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Sunday, July 5, 2009

युनूस जी की डाँट, HAM रेडियो, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड

मैं तो कहूँगा कि युनूस जी ने डाँट लगाई है! अब भले ही वे इंकार कर दें, लेकिन उन्होंने कहा है कि दो पोस्ट लिख कर आगे कुछ लिखो ही ना, ये अच्छी बात नहीं है। डाँट सुनकर मुझे भी याद आया कि ज्ञानदत्त जी के ब्लॉग पर आई सतीश सक्सेना जी की आग्रहनुमा टिप्पणी के बहाने हमने एक पोस्ट लिख कर बताया था कि कि शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM क्यों कहते हैं। उसकी अगली कड़ी में जिज्ञासा शांत करने की कोशिश की गयी थी कि सोनिया गांधी, अमिताभ बच्चन जैसे शौकिया रेडियो ऑपरेटर (HAM) आख़िर करते क्या हैं!? अगली पोस्ट का संकेत देते हुये हमने कुछ और रोचक जानकारियां तथा भारत सहित, दुनिया के कुछ चर्चित व्यक्तियों की HAM पहचान (कहें तो आईडी) देने की बात की थी जिससे आप उनसे बतिया सकें! बस इसी बात को लेकर डाँट पड़ गई कि अगली कड़ी कहाँ है?


लापरवाही का यह हाल है कि पिछले दिनों मीडिया द्वारा अनदेखा किया गया लिम्का बुक का रिकॉर्ड भी हमें अगली किसी पोस्ट के लिए प्रेरित नहीं कर सका था। रिकॉर्ड यह था कि पहली बार एक 22 वर्षीया शौकिया रेडियो ऑपरेटर भारतीय युवती ने 12 सद्स्यों वाले अंतर्राष्ट्ररीय अभियान में हिस्सा लिया। वह इस समूह की इकलौती महिला सदस्य थीं। बात यहीं खतम नहीं हो जाती। रिकॉर्ड यह भी है कि International Dxpedition TI9KK, Costa Rica अभियान में यह पहली भारतीय नागरिक थीं। इस अनोखे रिकॉर्ड धारी, हैदराबाद निवासी युवती के अभियानों, रिकॉर्डों आदि की जानकारी यहाँ देखी जा सकती है। सुश्री एस यामिनी स्कूलों, इंजीनियरिंग कालेजों, आईआईटी के छात्रों को प्रशिक्षण देती हैं। शौकिया रेडियो पर सेमिनार का आयोजन भी करती हैं।


अब क्या किया जाये? सोचते हुये पोस्ट लिखने बैठा तो वह तमाम प्रश्न सामने आ गये जो जिज्ञासुयों ने लिख भेजे थे ईमेल में। पहला प्रश्न तो यही था कि एक शौकिया रेडियो ऑपरेटर बनने के लिए क्या करना पड़ता है? इसका जवाब कुछ इस तरह है कि यह दुनिया के उन गिने-चुने शौक में से एक है जिसके लिए सरकारी लाइसेंस की आवश्यकता पड़ती है। शौकिया रेडियो रखने व संचालित करने के लिये 12 वर्ष से अधिक की उम्र का कोई भी नागरिक मुख्यत: तीन विषयों I) Morse Code (Transmission & Reception) ii) Communication Procedure iii) Basic Electronics की परीक्षा में सफल होने के बाद लाइसेंस प्राप्त कर सकता है, जिसे भारत सरकार के सूचना मंत्रालय के अंतर्गत दूरसंचार विभाग के वायरलेस मॉनिटरिंग स्टेशन का प्रमुख अधिकारी जारी करता है। परीक्षा में शामिल होने के लिए किसी शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं है। दो माह तक प्रतिदिन दो घंटे का प्रशिक्षण लेकर परीक्षा में शामिल हुया जा सकता है। स्वयं तैयारी कर के भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। लगभग प्रतिमाह होने वाली परीक्षा की फीस विभिन्न लाईसेंस के अनुसार 10 से 25 रूपये है। आवेदन पत्र यहाँ से डाउनलोड किया जा सकता है।

