आदरणिय पाठकगण
आज यानि 15 सितम्बर को सुरतमें स्थायी हुए एक जमानेके मशहूर अभिनेता और फिल्म छोटा आदमी तथा तीसरा किनाराके निर्देषक, जिन्होंने साऊन्ड अभियंता के रूपमें फिल्मी दुनियामें प्रवेष किया था उनकी जनम तारीख है । तो उनको रेडियोनामा की और से बधाई देते हुए रेडियो श्री लंका तथा विविध भारती की विज्ञापन प्रसारण सेवा के सुरत केन्द्र द्वारा प्रस्तूत की गई बधाई नीचे क्रमश: प्रस्तूत है ।
पियुष महेता ।
सुरत ।
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Wednesday, September 15, 2010
Saturday, June 26, 2010
1. मेरी बजाई हुई माऊथ ओर्गन (हार्मोनिका) पर दूसरी धून 2. रेडियो सिलोन से उपलब्ध एक कम जाने अच्छे गीत की
आदरणिय पाठको,
जनवरी, 2010 की शुरूआतमें मैनें मेरी ख़ूद माऊथ ओरगन पर बजाई फिल्म एक ही रास्ता के गीत साँवरे सलोने की धून इस मंच पर रख़ी थी, जिनको कुछ हद तक़ सकारात्मक प्रतिबाव मिला था और सागर भाईने फ़िर ऐसी कोशीश करने के लिये अपनी टिपणीमें अनुरोध किया था तो उस अनुरोध को मध्यनज़र रख़ते हुए फ़िल्म सीआईडी के गीत अय दिल मुश्कील जीना यहाँ को बजाया है । वैसे यु-ट्यूब पर तो कुछ दिनों से यह चढ़ा दिया था पर मंअल और शुक्रवार तो अन्नपूर्णाजी के लिये छोड़ देते है । तो इस लिये इतने दिन हो गये तो नीचे सुनिये, देख़ीये और (टिपणी) लिख़ीय्रे ।
जैसे इस ब्लोग के मंच पर आपको सुचीत किया गया है रेडियो सिलोन (श्री लंका) के रात्रीकालीन हिन्दी-अंग्रेजी के मिलेजूले प्रसारण को वेब से सुनने के लिये तो कितने पाठकोने सुना वह तो पता नहीं चला पर कभी कभी आम सिनेसंगीत शोक़ीन लोगों के लिये कुछ हद तक अनजान गाने कैसे प्रस्तूत किये जाते है इसकी मेरे इसी साईट से पाये हुए एक गाने की सिर्फ़ झलक प्रस्तूत करता हूँ । वैसे पूरा गाना मेरे पास है पर कई बार पाठकोने प्रतिभाव देने की बात टाल कर मूझे काफ़ी हद तक़ निराश किया है इस लिये अब आज से कभी भी पूरा गाना या पूरी धून यहाँ मेरी और से किसी भी कलाकार के संदर्भमें प्रस्तूत नहीं करूँगा पर सिर्फ़ झलके ही रखूँगा । और ज्यादा टिपणी मिली तभी इसे अपडेट या पूरक पोस्ट में रख़ने का या उन टिपणीकारों के निज़ी इ मेईल आईडी पर भेजने का इरादा रख़ता हूँ । हा, टिपणीमें हकीकत की गलती (भाषा की गलती को सागरभी क्षमा करें)की और विनय विवेक के साथ घ्यानाकर्षित करना तो जरूरी है, और मैं भी वैसा करता हूँ । तो सुनिये
श्रीमती ज्योति परमार की उद्दघोषणा के साथ ।
पियुष महेता (सुरत )
जनवरी, 2010 की शुरूआतमें मैनें मेरी ख़ूद माऊथ ओरगन पर बजाई फिल्म एक ही रास्ता के गीत साँवरे सलोने की धून इस मंच पर रख़ी थी, जिनको कुछ हद तक़ सकारात्मक प्रतिबाव मिला था और सागर भाईने फ़िर ऐसी कोशीश करने के लिये अपनी टिपणीमें अनुरोध किया था तो उस अनुरोध को मध्यनज़र रख़ते हुए फ़िल्म सीआईडी के गीत अय दिल मुश्कील जीना यहाँ को बजाया है । वैसे यु-ट्यूब पर तो कुछ दिनों से यह चढ़ा दिया था पर मंअल और शुक्रवार तो अन्नपूर्णाजी के लिये छोड़ देते है । तो इस लिये इतने दिन हो गये तो नीचे सुनिये, देख़ीये और (टिपणी) लिख़ीय्रे ।
