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Friday, January 14, 2011

फरमाइशी फिल्मी गीतों के कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 13-1-11

विविध भारती से फरमाइशी फिल्मी गीतों के कार्यक्रम हैं - एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने, मन चाहे गीत, हैलो फरमाइश, जयमाला, आपकी फरमाइश इन गीतों के लिए फरमाइश भेजने वाले श्रोताओं की जितनी संख्या हैं उससे कई गुना ज्यादा संख्या ये गाने सुनने वालो की हैं।

ये दो-तीन सप्ताह का समय ऐसा होता हैं जब दोपहर के कार्यक्रमों के श्रोताओं की संख्या बढ़ जाती हैं। इन दिनों स्कूलों में छमाही परीक्षाएं हो चुकी हैं और बच्चो की छुट्टियां हैं पर अध्यापक स्कूल आते हैं पेपर जांचने और परिणाम तैयार करने। ऐसा काम वो रेडियो सुनते हुए करते हैं। साल में दो-तीन बार ऎसी स्थिति आती हैं जब स्कूल और कॉलेज में छात्रो की छुट्टी होती हैं पर शिक्षण गण को कुछ दिन और काम करना होता हैं तब अक्सर ये काम रेडियो सुनते हुए ही निबटाए जाते हैं क्योंकि छात्रो के न रहने से कडा अनुशासन भी नही रहता। वैसे भी स्टाफ रूम में रेडियो की आवाज नई बात नही हैं। पहले छोटे ट्रांसिस्टर थे आजकल सेल फोन हैं।

आइए इस सप्ताह प्रसारित इन कार्यक्रमों पर एक नजर डालते हैं -

फरमाइशी गीतों के कार्यक्रम दोपहर से शुरू होते हैं। पहला कार्यक्रम दोपहर 12 बजे प्रसारित होता हैं - एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने। यह अति आधुनिक कार्यक्रम हैं। यह सजीव प्रसारण हैं। रोज एक घंटे का सजीव प्रसारण सामान्य बात नहीं हैं।

कार्यक्रम की शुरूवात में 10 फ़िल्मों के नाम बता दिए गए फिर बताया गया एस एम एस करने का तरीका जो इस तरह हैं -
मोबाइल के मैसेज बॉक्स में जाकर टाइप करना हैं - वीबीएस - जगह छोड़े यानि स्पेस दे - फिल्म का नाम - स्पेस दे - गाने के बोल - स्पेस - अपना नाम और शहर का नाम और भेज दे इस नंबर पर - 5676744

और इन संदेशों को 12:50 तक भेजने के लिए कहा गया ताकि शामिल किया जा सकें। पहला गीत उदघोषक की खुद की पसन्द का सुनवाया गया ताकि तब तक संदेश आ सके। फिर शुरू हुआ संदेशों का सिलसिला। सबसे अधिक सन्देश जिन गीतों के लिए मिले वही गीत सुनवाए गए।

शुक्रवार को प्रस्तोता रही ममता (सिंह) जी। अच्छा लगा कि इन फिल्मो में से अधिकाँश ऐसे गीत सुनने के लिए श्रोताओं ने सन्देश भेजे जो ज़रा कम ही बजते हैं। एक-दो ऐसे गीत भी शामिल रहे जो बहुत ज्यादा सुनवाए जाते हैं - कारपोरेट फिल्म से ओ सिकंदर, विवाह फिल्म से मिलन अभी आधा-अधूरा हैं। डोर, कभी अलविदा न कहना, भागम भाग, बाबुल, 36 चाइना टाउन, अक्सर फिल्मो के गीत सुनवाए गए।

शनिवार को प्रस्तोता रही राजुल (अशोक) जी। गरम मसाला, काल, आशिक बनाया आपने, मैंने प्यार क्यों किया, सलाम नमस्ते फिल्मो के गीत, दस और नो एंट्री फिल्मो के शीर्षक गीत और बंटी और बबली फिल्म से नच बलिए गीत भी सुनवाया।

रविवार को क्षेत्रीय प्रायोजित कार्यक्रमों के कारण पूरा कार्यक्रम रिले नही हुआ। अंत में सुना कहो न प्यार हैं फिल्म का शीर्षक गीत।

