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Thursday, November 27, 2008

शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM क्यों कहा जाता है?

आईये रेडियोनामा पर बी.एस. पाबला का स्‍वागत करें । उनका अपना ब्‍लॉग है 'जिंदगी के मेले' । इस ब्‍लॉग पर जब उन्‍होंने हैम रेडियो पर ये पोस्‍ट लिखी तो हमने उनसे रेडियोनामा पर जुड़ने का आग्रह किया । जिसे उन्‍होंने सहर्ष स्‍वीकार कर लिया । हैम रेडियो से पाबला जी का बड़ा जुड़ाव है ज़ाहिर है कि उनकी इस श्रृंखला के ज़रिए रेडियोनामा पर एक नया आयाम जुड़ेगा ।

- यूनूस ख़ान ।

HAM रेडियो की तुलना इंटरनेट से नही की जा सकती। किसी प्राकृतिक विपत्ति में जब सब साधन नष्ट हो जायें तो यही है जिससे शेष विश्व से संपर्क हो सकता है। आज से 30-35 साल पहले के मुकाबले शौकिया रेडियो ऑपरेटर बनने व आनंद उठाने की प्रक्रिया में ज़्यादा अन्तर नहीं आ पाया है। जैसा कि कहा जाता है 'विचारधारा कभी नहीं बदलती, मात्र व्यवस्था बदल जाती है' आज समय के साथ चलते हुए, शौकिया रेडियो ऑपरेटर की सहायता के रूप में कई software भी आ गए हैं।

एक शौकिया रेडियो ऑपरेटर को HAM कहे जाने का कोई विशेष कारण ज्ञात नहीं है। कुछ व्यक्ति, इस तीन अक्षरों के शब्द HAM का सम्बन्ध, तीन महान रेडियो प्रयोगधर्मियों के नाम से जोड़ते हैं। वे हैं, हर्ट्ज (Hertz), जिन्होंने व्यवहारिक रूप में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों का प्रदर्शन, 1988 में किया था, आर्मस्ट्रांग (Armstrong) जिन्होंने रेडियो तरंगों के लिए आवश्यक resonant oscillator circuit विकसित किया था और मारकोनी (Marconi) जिन्होंने वर्ष 1901 में अटलाण्टिक महासागर के आर-पार, पहला रेडियो संपर्क स्थापित किया था और वे वर्ष 1909 में भौतिकी के नोबल पुरस्कार विजेता भी रहे।

दूसरों के अपने संस्करण है, उन के अनुसार रेडियो संचार के शुरूआती दिनों के दौरान, सरकार ने शौकिया रेडियो ऑपरेटरों को कुछ निश्चित फ्रीक्वेंसियों का उपयोग करने की अनुमति दी। शौकिया रेडियो स्टेशनों की frequency की स्थिति, उस समय बाक़ी फ्रीक्वेंसियों (की सारिणी) के बीच एक तरह से sandwich जैसी थी। फैशन में था हैम सैंडविच (जैसे आजकल हैम बर्गर है) और इतना ही काफी था शौकिया रेडियो ऑपरेटर HAM को कहा जाने के लिए।

एक और अटकल लगाई जाती है कि इस शब्द HAM का अभिप्राय है Help All Mankind, जो कि प्राकृतिक आपदाओं में संकटग्रस्त व्यक्तियों, नागरिक आपात परिस्थितियों के दौरान सहायता देने के लिए इसकी सेवा के रूप को दर्शाता है।

वैसे शब्द, HAM का उपयोग 1908 में पहले शौकिया वायरलेस स्टेशन के हार्वर्ड रेडियो क्लब के कुछ शौकीनों द्वारा उपयोग किया गया था। ये व्यक्ति थे Albert S. Hyman, Bob Almy तथा Poogie Murray. उन्होंने अपने पहले स्टेशन को HYMAN-ALMY-MURRAY का नाम दिया। जैसा कि होता ही है, इस तरह का एक लंबा नाम, मोर्स कोड (Morse code) के द्वारा भेजा जाना, जल्द ही थकाऊ महसूस किया गया और एक संशोधन की गुहार हुयी। फिर प्रत्येक व्यक्ति के नाम के पहले दो अक्षरों का उपयोग किया गया और हो गया HY-AL-MY। इसी बीच कुछ भ्रम की स्थिति पैदा होने लगी, जब एक शौकिया रेडियो स्टेशन HY-ALMU से और HYALMO नामक एक मैक्सिकन जहाज से संकेत प्राप्त होने लगे। फिर उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति के नाम का प्रथमाक्षर उपयोग करने का निर्णय लिया और बन गया HAM!

