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Saturday, May 3, 2008
हा हा हा हा हा हा हा हा ही ही ही हे हे हे हे हे
वही होगा जो ऊपर शीर्षक में लिखा है. और क्या होगा.
विविध भारती के जुबली झंकार में देश के नामी व्यंग्यकार मिले और फ़िल्में आह फ़िल्में वाह के नाम पर हा हा ही ही हू हू हे है की बारहखड़ी बिखेर दी. लीजिए सुनें पहली किश्त.
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ऑनलाइन प्लेयर पर सुनने के लिए नीचे दिए प्लेयर के प्ले बटन पर क्लिक करें.
दूसरी किश्त डाउनलोड यहां से करें
और ऑनलाइन प्लेयर पर यहाँ सुनें-
तीसरी किश्त डाउनलोड यहाँ से करें
ऑनलाइन प्लेयर पर यहाँ सुनें -
और चौथी, और अंतिम किश्त -
हा हा ही ही हे हे हू हू .... बिजली गोल हो गई! भई, मेरे शहर में बिजली बड़ी मंहगी है. ऊपर से बहुत आंख मिचौली खेलती है. ले दे कर मिलती है, थोड़ी थोड़ी और जब तब गोल होते रहती है... हा हा हा.... बू हू हू ... (ज्यादा हंसने से आंखों में आंसू आ ही जाते हैं,)
# अद्यतन - यूनुस खान ने इस कार्यक्रम के बचे भाग की अविकल रेकॉर्डिंग दो भागों में आर्काइव.ऑर्ग पर अपलोड किया है. इसकी एमपी 3 फ़ाइलें यहाँ से डाउनलोड करें -
पहला भाग यहाँ से डाउनलोड करें
दूसरा भाग यहाँ से डाउनलोड करें
ऑनलाइन प्लेयर पर यहाँ बजाने के कोड में कुछ त्रुटि आ रही है. त्रुटियों को दूर कर उन्हें शीघ्र ही यहाँ लगाया जाएगा.
Thursday, April 3, 2008
इश्क, आख़िर क्या है ये इश्क?
क्या ये गूंगे का गुड़ है या भूखे की रोटी? क्या ये अनंत आसमान है या अ-आयामी ब्लैक होल?
कविसम्मेलन तीन घंटे चला, जिसकी एक-एक घंटे की रेकॉर्डिंग (प्रत्येक कोई 7 मेगाबाइट एमपी3 मात्र.) आपके लिए नीचे लाइफ़लॉगर प्लेयर की कड़ी के रूप में दी जा रही है. पर, अच्छा ये होगा कि आप इन्हें डाउनलोड कर रखें, और फुरसत के समय सुनें-सुनाएं. आपके मोबाइल एमपी3 प्लेयर के लिए भी यह शानदार संग्रह होगा - किसी लंबी बोरियत भरी यात्रा में इसे चालू कर लें, प्यार के सागर में गोते खाते आपका सफर कैसे कटेगा आपको यकीनन पता ही नहीं चलेगा.
प्यार की बातें प्यार के गीत भाग 1
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प्यार की बातें प्यार के गीत भाग 2
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प्यार की बातें प्यार के गीत भाग 3
प्लेयर पर सीधे बजाएं:
Sunday, February 3, 2008
प्यार हुआ इकरार हुआ... पहले सुनिए, फिर कुछ कहिए!
कुछ विवरण यहाँ पढ़ें
विविध भारती की जुबली झंकार की झनझनाहट सुनी क्या?
प्यार हुआ इकरार हुआ
मात्र झलक
यकीनन. इसके सुनने के बाद प्यार का जो बुखार चढ़ेगा, वो
शर्तिया हफ़्तों, महीनों नहीं उतरेगा.
तो फिर देर किस बात की, दिए गए लिंक क्लिक करिए व सुनिये
और हाँ, धन्यवाद यूनुस जी व संपूर्ण विविध भारती की टीम को इस शानदार प्रस्तुति के लिए.
यूनुस जी ने इसे खासतौर पर कोई सप्ताह भर में इसे संपादित किया था. और क्या खूब संपादित किया था. इसीलिए संपूर्ण रेकॉर्डिंग प्रस्तुत है - शाम पांच बजे का समाचार भी - ताकि सनद रहे...
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Wednesday, October 3, 2007
अब विविध भारती सुनें 5.1 सराउंड साउंड सिस्टम पर
विविध भारती के 50 वें जन्मदिन (3 अक्तूबर 2007) पर आइए, आज आपसे यह तकनीकी टिप साझा करते हैं. विविध भारती सुनने का आनंद 5.1 सराउंड साउंड सिस्टम पर कैसे लें?