सोमवार को प्रस्तोता रहे अशोक हमराही जी। फिल्मे रही - बेवफा, ब्लफ मास्टर, वीर जारा, खाकी, मर्डर, हमतुम। इन फिल्मो के गीतों के साथ धूम और मुझसे शादी करोगी फिल्मो के शीर्षक गीत भी सुनवाए गए।

मंगलवार को प्रस्तोता रही राजुल (अशोक) जी। जूली, ऐतेबार (दोनों नई फिल्मे), फिजा, मस्ती, चमेली, गर्व, दिल मांगे मोर फिल्मो के गीत सुनवाए। कृष्णा कॉटेज फिल्म का गीत सूना सूना इस सप्ताह दूसरी बार सुनना अच्छा नही लगा।

बुधवार को प्रस्तोता रही मनीषा (भटनागर) जी। क़यामत, बागबान, अंदाज, चलते-चलते, मुन्ना भाई एम बी बी एस फिल्मो के गीत और कल हो न हो फिल्म का शीर्षक गीत सुनवाया।

गुरूवार को प्रस्तोता रहे अमरकांत जी। शुरूवात की चोरी चोरी चुपके चुपके फिल्म के शीर्षक गीत से। पिंजर, हंगामा, हासिल, जिस्म, इश्क विश्क फिल्मो के गीत सुनवाए। दम फिल्म से बाबूजी ज़रा धीरे चलो गीत भी शामिल था।

आधा कार्यक्रम समाप्त होने के बाद फिर से बची हुई फ़िल्मों के नाम बताए गए और फिर से बताया गया एस एम एस करने का तरीका। कार्यक्रम के अंत में अगले दिन की 10 फ़िल्मों के नाम बताए गए। हर दिन 10 फिल्मो के नाम बताए गए पर 10 से कम फिल्मो के ही गीत सुनवाए गए क्योंकि संदेशो की संख्या अधिक रही। देश के विभिन्न भागो से संदेश आए। आरम्भ, बीच में और अंत में बजने वाली संकेत धुन ठीक ही हैं। कभी-कभी इस कार्यक्रम को प्रस्तोता ने शो कहा, मैं समझ नही पा रही हूँ क्या रेडियो के कार्यक्रम को शो कहा जा सकता हैं...

इस सप्ताह यह कार्यक्रम अच्छा लगा क्योंकि नए दौर के संगीत का आनंद मिला। इस कार्यक्रम को मंगेश (सांगले) जी, गणेश (शिन्दे) जी, निखिल (धामापुरकर) जी, राजीव (प्रधान) जी, तेजेश्री (शेट्टे) जी के तकनीकी सहयोग से हम तक पहुंचाया गया और हम तक यह प्रसारण ठीक से पहुँच रहा हैं या नही, यह देखने (मॉनीटर) करने के लिए ड्यूटी रूम में ड्यूटी अधिकारी रही मालती (माने) जी। इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया विजय दीपक (छिब्बर) जी ने।

दोपहर 1:30 बजे का समय रहा मन चाहे गीत कार्यक्रम का जिसकी प्रस्तुति पारंपरिक और आधुनिक दोनों ढंग से हैं। यानि दो दिन ई-मेल से भेजी गई फरमाइश से गीत सुनवाए जाते हैं और शेष दिन पुराने तरीके से पत्रों से प्राप्त फरमाइश के अनुसार गीत सुनवाए जाते हैं। नए-पुराने गीतों के लिए श्रोताओं ने फरमाइश भेजी।

शुक्रवार को शुरूवात की कश्मीर की कलि फिल्म के मस्त गीत से - तारीफ़ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हे बनाया
मेरा गाँव मेरा देश, मेरा साया, आदमी, विवाह, कुदरत, धूम फिल्म का शीर्षक गीत, फना फिल्म का सुहान अल्लाह गीत भी सुनवाया। नजरो से कह दो प्यार में मिलने का मौसम आ गया जैसे बीच के समय के गीत भी सुनवाए गए। भूले-बिसरे गीत टाइप का गाना भी शामिल था - तुम रूठ के मत जाना

