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Monday, November 30, 2009

रेडियोनामा के जन्मदाता और ब्लोगींग की दूनियामें मेरे पिता श्री सागर नहार से रूबरू

आदरणिय पाठक गण,

रेडियोनामा के हमारे युनूसजी के रेडियोवाणी द्वारा परिचीत और ब्लोगींग की दुनियामें मेरे 'पिता' (यह प्रयोग एक रूपसे जानेमाने रेडियो प्रसारक श्री मनोहर महाजनजी की 'नकल' है, जिन्होंनें श्री हरमंदिरजी 'हमराझ'के हिन्दी फिल्मी गीतकोष के के वोल्यूमके रिलीझ कार्यक्रममें श्री गोपाल शर्माजी के लिये 'दादा', उनके पहेले आये पर गोपल शर्माजी के बाद रेडियो सिलोन गये स्व. शिवकूमार 'सरोज' के लिये 'पिता' और उनके बाद रेडियो श्रीलंका गये श्री रिपूसूदन कूमार ऐलावादीजी के लिये 'पुत्र' के रूपमें रेडियो प्रसारण की दुनिया के सम्बन्धमें परिचय दिया था, जो रेकोर्डिंग मूझे मेरे सुरत निवासी मित्र श्री हरीशभाई रघुवंशीजी के यहाँ देख़नेको काफ़ी समय पहेले देख़नेको मिली थी ।) श्री सागरभाई नहार जो एक लम्बी अवधी के ब्लोग और चेट परिचय के बाद आज मेरे घर आये थे , तो मैंनें सोचा की उनके शौख़ या उनके विचार सब तो ब्लोग पठको के लिये जाने पहचाने है । मैं सुरज को रोशनी क्या दिख़ाऊँ ! पर आप सबने उनके ब्लोगमें या रेडियोनामा पर युनूसजी की पोस्टमें उनको तसवीरमें सिर्फ़ देख़ा है , तो उनको बोलते हुए भी सुनाऊँ , जो सुन्दर भाषा बोलते है सुन्दर आवाझमें । तो सिर्फ़ थोडी सेकंड्स की छोटी अनौपचारिक बातचीत यहाँ प्रस्तूत की है ।



पियुष महेता ।
सुरत-395001.

5 comments:

Udan Tashtari said...

पीयूश जी, आपका आभार सागर भाई से मिलवाने के लिए. अच्छा लगा मिल कर.

अनूप शुक्ल said...

बहुत खूब! आप लोगों से मिलकर बहुत अच्छा लगा।

annapurna said...

अच्छा लगा !

संजय बेंगाणी said...

पहले "पिता" शब्द देख लगा अगली पिढ़ी ब्लॉगिंग में कुद पड़ी है.

वीडियो के लिए धन्यवाद.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

सागर भाई'सा और पीयूष भाई आप, दोनों ही संगीत प्रेमी हैं -- आज आपने लाइव शो दीखला कर हमें
खुशी दी है जिसके लिए धन्यवाद -- आभार तमारो -- बहु सरस -- आवा प्रयोगों करतां रहेजो - आवजो,
- स स्नेह,
- लावण्या

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