विविध भारती मैं कोई पिछले 30 वर्षों से लगातार सुनता आ रहा हूँ. राजनांदगांव में छात्र जीवन के दिनों में रेडियो की सर्किट में फेरबदल कर उसका स्पेशल एंटीना घर के छत पर लगाकर विविध भारती विज्ञापन प्रसारण सेवा नागपुर मीडियम वेव पर सुना करता था (दिन में दोपहर में 10-2 बजे तक शॉर्टवेव प्रसारण बंद रहता है, और आज भी रतलाम में घर पर छत पर एफएम के लिए एंटीना लगा है). तब प्रसारण के शोर (रेडियो की घरघराहट और सरसराहट) के बीच गीतों के बोलों को अपने कानों के प्राकृतिक नॉइस फ़िल्टर से ही दूर करना होता था.
परंतु अब स्थिति बदल चुकी है. मैं अब विविध भारती सेवा 5.1 सराउंड साउंड सिस्टम पर सुनता हूँ. डॉल्बी सराउंड साउंड मेंएकदम क्रिस्टल क्लीयर आवाज़.
यूँ तो विविध भारती प्रसारण सेवा देश भर में कोई 30 एफएम चैनलों के जरिए डिस्टार्शन (घरघराहट-सरसराहट मुक्त) फ्री प्रसारण करती है, परंतु उन स्थलों पर जहाँ यह सुविधा पहुँच नहीं पाती, इस तरह की सेवा डिश टीवी के जरिए प्राप्त की जा सकती है. भारत में अभी दूरदर्शन, जीटीवी, और टाटा-स्टार के डिश टीवी सेवाएँ हैं. दूरदर्शन की सेवा मुफ़्त है, जबकि अन्य में मासिक किराया देना होता है. डिश टीवी की कीमत कोई पंद्रह सौ रुपए से लेकर प्रारंभ होती है.
डिश टीवी और/या एफ़एम (एफएम प्रसारण व रिसीवर को स्टीरियो होना चाहिए) रेडियो के स्टीरियो आउट को आप डॉल्बी प्रोलॉजिक II तंत्र युक्त 5.1 सराउंड साउंड एम्प्लीफ़ॉयर सिस्टम (फ़िलिप्स या बॉस अनुशंसित) के स्टीरियो इनपुट में जोड़ें. डॉल्बी प्रोलॉजिक II तंत्र स्टीरियो ध्वनि को कृत्रिम रूप से 5.1 डिजिटल सराउंड साउंड में बदलता है, और इस वजह से आपको संगीत सुनने का आनंद कई गुना अधिक मिलता है.
अच्छे परिणाम के लिए स्पीकर सिस्टम आल्टेक लांसिंग या बोस का लें.
हालाकि विविध भारती के वे कार्यक्रम जो मोनो मोड में होते हैं – जैसे कि पुराने फ़िल्मी गाने जो स्टीरियो में रेकार्ड ही नहीं हुए हैं, वे 5.1 सराउंड साउंड में उतने प्रभावी नहीं लगेंगे, मगर नए जमाने के गाने जो चित्रलोक इत्यादि कार्यक्रमों में बजते हैं, उनका मजा कुछ और ही होता है.
इस विधि से आप किसी भी दूसरे स्टीरियो साउंड प्रसारण (जैसे कि रेडियो मिर्ची) या ऑडियो सीडी के संगीत का आनंद 5.1 सराउंड सिस्टम में ले सकते हैं.
तो फिर देर किस बात की? ले आइए आज ही एक 5.1 सराउंड साउंड सिस्टम.
Friday, September 14, 2007
मिर्ची सुनने वाले ऑलवेज खुश....
आआऊऊईई एफ़एम रेनबोओओओओ....
सुबह सुबह ट्रांजिस्ट ऑन किया. बढ़िया भजन आ रहा था. भक्ति रस में मन तल्लीन था. भजन समाप्त होते ही ट्रांजिस्टर चीख़ा –
आआऊऊईई एआईआर एफ़एम रेनबोओओओओ....
मैंने ट्रांजिस्टर को जांचा. उसके बैंड दिखाने वाले सूचक को जांचा. हां, मैंने एफएम रेनबो ही लगाया था, रेडियो मिर्ची नहीं. मगर फिर भी यह मुझे बता रहा था कि आप सुन रहे हैं –
आआऊऊईई एआईआर एफ़एम रेनबोओओओओ....
बुड़बक समझ रखा है क्या? हमने रेनबो ही लगाया है भाई. चलो इस संदेश को इग्नोर कर दिया. दूसरा भजन आया. तीसरा आया. चौथा आते ही फिर से ट्रांजिस्टर ने बताया –
आआऊऊईई एआईआर एफ़एम रेनबोओओओओ....