शनिवार को भी नए पुराने गाने सुनवाए। कामचोर, आप तो ऐसे न थे, कुदरत (अस्सी के दशक की फिल्म) फिल्मो के गीत सुनवाए गए। 1942 अ लव स्टोरी फिल्म से लड़की को देखा तो ऐसा लगा गीत भी शामिल था। उमराव जान, मोहरा और मासूम फिल्म की गजल - हुजूर इस क़दर भी न इतरा के चलिए और बाजार फिल्म की यह गजल भी सुनवाई - फिर छेड़ी रात बात फूलो की। इस तरह इस दिन श्रोताओं की गजलो की फरमाइश ज्यादा पूरी हुई पर क्रम व्यवस्थित नही रहा। एक के बाद एक गजले सुनवाई, अगर गीत और गजल मिलाकर सुनवाते तो अच्छा लगता। प्रस्तोता रही मंजू (द्विवेदी)) जी।

रविवार को गैम्बलर, मिलन, सरस्वती चन्द्र, लैला मजनू, धूल का फूल, चोर मचाए शोर, नया दौर, फिल्मो के गीत सुनवाए। रोमांटिक गीतों के अलावा अलग भावो के गीत भी थे, शोर फिल्म से - जीवन चलने का नाम, दोस्ती फिल्म से - गुडिया हम से रूठी रहोगी कब तक न हंसोगी

बेताब फिल्म से शब्बीर कुमार का गाया यह गीत बहुत दिन बाद सुनना अच्छा लगा - तुमने दी आवाज लो मैं आ गया
इस दिन साठ-सत्तर के दशक के गीत अधिक सुनवाए गए। प्रस्तोता रही मंजू (द्विवेदी) जी।

सोमवार को एक नई बात हुई जो अच्छी लगी। शुरू में ही सभी फिल्मो के नाम बता दिए गए। अच्छा हैं, शुरू में ही श्रोताओं को पता चल जाएगा कि उनकी फरमाइश पूरी होने वाली हैं या अगले दिन के लिए प्रतीक्षा करनी हैं। शुरूवात हुई आक्रमण फिल्म के गीत से। सिलसिला, गोरा और काला, फर्ज, जीवन मृत्यु, खाकी, विजयपथ, कल हो न हो फिल्मो के रोमांटिक गीत सुनवाए। मझधार फिल्म से यह गीत अलग रहा जो मैंने शायद पहली ही बार सुना -

ऐ मेरे दोस्त दोस्ती की क़सम

प्रस्तोता रही रेणु (बंसल) जी।

मंगलवार को भी प्रस्तोता रही रेणु (बंसल) जी। शुरूवात की मेरा साया फिल्म के शीर्षक गीत से। पत्थर के सनम, पेइंग गेस्ट, कोहिनूर, आशीर्वाद, फिल्मो के रोमांटिक गीत सुनवाए गए। पालकी फिल्म का यह गीत बहुत दिन बाद सुना -

दिले बेताब को सीने से लगाना होगा आज परदा हैं तो कल सामने आना होगा

इस क़व्वाली की फरमाइश भी श्रोताओं ने बहुत दिन बाद की - यह मस्जिद हैं वो बुतखाना चाहे ये मानो चाहे वो मानो
धूम, विवाह, वीरजारा, हम तुम फिल्मो के गीत भी सुनवाए, इन फिल्मो का इस सप्ताह दुबारा-तिबारा शामिल होना अच्छा नही लगा।

बुधवार को अमरकांत जी ने सुनवाए ई-मेल से प्राप्त फ़रमाइशो के अनुसार गीत। ताजमहल, प्रोफ़ेसर, आरजू फिल्मो के गीत, चौदहवी का चाँद फिल्म का शीर्षक गीत, कैदी नंबर 11 फिल्म का लताजी और डेजी ईरानी का गाया यह गीत बहुत दिन बाद सुनना अच्छा लगा -

मीठी-मीठी बातो से बचना ज़रा

रूस्तम-ए-हिंद फिल्म के इस गीत के लिए भी श्रोताओं ने ई-मेल भेजा जिसकी फरमाइश श्रोता कम ही करते हैं - मेरे पहलू में आके बैठो खुदा के वास्ते

नई फिल्मे मैंने दिल तुझको दिया, रब ने बना दी जोडी, वीरजारा, ताल, परिंदा के गीत भी शामिल थे।

