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Friday, August 6, 2010

दोपहर बाद के जानकारीपूर्ण कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 5-8-10

दोपहर में 2:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम की समाप्ति के बाद आधे घण्टे के लिए क्षेत्रीय प्रसारण होता है जिसके बाद केन्द्रीय सेवा के दोपहर बाद के प्रसारण के लिए हम 3 बजे से जुड़ते है।

3 बजे सखि सहेली कार्यक्रम में शुक्रवार को प्रसारित हुआ कार्यक्रम हैलो सहेली। फोन पर सखियों से बातचीत की निम्मी (मिश्रा) जी ने। पहला कॉल अच्छा रहा। एक घरेलु महिला ने बात की और बताया अपने घरेलु काम-काज के बारे में। उनकी छोटी सी लड़की ने भी बात की और यह गीत पसंद किया -

चुन चुन करती आई चिड़ियाँ

रिटायर्ड शिक्षिका, छात्रो ने फोन किए। एक सखी ने बताया कि वो पुलिस में अपना करिअर बनाना चाहती हैं। एक ने बताया कि सिविल सेवा में जाना चाहती हैं। बताया कि अपने शिक्षक पति के कहने से इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं। यह प्रेरणा देने वाला कॉल अच्छा रहा। नेपाल के पास के जिले देवरिया के प्रतापपुर गाँव की घरेलु महिला से भी बातचीत अच्छी रही। कहने लगी उसके पति दूर भिलाई में काम करते हैं। उसे घूमने फिरने का शौक हैं, घर के काम, सिलाई कढ़ाई भी करती हैं और यह गीत पसंद किया -

मेरा पति मेरा देवता हैं

ऎसी बातचीत से पता चलता हैं आज भी हमारे यहाँ कुछ महिलाओं की जीवन शैली पारंपरिक हैं। एक और सखी ने बताया कि उसने मुन्ने को जन्म दिया हैं, बड़ा होकर वहा क्या बनेगा यह सब बाद में ही तय होगा, अच्छा लगा कि माँ होने के नाते वह अपनी मर्जी मुन्ने पर लादना नही चाहती। इस तरह महिलाओं में जागरूकता भी नजर आई और परम्परा भी।

असम के तेजपुर जिले की घरेलु महिला ने बताया कि वहां विविध भारती साफ़ सुनाई देता हैं। सखियों ने विविध भारती के कार्यक्रमों को पसंद करने की भी बात कही। सखियों की पसंद पर नए-पुराने विभिन्न मूड के गाने सुनवाए गए, नया गीत जुबी जुबी भी सखियों की पसंद पर सुनवाया गया।

बिहार, इलाहाबाद जैसे शहरों से भी फोन आए, गाँव, जिलो से फोन आए। लोकल काल भी थे। इस कार्यक्रम को तैयार करने में तकनीकी सहयोग तेजेश्री (शेट्टे) जी और प्रस्तुति सहयोग रमेश (गोखले) जी का रहा।

सोमवार को पधारे निम्मी (मिश्रा) जी और चंचल (वर्मा) जी। इस दिन पहले फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं दी गई। यह दिन रसोई का होता है, सखियों के पत्रों से सोया बर्गर और नारियल तथा फूल मखाने का सलाद बनाना बताया गया। कांचन (प्रकाश संगीत) जी की लिखी झलकी सुनवाई गई - तोहफा, जिसमे पत्नी के जन्मदिन पर पति उपहार में कार देना चाहता हैं पर उस दिन डिलीवरी नही मिलती। पत्नी फिल्म देखने जाने के लिए तांगा मंगवाती हैं। निम्मी जी के साथ अमरकांत जी के अभिनय से सजी यह झलकी ईंधन की किल्लत के इस दौर में अच्छी लगी।

सखियों की पसंद पर पुरानी फिल्मो के गीत सुनवाए गए - रतन, बंदिनी, चोरी-चोरी, खानदान, मदर इंडिया, फिल्मो के गीत और यह गीत भी -