Call Sign, एक शौकिया रेडियो ऑपरेटर की पहचान होता है। जिसके पहले अक्षर संबंधित देश को प्रदर्शित करते है और इसे International Telecommunications Union द्वारा जारी किया जाता है। हालांकि किसी खास घटनाक्रम के चलते किसी विशेष अक्षर का भी प्रयोग होता है ताकि उससे जुड़े रेडियो स्टेशनों की पहचान तुरंत हो सके। इन सब विशेषाधिकारों के कारण इन हैम को कुछ कार्य निषिद्ध भी हैं, जैसे कि: 1. वे अपने रेडियो का उपयोग कर धन नहीं कमायेंगे। (आखिर यह एक शौक है) 2. वे अपने रेडियो का उपयोग जनता के लिये किसी प्रसारण हेतु नहीं कर सकते। यह मात्र एक ऑपरेटर को दूसरे ऑपरेटर से वार्तालाप के लिए है। संगीत य अन्य कार्यों के लिए नहीं। कुछ अधिक जानकारी इस सरकारी वेबसाईट पर मिल सकेगी।

कुछेक जानकारीपरक वेबसाईट्स हैं:
  • हैम रेडियो पर एक भारतीय व्यवसायिक वेबसाईट http://www.hamradioindia.org/
  • आईआईटी कानपुर के सहयोग से सरकारी वेबसाईट http://www.vigyanprasar.gov.in/ham/hamnew.asp
  • हैम रेडियो पर केरल की वेबसाईट http://www.naturemagics.com/ham-radio/ham-radio.shtm
  • शौकिया रेडियो ऑपरेटरों के लिए एक भारतीय वेबसाईट http://www.indiahams.com/
  • भारतीय हैम रेडियो ऑपरेटरों के लिए वेबसाईट http://www.hamradioindia.com/
  • हैम रेडियो इंडिया की वेबसाईट http://www.hamradioindia.net/
  • अमैच्योर रेडियो सोसायटी ऑफ इंडिया की वेबसाईट http://www.arsi.info/
  • भारतीय शौकिया रेडियो ऑपरेटर पर विकिपीडिया पृष्ठ http://en.wikipedia.org/wiki/Amateur_radio_in_India
  • विकिपीडिया पर शौकिया रेडियो संबंधित पत्रिकायों की सूची http://en.wikipedia.org/wiki/List_of_amateur_radio_magazines
भारत कुछ चर्चित व्यक्तियों के call sign नीचे दिये जा रहे हैं , जिनसे सीधी बात की जा सकती है
  • सोनिया गांधी VU2SON
  • प्रियंका गांधी VU2PGY
  • अमिताभ बच्चन VU2AMY
  • दयानिधि मारन VU2DMK
  • कमल हसन VU2HAS
  • कुमार बंगारप्पा VU3KMV

दुनिया के प्रभावशाली कुछ व्यक्तियों की सूची यहाँ , यहाँ तथा यहाँ देखें

यह विधा इतनी मह्त्वपूर्ण व उपयोगी है कि देश की प्रतिष्ठित लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी, मसूरी में हैम रेडियो के लिए अलग क्लब बना हुया है। जिसमें इसकी बारीकियों के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

एक बात याद की जाये तो भारत के प्रधानमंत्री रहे स्वर्गीय राजीव गांधी, अपने मारे जाने के चंद घंटो पहले भी 'ऑन एयर' थे तथा उनकी आखिरी 'कॉल' विशाखापत्तन्नम से थी। 1994 में राजीव गांधी फाऊँडेशन के सहयोग से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अमैच्योर रेडियो ने राजीव गांधी फाँऊडेशन अमैच्योर रेडियो क्लब की स्थापना की थी जिसे राजीव गांधी का Call Sign, VU2RG दे दिया गया।