गुरूवार को ममता (सिंह) जी ने सुनवाए ई-मेल से प्राप्त फ़रमाइशो के अनुसार गीत। पाकीजा, कयामत से क़यामत तक, मुकद्दर का सिकंदर, विश्वात्मा, लम्हे फिल्मो के गीत, नई फिल्म स्लम डॉग मिलियनियर, अंखियो के झरोखों से और आवारा फिल्म का शीर्षक गीत भी शामिल था। एक थी लड़की फिल्म से पुराना लोकप्रिय गीत लारालप्पा सुन कर मजा आ गया। मिस्टर एक्स इन बॉम्बे का मेरे महबूब क़यामत होगी गीत सुनना बहुत खराब लगा क्योंकि पिछली रात को आपकी फरमाइश कार्यक्रम में ही सुना था।

शनिवार, मंगलवार और गुरूवार को शाम 4 बजे पिटारा कार्यक्रम के अंतर्गत प्रसारित हुआ आधुनिक तकनीक से सजा फरमाइशी कार्यक्रम - हैलो फरमाइश। इसमे विविध भारती के प्रस्तोता श्रोताओं से सीधे फोन पर बात करते हैं। अपनी पसंद का गीत बताने के साथ-साथ कुछ इधर-उधर की भी बाते होती हैं जिससे कई तरह की जानकारियाँ भी मिल जाती हैं। पिटारा की संकेत धुन के बाद इस कार्यक्रम की संकेत धुन सुनवाई गई।

मंगलवार को फोन पर श्रोताओं से बातचीत की युनूस (खान) जी ने। विभिन्न श्रोताओं ने अपने काम के बारे में बताया जैसे मोटर वायरिंग का काम, एक श्रोता ने बताया वह प्राइवेट फर्म में काम करता हैं। कश्मीर के श्रोता ने वहां के सर्द मौसम और बर्फबारी के बारे में बताया। राजस्थान के श्रोता ने कहा आजकल वहां ठण्ड बहुत हैं। कुछ श्रोताओं ने नव वर्ष की शुभकामनाएं दी। नए पुराने गीत अनुरोध पर सुनवाए गए। लताजी का गाया बरसात फिल्म का पुराना गीत -

हवा में उड़ता जाए मेरा लाल दुपट्टा मलमल का

नई फिल्म तेरे नाम का गीत ओढ़नी ओढ़ के नाचूं

और अनोखी अदा फिल्म का यह गीत बहुत दिन बाद सुना -

हाल क्या हैं दिलो का न पूछो सनम आपका मुस्कुराना गजब ढा गया

एक श्रोता ने अपने एक मित्र को समर्पित करने के लिए देशप्रेमी फिल्म के शीर्षक गीत की भी फरमाइश की।

गुरूवार को श्रोताओं से फोन पर बातचीत की अमरकांत जी ने। इस दिन अधिकतर छात्रो ने बात की। एक छात्र ने बताया कि वह फ़ौज में जाना चाहता हैं। नई फिल्मो के गीत भी सुनवाए जैसे कल हो न हो फिल्म से और पुरानी फिल्मो के गीत भी शामिल थे जैसे नदिया के पार फिल्म का गीत -

कौन दिशा में लेके चला रे

तीनो ही कार्यक्रमों में श्रोताओं ने विविध भारती के विभिन्न कार्यक्रमों को पसंद करने की बात बताई।

रिकार्डिंग के लिए फोन नंबर बताया गया - 28692709 मुम्बई का एस टी डी कोड 022 यह भी बताया कि हर सोमवार, मंगलवार और शुक्रवार को फोन कॉल रिकार्ड किए जाते हैं। कुछ सामान्य निर्देश भी दिए जैसे फोन करते समय यह ध्यान रखे कि आसपास बहुत शोर न हो रहा हो, पहले से तय कर ले कि किस गीत की फरमाइश करनी हैं और एक बार फोन कॉल शामिल होने के दो महीने बाद दुबारा फोन करे।

कार्यक्रम माधुरी (केलकर) जी के सहयोग से वीणा (राय सिंहानी) जी ने प्रस्तुत किया। तकनीकी सहयोग स्वाति (भंडारकर) जी, सुधाकर (मटकर) जी का रहा।

शाम बाद 7 बजे दिल्ली से प्रसारित समाचारों के 5 मिनट के बुलेटिन के बाद शुरू हुआ फ़ौजी भाईयों की फ़रमाइश पर सुनवाए जाने वाले फ़िल्मी गीतों का कार्यक्रम जयमाला। इसमे फरमाइशी गीत सुनने के लिए फ़ौजी भाई एस एम एस या ई-मेल भेजते हैं। कार्यक्रम के शुरू और समाप्ति पर बजने वाली संकेत धुन अच्छी हैं, एकदम कार्यक्रम की परिचायक हैं।