छुप गया कोई रे दूर से पुकार के

मंगलवार को भी पधारी सखियां निम्मी (मिश्रा) जी और चंचल (वर्मा) जी। यह करिअर का दिन होता है। इस दिन पुस्तकालय के क्षेत्र में करिअर बनाने की जानकारी दी गई।

हमेशा की तरह सखियो के अनुरोध पर गाने नए ही सुनवाए गए, शुरूवात की गुरू फिल्म के बारिश के गीत से - बरसों रे मेघा,
वीर, ऐतेराज, मुस्कान, मंगल पाण्डेय, मुझसे शादी करोगी फिल्मो के गीत सुनवाए।

बुधवार को सखियाँ पधारीं - निम्मी (मिश्रा) जी और देवी (कुमार) जी। इस दिन स्वास्थ्य और सौन्दर्य संबंधी सलाह दी जाती है्। वजन घटाने के लिए भोजन के नुस्के बताए गए जैसे भुना आलू, गाजर आदि खाए। पहरावे का तौर-तरीका बताया। बेल के फलो के औषधीय गुणों की जानकारी दी, एक सखी के भेजे गए पत्र द्वारा। इस दिन किशोर दा को उनके जन्मदिन पर याद किया और सखियों की फरमाइश में से उन्ही के गीत चुन कर सुनवाए. सफ़र, आंधी, घर, धर्मात्मा, तपस्या, अंदाज फिल्मो के गीत सुनवाए गए और यह गीत भी शामिल था -

गुलमोहर गर तुम्हारा नाम होता

गुरूवार को सखियाँ पधारी निम्मी (मिश्रा) जी और अंजू जी। इस दिन सफल महिलाओं के बारे में बताया जाता है। इस दिन बैड मिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार जैसे सर्वोच्च सम्मान मिलने की जानकारी दी। सखियों के पत्रों से जानकारी दी गई जैसे बिहार के भागलपुर गाँव में लड़की के जन्म पर पौधा लगाया जाता हैं इससे वृक्ष संपदा बढी हैं। पहली महिला फोटो पत्रकार और फिल्मी हस्ती जोहरा सहगल के बारे में बताया, यह जानकारी पहले भी दी जा चुकी हैं।
सखियों के अनुरोध पर लोकप्रय गीत सुनवाए - चेक दे इंडिया, कभी-कभी, ज्वैल थीफ, प्रोफ़ेसर, और प्यार हो गया फिल्मो से और माया फिल्म का यह गीत -

तस्वीर तेरी दिल में
जिस दिन से उतारी हैं

हर दिन श्रोता सखियों के पत्र पढे गए। कुछ पत्रों में कार्यक्रमों की तारीफ़ थी। बारिश के मौसम में देखभाल के घरेलु नुस्के भी बताए गए। इस कार्यक्रम की दो परिचय धुनें सुनवाई गई - एक तो रोज़ सुनी और एक विशेष धुन हैलो सहेली की शुक्रवार को सुनी। प्रस्तुति कमलेश (पाठक) जी और कल्पना (शेट्टे) जी की रही।

शनिवार और रविवार को प्रस्तुत हुआ सदाबहार नग़में कार्यक्रम जिसमे अच्छे सदाबहार नगमे सुनने को मिले। शनिवार को महान गायक मोहम्मद रफी की पुण्य तिथि पर यह कार्यक्रम उन्ही को समर्पित रहा। उनके गाए रोमांटिक गीत सुनवाए राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने, भरोसा, प्रोफ़ेसर, लाला रूख, कन्यादान, इशारा, प्यार किया तो डरना क्या और नाईट इन लन्दन फिल्म से यह गीत -
नजर न लग जाए किसी की राहो में

