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Tuesday, June 9, 2009

साथी फ़िल्म का प्यारा सा गीत

आज याद आ रहा है साथी फ़िल्म का लता जी का गाया एक गीत। यह फ़िल्म साठ के दशक के अंतिम वर्षों में रिलीज़ हुई थी। यह फ़िल्म और इसके गीत बहुत लोकप्रिय रहे और आज भी है।

इस फ़िल्म में नायक और नायिका की भूमिकाओं में है राजेन्द्र कुमार और वैजन्तीमाला और सहनायिका है सिम्मी ग्रेवाल। अक्सर नायक और नायिका के गीत ही लोकप्रिय होते है लेकिन आज मैं जिस गीत की चर्चा कर रही हूँ वह गीत सहनायिका सिम्मी ग्रेवाल और राजेन्द्र कुमार पर एक पार्टी में फ़िल्माया गया है जिसे पर्दे पर बहुत ही ख़ूबसूरती से गाया है सिम्मी ने।

मुझे तो इस फ़िल्म का यही गीत बहुत पसन्द है। यह गीत भी इस फ़िल्म के अन्य गीतों की तरह बहुत लोकप्रिय रहा और रेडियो के सभी केन्द्रों से बहुत सुनवाया जाता था फिर धीरे धीरे कम होता गया और अब तो बहुत समय से इसे नहीं सुना।

इस गीत के कुछ बोल मुझे याद नहीं आ रहे, जो याद है वो इस तरह है -

ये कौन आया रोशन हो गई महफ़िल जिसके नाम से
मेरे घर में जैसे सूरज निकला है शाम से
ये कौन आया

यादें है कुछ आई सी या किरणें लहराई सी
मन में सोए अरमानों ने ली है इक अँगड़ाई सी
अरमानों की मदिरा छलके अँखियों के जाम से
ये कौन आया

क्या कहिए इस आने को आया है तरसाने को
देखा उसने हँस हँस के हर अपने बेगाने को
लेकिन कितना बेपरवाह है मेरे ही सलाम से
ये कौन आया

… …
चुपके चुपके राधा कोई पूछे अपने श्याम से
ये कौन आया

पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

4 comments:

अल्पना वर्मा said...

यह हैं इस अधूरे गीत की बाकी पंक्तियाँ---

आहट पे हलकी हलकी छाती धड़के पायल की ,हर गोरी से नाम उस का लहरें पूछे आँचल की...
चुपके चुपके राधा कोई पूछे अपने श्याम से
ये कौन आया
---------

annapurna said...

शुक्रिया !

Rajendra said...

'साथी' फिल्म का उम्दा संगीत दिया था नौशाद ने. इस फिल्म के संगीत की खासियत यह थी कि नौशाद साहब ने इस फिल्म में सभी गीतों की धुनों में पूरी तरह पश्चिमी वाद्य यंत्रों का उपयोग किया. इसीलिए इस फिल्म के म्यूजिक का साउंड नौशाद साहब की अन्य फिल्मों की धुनों से बिलकुल अलग है.

Rajendra said...

'साथी' फिल्म का उम्दा संगीत दिया था नौशाद ने. इस फिल्म के संगीत की खासियत यह थी कि नौशाद साहब ने इस फिल्म में सभी गीतों की धुनों में पूरी तरह पश्चिमी वाद्य यंत्रों का उपयोग किया. इसीलिए इस फिल्म के म्यूजिक का साउंड नौशाद साहब की अन्य फिल्मों की धुनों से बिलकुल अलग है.

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