शुक्रवार को प्रस्तोता रही संगीता (श्रीवास्तव) जी। नए-पुराने रोमांटिक गीत सुनवाए गए - महबूबा, कुछ कुछ होता हैं, प्रेम रोग, मैंने प्यार किया, जुर्म और यह अलग भाव का गीत भी शामिल था -

आज गा लो मुस्कुरा लो महफिले सजा लो जीवन की डोर बड़ी कमजोर

रविवार को कुछ ही समय पहले की फिल्मो के रोमांटिक गीत सुनवाए गए - नाजायज, कृष्णा कॉटेज, विश्वात्मा फिल्मो से और ये गीत भी शामिल थे -

तू जब जब मुझको पुकारे मैं दौड़ी आऊँ नदिया किनारे

हमको हमीं से चुरा लो

सोमवार को प्यार और शादी-ब्याह के गीत अधिक सुनवाए गए। वीर, विवाह, प्रेमरोग फिल्मो के गीत, क्योंकि फिल्म का शीर्षक गीत और अच्छा लगा कि इतिहास फिल्म के इस गीत के लिए भी फ़ौजी भाइयों ने फरमाइश भेजी जिसे बहुत ही कम सुनवाया जाता हैं - ये इश्क बड़ा बेदर्दी हैं

प्रस्तोता रही मंजू (द्विवेदी) जी।

मंगलवार को प्रस्तोता रही संगीता (श्रीवास्तव) जी। शुरूवात हुई दिलवाले दुल्हनिया ले जाएगे फिल्म के लोकप्रिय गीत मेहंदी लगा के रखना से जिसके बाद बॉबी, महबूबा, कुर्बान, मैंने प्यार किया फिल्म के गीतों के साथ आज के समय का लोकप्रिय गीत दबंग फिल्म से सुनवाया -

तेरे मस्त मस्त दो नैन

और इस सप्ताह दुबारा सुना फना फिल्म का गीत सुहान अल्लाह

बुधवार को प्रस्तोता रही मंजू (द्विवेदी) जी। सभी कम लोकप्रिय गीत सुनवाए गए - घातक, गर्व, तवायफ, मझधार फिल्मो से पर समापन किया पुरानी लोकप्रिय फिल्म नीलकमल के इस लोकप्रिय गीत से - तुझको पुकारे मेरा प्यार

गुरूवार को चाहत, राजा हिन्दुस्तानी, अंदाज, होगी प्यार की जीत फिल्मो के गीत और पुरानी फिल्म हीर रांझा से मिलो न तुम तो हम घबराए और निकाह फिल्म का सलमा आगा का यह गीत बहुत दिन बाद सुनवाया - दिल के अरमाँ आसुंओं में बह गए
फ़ौजी भाइयों को एस एम एस करने का तरीका भी बताया गया जो इस तरह हैं -

मोबाइल के मैसेज बॉक्स में जाकर टाइप करना हैं - वीजेएम - जगह छोड़े यानि स्पेस दे - फिल्म का नाम - स्पेस दे - गाने के बोल - स्पेस - अपना नाम और रैंक जरूर लिखे और भेज दे इस नंबर पर - 5676744

10:30 बजे प्रसारित हुआ आपकी फ़रमाइश कार्यक्रम। यहाँ भी मन चाहे गीत की तरह ई-मेल और पत्रों से भेजी गई फरमाइश पर गीत सुनवाए गए। इसमें श्रोताओं की फ़रमाइश पर कुछ समय पुरानी फिल्मो के गीत अधिक सुनवाए गए।

शुक्रवार को आर पार, राजकुमार, मेरे सनम, मेरे महबूब, हरियाली और रास्ता फिल्मो के गीतों के साथ आरती फिल्म का यह गीत भी सुनवाया -

आपने याद दिलाया तो मुझे याद आया

प्रस्तोता रही संगीता (श्रीवास्तव) जी।

शनिवार को एक मुसाफिर एक हसीना, गीत, जीवन मृत्यु फिल्मो के लोकप्रिय गीत सुने। लीडर फिल्म का यह गीत भी सुनवाया जो बहुत ही कम सुनवाया जाता हैं -