जैसे इस ब्लोग के मंच पर आपको सुचीत किया गया है रेडियो सिलोन (श्री लंका) के रात्रीकालीन हिन्दी-अंग्रेजी के मिलेजूले प्रसारण को वेब से सुनने के लिये तो कितने पाठकोने सुना वह तो पता नहीं चला पर कभी कभी आम सिनेसंगीत शोक़ीन लोगों के लिये कुछ हद तक अनजान गाने कैसे प्रस्तूत किये जाते है इसकी मेरे इसी साईट से पाये हुए एक गाने की सिर्फ़ झलक प्रस्तूत करता हूँ । वैसे पूरा गाना मेरे पास है पर कई बार पाठकोने प्रतिभाव देने की बात टाल कर मूझे काफ़ी हद तक़ निराश किया है इस लिये अब आज से कभी भी पूरा गाना या पूरी धून यहाँ मेरी और से किसी भी कलाकार के संदर्भमें प्रस्तूत नहीं करूँगा पर सिर्फ़ झलके ही रखूँगा । और ज्यादा टिपणी मिली तभी इसे अपडेट या पूरक पोस्ट में रख़ने का या उन टिपणीकारों के निज़ी इ मेईल आईडी पर भेजने का इरादा रख़ता हूँ । हा, टिपणीमें हकीकत की गलती (भाषा की गलती को सागरभी क्षमा करें)की और विनय विवेक के साथ घ्यानाकर्षित करना तो जरूरी है, और मैं भी वैसा करता हूँ । तो सुनिये
श्रीमती ज्योति परमार की उद्दघोषणा के साथ ।
पियुष महेता (सुरत )
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PIYUSH MEHTA,
पियुष महेता,
माऊथ ओर्गन,
रेडियो श्रीलंका
Wednesday, June 2, 2010
रेडियो श्री लंका और फिल्मी धूने
रेडियो श्री लंका हर मंगलवार अपने सुबह के 8 से 8.30 तक के प्रसारणमें पहली 15 मिनीटमें प्रायोजित क्रिश्च्यन कार्यक्रम प्रसारित करता है और बाकी बची 15 मिनीटमें पिछले के पिछले मंगलवार तक फिल्म संगीत प्रसारित करता आया था । तब मैनें उद्दघोषिका श्रीमती ज्योति परमारजीसे फोन पर सुचन किया था कि कितने सालों से उनका फिल्मी धूनों का नियमीत कार्यक्रम सुबह 6 बजे से 6.05 तक और गुरुवार तथा शुक्रवार सुबह 6.15 तक आता है वह शायद ही किसी दिन पकडमें आता है, जो हवामान के आधार पर है । तो वे लोग मंगल वार को सुबह 8.15 पर जो फिल्म संगीत करीब करीब 1965 के बाद के ही होते है और अन्य रेडियो और टी वी चेनल्स पर भी मिल पाते है तो उनकी जगह फिल्मी धूने जो एलपी के बजाय 45 आरपीएम और 78 आरपीएम रेकोर्ड्झ में और सिर्फ़ रेडियो श्रीलंकाकी लायब्रेरीमें कैद हुआ है तो उनको क्यों श्रोताओं तक पहोंचाया नहीं जाय ! तो उन्होंनें जवाब दिया कि श्रोतालोगो के रिस्पोंस और मांग के आधार पर ही यह किया जा सकता है । फ़िर मैंनें कहा कि श्रोता लोगो की यादोंमें अगर साझ और वादक कलाकारों के नाम गानों के शुरूके बोलों के साथ याद नहीं रहते और इसी कारण अपना प्रतिभाव मेरी तराह नहीं दे पाते तो इसका मतलब यह नहीं कि वे उनको नापसंद करते है । बादमें मैं जो भारतके श्रोता मेरी सुचना के आघार पर वादक कलाकारों के बारेमें जो भी बधाई या श्रद्धांजली के छोटे छोटे या पूरे कार्यक्रमों को सुनकर मेरा सम्पर्क करके प्रतिभाव देते आये थे उनसे फोन या ई-मे -ईल द्वारा सम्पर्क कर के मेरे सुचनको उन सब के द्वारा बार बार यही बात कहलवाई या लिख़वायी तो इस के नतीजे से बिते हुए कलसे सुबह 8.15 से फिल्मी धूनों का एक अतिरीक्त साप्ताहीक कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें कल (1) साझ क्लेवायोलीन पर स्व. कल्याणजी (आणंदजी ) वीरजी शाह की बजाई फिल्म चोरी चोरी के गीत आ जा सनम की घून (78 आरपीएम (2) हार्मोनियम पर श्री इश्वरीलाल नेपाली की बजाई फिल्म हमलोग की धून सुन सुन सुन बाजे पायल (78 आरपीएम (3) श्री एनोक डेनियेल्स की पियानो एकोर्डियन पर फिल्म वो कोन थी की धून नैना बरसे (4) और मास्टर (इब्राहीम) अजमेरी की फिल्म मोर्डन गर्ल की धून ये मौसम रंगीन शमा (78 आर पी एम से ) सुनवाई । इस लिये रेडियो श्री लंका बधाई के पात्र है ।
