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Wednesday, June 2, 2010

रेडियो श्री लंका और फिल्मी धूने

रेडियो श्री लंका हर मंगलवार अपने सुबह के 8 से 8.30 तक के प्रसारणमें पहली 15 मिनीटमें प्रायोजित क्रिश्च्यन कार्यक्रम प्रसारित करता है और बाकी बची 15 मिनीटमें पिछले के पिछले मंगलवार तक फिल्म संगीत प्रसारित करता आया था । तब मैनें उद्दघोषिका श्रीमती ज्योति परमारजीसे फोन पर सुचन किया था कि कितने सालों से उनका फिल्मी धूनों का नियमीत कार्यक्रम सुबह 6 बजे से 6.05 तक और गुरुवार तथा शुक्रवार सुबह 6.15 तक आता है वह शायद ही किसी दिन पकडमें आता है, जो हवामान के आधार पर है । तो वे लोग मंगल वार को सुबह 8.15 पर जो फिल्म संगीत करीब करीब 1965 के बाद के ही होते है और अन्य रेडियो और टी वी चेनल्स पर भी मिल पाते है तो उनकी जगह फिल्मी धूने जो एलपी के बजाय 45 आरपीएम और 78 आरपीएम रेकोर्ड्झ में और सिर्फ़ रेडियो श्रीलंकाकी लायब्रेरीमें कैद हुआ है तो उनको क्यों श्रोताओं तक पहोंचाया नहीं जाय ! तो उन्होंनें जवाब दिया कि श्रोतालोगो के रिस्पोंस और मांग के आधार पर ही यह किया जा सकता है । फ़िर मैंनें कहा कि श्रोता लोगो की यादोंमें अगर साझ और वादक कलाकारों के नाम गानों के शुरूके बोलों के साथ याद नहीं रहते और इसी कारण अपना प्रतिभाव मेरी तराह नहीं दे पाते तो इसका मतलब यह नहीं कि वे उनको नापसंद करते है । बादमें मैं जो भारतके श्रोता मेरी सुचना के आघार पर वादक कलाकारों के बारेमें जो भी बधाई या श्रद्धांजली के छोटे छोटे या पूरे कार्यक्रमों को सुनकर मेरा सम्पर्क करके प्रतिभाव देते आये थे उनसे फोन या ई-मे -ईल द्वारा सम्पर्क कर के मेरे सुचनको उन सब के द्वारा बार बार यही बात कहलवाई या लिख़वायी तो इस के नतीजे से बिते हुए कलसे सुबह 8.15 से फिल्मी धूनों का एक अतिरीक्त साप्ताहीक कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसमें कल (1) साझ क्लेवायोलीन पर स्व. कल्याणजी (आणंदजी ) वीरजी शाह की बजाई फिल्म चोरी चोरी के गीत आ जा सनम की घून (78 आरपीएम (2) हार्मोनियम पर श्री इश्वरीलाल नेपाली की बजाई फिल्म हमलोग की धून सुन सुन सुन बाजे पायल (78 आरपीएम (3) श्री एनोक डेनियेल्स की पियानो एकोर्डियन पर फिल्म वो कोन थी की धून नैना बरसे (4) और मास्टर (इब्राहीम) अजमेरी की फिल्म मोर्डन गर्ल की धून ये मौसम रंगीन शमा (78 आर पी एम से ) सुनवाई । इस लिये रेडियो श्री लंका बधाई के पात्र है ।
दूसरी और अभी 31 मई के पत्रावलीमें किसी श्रोता के फिल्म बरसातकी रात के 78 आरपीएम में फसे एक गाने को याद दिलवाया तब श्री कमल शर्माजीनें कहा की विविध भारती अकेला 78 आरपीएम बजाने वाला रेडियो चेनल है, जब की एसएलबीसी ज्यादातर 78 आरपीएम ही बजाता है । और विविध भारती के लिये जबकी फिल्म संगीत के बारेमें यह बात 78 आरपीएम वाली एक जगह सही है तब फिल्मी धूनों के सम्बंधमें यह बिलकूल गलत हो गई है जब से यानि 2002 से साझ और आवाझ कार्यक्रम बंध हुआ है तब से । एक बार मेरे ही पत्र के जवाबमें श्री महेन्द्र मोदी साहबने ऐसा बहाना बनाया था कि 78 और 45 आरपीएम रेकोर्डझ घीस गये है और बजाने लायक नहीं रहे है तो मूझे तबसे यह सवाल मनमें हो रहा है कि गानों के 78 आरपीएम रेकोर्डझ पूरे दिन के कार्यक्रममें बजते रहे है वे घीसने की सम्भवना ज्यादा है या दिन में सिर्फ 5 से 15 मिनीट की समयावधीमें ही स्थान पाने वाले इतने सारे फिल्मी धूनों के रेकोर्ड्झ घीस जाने की सम्भवनाएं ज़्यादा है ? पिघाली मई की 6 तारीख़ को प्रसारित श्री अशोक सोनावणे जी के साथ हल्लो फरमाईशमें इनमें से काफ़ी बात कहने का मोका मिला था और उनका तथा श्री महादेव जगदाले साहब और तेजश्री शेठी और श्री रमेश गोखलेजी का मैं आभारी हूँ , कि मेरी बातचीत को काफ़ी हद तक स्थान दिया । हाँ कुछ अंश कटे जरूर थे जो मूझे ख़ास लगते थे पर समय की पाबंदी के हिसाबसे मूझे काफ़ी कवरेज दिया गया था । वह रेकोर्डिंग अन्नपूर्णा जी नें शायद सुनी होगी । यह अपलॉडींग की समस्या के कारण अभी रख़ नहीं पाता हूँ ।
पियुष महेता ।
सुरत ।

2 comments:

OMANAND0HAM said...

kya purani film anuradha ka koi geet duet tha bol yad nahi aarahe hain, kya anuradha film ke gaano ke bare me kisi se vivran mil sakta hai. Bahut manmohak dhune thi, ab kahin bhi sunne me nahi aati.

डॉ. अजीत कुमार said...

aapne achchhi khichayi kii hai sabon ki..

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