क्या कहूं हमें आपसे प्यार हैं

एक फूल दो माली फिल्म का यह गीत भी बहुत दिन बाद सुनना अच्छा लगा - सैंय्या ले गई जिया तेरी पहली नजर

रविवार को सूरज, नाईट इन लन्दन, बसंत बहार, सरस्वती चन्द्र, लव इन टोकियो फिल्मो के गीतों के साथ वह कौन थी फिल्म का यह गीत भी सुनवाया -

शोख नजर की बिजलियाँ हमें पे यूहीं गिराए जा

सोमवार को प्रस्तोता रही मंजू (द्विवेदी) जी। शुरूवात बच्चो के गीत से हुई, अब दिल्ली दूर नही फिल्म से - चुन चुन करती आई चिड़िया

सच्चा झूठा, अदालत, जिस देश में गंगा बहती हैं, टॉवर हाउज फिल्मो के गीत और मेरा साया फिल्म से झुमका गिरा रे भी शामिल था।

मंगलवार को प्रस्तोता रही संगीता (श्रीवास्तव) जी। पुरानी फिल्म पवित्र पापी के साथ बहुत पुरानी फिल्मो के गीत सुनवाए गए - ससुराल, जेलर, पोस्ट बॉक्स नंबर 999, तक़दीर फिल्मो से और कण कण में भगवान फिल्म का यह गीत भी सुनवाया - अपने पिया की मै तो बनी रे जोगनिया

बुधवार को प्रस्तोता रही मंजू (द्विवेदी) जी। मिस्टर नटवरलाल के अलावा पुरानी फिल्मो - मिस्टर एक्स इन बॉम्बे, फूल बने अंगारे, मेरे महबूब, अदालत के गीत सुनवाए गए, दिल और मोहब्बत फिल्म का यह गीत भी सुना जो आजकल कम ही सुनवाया जाता हैं -

हाथ आया हैं जबसे तेरा हाथ में, आ गया हैं नया रंग जज्बात में

गुरूवार को श्रोताओं के ईमेल आधारित फरमाइशी गीतों में शुरूवात की दो कलियाँ फिल्म के गीत से - तुम्हारी नजर क्यों खफा हो गई

कश्मीर की कलि, दो रास्ते, बीस साल बाद और लावारिस फिल्मो के गीत सुनवाए।

बुधवार और गुरूवार को मन चाहे गीत और आपकी फ़रमाइश कार्यक्रम में ईमेल से प्राप्त फ़रमाइशें पूरी की जाती है अन्य दिन पत्र देखे जाते है। देश के अलग-अलग भागों से बहुत से पत्रों से गानों की फ़रमाइश भेजी गई और हर पत्र में भी बहुत से नाम रहे जबकि ई-मेल की संख्या कम ही रही। अधिकाँश गीत एक ही मेल पर सुनवाए गए। गाने नए पुराने दोनों ही शामिल थे।

जयमाला और आपकी फरमाइश कार्यक्रम प्रायोजित रहे। इन दोनों कार्यक्रमों में और मन चाहे गीत कार्यक्रम में अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए। पूरे सप्ताह देश के विभिन्न भागों, शहरों, गाँवों, जिलो, कस्बों से श्रोताओं की फरमाइश पर नए पुराने सभी समय के गीत विभिन्न कार्यक्रमों में सुनने को मिले। 12 बजे के कार्यक्रम में आजकल की फिल्मो के गीत सुनवाए गए और उसके बाद 1:30 बजे के कार्यक्रम में पुरानी फिल्मो के गीत अधिक सुनवाए। शाम बाद के कार्यक्रम में नई-पुरानी फिल्मो के गीत मिलाकर सुनवाए और रात के कार्यक्रम में पुरानी फिल्मो के गीत अधिक बजे।

एक बात बहुत अखर गई। एक ही फिल्म के गीत दो-तीन बार सुनवाए गए। कभी एक ही गीत दुबारा सुनवाया कभी अलग-अलग गीत सुनवाए। एक ही फिल्म को दुबारा शामिल करने के लिए कम से कम एक महीने का अंतर होने से ठीक रहेगा। श्रोताओं की फरमाइश एक महीने बाद भी पूरी की जा सकती हैं।

आप सबको मकर संक्रांति, पोंगल और लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनाएं !

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