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Wednesday, September 2, 2009

अन्नपूर्णा जी ने याद किया - ’ एक मुट्ठी आसमान ’

रेडियोनामा पर सर्वाधिक लिखने वाली लेखिका अन्नपूर्णाजी को विविध भारती से यह गीत न सुन पाना आश्चर्यजनक है । कल लिखी उनकी पोस्ट आज प्रवास से लौट कर देखी ।
उक्त गीत गीत प्रस्तुत है :



कृपया पूरी बफ़रिंग के बाद , बिना बाधा सुनें ।

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