दूसरी और अभी 31 मई के पत्रावलीमें किसी श्रोता के फिल्म बरसातकी रात के 78 आरपीएम में फसे एक गाने को याद दिलवाया तब श्री कमल शर्माजीनें कहा की विविध भारती अकेला 78 आरपीएम बजाने वाला रेडियो चेनल है, जब की एसएलबीसी ज्यादातर 78 आरपीएम ही बजाता है । और विविध भारती के लिये जबकी फिल्म संगीत के बारेमें यह बात 78 आरपीएम वाली एक जगह सही है तब फिल्मी धूनों के सम्बंधमें यह बिलकूल गलत हो गई है जब से यानि 2002 से साझ और आवाझ कार्यक्रम बंध हुआ है तब से । एक बार मेरे ही पत्र के जवाबमें श्री महेन्द्र मोदी साहबने ऐसा बहाना बनाया था कि 78 और 45 आरपीएम रेकोर्डझ घीस गये है और बजाने लायक नहीं रहे है तो मूझे तबसे यह सवाल मनमें हो रहा है कि गानों के 78 आरपीएम रेकोर्डझ पूरे दिन के कार्यक्रममें बजते रहे है वे घीसने की सम्भवना ज्यादा है या दिन में सिर्फ 5 से 15 मिनीट की समयावधीमें ही स्थान पाने वाले इतने सारे फिल्मी धूनों के रेकोर्ड्झ घीस जाने की सम्भवनाएं ज़्यादा है ? पिघाली मई की 6 तारीख़ को प्रसारित श्री अशोक सोनावणे जी के साथ हल्लो फरमाईशमें इनमें से काफ़ी बात कहने का मोका मिला था और उनका तथा श्री महादेव जगदाले साहब और तेजश्री शेठी और श्री रमेश गोखलेजी का मैं आभारी हूँ , कि मेरी बातचीत को काफ़ी हद तक स्थान दिया । हाँ कुछ अंश कटे जरूर थे जो मूझे ख़ास लगते थे पर समय की पाबंदी के हिसाबसे मूझे काफ़ी कवरेज दिया गया था । वह रेकोर्डिंग अन्नपूर्णा जी नें शायद सुनी होगी । यह अपलॉडींग की समस्या के कारण अभी रख़ नहीं पाता हूँ ।
पियुष महेता ।
सुरत ।
दूसरी और अभी 31 मई के पत्रावलीमें किसी श्रोता के फिल्म बरसातकी रात के 78 आरपीएम में फसे एक गाने को याद दिलवाया तब श्री कमल शर्माजीनें कहा की विविध भारती अकेला 78 आरपीएम बजाने वाला रेडियो चेनल है, जब की एसएलबीसी ज्यादातर 78 आरपीएम ही बजाता है । और विविध भारती के लिये जबकी फिल्म संगीत के बारेमें यह बात 78 आरपीएम वाली एक जगह सही है तब फिल्मी धूनों के सम्बंधमें यह बिलकूल गलत हो गई है जब से यानि 2002 से साझ और आवाझ कार्यक्रम बंध हुआ है तब से । एक बार मेरे ही पत्र के जवाबमें श्री महेन्द्र मोदी साहबने ऐसा बहाना बनाया था कि 78 और 45 आरपीएम रेकोर्डझ घीस गये है और बजाने लायक नहीं रहे है तो मूझे तबसे यह सवाल मनमें हो रहा है कि गानों के 78 आरपीएम रेकोर्डझ पूरे दिन के कार्यक्रममें बजते रहे है वे घीसने की सम्भवना ज्यादा है या दिन में सिर्फ 5 से 15 मिनीट की समयावधीमें ही स्थान पाने वाले इतने सारे फिल्मी धूनों के रेकोर्ड्झ घीस जाने की सम्भवनाएं ज़्यादा है ? पिघाली मई की 6 तारीख़ को प्रसारित श्री अशोक सोनावणे जी के साथ हल्लो फरमाईशमें इनमें से काफ़ी बात कहने का मोका मिला था और उनका तथा श्री महादेव जगदाले साहब और तेजश्री शेठी और श्री रमेश गोखलेजी का मैं आभारी हूँ , कि मेरी बातचीत को काफ़ी हद तक स्थान दिया । हाँ कुछ अंश कटे जरूर थे जो मूझे ख़ास लगते थे पर समय की पाबंदी के हिसाबसे मूझे काफ़ी कवरेज दिया गया था । वह रेकोर्डिंग अन्नपूर्णा जी नें शायद सुनी होगी । यह अपलॉडींग की समस्या के कारण अभी रख़ नहीं पाता हूँ ।
पियुष महेता ।
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पियुष महेता,
फिल्मी धूनें हल्लो फरमाईश,
रेडियो श्रीलंका,
विविध भारती
Saturday, April 17, 2010
श्री एनोक डेनियेल्स और आकाशवाणी अहमदावाद को जनम दिन और स्थापना दिन की बधाईयाँ
