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Friday, August 13, 2010

शाम बाद के पारम्परिक कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 12-8-10

शाम 5:30 बजे गाने सुहाने कार्यक्रम की समाप्ति के बाद क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है, फिर हम शाम बाद के प्रसारण के लिए 7 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।

7 बजे दिल्ली से प्रसारित समाचारों के 5 मिनट के बुलेटिन के बाद शुरू हुआ फ़ौजी भाईयों की फ़रमाइश पर सुनवाए जाने वाले फ़िल्मी गीतों का जाना-पहचाना सबसे पुराना कार्यक्रम जयमाला। अंतर केवल इतना है कि पहले फ़ौजी भाई पत्र लिख कर गाने की फ़रमाइश करते थे आजकल ई-मेल और एस एम एस भेजते है। कार्यक्रम शुरू होने से पहले धुन बजाई गई ताकि विभिन्न क्षेत्रीय केन्द्र विज्ञापन प्रसारित कर सकें। फिर जयमाला की ज़ोरदार संकेत (विजय) धुन बजी जो कार्यक्रम की समाप्ति पर भी बजी। संकेत धुन के बाद शुरू हुआ गीतों का सिलसिला। नए पुराने गीत सुनने को मिले।

शुक्रवार को क्योंकि, रंगोली, साथी फिल्मो के गीतों के साथ तेरे नाम फिल्म का शीर्षक गीत भी सुनवाया और मुद्दत फिल्म का यह गीत भी सुना -

प्यार हमारा अमर रहेगा याद करेगा ज़माना

तू मुमताज हैं मेरे ख़्वाबों की मैं तेरा शाहेजहां

रविवार को गजनी, नाम, विवाह, कुछ कुछ होता हैं फिल्म का शीर्षक गीत और हसीना मान जाएगी फिल्म से यह गीत भी सुनवाया गया -

बेखुदी में सनम उठ गए जो क़दम आ गए पास हम

सोमवार को शुरूवात की इस गीत से -

पहली पहली बार मुहब्बत की हैं कुछ न समझ में आए मैं क्या करूं

इसके अलावा दिलवाले दुल्हनिया ले जाएगे, लावारिस, कृष और जॉनी मेरा नाम का बाबुल प्यारे गीत भी शामिल था।

मंगलवार को माँ तुझे सलाम, करण अर्जुन, तलाश, देवर और रंग फिल्मो के लोकप्रिय गीतों के साथ दिल तो पागल हैं फिल्म से फ़ौजी भाइयो ने ऐसे गीत की फरमाइश की जो कम ही सुना जाता हैं -

कब तक चुप बैठे अब तो हैं कुछ बोलना

इस दिन उद्घोषिका शुरू में माइक्रोफोन के सामने आत्मविश्वासी नही लगी पर बाद में प्रस्तुति सामान्य रही।

बुधवार को अजब प्रेम की गजब कहानी, दिलवाले, मासूम, बार्डर फिल्म का देश भक्ति गीत और सांवरिया फिल्म का यह गीत भी सुनवाया गया -

जब से तेरे नैना मेरे नैनो से लागे रे

गुरूवार को धर्मात्मा, कुर्बानी, हम दिल दे चुके सनम फिल्म के रोमांटिक गीतों के साथ हम आपके हैं कौन फिल्म से यह गीत -

लो चली मैं अपने देवर की बारात लेके

चायना गेट फिल्म से छम्मा छम्मा, हिन्दुस्तान की क़सम और काबुलीवाला फिल्म से देश भक्ति गीत भी सुनवाए गए।

शनिवार को विशेष जयमाला प्रस्तुत किया रंगमंच, टेलीविजन और फिल्मो के अभिनेता राकेश बेदी ने। अच्छी हलकी-फुल्की मनोरंजनात्मक प्रस्तुति रही। कुछ अपनी फिल्मो की बाते की और कुछ फ़ौजी भाइयो के जीवन की चर्चा की। पड़ोसन, हकीक़त, चश्मे बद्दूर, एक दूजे के लिए फिल्मो के गीत सुनवाए। प्रस्तुति कल्पना (शेट्टी) जी की रही।

7:45 को गुलदस्ता कार्यक्रम में शुक्रवार को पुराने रिकार्ड सुनना अच्छा लगा। शुरूवात हुई पंडित गोविन्द प्रसाद जयपुर वाले की आवाज से -

जब भी कोई सदा तेरी बहला गई मुझको

अपनी तनहाइयों पे हसीं आ गई मुझको

कलाम कतिल शिफाई का रहा। फिर फैय्याज हाशमी का कलाम सुना जगमोहन की आवाज में -

जीने की आरजू में मौत से पहले मर गए

समापन किया बहुत बढ़िया - मलिका पुखराज की आवाज में अभी तो मैं जवान हूँ

पर खेद हैं पूरा नही सुनवाया, समय की कमी से।

रविवार को शुरूवात हुई राजेन्द्र मेहता और नीना मेहता की गई इस ख़ूबसूरत गजल से -

जब रात का आँचल गहराए और सारा आलम सो जाए

तब मुझसे मिलने शमा जला के तुम ताजमहल में आ जाना

फिर ग़ालिब का कलाम रफी साहब की आवाज में सुनवाया गया -

मैं न अच्छा हुआ न बुरा हुआ

महफ़िल एकतेदाम को पहुंची अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन की आवाजो में इस कलाम से -

