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Wednesday, January 7, 2009

अमिताभ बच्चन, प्रियंका गाँधी जैसे शौकिया रेडियो ऑपरेटर (HAM) आख़िर करते क्या हैं!?

रेडियोनामा से जुड़ते हुए जब युनुस जी से मैंने आशंका जाहिर की थी कि नियमित नहीं रह पाऊँगा, किसी विषय विशेष पर लिखते हुए! तो उन्होंने सहजता पूर्वक जवाब दिया कि अपने समय और सुविधा के मुताबिक लिखिएगा। हैम रेडियो पर पहली पोस्ट 'शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM क्यों कहा जाता है?' के बाद आजकल करते-करते अगली कड़ी के लिए समय बीतता जा रहा था। एक दिन हिम्मत कर ही ली आपको बताने की कि शौकिया रेडियो ऑपरेटर (HAM) की सूची में सोनिया गांधी, अमिताभ बच्चन, प्रियंका गांधी, कमल हसन, दयानिधि मारन, कुमार बंगारप्पा सहित दुनिया भर के नोबल पुरस्कार विजेता, अविष्कारक, अन्तरिक्ष यात्री, राजकुमार, तानाशाह, राजनीतिज्ञ, फिल्मी सितारे, वैज्ञानिक, धार्मिक गुरु, खिलाड़ी, इतिहासकार, सत्ता प्रमुख आदि शामिल हैं। जिनसे आप सीधा संपर्क रख सकते हैं! जैसा कि नाम से ही विदित है 'शौकिया'। तो शौक की कोई कीमत नहीं होती। उस पर खर्च किए गए धन के सामने कोई तर्क काम नहीं आता। अपने शौक का औचित्य सिद्ध करने वाले बहुतेरे मिल जायेंगे। इससे अधिक जानकारी तो शास्त्री जी से ही मिल पाएगी।

शौकिया रेडियो सचमुच एक शौक है, कहा जाए तो यह एक वैज्ञानिक शौक है, लेकिन एक आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदा की परिस्थितियों में इस शौक की उपयोगिता नज़र आती है। जैसे आप पत्र-मित्र बनाते हैं, आजकल इन्टरनेट पर नेट मित्र से बतियाते, चैट करते हैं। वैसे ही अपना ख़ुद का दो-तरफा रेडियो बनाकर, उपयोग कर, पूरे विश्व में जाने-माने या अनजाने व्यक्तियों से संपर्क करने की उत्तेजना, आनंद से दो-चार हो सकते हैं, रेडियो मित्र बना सकते हैं। Indian Wireless Telegraph Rules 1978 के मुताबिक शौकिया रेडियो सेवा मतलब, a service of self training communication and technical investigations carried on by amateurs, that is, persons duly authorised under these rules interested in radio techniques solely with a personal aim and without pecuniary interest.

यह, रेडियो ऑपरेटरों के बीच आपसी संचार द्वारा, स्वयं सीखी जाने वाली एवं तकनीकी जांच प्रक्रिया है। मोबाईल फोन जैसे यंत्र की रेडियो तरंगों के उपयोग से, एक हैम रेडियो ऑपरेटर, विभिन्न संचार उपकरणों और प्रणालियों के सहारे, विभिन्न प्रयोग कर, गहन इलेक्ट्रॉनिक्स विज्ञान सीख सकता है और साथ-साथ दुनिया भर में लोगों को इसके बलबूते सामान्य परिस्थितियों के अलावा आपातकालीन चिकित्सा, यातायात, बाढ़, चक्रवात, तूफान, भूकंप या किसी अन्य आपदा जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपातकालीन संचार नेटवर्क स्थापित कर, महान सेवा प्रदान कर सकता है। पूरे विश्व में लाखों व्यक्ति, इस विधा का अनुसरण करते हैं, ब्लॉग की भाषा में बोले तो follower हैं।

जब मौजूदा सार्वजनिक या सरकारी संचार प्रणालियां असफल हो जायें तो यह एमेच्योर रेडियो स्टेशन 'दूसरी लाइन' के रूप में संचार व्यवस्था का काम करते है। जीवन के सभी क्षेत्रों से, तकनीशियनों से लेकर इंजीनियरों, शिक्षकों से लेकर वैज्ञानिक, छात्र से लेकर सेवानिवृत्त तक शौकिया रेडियो ऑपरेटर हैं। अन्य शौकों की तरह, उनमें से कई के लिए तो इस शौक का आकर्षण यह भी है कि स्वयं अपने हाथों से इसके उपकरण बनाना, चाहे वह छोटा सा एंटीना ही क्यों न हो या फिर ट्रांसमीटर बनाने जैसा जटिल कार्य या अपने ट्रांसमीटर, रेडियो और एक कंप्यूटर के बीच एक संबंध interface स्थापित करना।