आदरणिय पाठकगण, कल यानि 15 अप्रिलको मैंनें आपके लिये एक कुतूहल छोड़ दिया था कि मैं किस वादक कलाकार की बात करने वाला हूँ । तो इस पर सिर्फ और सिर्फ़ अन्नपूर्णाजी की टिपणी आयी तो अब इस का खुलासा करने की घड़ी आ पहोंची है कि आजआनि 16 अप्रैल को य् देश के महान पियानो और पियानो-एकोर्डियन वादक श्री एनोक डेनियेल्स की जनम तारीख़ है और वे अपनी आयु के 77 साल पुरे कर चुके है और अब भी वे मंच कार्यक्रमोमें और श्री ख़ैयाम साहब जैसे फिल्मी संगीत की दुनियामें सबसे लम्बा सफ़र तय करने वाले संगीत कार की गैर-फिल्मी रचनाओं के आल्बमके वाद्यवृंद संयोजक के रूपमें सक्रिय है । तो उनके लिये रेडियो श्रीलंका की हिन्दी सेवा की उद्दघोषिका श्रीमती ज्योति परमारजीने मेरे द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर मेरे नाम के साथ एक अनोख़ा कार्यक्रम प्रस्तूत किया, जिसमें उनकी पियानो-एकोर्डियन पर बजाई फिल्म ‘लाजवंती’ के गीत ‘कुछ: दिन पहेले एक साल...’ और फिल्म ‘सोलहवा साल’ के गीत ‘ए अपना दिल तु आवारा...’के गीत की 78 RPM records पर संग्राहित धूनें प्रस्तूत की और बादमें वे फिल्मी गाने प्रस्तूत किये गये जिसमें उन्होंनें पियानो या पियानो-एकोर्डियन पर अपनी कमाल दिख़ाई है ।
यह कार्यक्रम को सुन कर कुछ श्रोतालोगोने सुरत से और गुजरात तथा देश के अन्य भागोसे भी मेरा फोन पर सम्पर्क किया श्री एनोक डेनियेल्स साहब का नं. जानने के लिये जिसमें एक थे इन्दौर के श्री कैलास शुक्लाजी जिन्होंनें डेनियेल्स साहब को तो फोन किया ही पर उनके नं को रेडियो पर प्रसारित करवाया और बादमें डेनियेल्स साहब से मेरी बात हुई तो उन्होंनें बताया कि फोन से ही जूड़े रहना पड़ा है । ज्योतिजीने मूझे फोन पर धन्यवाद कहते हुए बताया कि भारत और पाकिस्तानसे भी उन्हें ऐसी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई कि जो लोग आंठ बजे घरसे निकल जाने वाले होते है उन लोगोंनें भी अपना निकलना आधा घंटा देरी से जाना तय करके कार्यक्रम सुना और बहोत सराहा ।
तो रेडियोनामा की और से श्री एनोक डेनियेल्स साहबको लम्बे, स्वस्थ, और संगीत के क्षेत्रमें सक्रियता बरकरार रहने वाली उम्र की शुभ:कामना देते हुए नीचे प्रस्तूत कर रहा हूँ, विविध भारती के एक बंध हो चूके फोन इन कार्यक्रम ‘हल्लो आप के अनुरोध पर’ का अंश जिसमें मैंनें प्रथम बार हिस्सा लिया था, हमारे रेडियोनामा के एक चहिते पोस्ट लेख़क श्री युनूस भाई और मीठी आवाझ वाली रेडियो सख़ी श्रीमती ममता सिंध के साथ जिसमें पूरे भारतसे किसी ख़ास वाद्य और वादक कलाकार की फिल्मी धूनका अनुरोध करने वाला पहला और आख़री श्रोता रहा हूँ । हाँ, विविध भारती संग्रहालयमें मेरे अनुरोध वाली धून होते हुए भी समय की कमी के कारण नहीं ढूँढ पाने के कारण मेरी सहमती के साथ एक अलग धून सुनवाई थी पियानो-एकोर्डियन पर ही श्री एनोक डेनियेल्स साहब की ही और यह रेकोर्डिंग सुनते हुए एक और सस्पेन्स खुलेगा ।
अब उपर के रेकोर्डिंगमें मैंनें जो वैकल्पीक अनुरोध किया था और जिस LP का जिक्र किया था वैसी एक माईल-स्टोन रूप आल्बम डान्स टाईम जो डेनियेल्स साहब की वाद्यवृंद रचना है, प्रस्तूत कर रहा हूँ, ‘ओ मेरे सोना...’ फिल्म ‘तीसरी मंझील’ से जो विविध भारती से अन्तरालमें आज से करीब तीन साल पहेले बार बार प्रसारित होती थी ।
अब यही धून को पियानो-एकोर्डियन वादन के रूपमें सुनिये, जिसमें भी वाद्यवृद संयोजन श्री डेनियेल्स साहबका ही है और यह आल्बम उपरकी अल्बम से पूराना है । पर विविघ भारती और रेडियो सिलोन दोनों के पास होते हुए भी सालों के सालों से प्रस्तूत नहीं हुआ है ।