रविवार को निम्मी (मिश्रा) जी ने पचास के दशक की फिल्मो के सदाबहार गीत सुनवाए साथ ही उस दौर के गीत और संगीत की चर्चा भी की। उड़न खटोला, घर न 44, तांगेवाला, देवदास, मिस्टर एंड मेसेज 55 फिल्मो के गीत सुनवाए गए. गीतों का चुनाव अच्छा रहा. विभिन्न मूड और चलन के गीत सुनने को मिले - शास्त्रीय संगीत में पगा गीत - नैन सो नैन नाही मिलाओ

बाप रे बाप फिल्म से - पिया पिया पिया मेरा जिया पुकारे

3:30 बजे नाट्य तरंग कार्यक्रम में शनिवार को अली मोहम्मद लोन का लिखा नाटक सुना - चिनार। आदर्शवादी लेखक अपने यथार्थ जीवन में अपने परिवार को शोषित करता हैं। जब समाज उनका सम्मान करता हैं तब परिवार छोड़ जाता हैं, पर इसका उन्हें एहसास होता हैं। कश्मीर केंद्र की बढ़िया प्रस्तुति।

रविवार को इक़बाल मजीद का लिखा नाटक प्रसारित किया गया - अपना अपना सच जिसके निर्दशक हैं राकेश ढ़ोंढीयाल। अच्छा सन्देश देता नाटक था. आधुनिकता के नाम पर स्वच्छंद विचारों की महिआओ के शादी जैसे संस्कार पर से उठते विश्वास, व्यक्तित्व को बनाए रखने के लिए माँ न बनने की जिद. अंत में दुर्घटना की शिकार हुई नायिका से समाज भी दूरी ही बनाए रखता हैं तब अकेलेपन में वह पति के आदर्शो को समझ पाती हैं. भोपाल केंद्र की अच्छी प्रस्तुति रही पर एकाध सीन बहुत बोल्ड रहा, परिवार के साथ बैठ कर सुनने में उलझन हो सकती हैं.

शाम 4 से 5 बजे तक सुनवाया जाता है पिटारा कार्यक्रम जिसकी अपनी परिचय धुन है और हर कार्यक्रम की अलग परिचय धुन है।

शुक्रवार को प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम सरगम के सितारे जिसमे सितारा रही ख्यात पार्श्व गायिका हेमलता जिनसे बातचीत की ममता (सिंह) जी ने। शुरूवात में ही विविध भारती की तारीफ़ की और कह दिया कि कार्यक्रम सुनती रही और इस दिशा में करिअर बना। शुरू की बातचीत से अच्छी जानकारी मिली। बताया कि पारिवारिक माहौल संगीत का हैं पर पारंपरिक होने से संगीतज्ञ पिता जयचंद भट्ट की पुत्री होते हुए भी लड़कियों को संगीत से दूर ही रखा गया। बचपन में चोरी से संगीत सीखा फिर एक बार दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित विशाल कार्यक्रम में मध्यांतर में पहली बार गाया और शामिल सभी बड़े कलाकारों की नजर में आई। फिर शुरू हुई शिक्षा। शुरू हुआ कार्यक्रम देने का सिलसिला। पहली बार रोशन नाईट में गाया।

एक ख़ास बात बताई कि जब भी उन्होंने किसी को अपने स्वर परीक्षण के लिए गाकर सुनाया तो गीत निजी संग्रह से ही रहे, फिल्मी नही। पहला फिल्मी गीत विशवास फिल्म के लिए गाया -

ले चल ले चल मुझे उस दुनिया में प्यार ही प्यार हैं जहां

रफी साहब के साथ बचपन फिल्म के लिए गाया - आया रे खिलौने वाला खेल खिलौने लेके आया रे

150 गाने गाने के बाद रविन्द्र जैन के लिए गाया, फकीरा फिल्म का शीर्षक गीत, चितचोर के गानों की चर्चा हुई और उसके लिए मिले पहले अवार्ड की भी। सभी चर्चित गानों को सुनवाया गया। इस तरह संघर्ष से मिली सफलता, अपने शुरूवाती गीतों की लोकप्रियता से परोक्ष रूप से प्रतिस्पर्धा भी स्पष्ट हुई लेकिन जब बातचीत में उठान आया और चरम पर बात पहुंची तब बातचीत का सिरा ग़ुम हो गया। हेमलता के करिअर के महत्वपूर्ण गीत की चर्चा तक नही की, सिर्फ सुनवाया - अंखियो के झरोखों से फिल्म का शीर्षक गीत।

