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Friday, June 5, 2009

साप्ताहिकी 4-6-09

सुबह 6 बजे समाचार के बाद चिंतन में स्वामी रामातीर्थ, महात्मा गाँधी, स्वामी विवेकानन्द, विदेशी साहित्यकार शेक्सपीयर के विचार बताए गए। वन्दनवार में हर दिन अच्छे भजन सुनवाए गए। बहुत दिन बाद सुना पिनाज़ मसाणी की आवाज़ में कन्हैय्या का बालपन। बुधवार को पुराने भजन सुनवाए गए जैसे -

स्वीकारो मेरे परणाम

मैं तो प्रेम दीवानी

कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा, अच्छे गीत सुनवाए गए जैसे -

मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा

7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में लोकप्रिय गीत भी शामिल रहे जैसे सीआईडी फ़िल्म का शमशाद बेगम का गाया गीत - कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना। ऐसे गीत भी सुनवाए गए जो बहुत ही कम सुनवाए जाते है जैसे फ़िल्म मिर्ज़ा ग़ालिब का शमशाद बेगम का गाया गीत।

7:30 बजे संगीत सरिता में श्रृंखला जारी रही - सरोद का सुर संसार जिसे प्रस्तुत कर रहे है ख़्यात सरोद वादक पंडित बृजनारायण। इस सप्ताह सरोद वाद्य पर और अधिक जानकारी दी गई। बताया गया कि यह बहुत भारी वाद्य है पर इसका अर्थ यह नहीं कि इस पर केवल गंभीर राग ही अच्छे लगते है। इसके बनारस घराने की दो विशेष शैलियों पर चर्चा की गई। हर कड़ी में सरोद पर विभिन्न राग सुनवाए गए। पंडित जी की शिक्षा के बारे में भी जानकारी दी गई कि घरेलु वातावरण संगीत का रहा इसीलिए आरंभिक शिक्षा घर पर ही हुई और पहले गुरू रहे पिताश्री पंडित रामनारायण जो सारंगी वादक है। इस तरह सारंगी वादक से शिक्षा लेकर सरोद वादक बनने के अनुभव बताए कि सारंगी ऐसा वाद्य है जिस पर सभी तरह का संगीत बजाया जा सकता है। शिक्षा में गुरू यानि पिता से सभी कलाकारों के बारे में जाना। पहला कार्यक्रम 12 साल की उमर में किया। इस श्रंख़ला में यह एक अच्छी बात रही कि फ़िल्मी गीत नहीं सुनवाए गए।

7:45 को त्रिवेणी में इज्ज़त फ़िल्म का यह गीत मैं सुनते-सुनते थक गई -

क्या मिलिए ऐसे लोगों से

किसी न किसी समस्या पर चर्चा में किसी न किसी संदर्भ में यह गीत बज ही उठता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि गीत बहुत अच्छा है और विभिन्न संदर्भों में सुनना भी अच्छा लगता है पर किसी भी बात की अति अच्छी नहीं लगती।

सप्ताह भर जल की समस्या की, ज़िन्दगी की बातें हुई और गाने भी नए पुराने उचित सुनवाए गए। मंगलवार को विषय अच्छा लिया गया - अफ़वाह पर आलेख ठीक ही था लेकिन गीत जम नहीं रहे थे, शायद इस विषय पर उचित गीत ढूँढना कठिन हो, ऐसे में इस विषय को सीधा न लेकर परोक्ष रूप से लिया जा सकता था।

दोपहर 12 बजे एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने कार्यक्रम में शुक्रवार को चीनी कम, गुरू, युवा जैसी नई फ़िल्में लेकर आए अशोक जी। शनिवार को युवा, राज़, काँटे, सिंग इज़ किंग जैसी नई फ़िल्में लेकर आई निम्मी (मिश्रा) जी। सोमवार को बस यूँ ही, यहाँ, रोशनी जैसी नई फ़िल्में लेकर आईं शहनाज़ (अख़्तरी) जी। समझ में नहीं आया जिन फ़िल्मों के नाम भी बहुत नए और कम सुने गए है उसके लिए इतने संदेश आए, ख़ैर… मंगलवार को धूल का फूल, काश्मीर की कलि, आदमी जैसी पुरानी फ़िल्मे रही। बुधवार को मंजू (द्विवेदी) जी लाईं कन्यादान, बेटी-बेटे, साथी, कारवाँ जैसी पुरानी लोकप्रिय फ़िल्में। गुरूवार को कमल (शर्मा) जी लाए लोकप्रिय फ़िल्में - गुमराह, काली टोपी लाल रूमाल, दुल्हन एक रात की, झुमरू।