यार, मेरा ट्रांजिस्टर उन्नत किस्म का है. इसमें फ्रिक्वेंसी ड्रिफ़्ट नहीं होती. जो स्टेशन, जो बैण्ड मैं लगाता हूँ, ये वो ही बजाता है. फिर फिजूल क्यों बताते हो? पर जब एक घंटे के अंतराल में इसने मुझे पांचवी बार बताया कि मैंने -
आआऊऊईई एआईआर एफ़एम रेनबोओओओओ....
लगाया हुआ है, तो मेरा पारा चढ़ गया. मैंने रेडियो के बैण्ड परिवर्तक (रिमोट) को उमेठा, और रेडियो मिर्ची लगाया.
कोई फंकी रीमिक्स चल रहा था. उसके खत्म होते ही ट्रांजिस्टर चिल्लाया –
मिर्ची सुनने वाले आलवेज खुश!
मुझे आश्चर्य हुआ कि कैसे मेरे ट्रांजिस्टर को पता चला कि मैंने मिर्ची लगाया है और मैं आलवेज खुश होने की नाकाम कोशिश कर रहा हूँ.
दूसरा रीमिक्स आया, तीसरा आया. उसके बाद फिर मेरे ट्रांजिस्टर ने बताया –
मिर्ची सुनने वाले आलवेज खुश!
मैंने कन्फर्म किया कि मैंने रेडियो मिर्ची ही लगाया हुआ है. हाँ, रेडियो मिर्ची ही लगा हुआ था. फिर वो क्यूं इसे बता रहा था पता नहीं.
घंटा भर सुनने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं जितना खुश नहीं था, उससे ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर बोल रहा था –
मिर्ची सुनने वाले आलवेज खुश!
मैंने बड़े दुःखी मन से रेडियो का बैण्ड बदला. इस दफा लगा विविध भारती.
सुबह-सुबह पुराने – भूले बिसरे गीत चल रहे थे.
गाना बज रहा था – अफसाना लिख रही हूँ दिले बेकरार का...
गाना खत्म होते ही ट्रांजिस्टर चिल्लाया –
आप सुन रहे हैं – विविध भारती.
ये यूनुस मियाँ की आवाज़ लग रही थी. मुझे आश्चर्य हुआ कि मैंने विविध भारती ही रेडियो पर ट्यून किया हुआ है, तो उसमें उर्दू सर्विस तो बजेगी नहीं. फिर यूनुस मियाँ मुझे क्यों ये बता रहे हैं कि आप सुन रहे हैं विविध भारती?
विविध भारती बैण्ड पर भी कोई हर पंद्रह मिनट, आधा घंटा में मुझे याद दिलाता रहा कि मैं विविध भारती सुन रहा हूँ. यदि मुझे बारंबार, नियमित अंतराल से याद नहीं दिलाया जाता तो शायद मैं समझता कि किशोर कुमार का वो गाना जो अभी मैंने सुना वो शायद किसी और चैनल में सुना होऊंगा, और क्रेडिट उसे दे दूंगा.
कोई आधा-दर्जन बार जब मैंने सुना –
आप सुन रहे हैं विविध भारती
तो फिर मेरा दिमाग झन्ना गया. मैंने ट्रांजिस्टर का कान उमेठा और उसे उर्दू सर्विस पर लगा दिया.
पहली ही आवाज़ मेरे कान में पड़ी –
ये आल इंडिया रेडियो की उर्दू सर्विस है.
हाँ, भई, है. है. ऊर्दू सर्विस ही है. मैंने वो ही बैण्ड ट्यून किया है. मत बताओ. मेरा हाथ चला. अब मैंने लगाया 93.4 माई एफ़एम.
कोई जानी पहचानी धुन आ रही थी. थोड़ा सा रुका तो धुन के बाद अनाउंसर चिल्लाया –
माई दुनिया, 93.4 माई एफ़एम...
हुँह. सभी मुझे बेवकूफ समझते हैं. क्या मुझे नहीं पता कि मैंने क्या स्टेशन, कौन सा बैण्ड लगाया है? और हर पंद्रह मिनट में बताते हैं कि क्या स्टेशन सुन रहा हूँ. क्या मुझे डिमेंशिया का मरीज समझते हैं? जो मैं हर दस मिनट में भूल जाता हूं कि मैं कौन सा स्टेशन सुन रहा हूँ, कौन सा स्टेशन मैंने ट्यून किया है?
मैंने ट्रांजिस्टर का स्विच बन्द कर दिया. पर दिमाग में शान्ति नहीं थी. बेतरतीब आवाजें मन में बेतरतीब गूंज रही थीं –
आआऊऊईई एआईआर एफ़एम रेनबोओओओओ....
माई दुनिया, 93.4 माई एफ़एम..
ये आल इंडिया रेडियो की उर्दू सर्विस है.
आप सुन रहे हैं – विविध भारती.
मिर्ची सुनने वाले आलवेज खुश!
मुझे किसी मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए. क्या खयाल है आपका?
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