एक तो यह गीत ही विलक्षण हैं। आमतौर पर गीत में एक ही मूड होता हैं या कभी दो मूड होते हैं पर इस गीत में विभिन्न मूड हैं। एक बार तो गायकी इतनी धीमी हैं कि सुनने वाला थम जाता हैं। हर अंतरे का अलग मूड हैं। फिल्म में यह गीत ज्यादा उभर कर आया हैं। विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न मूड में बजा और हेमलता ने सारी स्थितियां समझते हुए आत्मसात कर इस गीत को गाया, पूरी जान लगा दी उन्होंने और उसका फल भी मिला। उस वर्ष का सर्वश्रेष्ठ गीत रहा यह। खुद लताजी ने इस गीत की तारीफ़ की। हेमलता के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि रही पर जितनी लोकप्रियता उतना विवाद इस गीत से जुडा। इस गीत के बाद एक दो फिल्मो में गाने के बाद हेमलता ने फिल्म संसार छोड़ दिया।

हम जानते हैं विवादों की बात नही की जाती पर इस गीत को सुनवाने के बाद एक सामान्य सवाल उनके फिल्मो में गाना जारी नही रखने के बारे में पूछ लेते तो भी सूत्र बना रहता, लेकिन इस गीत को सिर्फ सुनवा कर उसके बाद उनके बेटे की चर्चा बेतुकी लगी। फिर उन्होंने निजी संग्रह से कुछ गुनगुनाया और एक गीत की झलक के साथ बातचीत समाप्त हो गई। कार्यक्रम हो सरगम के सितारे और मेहमान हो हेमलता और फिल्म अंखियो के झरोके से का शीर्षक गीत वो न गुनगुनाए तो सुधी संगीत श्रोता के लिए समापन अटपटा ही लगेगा। मुझे याद हैं कुछ समय पहले दूरदर्शन पर यह फिल्म दिखाई गई थी। तब फिल्म से जुड़े किसी कलाकार को बुलाने के चलन में हेमलता को बुलाया गया था। पूरी फिल्म के प्रसारण के दौरान हेमलता ने विभिन्न मूड की पंक्तिया गाकर सुनाई थी। इस बातचीत के रिकार्डिंग इंजीनियर हैं - राजेन्द्र (मैं पूरा नाम ठीक से सुन नही पाई) , इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया चित्रलेखा (जैन) जी ने।

रविवार को प्रसारित हुआ कार्यक्रम उजाले उनकी यादो के जिसमे ख्यात पार्श्व गायक महेंद्र कपूर से ममता (सिंह) जी की बातचीत की अंतिम कड़ी सुनवाई गई। यादो की भीड़ रही. गायक कलाकारों में आशा भोंसले, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, तलत महमूद, मन्नाडे, मुकेश, हेमंत कुमार, गीता दत्त, संगीतकार अनिल विश्वास, खैय्याम, राजेश रोशन इन सब को याद किया. स्वाभाविक हैं कि हरेक के लिए एकाध ख़ास बात ही बताई गई. शायद अंतिम कड़ी थी, इसीलिए... मुकेश के बारे में ख़ास बात बताई कि जब उन्हें पहला अवार्ड मिला तो केवल मुकेश ही ऐसे गायक थे जिन्होंने बधाई दी. अन्य गायक कलाकारों के बारे में बताया कि चूंकि महेंद्र कपूर सबसे जूनियर रहे इसीलिए जब भी कोई शो किया किसी ने पैसे नही लिए. बुखार में तपते हुए अनिल दा के पास हीर गाने का प्रसंग मार्मिक रहा. खैय्याम को स्कूल के दिनों से जानने की बात बताई. अनुराधा पौडवाल को प्रतिभाशाली गायिका बताया. राजेश रोशन के काम की प्रशंसा में लकी अली का गाया गीत सुनवाया - एक पल का

