रेडियो सखी ममतासिंह ने स्वर साम्राज्ञी, स्वर कोकिला लता मंगेशकर का एक टेलिफोनिक साक्षात्कार किया था। उस साक्षात्कार को आज मैं आप सबके लिये पेश कर रहा हूँ।

आधे घंटे के इस इंटरव्‍यू की फाइल बहुत बड़ी थी तो मैने सोचा इसका वजन कम कर दिया जाये, और किया भी; परन्तु मजा नहीं आया तो फाइल को काट कर दो भागों में किया ताकि इस्निप पर आसानी से जोड़ा जा सके और सुनने वालों को परेशानी हो। फिर भी इस साक्षात्कार का पूरा मजा लेने के लिये जिन मित्रों की नेट की स्पीड कम हो वे प्ले के बटन पर क्लिक करने के बाद पॉज कर दीजिये ताकि पूरा लोड हो जाये और सुनते समय अटके नहीं।

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Wednesday, October 3, 2007

अब विविध भारती सुनें 5.1 सराउंड साउंड सिस्टम पर

विविध भारती के 50 वें जन्मदिन (3 अक्तूबर 2007) पर आइए, आज आपसे यह तकनीकी टिप साझा करते हैं. विविध भारती सुनने का आनंद 5.1 सराउंड साउंड सिस्टम पर कैसे लें?

विविध भारती मैं कोई पिछले 30 वर्षों से लगातार सुनता आ रहा हूँ. राजनांदगांव में छात्र जीवन के दिनों में रेडियो की सर्किट में फेरबदल कर उसका स्पेशल एंटीना घर के छत पर लगाकर विविध भारती विज्ञापन प्रसारण सेवा नागपुर मीडियम वेव पर सुना करता था (दिन में दोपहर में 10-2 बजे तक शॉर्टवेव प्रसारण बंद रहता है, और आज भी रतलाम में घर पर छत पर एफएम के लिए एंटीना लगा है). तब प्रसारण के शोर (रेडियो की घरघराहट और सरसराहट) के बीच गीतों के बोलों को अपने कानों के प्राकृतिक नॉइस फ़िल्टर से ही दूर करना होता था.

परंतु अब स्थिति बदल चुकी है. मैं अब विविध भारती सेवा 5.1 सराउंड साउंड सिस्टम पर सुनता हूँ. डॉल्बी सराउंड साउंड मेंएकदम क्रिस्टल क्लीयर आवाज़.

यूँ तो विविध भारती प्रसारण सेवा देश भर में कोई 30 एफएम चैनलों के जरिए डिस्टार्शन (घरघराहट-सरसराहट मुक्त) फ्री प्रसारण करती है, परंतु उन स्थलों पर जहाँ यह सुविधा पहुँच नहीं पाती, इस तरह की सेवा डिश टीवी के जरिए प्राप्त की जा सकती है. भारत में अभी दूरदर्शन, जीटीवी, और टाटा-स्टार के डिश टीवी सेवाएँ हैं. दूरदर्शन की सेवा मुफ़्त है, जबकि अन्य में मासिक किराया देना होता है. डिश टीवी की कीमत कोई पंद्रह सौ रुपए से लेकर प्रारंभ होती है.

डिश टीवी और/या एफ़एम (एफएम प्रसारण व रिसीवर को स्टीरियो होना चाहिए) रेडियो के स्टीरियो आउट को आप डॉल्बी प्रोलॉजिक II तंत्र युक्त 5.1 सराउंड साउंड एम्प्लीफ़ॉयर सिस्टम (फ़िलिप्स या बॉस अनुशंसित) के स्टीरियो इनपुट में जोड़ें. डॉल्बी प्रोलॉजिक II तंत्र स्टीरियो ध्वनि को कृत्रिम रूप से 5.1 डिजिटल सराउंड साउंड में बदलता है, और इस वजह से आपको संगीत सुनने का आनंद कई गुना अधिक मिलता है.

अच्छे परिणाम के लिए स्पीकर सिस्टम आल्टेक लांसिंग या बोस का लें.