आज के रेडियो श्री लंका के श्री डेनियेल्स साहब वाले कार्यक्रम की काफ़ी अच्छी रेकोर्डिंग पूणे के श्रोता श्री गिरीश मानकेश्वरजी ने की है जो मेरे द्वारा की गयी रेकोर्डिंग से बहेतर है मूझे इ-मेईल से भेजने वाले है तो वह प्राप्त होते ही इस मंच पर प्रस्तूत होगी ।
श्री एनोक डेनियेल्स साहब को विविध भारती के ‘आज के मेहमान’ में आमंत्रीत करने के लिये मेरे बार बार के अनुरोध को एक बार फ़िर दोहराता हूँ पर विश्वास है, कि यह एक बेकार की कवायत है और इसे सुना-अनसुना या पढ़ा-अनपढ़ा ही किया जायेगा ।
एक बात यह भी हुई है कि श्री युनूसजी रेडियोवाणी और फेसबूकमें तथा उनके अन्य ब्लोग्समें तथा अपने बेटे जादू के साथ इतने-इतने मशरूफ़ हो गये है कि फिल्मी धून के शोक़ीन होते हुए भी इस मंच पर की फिल्मी धूनों की पोस्ट पर कई वक्त से एक भी टिपणी दे नहीं पाये है, यहाँ तक, कि अपने चहीते साझ सेक्षोफोन की धूनो की पोस्ट पर भी और अपने चहीते कलाकार मनोहरीदा के जनम दिन पर भी ! इस बार देख़ते है क्या होता है ।
आज आकाशवाणी अहमदावाद का भी स्थापना दिन है, तो उनके केन्द्र निर्देषक श्री भगीरथभाई पंड्या साहब तथा पूरे कर्मचारी-गण को भी बधाई ।
पियुष महेता ।
सुरत ।
यह कार्यक्रम को सुन कर कुछ श्रोतालोगोने सुरत से और गुजरात तथा देश के अन्य भागोसे भी मेरा फोन पर सम्पर्क किया श्री एनोक डेनियेल्स साहब का नं. जानने के लिये जिसमें एक थे इन्दौर के श्री कैलास शुक्लाजी जिन्होंनें डेनियेल्स साहब को तो फोन किया ही पर उनके नं को रेडियो पर प्रसारित करवाया और बादमें डेनियेल्स साहब से मेरी बात हुई तो उन्होंनें बताया कि फोन से ही जूड़े रहना पड़ा है । ज्योतिजीने मूझे फोन पर धन्यवाद कहते हुए बताया कि भारत और पाकिस्तानसे भी उन्हें ऐसी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई कि जो लोग आंठ बजे घरसे निकल जाने वाले होते है उन लोगोंनें भी अपना निकलना आधा घंटा देरी से जाना तय करके कार्यक्रम सुना और बहोत सराहा ।
तो रेडियोनामा की और से श्री एनोक डेनियेल्स साहबको लम्बे, स्वस्थ, और संगीत के क्षेत्रमें सक्रियता बरकरार रहने वाली उम्र की शुभ:कामना देते हुए नीचे प्रस्तूत कर रहा हूँ, विविध भारती के एक बंध हो चूके फोन इन कार्यक्रम ‘हल्लो आप के अनुरोध पर’ का अंश जिसमें मैंनें प्रथम बार हिस्सा लिया था, हमारे रेडियोनामा के एक चहिते पोस्ट लेख़क श्री युनूस भाई और मीठी आवाझ वाली रेडियो सख़ी श्रीमती ममता सिंध के साथ जिसमें पूरे भारतसे किसी ख़ास वाद्य और वादक कलाकार की फिल्मी धूनका अनुरोध करने वाला पहला और आख़री श्रोता रहा हूँ । हाँ, विविध भारती संग्रहालयमें मेरे अनुरोध वाली धून होते हुए भी समय की कमी के कारण नहीं ढूँढ पाने के कारण मेरी सहमती के साथ एक अलग धून सुनवाई थी पियानो-एकोर्डियन पर ही श्री एनोक डेनियेल्स साहब की ही और यह रेकोर्डिंग सुनते हुए एक और सस्पेन्स खुलेगा ।
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अब उपर के रेकोर्डिंगमें मैंनें जो वैकल्पीक अनुरोध किया था और जिस LP का जिक्र किया था वैसी एक माईल-स्टोन रूप आल्बम डान्स टाईम जो डेनियेल्स साहब की वाद्यवृंद रचना है, प्रस्तूत कर रहा हूँ, ‘ओ मेरे सोना...’ फिल्म ‘तीसरी मंझील’ से जो विविध भारती से अन्तरालमें आज से करीब तीन साल पहेले बार बार प्रसारित होती थी ।