कुछ गीत बहुत दिन बाद सुन कर अच्छा लगा - नाखुदा फिल्म का शीर्षक गीत और यह पुराना गीत -

सिकंदर ने पोरस से की थी लड़ाई
तो की थी लड़ाई, मैं क्या करूं

जूनियर होने के नाते सभी सीनियर गायकों से मिलने वाले सुझाव और उनके सद्भाव की भी चर्चा की। इस बातचीत के रिकार्डिंग इंजीनियर हैं - राजेन्द्र (मैं पूरा नाम ठीक से सुन नही पाई) , तकनीकी सहयोग रहा तेजेश्री (शेट्टे) जी का, संयोजन किया कल्पना (शेट्टी) जी ने और प्रस्तुतकर्ता हैं कमल (शर्मा) जी।

सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में बाल रोग विशेषज्ञ डा संगीता जाधव से रेणु (बंसल) जी की बातचीत सुनवाई गई, विषय रहा - स्तन पान। विस्तार से जानकारी दी। अगस्त का पहला सप्ताह स्तन पान को समर्पित हैं, इसी सन्दर्भ में रही यह बातचीत. शुरूवात गोदभराई के गीत से हुई. कुछ पारंपरिक बातो की भी व्याख्या की और उनके विकल्प भी बताए जैसे जन्म के बाद पहले शहद और चीनी मिले पानी को पिलाने के बाद शिशु को पहला स्तन पान कराना, बताया कि इससे संक्रमण भी हो सकता हैं और पहला स्वाद लेने के बाद शिशु स्तन पान नही भी कर सकता इसीलिए माँ को यह दिया जा सकता हैं जो पच कर शिशु के दूध में मिल जाएगा. दूध बनने की ग्रंथियां छोटे बड़े दोनों स्तनों में समान होती हैं. किसी भी आरामदेय स्थिति में स्तनपान कराया जा सकता हैं. शिशु को माँ के बगल में ही लिटाने से उसका तापमान ठीक बना रहता हैं. उसे स्तन के पास लिटाने से शिशु खुद स्तन के पास सरकता हैं जिससे मांस पेशियों का विकास होता हैं. माँ का वजन पहले से ही अधिक हो तो गर्भावस्था में अधिक घी वगैरह अधिक न दे, वैसे भी घरेलु पौष्टिक भोजन ही गर्भवती को देना चाहिए. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी मार्ग दर्शन की प्रमुख बाते भी बताई गई. अगले सप्ताह भी बातचीत जारी रहेगी. इस जानकारीपूर्ण कार्यक्रम की प्रस्तुतकर्ता हैं कमलेश (पाठक) जी। बढ़िया कार्यक्रम, पूरी टीम को बधाई.

बुधवार को आज के मेहमान कार्यक्रम के स्थान पर ख्यात पार्श्व गायक, अभिनेता, निर्माता, निर्देशक किशोर कुमार की याद में विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किया कमल (शर्मा) जी ने - मेरे अपने जिसमे किशोर दा को याद किया उनकी जीवन संगिनी ख्यात अभिनेत्री लीना चंद्रावरकर ने जिनसे बातचीत की कमल जी ने। लीना जी ने किशोर दा से दार्जलिंग में हुई मुलाक़ात को याद किया जब स्टेज शो में पहली बार किशोर दा ने पड़ोसन का गीत मेरे सामने वाली खिड़की गाया। बताया कि किशोर दा जीवन में बहुत संतुलित थे। उनके साथ गाए गीत गम का फ़साना की रिकार्डिंग के अनुभव बताए। विवाह के बाद उनकी जीवन शैली को याद किया कि उन्हें शौपिंग करना बिल्कुल पसंद नही था पर खाने का बहुत शौक़ था। अपने पुत्र सुमित को सुलाते समय गाया करते थे - प्यार का जहां हो

