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Friday, February 6, 2009

साप्ताहिकी 5-2-09

सप्ताह के आरंभ में विविध भारती में पूर्व राष्ट्रपति श्री आर वेंकटरमन जी के निधन से शोक की लहर जारी रही। अंतिम दिनों में प्रसारण सामान्य रहा।

इस सप्ताह का पहला दिन गाँधी जी की पुण्य स्मृति - शहीद दिवस रहा। इस दिन प्रसारण की शुरूवात क्षेत्रीय केन्द्र ने परम्परागत रूप में की। सुबह सवेरे प्रसारण की शुरूवात आकाशवाणी की संकेत धुन (सिगनेचर ट्यून) से होती है जिसके बाद वन्देमातरम फिर मंगल ध्वनि सुनवाई जाती है। यह सब क्षेत्रीय केन्द्र से प्रसारित होता है जिसके बाद समाचारों से रिले की शुरूवात होती है। हमारे क्षेत्रीय केन्द्र हैदराबाद की यह परम्परा रही है कि 2 अक्तूबर और 30 जनवरी - गाँधी जी के जन्मदिन और पुण्य तिथि, इन दोनों ही दिन मंगल ध्वनि के स्थान पर बापू का प्रिय भजन वैष्णव जन सुनवाया जाता है। इस सप्ताह भी यह परम्परा बनी रही और यह भक्ति पद सुनवाया गया।


सुबह 6 बजे समाचार के बाद चितन में राम महिमा बताई गई जिसके बाद वन्दनवार में पुराने भजन सुनवाए गए -

मीरा भजन - मैं तो प्रेम दीवनी, मेरा दर्द न जाने कोय
पायो जी मैनें राम रतन धन पायो (लता जी की आवाज़ नहीं)
घूँघट के पट खोल रे तोहे पिया मिलेंगे (जुतिका राय की आवाज़)


हर दिन कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा।


7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में एकाध लोकप्रिय गीत के साथ भूले बिसरे गीत भूली बिसरी आवाज़ों में सुनवाए गए जैसे अरूण कुमार, कानन देवी, अमीर बाई कर्नाटकी, शमशाद बेगम। कार्यक्रम मूल रूप में प्रसारित हुआ पर आरंभिक दिनों में गंभीर गीत सुनवाए गए। फ़िल्म शादी का पैरोडी गीत बहुत दिन बाद सुना -

तेरे पूजन को भगवान बनाऊँ बैंक मैं आलीशान


7:30 बजे संगीत सरिता में श्रृंखला मेरी संगीत यात्रा में एक श्रृंखला समाप्त हुई जिसमें प्रख़्यात संगीतज्ञ पंडित जसराज अपने बालसखा स्वामी हरिप्रसाद से अपनी संगीत यात्रा बता रहे थे। विभिन्न रागों पर बंदिशे भी सुनाई। इस श्रृंखला की ख़ास बात रही कि संगीत के चमत्कार के अनुभव सुनाए गए। बताया गया कि राग मेघ मल्हार गाने के बाद बारिश शुरू हुई जहाँ तीन साल से बारिश नहीं हो रही थी।

कांचन (प्रसाद संगीत) जी की दूसरी श्रृंखला शुरू हुई जिसके अंतर्गत प्रसिद्ध वायलन वादिका विदुशी एम राजम की संगीत यात्रा शुरू हुई। लेकिन यह कार्यक्रम कुछ ही समय पहले सुना था। इतनी जल्दी दुबारा सुनना ठीक नहीं लगता। वैसे भी एक जैसी दो श्रृंखलाएँ एक के बाद एक सुनना अच्छा नहीं लग रहा।


7:45 को त्रिवेणी में शुक्रवार को प्रकृति की बातें की गई, सर्वव्यापी ईश्वर की बात हुई, आलेख, गीतों का चयन जैसे बूँद जो बन गई मोती फ़िल्म का गीत -

हरी भरी वसुन्धरा पे नीला-नीला ये गगन

और प्रस्तुति अच्छी रही पर यह अंक शनिवार को प्रसारित होता तो ज्यादा अच्छा होता, शुक्रवार को भी अच्छा ही लगा लेकिन गाँधी जी की पुण्य तिथि और शहीद दिवस पर कुछ और बात भी हो सकती थी। अब जब यह शुक्रवार को सुनवा ही दिया तो शनिवार को कोई और बात ख़ास कर शिक्षा की बात की जा सकती थी क्योंकि शनिवार का दिन था बसन्त पंचमी, श्री पंचमी, सरस्वती पूजन जबकि शनिवार को बात हुई सुरक्षा की।


दोपहर 12 बजे एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने कार्यक्रम में शुक्रवार को आए युनूस जी कलात्मक फ़िल्में लेकर जैसे लेकिन, सदमा, अलग-अलग और श्रोताओं ने भी इन फ़िल्मों के संजीदा गीतों के लिए संदेश भेजे जैसे ग़मन फ़िल्म का सुरेश वाडेकर का गाया यह गीत -

