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Saturday, February 27, 2010

फ़राज़ की एक ग़ज़ल

इकबाल बानो की आवाज़ में एक ग़ज़ल

1 comment:

शहरोज़ said...

आप सभी को ईद-मिलादुन-नबी और होली की ढेरों शुभ-कामनाएं!!
इस मौके पर होरी खेलूं कहकर बिस्मिल्लाह ज़रूर पढ़ें.

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