कार्यक्रम में उनके दोनों ही तरह के गीत सुनवाए - कहानी किस्मत की फिल्म से -

रफ्ता रफ्ता देखो आँख मेरी लड़ी हैं

मजबूर फिल्म से - देखा तूफां को कश्ती डुबोते हुए

कार्यक्रम तैयार करने में तकनीकी सहयोगी रहे पी के ए नायर जी।

हैलो फ़रमाइश कार्यक्रम में शनिवार को श्रोताओं से फोन पर बात की राजेन्द्र (त्रिपाठी) ने। विभिन्न क्षेत्रो से फोन आए और लोकल काल भी थे। अलग-अलग तरह के श्रोताओं से बात हुई। विभिन्न काम करने वालो ने बात की - इस बार विविध भारती के कार्यक्रमों पर अधिक बात हुई। श्रोताओं ने बताया कि सालो से सुन रहे हैं, गृहणी ने बताया हमेशा रेडियो सुनती हैं। हाल ही में किए गए परिवर्तन पर भी चर्चा हुई। गानों की दृष्टि से पूरा कार्यक्रम रफीमय रहा। सभी ने पुण्य तिथि पर उन्हें याद किया। आया सावन झूम के, पगला कही का जैसी फिल्मो के लोकप्रिय गीतों के लिए अनुरोध किया और सदाबहार गीत भी शामिल रहा -
बहारो फूल बरसाओ मेरा महबूब आया


इस कार्यक्रम को तैयार करने में तकनीकी सहयोग तेजेश्री (शेट्टे) जी और प्रस्तुति सहयोग रमेश (गोखले) जी का रहा। कार्यक्रम को प्रस्तुत किया महादेव (जगदाले) जी ने।

मंगलवार को फोन पर श्रोताओं से बातचीत की अमरकांत जी ने। छात्र, खेती करने वाले, दुकान चलाने वाले जैसे विभिन्न श्रोताओं ने अपने काम के बारे में बताया। एक श्रोता से अच्छी जानकारी मिली, उन्होंने बताया कि कोयला खदान में 400 फीट गहराई में उतर कर मशीन से कोयला तोड़ने का काम करते हैं। अपने काम, प्रशिक्षण के बारे में अच्छी जानकारी दी। एक श्रोता ने कहा कि बारिश का इतेजार हैं, गाँव में पीने के पानी कि भी किल्लत हैं। एक श्रोता ने बताया कि रफी साहब पर शोधपरक पुस्तक लिखी हैं। नए पुराने गीत अनुरोध पर सुनवाए गए। एक बहुत पुराने गीत की फरमाइश हुई, श्रोता ने बताया कि बिखरे मोती फिल्म में अमीर बाई कर्नाटकी के साथ रफी साहब का गाया गीत, अमरकांत जी ने कहा कि इसे संग्रहालय में मुश्किल से ढूंढा गया, मैं सोचने लगी यह गीत ठीक से बजेगा भी या नही पर बहुत स्पष्ट सुनने को मिला, कोई तकनीकी खराबी नही -

आंसू थे मेरी जिन्दगी जो आँखों ने बहा दिया

इस कार्यक्रम को तैयार करने में तकनीकी सहयोग तेजेश्री (शेट्टे) जी और प्रस्तुति सहयोग माधुरी (केलकर) जी का रहा। कार्यक्रम को प्रस्तुत किया वीणा (राय सिंघानी) जी ने।

गुरूवार को श्रोताओं से फोन पर बातचीत की कमल (शर्मा) जी ने। विभिन्न श्रोताओं ने फोन किया जैसे छात्र, गृहिणी, खेती का काम करने वाले। एक श्रोता ने कहा वह खेत में कपास लगाना चाहता हैं। कांगड़ा के श्रोता ने वहां की काफी बाते बताई, वहां की पेंटिंग, वहां के मंदिरों के बारे में बताया। एक श्रोता ने अपने ऑटोमोबाइल के काम के बारे में बताया। गाने नए पुराने पसंद किए गए। पुरानी फिल्म मिलन का सावन गीत, नई फिल्म मुझे कुछ कहना हैं और फिल्म सावन को आने दो का शीर्षक गीत भी सुनवाया गया।