अब यही धून को पियानो-एकोर्डियन वादन के रूपमें सुनिये, जिसमें भी वाद्यवृद संयोजन श्री डेनियेल्स साहबका ही है और यह आल्बम उपरकी अल्बम से पूराना है । पर विविघ भारती और रेडियो सिलोन दोनों के पास होते हुए भी सालों के सालों से प्रस्तूत नहीं हुआ है ।
आज के रेडियो श्री लंका के श्री डेनियेल्स साहब वाले कार्यक्रम की काफ़ी अच्छी रेकोर्डिंग पूणे के श्रोता श्री गिरीश मानकेश्वरजी ने की है जो मेरे द्वारा की गयी रेकोर्डिंग से बहेतर है मूझे इ-मेईल से भेजने वाले है तो वह प्राप्त होते ही इस मंच पर प्रस्तूत होगी ।
श्री एनोक डेनियेल्स साहब को विविध भारती के ‘आज के मेहमान’ में आमंत्रीत करने के लिये मेरे बार बार के अनुरोध को एक बार फ़िर दोहराता हूँ पर विश्वास है, कि यह एक बेकार की कवायत है और इसे सुना-अनसुना या पढ़ा-अनपढ़ा ही किया जायेगा ।
एक बात यह भी हुई है कि श्री युनूसजी रेडियोवाणी और फेसबूकमें तथा उनके अन्य ब्लोग्समें तथा अपने बेटे जादू के साथ इतने-इतने मशरूफ़ हो गये है कि फिल्मी धून के शोक़ीन होते हुए भी इस मंच पर की फिल्मी धूनों की पोस्ट पर कई वक्त से एक भी टिपणी दे नहीं पाये है, यहाँ तक, कि अपने चहीते साझ सेक्षोफोन की धूनो की पोस्ट पर भी और अपने चहीते कलाकार मनोहरीदा के जनम दिन पर भी ! इस बार देख़ते है क्या होता है ।
आज आकाशवाणी अहमदावाद का भी स्थापना दिन है, तो उनके केन्द्र निर्देषक श्री भगीरथभाई पंड्या साहब तथा पूरे कर्मचारी-गण को भी बधाई ।
पियुष महेता ।
सुरत ।
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एनोक डेनियेल्स,
ज्योति परमार,
पियुष महेता,
रेडियो श्रीलंका
Thursday, April 15, 2010
कल सुनिये रेडियो श्रीलंका हिन्दी सेवा सुबह 8 बजे
कल सुबह पुरानी फिल्मो के गीतो के पश्चात रेडियो श्रीलंका हिन्दी सेवा पर सुनिये एक महान वादक कलाकार के जनम दिन पर एक विषेष कार्यक्रम जो प्रस्तूत करेंगी श्रीमती ज्योति परमार, जिसमें उन गानों का जिक्र भी होगा या गानों के उस अंश को सुनवाया भी जा सकता है जिनमें इस कलाकारनें बजाया हो । वैसे उस कालाकारके बारेमें इस मंच पर मैं कई बार कुछ न कुछ प्रस्तूत कर चूका हूँ । क्या आप इनके बारेमें बता सकते है ? नहीं तो सुनिये एस एल बी सी या इसी मंच पर इन्तेझार किजीये ?
पियुष महेता ।
सुरत-395001
पियुष महेता ।
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PIYUSH MEHTA,
ज्योति परमार,
पियुष महेता,
रेडियो श्रीलंका
Monday, April 12, 2010
रेडियो श्रीलंका-हिन्दी सेवा की उद्दघोषिका श्री सुभाषिनीजी को जन्मदिन की बधाई
आदरणिय पाठकगण,
आज रेडियो श्री लंका की हिन्दी सेवाकी श्री लन्कन मुल की हिन्दी भाषाकी उद्दघोषिका श्री सुभाषिनी डि'सिल्वाजी की जनम तारीख़ है तो इस मोके पर उनको जनमदिन की बधाई और ढेर सारी शुभ: कामना । एक विषेष बात यह भी है कि वे भारतमें लख़नौमें दो साल रह कर भारतीय शास्त्रीय संगीतको एक हद तक शीख़ कर गयी है । भारतीय संगीत एक बहोत ही गहन विषय होने के कारण 'एक हद' शब्द-समूह को मैनें इस्तेमाल किया है ।
पियुष महेता ।
सुरत ।
आज रेडियो श्री लंका की हिन्दी सेवाकी श्री लन्कन मुल की हिन्दी भाषाकी उद्दघोषिका श्री सुभाषिनी डि'सिल्वाजी की जनम तारीख़ है तो इस मोके पर उनको जनमदिन की बधाई और ढेर सारी शुभ: कामना । एक विषेष बात यह भी है कि वे भारतमें लख़नौमें दो साल रह कर भारतीय शास्त्रीय संगीतको एक हद तक शीख़ कर गयी है । भारतीय संगीत एक बहोत ही गहन विषय होने के कारण 'एक हद' शब्द-समूह को मैनें इस्तेमाल किया है ।
पियुष महेता ।
सुरत ।