इस पोस्ट के लिखे जाते हुये मैंने भारत के लगभग हर छोटे-बड़े शहर में शौकिया रेडियो ऑपरेटर की तलाश की तो पाया कि लगभग हर शहर में कोई ना कोई मौज़ूद है, जो अपने रेडियो से दुनिया भर में नये मित्र बनाता जा रहा है, बतिया रहा है और घोर विपत्ति के समय अपने इस शौक की बदौलत, बचाव कार्यों में सहायता भी दे रहा है। जैसे भिलाई में VU2TLY, मेरठ में VU3KSG, रांची में VU2GBQ, धनबाद में VU2VLX, कानपुर में VU3WIX, बोकारो में VU3BTP, रोहतक में VU2BSB, नासिक में VU3PAQ, उज्जैन में VU3AAL, कोटा में VU2DPK, जयपुर में VU2EMZ , भोपाल में VU2HCZ , आगरा में VU2BX , ठाणे में VU2ATV, नागपुर में VU2SJA, विशाखापतनम में VU3RJY

क्या पता, अगली बार जब तलाशा जाये तो आपके शहर से आपका call sign व नाम दिखे ! लेकिन अब उम्मीद है कि युनूस जी मुस्कुरा रहे होंगे।






Wednesday, January 7, 2009

अमिताभ बच्चन, प्रियंका गाँधी जैसे शौकिया रेडियो ऑपरेटर (HAM) आख़िर करते क्या हैं!?

रेडियोनामा से जुड़ते हुए जब युनुस जी से मैंने आशंका जाहिर की थी कि नियमित नहीं रह पाऊँगा, किसी विषय विशेष पर लिखते हुए! तो उन्होंने सहजता पूर्वक जवाब दिया कि अपने समय और सुविधा के मुताबिक लिखिएगा। हैम रेडियो पर पहली पोस्ट 'शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM क्यों कहा जाता है?' के बाद आजकल करते-करते अगली कड़ी के लिए समय बीतता जा रहा था। एक दिन हिम्मत कर ही ली आपको बताने की कि शौकिया रेडियो ऑपरेटर (HAM) की सूची में सोनिया गांधी, अमिताभ बच्चन, प्रियंका गांधी, कमल हसन, दयानिधि मारन, कुमार बंगारप्पा सहित दुनिया भर के नोबल पुरस्कार विजेता, अविष्कारक, अन्तरिक्ष यात्री, राजकुमार, तानाशाह, राजनीतिज्ञ, फिल्मी सितारे, वैज्ञानिक, धार्मिक गुरु, खिलाड़ी, इतिहासकार, सत्ता प्रमुख आदि शामिल हैं। जिनसे आप सीधा संपर्क रख सकते हैं! जैसा कि नाम से ही विदित है 'शौकिया'। तो शौक की कोई कीमत नहीं होती। उस पर खर्च किए गए धन के सामने कोई तर्क काम नहीं आता। अपने शौक का औचित्य सिद्ध करने वाले बहुतेरे मिल जायेंगे। इससे अधिक जानकारी तो शास्त्री जी से ही मिल पाएगी।

शौकिया रेडियो सचमुच एक शौक है, कहा जाए तो यह एक वैज्ञानिक शौक है, लेकिन एक आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदा की परिस्थितियों में इस शौक की उपयोगिता नज़र आती है। जैसे आप पत्र-मित्र बनाते हैं, आजकल इन्टरनेट पर नेट मित्र से बतियाते, चैट करते हैं। वैसे ही अपना ख़ुद का दो-तरफा रेडियो बनाकर, उपयोग कर, पूरे विश्व में जाने-माने या अनजाने व्यक्तियों से संपर्क करने की उत्तेजना, आनंद से दो-चार हो सकते हैं, रेडियो मित्र बना सकते हैं। Indian Wireless Telegraph Rules 1978 के मुताबिक शौकिया रेडियो सेवा मतलब, a service of self training communication and technical investigations carried on by amateurs, that is, persons duly authorised under these rules interested in radio techniques solely with a personal aim and without pecuniary interest.

यह, रेडियो ऑपरेटरों के बीच आपसी संचार द्वारा, स्वयं सीखी जाने वाली एवं तकनीकी जांच प्रक्रिया है। मोबाईल फोन जैसे यंत्र की रेडियो तरंगों के उपयोग से, एक हैम रेडियो ऑपरेटर, विभिन्न संचार उपकरणों और प्रणालियों के सहारे, विभिन्न प्रयोग कर, गहन इलेक्ट्रॉनिक्स विज्ञान सीख सकता है और साथ-साथ दुनिया भर में लोगों को इसके बलबूते सामान्य परिस्थितियों के अलावा आपातकालीन चिकित्सा, यातायात, बाढ़, चक्रवात, तूफान, भूकंप या किसी अन्य आपदा जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपातकालीन संचार नेटवर्क स्थापित कर, महान सेवा प्रदान कर सकता है। पूरे विश्व में लाखों व्यक्ति, इस विधा का अनुसरण करते हैं, ब्लॉग की भाषा में बोले तो follower हैं।

जब मौजूदा सार्वजनिक या सरकारी संचार प्रणालियां असफल हो जायें तो यह एमेच्योर रेडियो स्टेशन 'दूसरी लाइन' के रूप में संचार व्यवस्था का काम करते है। जीवन के सभी क्षेत्रों से, तकनीशियनों से लेकर इंजीनियरों, शिक्षकों से लेकर वैज्ञानिक, छात्र से लेकर सेवानिवृत्त तक शौकिया रेडियो ऑपरेटर हैं। अन्य शौकों की तरह, उनमें से कई के लिए तो इस शौक का आकर्षण यह भी है कि स्वयं अपने हाथों से इसके उपकरण बनाना, चाहे वह छोटा सा एंटीना ही क्यों न हो या फिर ट्रांसमीटर बनाने जैसा जटिल कार्य या अपने ट्रांसमीटर, रेडियो और एक कंप्यूटर के बीच एक संबंध interface स्थापित करना।

शौकिया रेडियो का एक बेहतरीन प्रदर्शन, 1960 में भारत में तत्कालीन पोस्ट और टेलीग्राफ विभाग की हड़ताल के दौरान देखने को मिला था, जब शौकिया ऑपरेटरों ने जनता को बहुमूल्य सार्वजनिक सेवा गतिविधियों के साथ महत्वपूर्ण संदेश भेजने का प्रबंध किया था। सितम्बर 1979 में, मोरवी (गुजरात) में मच्छु बांध टूटने पर अचानक आयी बाढ़ के समय, पश्चिमी भारत के एक दर्जन से अधिक शौकिया रेडियो ऑपरेटरों ने राहत एजेंसियों, सरकारी अधिकारियों और आपदा के शिकार लोगों के लिए, राजकोट, बड़ौदा, अहमदाबाद और मुंबई आदि शहरों में आपातकालीन रेडियो स्टेशनों को सक्रिय कर सहायता प्रदान की थी। HAMs द्वारा इसी प्रकार की सेवायें, सौराष्ट्र में आये विनाशकारी तूफान, बंगाल की खाड़ी के ऊपर खराब मौसम की संभावना के चलते आंध्र प्रदेश में कई बार आये तूफान के दौरान भी प्रदान की गयी थीं।

जरा याद कीजिये लातूर (महाराष्ट्र) में आये भूकम्प, उत्तरकाशी के भूकम्प की, जहाँ हैम रेडियो ऑपरेटरों ने, प्रभावित लोगों के लिए व्यवस्था, दवाइयां, भोजन और कपड़ों के लिए समन्वय और राहत कार्यों के आयोजन के लिए आवश्यक संचार नेटवर्क प्रदान किया। हाल ही में उड़ीसा के विनाशकारी चक्रवात की आपदा के दौरान जब सभी संचार ध्वस्त हो गई थीं तो इसकी महत्ता एक बार पुन: साबित हुयी थी। उड़ीसा के मुख्य मंत्री निवास पर एक हैम रेडियो स्टेशन ने लगभग एक महीने तक देश की राजधानी के साथ संपर्क बनाए रखा। एशियाड जैसे बड़े खेल समारोह, हिमालय कार रैली आदि के दौरान शौकिया रेडियो स्टेशनों द्वारा अधिकारियों की सहायता हेतु इसे अक्सर याद किया किया जाता है। 2004 में आयी सुनामी के वक्त तो यह इकलौता संचार माध्यम था। माना जाये तो, यह विशेष तकनीकी खेल या शौक बहुत हद तक दूसरे गैर-सरकारी लोक सेवा संगठन (जैसे रेडक्रॉस) के समतुल्य एक राष्ट्रीय परिसंपत्ति है।

