
बहुत दिनों से एक गाने को सुनने की तमन्ना थी दिल में. सोचा कि रेडियो पर इस गाने को क्यों न फरमाइश कर दिया जाए. याद आ गयी कि हमारे इस ब्लॉग की महत्वपूर्ण रचनाकार ' श्रीमती अन्नपूर्णा जी' ने बहुत दिनों पहले इसी गाने की बात की थी . तो.... मैंने भी एक मेल भेज दिया अपनी प्यारी विविध भारती को. पर शायद अभी तक वो फरमाइश पूरी नहीं हो पायी है. चलिए... इन्तजार और सही.
2 comments:
मैं भी इंतज़ार कर रही हूँ कि विविध भारती से यह गीत कब सुनने को मिलेगा...
मैंने आप की फरमाइश में mail request भेजी है. अगर कभी बजे तो मुझे भी बताइयेअ, अगर मैं सुन नहीं पाया तो.
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आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद।