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Thursday, February 24, 2011

महिला और युवा वर्ग के कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 24-2-11

महिला और युवा वर्ग के दो कार्यक्रम हैं - सखि-सहेली और जिज्ञासा महिला वर्ग के कार्यक्रम में एक कड़ी युवा सखियों के लिए होती हैं जो युवको के लिए भी उपयोगी हैं।

आइए, इस सप्ताह प्रसारित इन दोनों कार्यक्रमों पर एक नजर डालते हैं -

इस सप्ताह दोनों ही कार्यक्रमों में परीक्षा के समय को ध्यान में रखते हुए युवा वर्ग को सलाह दी गई।

सप्ताह में पांच दिन एक घंटे के लिए दोपहर 3 बजे से प्रसारित होने वाले महिलाओं के कार्यक्रम सखि-सहेली में शुक्रवार को प्रसारित हुआ कार्यक्रम हैलो सहेली। फोन पर सखियों से बातचीत की ममता (सिंह) जी ने। 10 फोन कॉल थे। लगभग सभी कॉल स्कूल और कॉलेज की छात्राओं के थे। एक छात्रा की बातचीत से पता चला कि उसके गाँव में अधिक सुविधाएं नही हैं इसीलिए वह पढाई छोड़ चुकी हैं। दो-तीन सखियों ने कोई बात ही नही की सिर्फ अपने शहर का नाम बताया और गीत की फरमाइश की। कुछ सखियों ने बताया कि वे घर का कामकाज करती हैं। कुछ से विस्तार से बातचीत हुई, पता चला कि राजस्थान में इस समय बारिश हुई हैं। जबलपुर की सखि ने बताया कि वहां नर्मदा घाट पर पूजा-पाठ बहुत होती हैं फिर भी वहां सफाई बहुत हैं। छात्र सखियों में से अंग्रेजी और हिन्दी साहित्य में एम ए कर रही सखियों ने अपनी पसंदीदा पुस्तकों और लेखको के नाम बताए।

सखियों की पसंद पर नए-पुराने गाने सुनवाए गए। इस बार लोकप्रिय गीतों की फरमाइश कम ही रही, ऐसे गीतों की फरमाइश आई जो बहुत ही कम सुनवाए जाते हैं जैसे यह गीत - माफी देईदो कसूर बालम

विभिन्न क्षेत्रो से शहर, गाँव, जिलो से फोन आए। एक ऎसी सखि ने भी फोन किया जो पत्र बहुत लिखती हैं पर फोन पहली बार किया। सखियों ने विविध भारती के कार्यक्रमों को पसंद करने की बात कही। कार्यक्रम के समापन पर बताया गया कि इस कार्यक्रम के लिए हर बुधवार दिन में 11 बजे से फोन कॉल रिकार्ड किए जाते हैं जिसके लिए फोन नंबर भी बताए - 28692709 मुम्बई का एस टी डी कोड 022

शुरू और अंत में संकेत धुन सुनवाई गई जिसमे शीर्षक के साथ उपशीर्षक भी कहा जाता हैं - सखियों के दिल की जुबां - हैलो सहेली ! इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया वीणा (राय सिंघानी) जी ने, गणेश (शिंदे) जी के सहयोग से।

अन्य चार दिनों में सखि-सहेली कार्यक्रम में हर दिन दो प्रस्तोता सखियाँ आपस में बतियाते हुए कार्यक्रम को आगे बढाती हैं। हर दिन के लिए एक विषय निर्धारित हैं -सोमवार - रसोई, मंगलवार - करिअर, बुधवार - स्वास्थ्य और सौन्दर्य, गुरूवार - सफल महिलाओं की गाथा।

सोमवार को प्रस्तोता रही ममता (सिंह) जी और निम्मी (मिश्रा) जी। यह दिन रसोई का होता है, सखियों द्वारा भेजे गए पत्रों में से सम्पूर्ण भोजन और पोषण देने वाले भरवां पराठे बनाने की विधि बताई गई और निम्मी जी ने नीम्बू का अचार बनाने की दो विधियां बताई।

सखियों की पसंद पर पुरानी फिल्मो के लोकप्रिय गीत सुनवाए गए इन फिल्मो से - संजोग, उम्मीद, कन्यादान, मोहब्बत इसको कहते हैं, साक्षी गोपाल, सफ़र और सखियों की फरमाइश पर यह क़व्वाली सुनना अच्छा लगा -