थोड़ा पीछे लौटें तो भारत के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने शौकिया रेडियो ऑपरेटर का लाइसेंस 1974 में प्राप्त किया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने वायरलेस उपकरणों पर आयात शुल्क घटाकर इस विधा को आगे बढ़ाने में मदद की थी, जिसके चलते आज भारत में शौकिया रेडियो ऑपरेटर की तादाद लगभग 18,000 पहुँच चुकी है। वे अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बीच भी इस शौक को पूरा करते थे और एक सक्रिय शौकिया रेडियो ऑपरेटर माने जाते थे। यहाँ तक कि अपने मारे जाने के चंद घंटो पहले भी वे 'ऑन एयर' थे तथा उनकी आखिरी 'कॉल' विशाखापत्तन्नम से थी।

यह पोस्ट कुछ ज़्यादा ही बड़ी हो रही है। पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा था कि शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM क्यों कहते हैं? अगली पोस्ट में आप पायेंगे कुछ और रोचक जानकारियां तथा भारत सहित, दुनिया के कुछ चर्चित व्यक्तियों की HAM पहचान (कहें तो आईडी) जिससे आप उनसे बतिया सकें!

Thursday, November 27, 2008

शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM क्यों कहा जाता है?

आईये रेडियोनामा पर बी.एस. पाबला का स्‍वागत करें । उनका अपना ब्‍लॉग है 'जिंदगी के मेले' । इस ब्‍लॉग पर जब उन्‍होंने हैम रेडियो पर ये पोस्‍ट लिखी तो हमने उनसे रेडियोनामा पर जुड़ने का आग्रह किया । जिसे उन्‍होंने सहर्ष स्‍वीकार कर लिया । हैम रेडियो से पाबला जी का बड़ा जुड़ाव है ज़ाहिर है कि उनकी इस श्रृंखला के ज़रिए रेडियोनामा पर एक नया आयाम जुड़ेगा ।

- यूनूस ख़ान ।

HAM रेडियो की तुलना इंटरनेट से नही की जा सकती। किसी प्राकृतिक विपत्ति में जब सब साधन नष्ट हो जायें तो यही है जिससे शेष विश्व से संपर्क हो सकता है। आज से 30-35 साल पहले के मुकाबले शौकिया रेडियो ऑपरेटर बनने व आनंद उठाने की प्रक्रिया में ज़्यादा अन्तर नहीं आ पाया है। जैसा कि कहा जाता है 'विचारधारा कभी नहीं बदलती, मात्र व्यवस्था बदल जाती है' आज समय के साथ चलते हुए, शौकिया रेडियो ऑपरेटर की सहायता के रूप में कई software भी आ गए हैं।

एक शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM कहे जाने का कोई विशेष कारण ज्ञात नहीं है। कुछ व्यक्ति, इस तीन अक्षरों के शब्द HAM का सम्बन्ध, तीन महान रेडियो प्रयोगधर्मियों के नाम से जोड़ते हैं। वे हैं, हर्ट्ज (Hertz), जिन्होंने व्यवहारिक रूप में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों का प्रदर्शन, 1988 में किया था, आर्मस्ट्रांग (Armstrong) जिन्होंने रेडियो तरंगों के लिए आवश्यक resonant oscillator circuit विकसित किया था और मारकोनी (Marconi) जिन्होंने वर्ष 1901 में अटलाण्टिक महासागर के आर-पार, पहला रेडियो संपर्क स्थापित किया था और वे वर्ष 1909 में भौतिकी के नोबल पुरस्कार विजेता भी रहे।

दूसरों के अपने संस्करण है, उन के अनुसार रेडियो संचार के शुरूआती दिनों के दौरान, सरकार ने शौकिया रेडियो ऑपरेटरों को कुछ निश्चित फ्रीक्वेंसियों का उपयोग करने की अनुमति दी। शौकिया रेडियो स्टेशनों की frequency की स्थिति, उस समय बाक़ी फ्रीक्वेंसियों (की सारिणी) के बीच एक तरह से sandwich जैसी थी। फैशन में था हैम सैंडविच (जैसे आजकल हैम बर्गर है) और इतना ही काफी था शौकिया रेडियो ऑपरेटर HAM को कहा जाने के लिए।