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यों है

इस शहर में हए शख़्स परेशान सा क्यों है


शनिवार को अभिनेत्री गायिका सुरैया को याद किया गया, फ़िल्में रही मिर्ज़ा ग़ालिब, दिल्लगी, हिमालय की गोद में। सोमवार को निम्मी (मिश्रा) जी लेकर आईं नई लोकप्रिय फ़िल्में जैसे लगान, दस, कल हो न हो। मंगलवार को राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ले आए विरासत, त्रिशूल, साथ-साथ, धर्मवीर जैसी लोकप्रिय फ़िल्में। बुधवार को कमल (शर्मा) जी लाए लोकप्रिय फ़िल्में तीन देवियाँ, गाइड, पत्थर के सनम, हमराज़, एन ईवनिंग इन पैरिस, नाइट इन लन्दन, हरियाली और रास्ता, छाया। गुरूवार को शहनाज़ (अख़्तरी) जी लाईं नई फ़िल्में - धूम 2, बण्टी और बबली, सिंह इज़ किंग, नो एन्ट्री, कृष


यह कार्यक्रम हम अक्सर क्षेत्रीय प्रायोजित कार्यक्रम के कारण 15-20 मिनट के लिए सुन नहीं पाते है।


1:00 बजे से चित्रपट संगीत सुनवाया गया जिसमें फ़िल्मों के संजीदा, दार्शनिक भाव के गीत सुनवाए गए। सप्ताह के अंतिम दिनों में म्यूज़िक मसाला में प्यार है तुम से एलबम का यह गीत वाकई मसालेदार रहा -

सुन तेरे बिना आशिक ये कड़का
पैसा है गाड़ी है बंगला है गाड़ी है
ओ मेरी दिल नशीं बस तेरी है कमी


1:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम में आरंभिक दिनों में श्रोताओं की पसन्द से गंभीर गीत चुन कर सुनवाए गए। बाद में सामान्य प्रसारण में मिले-जुले गीत रहे।


3 बजे सखि सहेली में शुक्रवार को हैलो सहेली कार्यक्रम में फोन पर सखियों से बातचीत की शहनाज़ (अख़्तरी) जी ने। विभिन्न स्थानों से फोन आए। इस बार भी छात्राओं ने अपनी शिक्षा और अपने करिअर के बारे में बताया। घरेलु और कम पढी लिखी कामकाजी महिलाओं के भी फोनकाल आए। इस बार बातचीत कुछ विस्तार से हुई। साड़ियों पर जरी का काम करने वाली महिला ने बताया कि उसे दुकानों से काम मिलता है साथ ही काम के लिए धागा वग़ैरह भी दिया जाता है और साड़ी पर डिज़ाइन भी बना होता है, एक साड़ी पर वह जरी का काम तीन-चार दिन में कर लेती है जिसके उसे तीन चार सौ रूपए मिल जाते है। यह एक जानकारी मिली। साथ-साथ सखियों की पसन्द के गीत भी शामिल रहे, इस बार संजीदा गीत रहे यानि शोक के माहौल को देखते हुए चुने गए ऐसे फोन काल।

सोमवार को बसन्त का स्वागत हुआ। कविताओं की कुछ पंक्तियाँ सुनाई गई और कहा गया कि कवि निराला जी का यह पसन्दीदा मौसम है, अरे भई बसन्त पंचमी निराला और महादेवी वर्मा का जन्मदिन है। अच्छा लगा बहुत दिन बाद आग फ़िल्म से शमशाद बेगम का गाया यह गीत सुनना -


काहे कोयल शोर मचाए रे
मोहे अपना कोई याद आए


बाजरे की खिचड़ी, बाजरे के भूसे से मुठिए और चाकलेटी लड्डू बनाना बताया गया। मंगलवार को फ़िज़ियोथेरिपी के क्षेत्र में करिअर बनाने की जानकारी दी गई। बुधवार को सौन्दर्य प्रसाधान में मिलावट की चर्चा हुई। जहाँ तक हो सके रासायनिक प्रसाधान का उपयोग न करने की सलाह दी गई। त्वचा की देखभाल विशेषकर त्वचा की सफ़ाई की आवश्यकता की सलाह दी। गुरूवार को रेडियो श्रोता की जानी मानी नगरी झुमरी तलैया के बारे में बताया गया पर बहुत ही ऊपरी जानकारी दी गई। सिर्फ़ इतना ही पता चला कि पहले यह बिहार के अंतर्गत था अब झाड़खण्ड का एक भाग है जहाँ पहाड़, झरने है और वहाँ संगीत प्रेम है। यह भी बताना चाहिए था कि जहाँ से हर रेडियो स्टेशन पर फ़िल्मी गानों की फ़रमाइश भेजी जाती है वहाँ का अपना लोक संगीत कैसा है और वहाँ की जनता की अपने लोक संगीत और ग़ैर फ़िल्मी संगीत में कितनी रूचि है ? फ़िल्मी गानों की दीवानी इस नगरी में कितने फ़िल्मी गायक बनने की तमन्ना रखते है ? आदि…