हालाकि विविध भारती के वे कार्यक्रम जो मोनो मोड में होते हैं – जैसे कि पुराने फ़िल्मी गाने जो स्टीरियो में रेकार्ड ही नहीं हुए हैं, वे 5.1 सराउंड साउंड में उतने प्रभावी नहीं लगेंगे, मगर नए जमाने के गाने जो चित्रलोक इत्यादि कार्यक्रमों में बजते हैं, उनका मजा कुछ और ही होता है.

इस विधि से आप किसी भी दूसरे स्टीरियो साउंड प्रसारण (जैसे कि रेडियो मिर्ची) या ऑडियो सीडी के संगीत का आनंद 5.1 सराउंड सिस्टम में ले सकते हैं.

तो फिर देर किस बात की? ले आइए आज ही एक 5.1 सराउंड साउंड सिस्टम.

Tuesday, September 25, 2007

रेडियो का प्रसार गीत--नाच मयूरा नाच--लावण्‍या शाह का लेख


प्रसार ~ गीत "नाच रे मयूरा " "आकाशवाणी " का सर्व प्रथम गीत जिसे
प्रसारित किया गया वह था "नाच रे मयूरा , खोल कर सहस्त्र नयन देख सरस
स्वप्न जो कि आज हुआ पूरा, नाच रे मयूरा " शब्द लिखे थे कवि पँडित
नरेन्द्र शर्मा जी ने, सँगीत से सजाने वाले श्री अनिल बिस्वास जी थे और
स्वर था गायक श्री मन्नाडे जी का !
सँगीतकार श्री अनिल बिस्वास जी की जीवनी के लेखक श्री शरद दत्त जी ने इस
गीत से जुडे कई रोचक तथ्य लिखे हैँ. जैसे इस गीत की पहली दो पँक्तियाँ
फिल्म "सुजाता " मेँ मशहूर सिने कलाकार सुनील दत्त जी गुनगुनाते हैँ
सुजाता १९५९ मेँ बनी नूतन और सुनील दत्त द्वारा अभिनीत, निर्माता ,
निर्देशक बिमल रोय की मर्मस्पर्शी पेशकश रही थी.

जिसका जिक्र आप अनिल दा की इस वेब साइट पर भी पढ सकते हैँ

The Innaugeral Song for Vividh -Bharti
http://anilbiswas.com/ RE : NAACH RE MAYURA

डा. केसकर जी मँत्री थे सूचना व प्रसारण के ( Information and
Broadcasting ) डा. केसकर जी मँत्री थे सूचना व प्रसारण के !उन्हेँ उस
समय के हिन्दी सिने सँगीत के गीतोँ से नये माध्यम "रेडियो" का आरँभ हो ये
बात नापसन्द थी ! अब क्या हो ? आकाशवाणी पर तब कैसे गीत बजाये जायेँ ये
एक बडा गँभीर और सँजीदा मसला बन गया !
उसका हल ये निकाला गया कि "शुध्ध ~ साहित्यिक " किस्म के गीतोँ का ही
प्रसारण किया जायेगा. और साहित्योक हिन्दी गीतोँ के लिखनेवाले होँगे
देहली से श्री भगवती चरण वर्मा जी ( जिनका उपन्यास "चित्रलेखा " हिन्दी
साहित्य जगत मेँ धूम मचा कर अपना गौरवमय स्थान हासिल किये हुए था और बँबई
से कवि पँडित नरेब्द्र शर्मा जी को चुना गया. इन गीतोँ को सँगीत बध्ध
करेँगे मशहूर बँगाली सँगीत निर्देशक श्री अनिल बिस्वास जी !

उस ऐतिहासिक प्रथम सँगीत प्रसारण के शुभ अवसर पर नरेन्द्र शर्मा जी ने
अनिल बिस्वास को ये गीत दीये और उन्के लिये सुमधुर धुन बनाने का अनुरोध
किया.
ये गीत थे ~~
१) चौमुख दीवला बार धरुँगी, चौबारे पे आज,
जाने कौन दिसा से आयेँ, मेरे राजकुमार
( गायिका थीँ श्री मीना कपूर जी )

२ ) 'रख दिया नभ शून्य मेँ किसने तुम्हेँ मेरे ह्र्दय ?
इन्दु कहलाते, सुधा से विश्व नहलाते,
फिर भी न जग ने न जाना तुम्हेँ, मेरे ह्रदय "
( गायिका थीँ श्री मीना कपूर जी )

३ ) "नाच रे मयूरा, खोल कर सहस्त्र नयन,
देख सघन, गगन मगन,
देख सरस स्वप्न जो कि आज हुआ पूरा,
नाच रे मयूरा ...."
( गायक थे श्री मन्ना डे जी )
( At the inauguration of Vividh Bharati service
the very first song to be played was none other than "naach re
mayuuraa".)