शुरूआती दिनों में जब किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं हुया करता था, शौकिया रेडियो ऑपरेटर अपनी मर्जी से कोई भी frequency चुन लेते थे। कई बार तो उनका प्रसारण व्यवसायिक रेडियो स्टेशनों के मुकाबले ज़्यादा स्पष्ट होता था। परिणाम स्वरूप अमेरिकी कांग्रेस का ध्यान शौकिया रेडियो गतिविधि को सीमित करने के लिए की ओर गया। 1911 में, Albert Hyman ने, हार्वर्ड में शोध के लिए, विवादास्पद Wireless Regulation विधेयक को चुना। उनके प्रशिक्षक ने शोध की एक प्रतिलिपि, सेनेटर डेविड एल वॉल्श, जो इस विधेयक की सुनवाई समिति के एक सदस्य थे, को भेजे जाने पर जोर दिया। इस सेनेटर इस शोध से इतना प्रभावित हुए कि उन्हें समिति के सामने हाजिर होने को कहा गया।

अल्बर्ट ने अपना पक्ष रखा और बताया कि कैसे ये छोटे से स्टेशन बनाए गए। वह खचाखच भरे समिति के कमरे में यह बताते हुए रो ही पड़े कि यदि यह विधेयक पास हो गया तो ये शौकिया रेडियो स्टेशन बंद हो जायेंगे क्योंकि वे लाइसेंस शुल्क और अन्य सभी आवश्यकताओं का खर्च नहीं उठा सकते। अमेरिकी कांग्रेस की Wireless Regulation विधेयक पर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते यह छोटा सा शौकिया स्टेशन HAM, देश के उन सभी छोटे शौकिया स्टेशनों के लिए संघर्ष का प्रतीक बन गया, जिन्हें बड़े वाणिज्यिक स्टेशन अपने लालच के चलते, खतरा मानते थे व अपने आसपास भी उनकी उपस्थिति नहीं चाहते थे। अंत में यह विधेयक अमेरिकी कांग्रेस के सभापटल पर आ ही गया, उस समय लगभग हर वक्ता की जुबान पर था ".... बेचारा नन्हा सा HAM"

बस उसी दिन से शौकिया रेडियो ऑपरेटरों को HAM कह कर पुकारा जाने लगा और शायद रेडियो समयकाल के अंत तक पुकारा जाएगा।

5 comments:

PN Subramanian said...

पब्ला जी ने बड़ी अच्छी जानकारी दी है.एक दो पोस्ट के ज़रिए हेम स्थापित करने की प्रक्रिया से भी अवगत करा दें तो अच्छा रहेगा.आभार.
http://mallar.wordpress.com

annapurna said...

शुक्रिया युनूस जी पाब्ला जी को रेडियोनामा पर लाने के लिए।

पाब्ला जी आपका स्वागत है !

अच्छा जानकारीपूर्ण आलेख है।

सागर नाहर said...

आदरणीय पाबला जी
हेम रेडियो के बारे में बहुत सुना था। आपने बढ़िया जानकारी दी। आपसे अनुरोध है कि इस लेख की आगामी कड़ियों में हमें इस को स्थापित करने/ बनाने आदि के बारे में ज्यादा जानकारी दें।

नरेश सिह राठौङ said...

मै इस ब्लोग का इ मैल पाठक हूं । यह पोस्ट मुझे बहुत पसन्द आयी। इस कडी की अगली पोस्ट का इन्तजार रहेगा । पाब्ला जी व नाहर जी आप दोनो का धन्यवाद

Tara Chandra Gupta "MEDIA GURU" said...

bahut sukriy..............

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आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद।

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