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पियुष महेता,
रेडियो श्रीलंका,
सुभाषिनी डि'सिल्वा
Wednesday, March 10, 2010
१० मार्च मेंडोलिन वादक महेन्द्र भावसार को जन्मदिन की बधाई
आदरणिय पाठक गण,
जैसे मैंनें कल की पोस्टमें वादा किया था, आज 10वी मार्च के दिन, एक और पोस्ट लिखनेका, उसको भारतिय फिल्मी दुनियाके एक महान मेन्डोलिन वादक श्री महेन्द्र भावसार का जन्म दिन है तो इस उपलक्षमें रेडियो श्री लंकाने मेरे संदेश के आधार पर मेरे नाम के साथ उनके लिये बधाई संदेश प्रस्तूत करते हुए उनकी बजाई हुई मेन्डोलिन पर फिल्म प्रिन्स (शंकर जयकिसन)के गीत मदहोश हुआ म्लवाली फिज़ा को प्रस्तूत किया । पर इनका नाम गलती से श्रीमती ज्योति परमारने महेन्द्र की जगह महेश्वर एक से अधिक बार बोल दिया । फिर उनकी सराहना इस लिये जरूरी बनी कि मेरे तूर्त ही कहने पर तूर्त ही क्षमा याचना के साथ सुधार संदेश भी प्रस्तूत कर दिया है । इस पुरी रेकोर्डिंग मेरे पास थी पर पूना के मेरे नौजवान पर फ़िर भी पुराने संगीत के शौख़ीन मित्र जो अपनी शादी के बाद अपनी श्रीमतीजी को ले कर श्रीलंका जा कर सजीव प्रसारणमें आमंत्रीत और प्रस्तूत हुए थे, वैसे श्री गिरीश मानकेश्वरजीने ई मेईल से भेजी जो मेरी रेकोर्डिंग से बहेतर होने के कारण गिरीशजी के प्रति घन्यवाद के साथ तथा श्री महेन्द्र भावसारजी को जन्मदिन कीशुभ:कामना और स्वस्थ दिर्धायु की भी कामना के साथ नीचे प्रस्तूत की है ।
पर उसमें वो सुधार शामिल नहीं था, इस लिये मेरी रेकोर्डिंगमें से काट-छाट करके नीचे प्रस्तूत की है जो गुणवत्ता में उत्तम नहीं है पर घ्यान से सुनने पर सुनाई देती है ।
पियुष महेता ।
नानपुरा, सुरत ।
दि. 10 मार्च, 2010.
जैसे मैंनें कल की पोस्टमें वादा किया था, आज 10वी मार्च के दिन, एक और पोस्ट लिखनेका, उसको भारतिय फिल्मी दुनियाके एक महान मेन्डोलिन वादक श्री महेन्द्र भावसार का जन्म दिन है तो इस उपलक्षमें रेडियो श्री लंकाने मेरे संदेश के आधार पर मेरे नाम के साथ उनके लिये बधाई संदेश प्रस्तूत करते हुए उनकी बजाई हुई मेन्डोलिन पर फिल्म प्रिन्स (शंकर जयकिसन)के गीत मदहोश हुआ म्लवाली फिज़ा को प्रस्तूत किया । पर इनका नाम गलती से श्रीमती ज्योति परमारने महेन्द्र की जगह महेश्वर एक से अधिक बार बोल दिया । फिर उनकी सराहना इस लिये जरूरी बनी कि मेरे तूर्त ही कहने पर तूर्त ही क्षमा याचना के साथ सुधार संदेश भी प्रस्तूत कर दिया है । इस पुरी रेकोर्डिंग मेरे पास थी पर पूना के मेरे नौजवान पर फ़िर भी पुराने संगीत के शौख़ीन मित्र जो अपनी शादी के बाद अपनी श्रीमतीजी को ले कर श्रीलंका जा कर सजीव प्रसारणमें आमंत्रीत और प्रस्तूत हुए थे, वैसे श्री गिरीश मानकेश्वरजीने ई मेईल से भेजी जो मेरी रेकोर्डिंग से बहेतर होने के कारण गिरीशजी के प्रति घन्यवाद के साथ तथा श्री महेन्द्र भावसारजी को जन्मदिन कीशुभ:कामना और स्वस्थ दिर्धायु की भी कामना के साथ नीचे प्रस्तूत की है ।
पर उसमें वो सुधार शामिल नहीं था, इस लिये मेरी रेकोर्डिंगमें से काट-छाट करके नीचे प्रस्तूत की है जो गुणवत्ता में उत्तम नहीं है पर घ्यान से सुनने पर सुनाई देती है ।
पियुष महेता ।
नानपुरा, सुरत ।
दि. 10 मार्च, 2010.
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PIYUSH MEHTA,
पियुष महेता,
महेन्द्र भावसार,
मेन्डोलिन,
रेडियो श्रीलंका
Friday, October 30, 2009
श्री अमीन सायानी साहब रेडियो श्री लंका से बोले करीब 20 साल बाद !
