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Thursday, October 28, 2010

गैर फरमाइशी फिल्मी गीतों के कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 28-10-10

विविध भारती फिल्मी गीतों का गढ़ माना जाता हैं। वास्तव में यही से बजने वाले फिल्मी गीतों से फिल्मे याद रहती हैं वरना हर सप्ताह रिलीज होने वाली फिल्मो के युग में पुरानी फिल्मो को याद रखना कठिन हैं।

फिल्मी गीतों के कार्यक्रम की दो श्रेणियां हैं - फरमाइशी और गैर फरमाइशी जिनमे से महत्वपूर्ण हैं गैर फरमाइशी फिल्मी गीतों के कार्यक्रम जिसमे गीत सुनवाने के लिए श्रोताओं का दबाव नही होता हैं। विविध भारती खुद निर्णय लेकर विभिन्न रूपों में कुछ इस तरह से गीत सुनवाती हैं कि सभी गीतों को सुना जा सकता हैं।

इस समय विविध भारती से गैर फरमाइशी फिल्मी गीतों के तीन कार्यक्रम हैदराबाद में सुने जाते हैं भूले-बिसरे गीत, गाने सुहाने और सदाबहार नगमें जिनमे से भूले-बिसरे गीत सुबह के पहले प्रसारण का और गाने सुहाने शाम में प्रसारित होने वाला दैनिक कार्यक्रम हैं तथा सदाबहार नगमें सप्ताहांत यानि शनिवार और रविवार को दोपहर बाद में प्रसारित होने वाला कार्यक्रम हैं।

सुबह के प्रसारण में आधे घंटे के लिए 7 बजे से 7:30 तक प्रसारित होता हैं कार्यक्रम भूले-बिसरे गीत जिसमे पुराने फिल्मी गीत सुनवाए जाते हैं। शाम में 5 बजे दिल्ली से प्रसारित होने वाले समाचारों के 5 मिनट के बुलेटिन के बाद 5:05 बजे से 5:30 तक प्रसारित होता हैं कार्यक्रम गाने सुहाने जिसमे अस्सी के दशक और उसके बाद के फिल्मी गाने सुनवाए जाते हैं। शनिवार और रविवार को आधे घंटे के लिए 3 बजे से 3:30 तक प्रसारित होता हैं कार्यक्रम सदाबहार नगमे जिसमे पचास-साठ के दशक के लोकप्रिय फिल्मी गीत सुनवाए जाते हैं।

इस तरह आजकल के फिल्मी गीतों के लिए कोई कार्यक्रम नही हैं। वैसे फरमाइशी गीतों के कार्यक्रम में आजकल के गीत सुनवाए जाते हैं पर यदि गैर फरमाइशी गीतों के कार्यक्रम में ऐसे गीत सुनवाए जाए तो सभी गीत सुनने को मिलेगे। हमारा अनुरोध हैं कि एक ऐसा कार्यक्रम भी शुरू कीजिए या हो सकता हैं ऐसा कोई कार्यक्रम किसी ऐसे समय प्रसारित हो रहा हैं जिसे क्षेत्रीय प्रसारण के कारण बहुत से शहरों के श्रोता नहीं सुन पाते हो, तब ऐसे समय प्रसारित कीजिए जो क्षेत्रीय प्रसारण का समय न हो ताकि सभी इसका आनंद ले सकें। इस तरह विविध भारती से बहुत पुराने गीतों से लेकर नई रिलीज फिल्मो के गीत तक सुनने को मिलेगे।

आइए इस सप्ताह प्रसारित इन तीनों कार्यक्रमों पर एक नजर डालते हैं -

यह तीनो ही कार्यक्रम सुनने में कठिनाई हुई। तकनीकी गड़बड़ी थी। पता नही यह समस्या कहाँ से रही, क्षेत्रीय प्रसारण केंद्र से या हमारे ही क्षेत्र से किसी केबल समस्या के कारण प्रसारण ठीक से सुनाई नही दिया। आवाज बहुत धीमी रही, खरखराहट से कभी कुछ भी सुनाई नही दिया। कभी-कभार साफ़ आवाज आई। मंगलवार सुबह तक यही समस्या रही, बाद में प्रसारण सामान्य रहा। जो कुछ भी सुना उसी के आधार पर लिख रही हूँ।

