दर्द भरे गीतों की चर्चा मुकेश के गीतों के बिना अधूरी है. जितनी मुकेश की आवाज इस तरह के गीतों के लिए एकदम सही है उतनी सही आवाज बहुत कम गायकों की है. वैसे तो मुकेश को राजकपूर की आवाज माना गया है पर मनोज कुमार के लिए उनके गाए रोमांटिक गीत भी बहुत लोकप्रिय हुए है.
आज हम याद कर रहे है सत्तर के दशक में रिलीज हुई फिल्म मुक्ति की। इसी दौर में मुकेश के गाए गीत उनके जीवन के अंतिम गीत रहे। शायद मुक्ति फिल्म का यह गीत मुकेश का गाया अंतिम दर्द भरा गीत है. यह गीत शायद शशिकपूर पर फिल्माया गया और साथ में है विद्या सिन्हा. इस गीत के दो संस्करण है. महिला संस्करण शायद आशा भोंसले या लता जी ने गाया है पर यह उतना लोकप्रिय नहीं हुआ. मुकेश का गाया गीत ही बहुत लोकप्रिय हुआ. रेडियो से बहुत सुना करते थे यह गीत पर बाद में बजना बंद हो गया। जितने बोल इस गीत के मुझे याद आ रहे है वो इस तरह है -
सुहानी चाँदनी रातें हमें सोने नहीं देती
तुम्हारे प्यार की बातें हमें सोने नहीं देती
तुम्हारी रेशमी जुल्फों में दिल के फूल खिलते थे
इन्ही फूलों के मौसम में कभी हम तुम भी मिलते थे
पुरानी वो मुलाकाते हमें सोने नही देती
तुम्हारे प्यार की बातें हमें सोने नहीं देती
सुहानी चाँदनी रातें हमें सोने नहीं देती
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के यादों की ये बरसातें हमें सोने नहीं देती
तुम्हारे प्यार की बातें हमें सोने नहीं देती
सुहानी चाँदनी रातें हमें सोने नहीं देती
पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…
Tuesday, April 7, 2009
मुकेश के अंतिम गीतों में से एक दर्द भरा गीत
श्रेणी पोटली गीतों की
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1 Comments:
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Regards,
Pankaj Dwivedi
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