शौकिया रेडियो का एक बेहतरीन प्रदर्शन, 1960 में भारत में तत्कालीन पोस्ट और टेलीग्राफ विभाग की हड़ताल के दौरान देखने को मिला था, जब शौकिया ऑपरेटरों ने जनता को बहुमूल्य सार्वजनिक सेवा गतिविधियों के साथ महत्वपूर्ण संदेश भेजने का प्रबंध किया था। सितम्बर 1979 में, मोरवी (गुजरात) में मच्छु बांध टूटने पर अचानक आयी बाढ़ के समय, पश्चिमी भारत के एक दर्जन से अधिक शौकिया रेडियो ऑपरेटरों ने राहत एजेंसियों, सरकारी अधिकारियों और आपदा के शिकार लोगों के लिए, राजकोट, बड़ौदा, अहमदाबाद और मुंबई आदि शहरों में आपातकालीन रेडियो स्टेशनों को सक्रिय कर सहायता प्रदान की थी। HAMs द्वारा इसी प्रकार की सेवायें, सौराष्ट्र में आये विनाशकारी तूफान, बंगाल की खाड़ी के ऊपर खराब मौसम की संभावना के चलते आंध्र प्रदेश में कई बार आये तूफान के दौरान भी प्रदान की गयी थीं।

जरा याद कीजिये लातूर (महाराष्ट्र) में आये भूकम्प, उत्तरकाशी के भूकम्प की, जहाँ हैम रेडियो ऑपरेटरों ने, प्रभावित लोगों के लिए व्यवस्था, दवाइयां, भोजन और कपड़ों के लिए समन्वय और राहत कार्यों के आयोजन के लिए आवश्यक संचार नेटवर्क प्रदान किया। हाल ही में उड़ीसा के विनाशकारी चक्रवात की आपदा के दौरान जब सभी संचार ध्वस्त हो गई थीं तो इसकी महत्ता एक बार पुन: साबित हुयी थी। उड़ीसा के मुख्य मंत्री निवास पर एक हैम रेडियो स्टेशन ने लगभग एक महीने तक देश की राजधानी के साथ संपर्क बनाए रखा। एशियाड जैसे बड़े खेल समारोह, हिमालय कार रैली आदि के दौरान शौकिया रेडियो स्टेशनों द्वारा अधिकारियों की सहायता हेतु इसे अक्सर याद किया किया जाता है। 2004 में आयी सुनामी के वक्त तो यह इकलौता संचार माध्यम था। माना जाये तो, यह विशेष तकनीकी खेल या शौक बहुत हद तक दूसरे गैर-सरकारी लोक सेवा संगठन (जैसे रेडक्रॉस) के समतुल्य एक राष्ट्रीय परिसंपत्ति है।

थोड़ा पीछे लौटें तो भारत के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने शौकिया रेडियो ऑपरेटर का लाइसेंस 1974 में प्राप्त किया था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने वायरलेस उपकरणों पर आयात शुल्क घटाकर इस विधा को आगे बढ़ाने में मदद की थी, जिसके चलते आज भारत में शौकिया रेडियो ऑपरेटर की तादाद लगभग 18,000 पहुँच चुकी है। वे अपने व्यस्त कार्यक्रमों के बीच भी इस शौक को पूरा करते थे और एक सक्रिय शौकिया रेडियो ऑपरेटर माने जाते थे। यहाँ तक कि अपने मारे जाने के चंद घंटो पहले भी वे 'ऑन एयर' थे तथा उनकी आखिरी 'कॉल' विशाखापत्तन्नम से थी।

यह पोस्ट कुछ ज़्यादा ही बड़ी हो रही है। पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा था कि शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM क्यों कहते हैं? अगली पोस्ट में आप पायेंगे कुछ और रोचक जानकारियां तथा भारत सहित, दुनिया के कुछ चर्चित व्यक्तियों की HAM पहचान (कहें तो आईडी) जिससे आप उनसे बतिया सकें!

3 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अगली पोस्ट का इंतजार है।

बवाल said...

बहुत ही रोचक पाबला जी, जानकारियां काम की हैं. अगली कड़ी का के लिए तलब पैदा हो गई है.

Shastri said...

हेम रेडियो एक बहुत ही रोचक एवं जनोपयोगी शौक है.

इस क्षेत्र के शौकिया लोगों ने अपने बलबूते पर दूरसंचार पर जो प्रयोग किये थे वे एक एक करके जनोपयोगी उपकरणों के निर्माण का कारण बनते गये.

जिस क्रमबद्ध तरीके से उन्होंने संचारव्यवस्था का अध्ययन किया वह भी बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है.

सस्नेह -- शास्त्री

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