1:00 बजे शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम अनुरंजनि में शुक्रवार को आनन्दो चटर्जी का तबला वादन और विमल मुखर्जी का सितार वादन सुनवाया गया। शनिवार को उस्ताद अब्दुल करीम खाँ का गायन सुनवाया गया। सोमवार को उस्ताद बिस्मिला खाँ का शहनाई वादन सुनवाया गया। मंगलवार को बृजभूषण काबरा का गिटार वादन सुनवाया गया। बुधवार को शुभा मुदगल का गायन सुनवाया गया। गुरूवार को पंडित जसराज का गायन सुनवाया गया।

1:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम में श्रोताओं ने मिले-जुले गीतों के लिए फ़रमाइश की जैसे साठ के दशक की फ़िल्म अनुपमा का लताजी का गाया यह गीत जो मुझे भी बहुत है -

कुछ दिल ने कहा
कुछ भी नहीं
कुछ ऐसी भी बातें होती है

नई फ़िल्म अजनबी का यह गीत -

मेरी ज़िन्दगी में अजनबी का इंतेज़ार है
मैं क्या करूँ अजनबी से मुझे प्यार है

बीच के समय की फ़िल्म आक्रमण के किशोर कुमार और लताजी के गाए इस गीत की फ़रमाइश बहुत दिन बाद की श्रोताओं ने -

ये मौसम आया है कितने सालों में
आजा के खो जाए ख़्वाबों ख़्यालों में

3 बजे सखि सहेली कार्यक्रम में शुक्रवार को हैलो सहेली कार्यक्रम में फोन पर सखियों से बातचीत की शहनाज़ (अख़्तरी) जी ने। कुछ छात्राओं ने बात की। अपनी पढाई के बारे में बताया। अपने सिलाई-कढाई के काम के बारे में बताया। एक सखि ने कश्मीर से फोन किया और वहाँ के दर्शनीय स्थलों के नाम बताए और जानकारी नहीं दी। भोजपुर में शीशम के वृक्ष बहुत है, यह जानकारी भी मिली। एक फोनकाल बहुत प्यारा लगा, एक छोटी सी सखि प्रीति ने मध्यप्रदेश से बात की जो नौवीं कक्षा में पढती है। हल्की-फुल्की बात की, घरवालों के नाम बताए और बताया कि खेती की जाती है, पूछने पर कि खेती में क्या हुआ कहने लगी - अजी कुछ भी नहीं हुआ जी ! गाना पसन्द किया अस्सी के दशक की लोकप्रिय फ़िल्म नदिया के पार का -

कौन दिशा मे लेके चला रे बटुरिया
अरे ठहर ठहर ये सुहानी सी डगर
ज़रा देखन दे

सोमवार को कच्चे आम का पना बनाना बताया गया। मंगलवार को करिअर संबंधी बातें बताई जाती है। इस बार बताया गया कि करिअर का चुनाव कैसे करें। बच्चों को किसी विशेष करिअर के लिए दबाव न डाले। सलाहकार से कौंसिलर से करिअर के लिए सलाह भी ली जा सकती है। बुधवार को त्वचा को मुलायम बनाने के घरेलु उपाय बताए गए। गुरूवार को सफल महिलाओं की गाथा बताई जाती है। इस बार चित्रकार अमृता शेरगिल के बारे में बताया गया। सखियों की पसन्द पर सप्ताह भर नए पुराने और बीच के समय के अच्छे गीत सुनवाए गए जैसे पुरानी फ़िल्म सट्टा बाज़ार का गीत -

तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे
मोहब्बत की राह में मिलके चले थे

नई फ़िल्म युवराज का यह गीत

तू मुस्कुरा जहाँ भी है तू मुस्कुरा
तू धूप की तरह बदन को छू ज़रा

बीच के समय की फ़िल्म जवानी दीवानी का किशोर-आशा का गाया यह लोकप्रिय रोमांटिक गीत -

जानेजाँ ढूँढता फिर रहा धूप में रात दिन मैं यहाँ से वहाँ
मुझको आवाज़ दो छुप गए हो सनम
तुम कहाँ मैं यहाँ

शनिवार और रविवार को सदाबहार नग़में कार्यक्रम में सदाबहार गीत सुनवाए गए जैसे एक गाँव की कहानी फ़िल्म का तलत महमूद का यह गीत -