सुबह 7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में शुक्रवार को एक ख़ास बात रही, एक युगल गीत में आशा भोंसले की आवाज को छोड़ कर सभी गीतों में भूली-बिसरी आवाजे रही। मधुमती फिल्म का वह लोकप्रिय गीत सुनवाया गया जिसे बिजॉय मुखर्जी ने गाया हैं, जिनके गाए गीत बहुत ही कम हैं - तन जले मन जलता रहे

तलत महमूद का एक ऐसा शांत गीत सुनवाया गया जिसमे संगीत भी बहुत कम था। मुझे याद नही मैंने इस गीत को पहले कभी सुना हो - किसको खबर थी

अलग-अलग मूड के गीत सुनना अच्छा लगा - उदास गीत के बाद छैला बाबू फिल्म का यह मजेदार गीत सुनवाया गया -

देखो जी बहके हैं चाल संभाल के

इसी मूड का शमशाद बेगम और साथियों का गाया दिल्लगी फिल्म का यह अक्सर सुनवाया जाने वाला गीत भी शामिल था -

मेरी प्यारी पतंग, चली बादल के संग
दे ढील दे ढील ओ री सखि हाय वो काटा

शनिवार को ऐसे लोकप्रिय गीत सुनवाए गए जो अक्सर सुने जाते हैं - देख ली तेरी खुदाई

मुकेश का गाया गीत - मुझे रात-दिन ये ख्याल हैं

सुरैया का - धड़कते दिल की तमन्ना हो मेरा प्यार हो तुम

टैक्सी ड्राइवर फिल्म का गीत भी शामिल था। साथ ही सुनवाया गया कम सुना जाने वाला गीत - आन बसों बनवारी

रविवार को विभिन्न मूड के अक्सर सुने जाने वाले गीत सुनवाए गए -

मोहब्बत इसको कहते हैं फिल्म से - महफ़िल में आप आए जैसे के चाँद आया

सुरैया का गाया अफसर फिल्म से - नैना दीवाने एक नही माने करे मनमानी

कम सुने जाने गीत भी शामिल थे, छैला बाबू, सात समुन्दर पार फिल्म से और सैया से नेहा लगाए फिल्म से कमल बारोट और शमशाद बेगम का गाया यह गीत मैंने शायद ही पहले सुना -

नैना मोरे कजरारे हमें लग गई नजरिया

सोमवार को कठपुतली, जग्गा डाकू, पंचायत फिल्मो के लोकप्रिय गीतों के साथ कम सुने जाने वाले गीतों में राकेट टार्जन फिल्म का गीत और यह गीत भी सुनवाया - मैं हो गई साजन तेरी

मंगलवार को यह कार्यक्रम भारतीय सिनेमा के ख्यात फिल्मकार - अभिनेता, निर्माता- निर्देशक व्ही। शांताराम की पुण्य स्मृति में समर्पित रहा। शुरूवात के लिए बहुत ही उचित गीत चुन कर सुनवाया गया, पंडित जसराज का गाया शास्त्रीय संगीत में पगा लड़की सहयाद्रि की फिल्म से -

वन्दना करो, अर्चना करो

जिसके बाद उनकी बेहतरीन फिल्म दो आँखे बारह हाथ से सम्मिलित स्वरों में यह प्रार्थना सुनवाई गई -

ऐ मालिक तेरे बन्दे हम

उनके बारे में भी बताया गया।

बुधवार को भी मिले-जुले गीत सुनवाए गए यानि जो अक्सर सुनवाए जाते हैं जैसे चंडीदास फिल्म से कुंदनलाल सहगल का गाया गीत, कम सुनवाए जाने वाले गीत भी सुनने को मिले जैसे मैं हूँ जादूगर फिल्म से यह गीत -

कोई नही मेहरबां मुश्किल में हैं जाँ

मदारी, तू ही मेरी जिन्दगी, एक राज, रंगीन रातें फिल्मो के गीत सुनवाए गए।

आज का कार्यक्रम गीतकार अंजान को समर्पित रहा। अक्सर सुने जाने वाले गीत सुनवाए गए - गोदान, हॉलीडे इन बॉम्बे फिल्मो से और यह गीत -