मैं हवा हूँ कहाँ वतन मेरा

मंगलवार को महफ़िल का आगाज अंजान के इन बोलो से हुआ -

मेरे लिए तो बस वही पल हैं हसीं बहार के

तुम सामने बैठी रहो मैं गीत गाऊँ प्यार के

आवाज रफी साहब की रही। उसके बाद मुकेश की आवाज में सुना शौक़त परवेज का कलाम -

हाँ मैं दीवाना हूँ चाहे तो मचल सकता हूँ

आखिर में गुलाम अली की आवाज में मसरूह अनवर को सुना -

हमको किसके गम ने मारा यह कहानी फिर सही

इस तरह इस सप्ताह गुलदस्ता अच्छा रहा.

शनिवार को सुना सामान्य ज्ञान का कार्यक्रम जिज्ञासा। 6 और 9 अगस्त का ऐतिहासिक महत्त्व बताया। हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराए जाने की घटना और भारत में शुरू हुए भारत छोडो आन्दोलन की चर्चा की। इस ऐतिहासिक जानकारी के अलावा शेष जानकारी वही थी जो आजकल खबरों में हैं, जयपुर के जंतर-मंतर को विश्व धरोहर में शामिल करना, साइना नेहवाल को मिले खेल रत्न, सचिन का सबसे अधिक टेस्ट मैच खेलना। खोजी रिपोर्टर ने जानकारी दी कि प्याज में पाए जाने गंधक के कारण प्याज काटने पर आँखों में पानी आता हैं। खोजी रिपोर्ट भेजने के लिए ई-मेल आई डी भी बताया गया। शोध और आलेख युनूस (खान) जी का रहा। कार्यक्रम को प्रस्तुत किया विजय दीपक (छिब्बर) जी ने।

सोमवार को पत्रावली में पधारे निम्मी (मिश्रा) जी और कमल (शर्मा) जी। कार्यक्रमों की तारीफ़ थी। कुछ ही समय पहले किए गए परिवर्तनों के बारे में आए पत्रों के उत्तर से पता चला कि निदेशक महोदय राजेश रेड्डी जी की परिकल्पना हैं यह नए कार्यक्रम - तेरे सुर और मेरे गीत, हिट सुपर हिट में फेवरेट फाइव, सदाबहार नगमे सन्डे स्पेशल।

बुधवार को इनसे मिलिए कार्यक्रम में आरंभिक उद्घोषणा नही की गई जिससे बातचीत सुनने पर ही कलाकार को पहचान पाए सिर्फ चेतन नाम कह कर बातचीत करने से शुरू में पहचानना कठिन ही हो गया। एन एस डी से शिक्षा लेने फिर नाटक में काम करने की जानकारी दी, लोकनायक में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की फिर बताया गंगाजल फिल्म के बाद राजनीतिक भूमिकाएं अधिक ही हुई। पंकज कपूर के साथ किए गए टेलीविजन धारावाहिकों की भी चर्चा की। बताया गया कि अभिनेता चेतन पंडित से अशोक (सोनामणे) जी की टेलीफोन पर बात हुई पर मुझे स्टूडियो रिकार्डिंग लगी। रिकार्डिंग इंजीनियर रहे जयंत (महाजन) जी और प्रस्तुति वीणा (राय सिंघानी) जी की रही।

गुरूवार को प्रसारित हुआ कार्यक्रम राग-अनुराग। बढ़िया रहा कार्यक्रम। एक तो ऐसे राग चुने गए जो कम ही सुनवाए जाते हैं, दूसरे गीत भी ऐसे चुने जो कम सुनने को मिलते हैं, तीसरी ख़ास बात गीत शास्त्रीय संगीत को छूते रहे।

राग कालिंगडा - बाबुल छूट चला तेरा अंगना (फिल्म राखी)
राग हमीर - तुम तनन (किनारा)
राग शिव कल्याण - तू मेरे साथ रहेगा मन में (त्रिशूल)