एक और अटकल लगाई जाती है कि इस शब्द HAM का अभिप्राय है Help All Mankind, जो कि प्राकृतिक आपदाओं में संकटग्रस्त व्यक्तियों, नागरिक आपात परिस्थितियों के दौरान सहायता देने के लिए इसकी सेवा के रूप को दर्शाता है।

वैसे शब्द, HAM का उपयोग 1908 में पहले शौकिया वायरलेस स्टेशन के हार्वर्ड रेडियो क्लब के कुछ शौकीनों द्वारा उपयोग किया गया था। ये व्यक्ति थे Albert S. Hyman, Bob Almy तथा Poogie Murray. उन्होंने अपने पहले स्टेशन को HYMAN-ALMY-MURRAY का नाम दिया। जैसा कि होता ही है, इस तरह का एक लंबा नाम, मोर्स कोड (Morse code) के द्वारा भेजा जाना, जल्द ही थकाऊ महसूस किया गया और एक संशोधन की गुहार हुयी। फिर प्रत्येक व्यक्ति के नाम के पहले दो अक्षरों का उपयोग किया गया और हो गया HY-AL-MY। इसी बीच कुछ भ्रम की स्थिति पैदा होने लगी, जब एक शौकिया रेडियो स्टेशन HY-ALMU से और HYALMO नामक एक मैक्सिकन जहाज से संकेत प्राप्त होने लगे। फिर उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति के नाम का प्रथमाक्षर उपयोग करने का निर्णय लिया और बन गया HAM!

शुरूआती दिनों में जब किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं हुया करता था, शौकिया रेडियो ऑपरेटर अपनी मर्जी से कोई भी frequency चुन लेते थे। कई बार तो उनका प्रसारण व्यवसायिक रेडियो स्टेशनों के मुकाबले ज़्यादा स्पष्ट होता था। परिणाम स्वरूप अमेरिकी कांग्रेस का ध्यान शौकिया रेडियो गतिविधि को सीमित करने के लिए की ओर गया। 1911 में, Albert Hyman ने, हार्वर्ड में शोध के लिए, विवादास्पद Wireless Regulation विधेयक को चुना। उनके प्रशिक्षक ने शोध की एक प्रतिलिपि, सेनेटर डेविड एल वॉल्श, जो इस विधेयक की सुनवाई समिति के एक सदस्य थे, को भेजे जाने पर जोर दिया। इस सेनेटर इस शोध से इतना प्रभावित हुए कि उन्हें समिति के सामने हाजिर होने को कहा गया।

अल्बर्ट ने अपना पक्ष रखा और बताया कि कैसे ये छोटे से स्टेशन बनाए गए। वह खचाखच भरे समिति के कमरे में यह बताते हुए रो ही पड़े कि यदि यह विधेयक पास हो गया तो ये शौकिया रेडियो स्टेशन बंद हो जायेंगे क्योंकि वे लाइसेंस शुल्क और अन्य सभी आवश्यकताओं का खर्च नहीं उठा सकते। अमेरिकी कांग्रेस की Wireless Regulation विधेयक पर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते यह छोटा सा शौकिया स्टेशन HAM, देश के उन सभी छोटे शौकिया स्टेशनों के लिए संघर्ष का प्रतीक बन गया, जिन्हें बड़े वाणिज्यिक स्टेशन अपने लालच के चलते, खतरा मानते थे व अपने आसपास भी उनकी उपस्थिति नहीं चाहते थे। अंत में यह विधेयक अमेरिकी कांग्रेस के सभापटल पर आ ही गया, उस समय लगभग हर वक्ता की जुबान पर था ".... बेचारा नन्हा सा HAM"

बस उसी दिन से शौकिया रेडियो ऑपरेटरों को HAM कह कर पुकारा जाने लगा और शायद रेडियो समयकाल के अंत तक पुकारा जाएगा।

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