जाते जाते एक नजर भर देख लो

मंगलवार को प्रस्तोता रही ममता (सिंह) जी और उन्नति (वोहरा) जी। यह करिअर का दिन होता है। इस दिन ऐसे करिअर के बारे में जानकारी दी गई जिसे शायद लड़कियां कम ही अपनाती हैं - ऑटोमोबाइल डिजाइनिंग जिसमे दुपहिए और चार पहिए के वाहनों की डिजाइनिंग की जाती हैं। इस तरह यह कड़ी केवल लड़कियां ही नही लड़को के लिए भी उपयोगी रही।

यह दिन युवा सखियों के लिए हैं इसीलिए इस दिन सखियों की पसंद पर नए गाने ही सुनवाए गए। दबंग, माई नेम इज खान, अजब प्रेम की गजब कहानी, वीर फिल्मो के गीत सुनवाए और यह गीत भी शामिल था -

पल भर में चोरी किया रे मोरा जिया

बुधवार को प्रस्तोता रही ममता (सिंह) जी और निम्मी (मिश्रा) जी। इस दिन स्वास्थ्य और सौन्दर्य संबंधी सलाह दी जाती है्। सखियों के भेजे गए पत्रों से पपीते के उपयोग की सलाह दी, योगा कर रोग प्रतिरोधी क्षमता बढाने की बात कही। इसके अलावा कुछ और जाने-पहचाने घरेलु नुस्के बताए गए। कोई नई जानकारी नही थी।

सखियों की फरमाइश पर सत्तर अस्सी के दशक की लोकप्रिय फिल्मो के लोकप्रिय गीत सुनवाए गए, अनुराग, लैला मजनूं, आपकी क़सम, आज का अर्जुन फिल्मो से और दुल्हन वही जो पिया मन भाए फिल्म से यह गीत भी शामिल था -


ले तो आए हो हमें सपनों के गाँव में
प्यार की छाँव में बिठाए रखना, सजना

पड़ोसन फिल्म के हास्य गीत चतुरनार से समापन किया।

आज गुरूवार हैं, आज प्रस्तोता रही रेणु (बंसल) जी और निम्मी (मिश्रा) जी। इस दिन सफल महिलाओं के बारे में बताया जाता है। इस दिन सखियों के पत्रों से बंग दंपत्ति के बारे में जानकारी दी जिन्होंने गांधीजी के आह्वान पर नशाबंदी और साथ ही महिलाओं से सम्बन्धी समाज सुधार के कार्य किए।

सखियों के अनुरोध पर कुछ ही पहले के समय की फिल्मो के गीत सुनवाए - हम साथ-साथ हैं, इश्क, बंटी और बबली, क़यामत से क़यामत तक, हम आपके हैं कौन फिल्मो के गीत सुनवाए और तुम बिन फिल्म से शैलजा की आवाज में यह गीत भी सुनवाया जो कम ही सुनवाया जाता हैं -

मेरी दुनिया में आके मत जा कही मत जा

हर दिन श्रोता सखियों के पत्र पढे गए। कुछ ऎसी सखियों के पत्र थे जो अक्सर पत्र भेजती हैं, कुछ सखियों ने पहली बार पत्र भेजा। एक सखि ने बताया कि विवाह के समय उसे यह विवाह उतना पसंद नही आ रहा था पर बाद में ठीक लगने लगा। एक सखि ने पेड़ लगाने की सलाह दी और यह भी बताया कि उससे बहुत ऑक्सीजन मिलती हैं। कुछ पत्रों में बसत ऋतु और बसंत पंचमी के अवसर पर की जाने वाली सरस्वती पूजन की चर्चा की। एक सखि ने पत्र में कोल्हापुर शहर के बारे में जानकारी भेजी। एक पत्र से पता चला की सूर्य की पहली किरण पड़ने से जोधपुर शहर को सूर्य नगरी कहते हैं। छत्तीसगढ़ में दीवारों पर की जाने वाली पारंपरिक लोक चित्रकारी की जानकारी मिली। युवा कलाकारों को प्रोत्साहन देता एक रोचक किस्सा भी एक सखि ने लिख कर भेजा। एक सखि ने बेटियों के लिए एक कविता भी लिख कर भेजी।