आदरणिय पाठकगण,
अभी कुछ समय पहेले रेडियो श्रीलंका की वहाँ की ही रहेनेवाली वैसी निवृत पर केझ्यूल उद्दघोषिका श्रीमती पद्दमिनी परेरा एक लम्बे समय भारतमें घूम कर फ़िर सिलोन पहोँच कर रेडियो पर प्रवृत्त हुई । वे जब भारतमें थी, उस दौरान अपनी सुविधा अनुसार कई श्रोतालोगो से मिली (जिसमें मैं शामिल नहीं हूँ ।) और रेडियो श्रोता संधकी सभाओमें भी गयी और रेडियो श्रीलंका से जूडे कई पूराने लोगो से मिली । उनमें श्री गोपाल शर्माजी तो स्वाभावीक ही है पर श्री अमीन सायानी साहब से भी मिली और उनकी व्यस्तता होते हुए भी आगंतूक को उनकी और से प्राप्त होते हुए बहूमान के स्वानुभवसे बहोत ही प्रभावीत हुई और उनके साथ की गयी बातचीत की ध्वनि-मूद्री अपने साथ ले गयी जो दि. 21 अगस्त, 2009 की बात थी । और परसों यानि दि. 29 अक्तूबर, 2009 के दिन सुबह 8 बजे अपने नियमीत कार्यक्रम को स्थगीत करके उसके स्थान पर सुनवाई । हालाकी मैं रेकोर्ड तो नहीं कर सका । पर 1989 में सिलोन रेडियो से सिबाका गीतमाला के साप्ताहीक प्रसारण की समाप्ती के बाद कुछ समय श्री मनोहर महाजन द्वारा प्रस्तूत एक अगरबत्ती बनानेवालो द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमके दौरान उस उत्पादन के विज्ञापन तक करीब एक साल तक सीमीत रही थी । बादमें उनके जन्मदिन पर कुछ साल पहेले एक प्रायोजित कार्यक्रमकी पूरानी रेकोर्डिंग से सिर्फ शुरूके उद्दबोधन को ही प्रसारित किया गया था । तो यह तो एक चमत्कार जैसा ही लगा । रेडियो श्रीलंका से जूडे कई लोगोमें से सिर्फ़ कुछ ही लोगोने उस संस्था को प्यार और आदर से याद रख़ा है, उनमें श्री गोपाल शर्माजी, श्री अमीन सायानी सहब और उनके अलावा शी रिपूसूदन कूमार औलावादी और श्री मनोहर महाजन प्रमूख़ है ।
पद्द्मिनीजी और अमीन सायानी साहब को धन्यवाद और बधाई ।
पियुष महेता ।
नानपूरा, सुरत ।
अभी कुछ समय पहेले रेडियो श्रीलंका की वहाँ की ही रहेनेवाली वैसी निवृत पर केझ्यूल उद्दघोषिका श्रीमती पद्दमिनी परेरा एक लम्बे समय भारतमें घूम कर फ़िर सिलोन पहोँच कर रेडियो पर प्रवृत्त हुई । वे जब भारतमें थी, उस दौरान अपनी सुविधा अनुसार कई श्रोतालोगो से मिली (जिसमें मैं शामिल नहीं हूँ ।) और रेडियो श्रोता संधकी सभाओमें भी गयी और रेडियो श्रीलंका से जूडे कई पूराने लोगो से मिली । उनमें श्री गोपाल शर्माजी तो स्वाभावीक ही है पर श्री अमीन सायानी साहब से भी मिली और उनकी व्यस्तता होते हुए भी आगंतूक को उनकी और से प्राप्त होते हुए बहूमान के स्वानुभवसे बहोत ही प्रभावीत हुई और उनके साथ की गयी बातचीत की ध्वनि-मूद्री अपने साथ ले गयी जो दि. 21 अगस्त, 2009 की बात थी । और परसों यानि दि. 29 अक्तूबर, 2009 के दिन सुबह 8 बजे अपने नियमीत कार्यक्रम को स्थगीत करके उसके स्थान पर सुनवाई । हालाकी मैं रेकोर्ड तो नहीं कर सका । पर 1989 में सिलोन रेडियो से सिबाका गीतमाला के साप्ताहीक प्रसारण की समाप्ती के बाद कुछ समय श्री मनोहर महाजन द्वारा प्रस्तूत एक अगरबत्ती बनानेवालो द्वारा प्रायोजित कार्यक्रमके दौरान उस उत्पादन के विज्ञापन तक करीब एक साल तक सीमीत रही थी । बादमें उनके जन्मदिन पर कुछ साल पहेले एक प्रायोजित कार्यक्रमकी पूरानी रेकोर्डिंग से सिर्फ शुरूके उद्दबोधन को ही प्रसारित किया गया था । तो यह तो एक चमत्कार जैसा ही लगा । रेडियो श्रीलंका से जूडे कई लोगोमें से सिर्फ़ कुछ ही लोगोने उस संस्था को प्यार और आदर से याद रख़ा है, उनमें श्री गोपाल शर्माजी, श्री अमीन सायानी सहब और उनके अलावा शी रिपूसूदन कूमार औलावादी और श्री मनोहर महाजन प्रमूख़ है ।
पद्द्मिनीजी और अमीन सायानी साहब को धन्यवाद और बधाई ।
पियुष महेता ।
नानपूरा, सुरत ।
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PIYUSH MEHTA-SURAT
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