मेरे दो नैना मतवाले किस के लिए

कम सुनवाए जाने वाले गीत भी बजे जैसे रूस्तम कौन फिल्म से यह गीत -

क मने करले ह मने हमसे प मने प्यार

यह कार्यक्रम प्रायोजित रहा। प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद गाने सुहाने कार्यक्रम प्रसारित हुआ जिसमे अस्सी के दशक और उसके बाद के लगभग सभी ऐसे गीत सुनवाए गए जो लोकप्रिय हैं। शुक्रवार को शुरूवात की इस गीत से -

मदहोश दिल की धड़कन चुप सी तन्हाई

जिसके बाद कुर्बानी फिल्म का गीत सुनवाया गया फिर समापन किया आई मिलन की रात फिल्म के गीत से।

शनिवार को ख्वाबो की रानी जाने जाँ कब से तेरी तलाश हैं गीत के साथ तेरी क़सम फिल्म का गीत भी सुनवाया गया।

रविवार को हकीक़त, प्यार दीवाना होता हैं और दिल हैं के मानता नही फिल्म का शीर्षक गीत और आशिकी फिल्म से यह गीत सुनना भी अच्छा लगा -

नजर के सामने जिगर के पास कोई रहता हैं वो हो तुम

सोमवार को शुरूवात नाजायज फिल्म के पपिया झपिया गीत से की। सात रंग के सपने फिल्म का गीत भी सुनवाया गया और यह गीत भी शामिल था -

तुम क्या मिले जानेजाँ प्यार जिन्दगी से हो गया

मंगलवार को राम-लखन, दाग द फायर फिल्म के गीत और तेज़ाब फिल्म से यह गीत भी सुनवाया गया -

कह दो के तुम हो मेरी वरना

बुधवार को खिलाड़ी, मैं खिलाड़ी तू अनाडी फिल्मो के गीतों के साथ यह गीत भी शामिल था - ऐ मेरे हमसफ़र ऐ जानेजाना

आज शुरू में सुनवाया - इश्क बिना क्या जीना, इश्क बिना क्या मरना

और प्यार हो गया फिल्म के गीत के बाद समापन किया इस गीत से - वो सिकंदर ही दोस्तों कहलाता हैं

गानों के बीच में नई फिल्मो के विज्ञापन प्रसारित हुए। शुरू और अंत में संकेत धुन सुनवाई गई, जो विभिन्न फिल्मी गीतों के संगीत के अंशो को जोड़ कर तैयार की गई हैं।

दोपहर 3 बजे शनिवार और रविवार को प्रस्तुत हुआ कार्यक्रम सदाबहार नग़में। शनिवार को जब हम केन्द्रीय सेवा से जुड़े तब साथी फिल्म का शीर्षक गीत चल रहा था। इसके बाद अलग-अलग मूड के गाने सुनवाए गए -

दुनिया उसी की ज़माना उसी का

ये रात ये चांदनी फिर कहाँ

और हिमालय की गोद में फिल्म का कांकरिया मार के जगाया गीत भी शामिल था।

रविवार को जब हम केन्द्रीय सेवा से जुड़े तब अनाडी फिल्म के शीर्षक गीत का अंतिम अंतरा चल रहा था। इस कार्यक्रम में इसी फिल्म का एक और गीत सुनवाया गया, साथ ही कन्हैया और काली टोपी लाल रूमाल फिल्मो से भी दो-दो गीत सुनवाए गए। इससे लगा कि आयोजन विशेष था और शायद किसी एक वर्ष के सदाबहार गीत सुनवाए गए, पर न वर्ष बताया और न ही ऎसी कोई जानकारी दी। हो सकता हैं कार्यक्रम के शुरू में विवरण बताया गया हो, पर यहाँ हैदराबाद में और शायद कुछ अन्य शहरों में भी क्षेत्रीय प्रसारण के बाद 3 बजे से जुड़ते हैं तब तक कार्यक्रम शुरू हो चुका होता हैं इसी से कुछ पता नही चला। हमारा अनुरोध हैं कि ऎसी कोई जानकारी बाद में भी दीजिए और समापन पर अनिवार्य रूप से दीजिए जिससे सबको पता चले। विभिन्न मूड के गीत सुनने को मिले -

अब कहाँ जाए हम

लागी छूटे न अब तो सनम

तीनो कार्यक्रमों के दौरान अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजको के विज्ञापन भी प्रसारित हुए।

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