४ ) "युग की सँध्या कृषक वधु सी,
किसका पँथ निहार रही ?
उलझी हुई, सम्स्याओँ की,
बिखरी लटेँ, सँवार रही "
( गायिका थीँ सुश्री लता मँगेशकर जी )

सभी गीतोँ का स्वर सँयोजन अनिल दा ने किया जिसका प्रसारण देढ घँटे के
प्रथम ऐतिहासिक कार्यक्र्म मेँ भारत सरकार ने भारत की जनता को नये माध्यम
"रेडिय़ो " के, श्री गणेश के स्वरुप मेँ , इस अनोखे उपहार से किया.
यही !"प्रसार ~ गीत " कार्यक्रम से हुआ आकाशवाणी का जन्म !!


एक दुखद घटना इस कथा से जुडी हुई है ~ "युग की सँध्या " गीत , इस प्रथम
प्रसारण के बाद, न जाने कैसे, मिट गया ! इस्लिये, उस गीत की रेकोर्डीँग
आज तक उपलब्ध नहीँ है ! भारत कोकिला, स्वर साम्राज्ञी श्री लता मँगेशकर
उसे अगर गा देँ , पूरा गीत नहीँ तो कुछ पँक्तियाँ ही तो सारे भारत के लोग
दोबारा उस गीत का आनँद ले पायेगेँ . आज सँगीत से उस गीत को सजानेवाले
अनिल दा जीवित नहीँ हैँ और ना ही गीत के शब्द लिखने वाले कवि पँडित
नरेन्द्र शर्मा ( मेरे पापा )
भी हमारे बीच उपस्थित नहीँ हैँ ! हाँ, मेरी आदरणीया लता दीदी हैँ और
उनकी साल गिरह पर २८ सितम्बर को मैँ उनके दीर्घायु होने की कामना करती
हूँ !
" शतम्` जीवेन्` शरद: " की परम कृपालु ईश्वर से , विनम्र प्रार्थना करती
हूँ और ३ अक्तूबर को "विविध भारती " के जन्म दीवस पर अपार खुशी और सँतोष
का अनुभव करते हुए, निरँतर यशस्वी, भविष्य के स स्नेह आशिष भेज रही
हूँ ...आशा करती हूँ कि " रेडियो" से निकली आवाज़ , हर भारतीय श्रोता के
मन की आवाज़ हो, सुनहरे और उज्वल भविष्य के सपने सच मेँ बदल देनेवाली ताकत
हो जो रेडियो की स्वर ~ लहरी ही नहीँ किँतु, "विश्व व्यापी आनँद की लहर "
बन कर
मनुष्य को मनुष्य से जोडे रखे और भाएचारे और अमन का पैगाम फैला दे. जिस
से हरेक रुह को सुकुन मिले.
मेरी विनम्र अँजलि स्वीकारेँ ........
.शुभँ भवति ...
सादर ~ स ` स्नेह,
लावण्या

ऊपर की तस्‍वीर में लता मंगेशकर और पंडित नरेंद्र शर्मा

Monday, September 24, 2007

तीन अक्‍तूबर को विविध भारती पूरे कर रही है अपने पचास वर्ष, आईये विविध भारती से जुड़ी अपनी यादें बांटें ।


तीन अक्‍तूबर क़रीब आ रहा है । आप सोच रहे होंगे कि दो अक्‍तूबर तो पता है, गांधी जी का जन्‍मदिन । लेकिन ये तीन अक्‍तूबर को क्‍या हुआ था । तीन अक्‍तूबर सन 1957 को विविध भारती की स्‍थापना हुई थी । इस साल विविध भारती सेवा अपने पचास साल पूरे कर रही है । भारतीय मीडिया के इतिहास में
विविध भारती ऐसा पहला मनोरंजन रेडियो चैनल है जो अपनी स्‍थापना के पचास साल पूरे कर रहा है । और ये एक अहम घटना है ।