प्रस्तोता सखियों ने भी आपस में बतियाते हुए बहुत सी बाते बताई जैसे बेटे बेटियों में भेद भाव न करे, जीवन में तनाव न ले, क्रोध न करे, प्यार में खिलवाड़ न करे। युवा वर्ग को सलाह दी कि परीक्षा में समय सारणी बना कर पढाई करे। फिर भी लगता हैं पूरे प्रसारण समय का सदुपयोग नही हो पा रहा। विविध भारती ने सप्ताह में 5 घंटे महिलाओं को दिए हैं। सप्ताह में 5 घंटे का प्रसारण समय सामान्य बात नही हैं। हैलो सहेली में की जाने वाली सीधी बातचीत ठीक हैं। हमारा अनुरोध हैं अन्य चार दिनों में से किसी एक दिन पत्रों के माध्यम से विभिन्न विषयो की चर्चा ठीक रहेगी, शेष दिन प्रस्तुति का अंदाज बदल दीजिए। हर दिन का विषय जैसे रसोई, करिअर आदि जारी रखते हुए, फरमाइशी गीत सुनवाते हुए, एक या दो दिन साहित्य की चुनी हुई रचनाओं का पठन किया जा सकता हैं। साहित्य में महिलाओं के लिए कई प्रेरणादायी रचनाएं हैं।

कार्यक्रम के शुरू और अंत में सखि-सहेली की संकेत धुन सुनवाई गई। चारो दिन इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया कमलेश (पाठक) जी ने।

कार्यक्रम के दौरान एक सूचना भी दी कि हर महीने के अंतिम सोमवार के लिए एक विषय निर्धारित किया जाता हैं और उस पर सखियों के विचार आमंत्रित किए जाते हैं। सखियों के पत्रों को पढ़ कर सुनाया जाता हैं और साथ ही उनकी फरमाइश के गीत भी सुनवाए जाते हैं। इस बार का विषय हैं - प्यार

अपने विचार 28 तारीख तक भेजने के लिए पता भी बताया जो इस तरह हैं -

सखि-सहेली
विविध भारती सेवा
पोस्ट बॉक्स नंबर 19705
मुम्बई 400091

शनिवार को रात 7:45 पर सुना सामान्य ज्ञान का साप्ताहिक कार्यक्रम जिज्ञासा। 15 मिनट के इस कार्यक्रम के विभिन्न खंड हैं। हर खंड के बाद जानकारी से सम्बंधित फिल्मी गीत की झलक सुनवाई जाती हैं। पहला खंड हैं - समय यात्री - टाइम मशीन जिसके अंतर्गत भोजपुरी सिनेमा के 50 वर्ष पूरे होने की जानकारी दी गई। भोजपुरी सिनेमा के शुरूवात की बात भी बताई कि एक समारोह के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति से नजीर हुसैन की हुई बातचीत से भोजपुरी सिनेमा बनाने का ख्याल आया। पहली फिल्म 5.2.1962 को रिलीज हुई - गंगा मैय्या तोहे पिहरे चढैऊ। इस फिल्म का शीर्षक गीत और दो-तीन गीतों की झलकियाँ सुनवाई। इनमे से शीर्षक गीत और रफी साहब का गाया एक गीत पहले विविध भारती से बहुत सुनवाया जाता था पर शेष गीत पहली बार सुने। इसके बाद वेलेंटाइन डे पर निकली यह खबर बताई कि अमेरिका की टाइम पत्रिका द्वारा कराए गए सर्वेक्षण से पता चला कि विश्व की बेहतरीन पांच रोमांटिक फिल्मो में से एक हैं गुरूदत्त की फिल्म प्यासा। इस फिल्म का गीत भी सुनवाया। इसके बाद का खण्ड हैं - स्पोर्टस पैवेलियन जिसमे जाहिर हैं इस बार वर्ल्ड कप 2011 की चर्चा हुई। यह जानकारी भी मिली कि पहले इनामी राशि कम थी, अब बढ़ा दी गई। यहाँ यह नया गीत सुनना अच्छा लगा -

इस खेल में क्या बात हैं, हैं वर्ल्ड कप हमारा

एक खण्ड में परीक्षा के समय का ध्यान रखते हुए परीक्षा के तनाव से मुक्ति पाने के मनोवैज्ञानिको द्वारा बताए गए उपाय भी बताए। इस पूरे कार्यक्रम की सभी बाते समाचार पत्रों और इंटरनेट से आसानी से शहरियों को मिल जाती हैं। कुछ और स्तम्भ जोड़ कर शहरी युवाओं के लिए भी इसे अधिक उपयोगी बनाया जा सकता हैं। शोध, आलेख और स्वर युनूस (खान) जी का रहा। कार्यक्रम को प्रस्तुत किया विजय दीपक छिब्बर जी ने, सम्पादन पी के ए नायर जी ने किया।

इन दोनों कार्यक्रमों को सुनकर ऐसा लगता हैं जब विविध भारती महिला और युवा वर्ग के लिए अलग कार्यक्रम तैयार कर ही रही हैं तब बच्चो के लिए भी कोई कार्यक्रम तैयार किया जा सकता हैं। बाल श्रोताओं के लिए भी विविध भारती में जगह होनी चाहिए।

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