8 बजे का समय है हवामहल का जिसकी शुरूवात हुई गुदगुदाती धुन से जो बरसों से सुनते आ रहे है। यही धुन अंत में भी सुनवाई जाती है। शुक्रवार को मजा आ गया। जय सिंह एस राठौर की लिखी झलकी सुनी - साथ हमारा छूटे ना। पति तलाक़ की अर्जी देता हैं पर तलाक़ ले नही पाता। कोर्ट में मामला चल रहा हैं। कुछ बाते ऎसी रही जिसे आज की पीढी शायद जानती ही नहीं - पत्नी से उसके पति का नाम पूछा जाता हैं, परम्परावादी पत्नी, पति का नाम कैसे ले, कहती हैं - गधा खाए, भक्त गुण गाए। आखिर पति ही स्पष्ट करता हैं, गधा खाए घास, भक्त गुण गाते हैं राम के यानि नाम हैं घासीराम। राशन कार्ड के अनुसार पत्नी के घर से श्यामा को गवाही के लिए बुलाया जाना हैं पर श्यामा भैंस का नाम हैं। वकील साहब कहते हैं तलाक़ के बाद पत्नी को आधी तनख्वाह मिलेगी पर पत्नी को तो पूरी तनख्वाह चाहिए, साथ ही सवाल हैं बच्चो को कौन देखे। भोपाल केंद्र की इस झलकी की निर्देशिका हैं मीनाक्षी मिश्रा।

शनिवार को डा जीवनलाल गुप्ता की लिखी झलकी सुनी - दफ्तर। कर्मचारी और अधिकारी सभी दफ्तर में गप्पे मारते हैं, काम नही करते पर अधिकारी कर्मचारियों को डांटते हैं कि काम नहीं करते। दफ्तर का सामान्य माहौल बताया। कुछ ख़ास नही रही। इलाहाबाद केंद्र की इस प्रस्तुति के निर्देशक हैं मधुर श्रीवास्तव।

रविवार को स्वदेश कुमार का लिखा प्रहसन सुना - आता हैं याद मुझे। आज की व्यावहारिकता में पति-पत्नी को बीते प्यार के दिन याद आते हैं। सुनना अच्छा लगा। निर्देशक हैं हरबंस सिंह खुराना। यह जालंधर केंद्र की प्रस्तुति रही, जहां की कम ही प्रस्तुतियां सुनने को मिलती हैं।

सोमवार को बहुत गहरी बात कही गई। एक दम्पति अपने गूंगे पुत्र के लिए जबान खरीदना चाहते हैं. तरह-तरह की जबाने बिक रही हैं, आत्मविश्वास से भरी जबान, वादा करने वाली जबान, कविता की जबान, पसंद आती हैं कम बोलने वाली जबान पर गूंगा लड़का इशारा करता हैं कि कम बोलने से ज्यादा अच्छा गूंगा रहना हैं. श्याम नारायण की लिखी इस झलकी को निर्देशित किया रमेश चन्द्र दत्त ने. बढ़िया प्रस्तुति दिल्ली केंद्र से।

मंगलवार को के एल यादव का लिखा प्रहसन सुना - शिकार जिसकी निर्देशिका हैं चन्द्र प्रभा भटनागर। जीवहिंसा पर अच्छी प्रस्तुति। पति अपने दोस्तों के साथ शिकार पर जाने वाला हैं, रात में सपना देखता हैं और जीवहिंसा की बात समझ में आती हैं और सुबह पत्नी से कहता हैं कि दोस्त आए तो मना कर दे. प्रस्तुति लखनऊ केंद्र की रही।

बुधवार को सुनवाया गया प्रहसन मजेदार रहा - खातिरदारी। मेहमान से पूछा चाय लेंगे या कॉफी। चाय मीठी या फीकी। फिर गैस नही हैं, फिर सिलेंडर आ गया चूल्हा खराब हैं। अंत में पानी भी नही पिलाया क्योंकि मटका टूट गया। मजा आ गया। उदयपुर केंद्र की इस प्रस्तुति के लेखक तपन भट्ट हैं और निर्देशक हैं महेंद्र मोदी जी।

गुरूवार को प्रहसन सुना - सड़क का मजनूं जिसे डा रघुराज शरण शर्मा ने लिखा। लड़कियों को छेड़ने की आदत हैं। बुजुर्गवार समझाते हैं लड़कियों के स्कूल कॉलेज से न गुजरे पर कोई असर नहीं। ऐसे ही छेड़ते हुए बन जाता हैं लड़कियों का जीजाजी। अच्छा मनोरंजन हुआ। निर्देशक सत्य प्रकाश भारद्वाज। प्रस्तुति दिल्ली केंद्र की रही।

इस तरह हवामहल में विविधता रही - सन्देश भी मिला और मनोरंजन भी हुआ। साथ ही अलग-अलग केन्द्रों की प्रतिभाओं को जानने समझने का अवसर मिला।

प्रसारण के दौरान अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए, क्षेत्रीय विज्ञापन भी प्रसारित हुए। फ़ौजी भाइयो को एस एम एस करने का तरीका बताया गया। संदेश भी प्रसारित किए गए, कार्यक्रमों के बारे में बताया।

रात में हवामहल कार्यक्रम के बाद 8:15 बजे से क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है फिर हम 9 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।

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