शनिवार और रविवार को पुरानी फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए जैसे 12 ओ क्लाक फ़िल्म का गीता दत्त का गाया गीत -


कैसा जादू बलम तुमने डाला

खो गया नन्हा सा दिल हमारा


3:30 बजे शनिवार और रविवार को नाट्य तरंग में दिनेश भारती का लिखा नाटक सुना - गैस का चूल्हा

पिटारा में शुक्रवार को पिटारे में पिटारा कार्यक्रम में चूल्हा चौका कार्यक्रम में ऐसे व्यंजन बनाना बताया गया जिसे घर में तैयार किया जा सकता है। सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में डा संजीव शाह से मधुमेह (डायबिटीज़) के बारे में निम्मी (मिश्रा) जी ने बातचीत की। इसके लक्षणों जैसे प्यास ज्यादा लगना, कमज़ोरी आदि के बारे में बताया साथ ही कारण और निवारण पर विस्तार से चर्चा हुई। बुधवार को रचयिता निर्माता आशुतोष गावरकर से निम्मी (मिश्रा) जी की बातचीत प्रसारित हुई। असफल फ़िल्मों के बाद लगान जैसी फ़िल्म बनाने का साहस करना और सफल होना, अच्छी रही यह चर्चा।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद फ़िल्मी हंगामा में नए फ़िल्मी गीत बजते रहे।

7 बजे जयमाला में नए पुराने गंभीर भावों के मिले-जुले गीत सुनवाए गए। ऐसे गीत भी सुनने को मिले जिनकी फ़रमाइश फ़ौजी भाइयों ने बहुत दिनों बाद की जैसे फ़िल्म सफ़र। शनिवार को विशेष जयमाला प्रस्तुत किया गीतकार समीर ने। अपने गीतकार पिता अन्जान के बारे में बताया, खुद के गीतों को तैयार करने के अनुभव बताए और गीत भी सुनवाए।

7:45 पर शुक्रवार को लोकसंगीत में कमला झिंगियानी की आवाज़ में झूलेलाल का सिंधी लोकगीत सुन कर बहुत आनन्द आया। शनिवार और सोमवार को पत्रावली में पधारे निम्मी (मिश्रा) जी और महेन्द्र मोदी जी। इस बार की पत्रावली में भी नए साल की शुभकामनाएँ थी। इस बार भी तारिफ़ें और शिकायतें थी और कुछ बन्द हुए कार्यक्रम जैसे मंथन आदि को दुबारा शुरू करने के सुझाव आए। एक पत्र अच्छा लगा जिसे किसी ग्राम पंचायत से बहुत से लोगों ने मिलकर लिखा था। मंगलवार को ग़ैर फ़िल्मी क़व्वालियाँ सुनवाई गई। बुधवार को इनसे मिलिए कार्यक्रम में नृत्य निर्देशक प्रवर सेन से रेणु (बंसल) जी की बातचीत की प्रसारित हुई। नृत्य निर्देशन को करिअर की तरह कुछ ही समय से अपनाया जा रहा है, इस संबंध में चर्चा अच्छी चली। रविवार और गुरूवार को राग-अनुराग में विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुने।

8 बजे हवामहल में शुक्रवार को रूपक सुनवाया गया बापू के राम जिसके लेखक है प्रशान्त पाण्डेय और निर्देशक गंगा प्रसाद माथुर। सोमवार को हैदराबाद की प्रस्तुति रही - अज़हर अफ़सर की लिखी और ज़ाफ़र अली खाँ की प्रस्तुतकर्ता झलकी सुनी - एक पार्टी में, बहुत दिन बाद सुनी के पी सक्सेना की लिखी झलकी - चोर ऐसे आते है जिसके निर्देशक है विनोद आनन्द दयाल।


9 बजे गुलदस्ता में भक्ति संगीत सुनवाया गया पर अंतिम दिनों में गीत और ग़ज़लें सुनवाई गई।


9:30 बजे एक ही फ़िल्म से कार्यक्रम में तेरी मेहरबानियाँ, गाइड, रंगीला जैसी नई पुरानी फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।


10 बजे छाया गीत में मंगलवार को गीत अच्छे रहे ख़ास कर दस्तक फ़िल्म का लताजी का गाया यह गीत तो बहुत दिन बाद सुना -

बैंया ना धरो ओ बलमा

ना करो मोसे रार


छाया गीत आजकल एकरस होता जा रहा है, वही आवाज़ें, वही अन्दाज़, वही चाँद, तारे, फूल, प्यार, नींद, सपने, यादों, वादों के लगभग एक जैसे आलेख। अच्छा तो लगता है पर… रोज़-रोज़ रोटी दाल और बदल-बदल कर सब्जियाँ खाने से ऊब हो जाती है, कभी-कभार हलवा-पूरी समोसा-कचोरी खाने का भी मन करता है।

1 comment:

mamta said...

annapurna जी हम रेडियो तो रोज नही सुनते है पर आपकी साप्ताहिकी को पढ़कर पूरे हफ्ते रेडियो पर क्या -क्या हुआ इस का पता चल जाता है ।

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