इस कार्यक्रम को तैयार करने में तकनीकी सहयोग सुनील (भुजबल) जी और प्रस्तुति सहयोग रमेश (गोखले) जी का रहा। कार्यक्रम को प्रस्तुत किया वीणा (राय सिंघानी) जी ने।

तीनो ही कार्यक्रमों में श्रोताओं ने विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों को पसंद करने की बात बताई। एक पुराने श्रोता ने बहुत ही पुराने कार्यक्रमों को याद किया। कुछ श्रोताओ ने बहुत ही कम बात की। अमरकांत जी ने सलाह दी कि मोबाइल से फोन करते समय यह जांच ले कि नेटवर्क ठीक हैं या नही वरना कभी लाइन कट जाती हैं और कभी आवाज साफ़ नही आती।
तीनो ही कार्यक्रमों और हैलो सहेली कार्यक्रम के बाद रिकार्डिंग के लिए फोन नंबर, दिन और समय बताया गया।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद गाने सुहाने कार्यक्रम प्रसारित हुआ जिसमे लगभग सभी ऐसे गीत सुनवाए गए जो लोकप्रिय हैं।

शुक्रवार को शायद जो जीता वही सिकंदर, राधा का संगम और मीरा का मोहन फिल्मो के गीत सुनवाए गए क्योंकि गीत मैंने सुने पर विवरण नही सुना। एकाध बार कुछ सेकेंड्स के लिए प्रसारण रूक गया शायद उस दौरान विवरण बताया गया।

शनिवार को रफी साहब के गाए गाने सुहाने सुनवाए गए - झुक गया आसमान, संगम, आरजू, कश्मीर की कलि, तेरे घर के सामने फिल्म का शीर्षक गीत और काला बाजार से खोया खोया चाँद भी सुना।

रविवार को डर, नरसिम्हा, दामिनी फिल्मो के गीत और यह गीत भी सुनवाया -

गोरिया रे मेरी नींद चुरा के ले जा

सोमवार को खलनायक, रंग, फिर तेरी कहानी याद आई फिल्मो के गीत के साथ यह प्यारा सा गीत भी सुनवाया गया -

इस जहां की नहीं हैं तुम्हारी आँखे
आसमाँ से ये किसने उतारी आँखें

मंगलवार को 1942 अ लव स्टोरी, पिघलता आसमान, साहिबा फिल्म का शीर्षक गीत और सागर फिल्म से ओ मारिया भी सुनवाया गया।

बुधवार को किशोर दा की याद में अच्छा संयोजन रहा। लता जी और आशा जी को छोड़ कर अन्य गायिकाओं के साथ गाए उनके गीत सुनवाए - सुलक्षणा पंडित के साथ दूर का राही फिल्म से, आरती मुखर्जी के साथ तपस्या फिल्म से, अनुराधा पौडवाल के साथ बदलते रिश्ते फिल्म से और अलका याज्ञिक के साथ कामचोर फिल्म से।

गुरूवार को मासूम, रजिया सुल्तान, साथ-साथ, बाजार फिल्मो के गीत सुनवाए गए और यह गीत भी शामिल था -

मंजिले अपनी जगह हैं रास्ते अपनी जगह

पूरी सभा में प्रसारण के दौरान अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए और संदेश भी प्रसारित किए गए जिसमें विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताया गया।

शाम 5:30 बजे गाने सुहाने कार्यक्रम की समाप्ति के बाद क्षेत्रीय कार्यक्रम शुरू हो जाते है, फिर हम शाम बाद के प्रसारण के लिए 7 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुड़ते है।

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