विविध-भारती ने एक सुनहरा दौर देखा है रेडियो का । वो दौर जब सन 1967 से रेडियो पर विज्ञापन प्रसारण सेवा की शुरूआत हुई और फिर अमीन सायानी, ब्रज जी, मनोहर महाजन जैसे अनेक रेडियो प्रस्‍तुतकर्ताओं ने अपने प्रायोजित कार्यक्रम तैयार किये । बिनाका गीत माला, एस कुमार्स का फिल्‍मी मुक़दमा, सेरीडॉन के साथी, बॉर्नवीटा क्विज़ कॉन्‍टेस्‍ट, इंसपेक्‍टर ईगल जैसे अनगिनत प्रायोजित कार्यक्रम ऐसे रहे हैं जिन्‍होंने जनता के दिलों पर राज किया । आज जैसी उत्‍सुकता धारावाहिकों को लेकर होती है वैसी ही उत्‍सुकता एक ज़माने में रेडियो कार्यक्रमों को लेकर होती थी । और रेडियो के एनाउंसर किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं थे । मुझे याद है हमारे घर में भी रेडियो पूरे दिन चलता था और जैसे अवचेतन मन में वहीं से रेडियो के संस्‍कार बन गये ।

आज मैं यहां रेडियो की अपनी यादें नहीं बांट रहा हूं । बल्कि आप सबका आह्वान कर रहा हूं ।

आईये विविध भारती की स्‍वर्ण जयंती पर बांटें अपनी यादें । विविध भारती की आपकी जिंदगी में क्‍या जगह थी, या क्‍या जगह है । जिंदगी के वो कौन से सुनहरे लम्‍हे थे जो आपने अपने इस प्रिय रेडियो चैनल के साथ गुज़ारे । हवामहल, छायागीत, मनचाहे गीत, जयमाला, लोक संगीत जैसे पुराने या फिर हैलो फरमाईश, मंथन, सखी सहेली, सुहाना सफर या उजाले उनकी यादों के जैसे नये कार्यक्रमों से जुड़ी आपकी कोई तो यादें होंगी । कोई ऐसा गीत जो तब बजा तो यूं लगा जैसे आपके लिए बज रहा है । कोई ऐसी बात जो रेडियो से कही गयी तो सीधे आपके दिल में उतर गयी । जिंदगी के बेहद व्‍यस्‍त दिनों में भी विविध भारती की आवाज़ ने आपको सुकून का अहसास दिया होगा । आईये इन सभी यादों का एक गुलदस्‍ता सजाएं । और विविध भारती की स्‍वर्ण जयंती मनाएं ।

तो देर किस बात की है । अगर आप रेडियोनामा के सदस्‍य हैं तो तुंरत अपनी बात लिख दीजिए । अगर रेडियोनामा के सदस्‍य नहीं हैं तो कोई बात नहीं ।
आप इस ईमेल पते पर अपना आलेख भेज सकते हैं ।
radionama@gmail.com
ध्‍यान रहे, जहां तक मुमकिन हो आपको हिंदी में लिखना है ।
अगर हिंदी में लिखने में असुविधा है तो आप अंग्रेजी में लिख भेजिए । हम उसे रूपांतरित कर लेंगे ।

आईये विविध भारती की स्‍वर्ण जयंती मनाएं । सबको बताएं 3 अक्‍तूबर 2007 को विविध भारती अपने पचास साल पूरे कर रही है ।

ऊपर है विविध भारती के संस्‍थापक सदस्‍य पंडित नरेंद्र शर्मा की तस्‍वीर ।
दूसरी तस्‍वीर में अभिनेत्री नरगिस फौजी भाईयों के लिए जयमाला प्रस्‍तुत करते हुए । अखबार 'हिंदू' से साभार ।


चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: vividh-bharati, golden-jubilee-of-vividh-bharati, विविध-भारती-की-स्‍वर्ण-जयंती,


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