रात ने क्या क्या ख़्वाब दिखाए

3:30 बजे शनिवार को नाट्य तरंग में सुनवाया गया नाटक - महानगर जिसके मूल लेखक है नरेन्द्रनाथ मित्र, इस बंगला नाटक का अनुवाद और रेडियो रूपान्तर किया है राधाकृष्ण प्रसाद ने और निर्देशक है सत्येन्द्र शरत। महानगर में संघर्ष करते मध्यवर्गीय परिवार की कहानी जिसमें बहू को लगता है आर्थिक तंगी के लिए उसे काम करना ज़रूरी है पर परिवार को अपनी परम्पराओं के कारण यह नहीं भा रहा। हमें तो यह सुनते-सुनते राखी, परीक्षित साहनी और विश्वजीत की फ़िल्म हमक़दम याद आने लगी।

पिटारा में शाम 4 बजे रविवार को यूथ एक्सप्रेस की शुरूवात बहुत अच्छी रही, जो युवा परीक्षा में सफल नहीं हुए उन्हें कारणों को तलाशने की सलाह दी गई। किताबों की दुनिया स्तम्भ में इस बार कहानी सुनवाई गई। जवाहरलाल नेहरू की पुण्य तिथि और तम्बाकू निषेध दिवस पर जानकारी दी गई। कुतुबमीनार के बारे में बताया गया। विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश की सूचना भी दी गई।

शुक्रवार को प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम बाईस्कोप की बातें जिसमें कारवाँ फ़िल्म की बातें हुई। इस बार भी लोकेन्द्र शर्मा ने निर्माता निर्देशक की पिछली फ़िल्मों की भी जानकारी दी और इस फ़िल्म के बारे में भी विस्तार से बताया।

सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में त्वचा के रोंगों पर डा कल्पना सारंगी से रेणु (बंसल) जी की बातचीत हुई। अच्छी जानकारी मिली। बताया गया कि किसी भी तरह से ख़राबी त्वचा पर दिखाई दे तो तुरन्त डाक्टर से संपर्क करें, यहाँ मैं एक बात बताना चाहूँगी कि अक्सर महिलाएँ ख़ासकर लड़कियाँ कहती है कि मस्से जैसे ही त्वचा पर दिखाई दे तो खींच कर निकाल सकते है, अच्छा किया कि डाक्टर ने स्पष्ट शब्दों में इसकी मनाही की। बुधवार को आज के मेहमान कार्यक्रम में अभिनेत्री रवीना टंडन से बातचीत सुनवाई गई। शनिवार, मंगलवार और गुरूवार को हैलो फ़रमाइश में श्रोताओं से फोन पर बातचीत हुई। श्रोताओं की पसन्द के नए पुराने गीत सुनवाए गए।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद सप्ताह भर फ़िल्मी हंगामा कार्यक्रम में नई फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

7 बजे जयमाला में शनिवार को युवा निर्माता निर्देशक हैरी बवेजा ने प्रस्तुत किया विशेष जयमाला। खुद की फ़िल्मों के बारे में भी बताया, गीत सुनवाए। अच्छा लगा कि वो हर गीत को कहीं न कहीं से फ़ौजी भाइयों के जीवन से जोड़ने की कोशिश कर रहे थे। सोमवार से पत्रों और एस एम एस द्वारा भेजी गई फ़ौजी भाइयों की फ़रमाइश पर गीत सुनवाए गए। गाने नए और पुराने दोनों ही सुनवाए जा रहे है।

7:45 पर शुक्रवार को कच्छी लोकगीत सुना, बुन्देलखण्डी लोकगीत अच्छा लगा -

जो मैं होती राजा बन की हिरणिया

शनिवार और सोमवार को पत्रावली में निम्मी (मिश्रा) जी और महेन्द्र मोदी जी आए। श्रोताओं ने सेहतनामा, इनसे मिलिए कार्यक्रम की तारीफ़ थी, कुछ कार्यक्रम सुनवाने का अनुरोध किया। एक पत्र आया कि भूले बिसरे गीत कार्यक्रम में लता मंगेशकर के गीत अधिक बजते है और अन्य पुरानी गायिकाओं के कम सुनवाए जाते है जिसके जवाब में कहा गया कि दूसरी गायिकाओं के गीत कम है और लता जी के ज्यादा। इस जवाब से निम्मी जी तो सहमत हो गई पर मैं सहमत नहीं हूँ। अब भला किसी के गीत एक लाख है तो सुबह से शाम तक हर तरह के कार्यक्रम में उन्हीं के गीत सुनते रहेंगें ? सबसे बड़ी बात यह है कि इस कार्यक्रम में जिस दौर के गीत सुनवाए जाते है लताजी उस दौर की कम चर्चित, कम लोकप्रिय और वास्तव में नई गायिका है, दूसरी बात गायिकाओं के अलावा कई गायकों के भी गीत है जो लम्बे समय से नहीं सुनवाए गए जैसे सी एच आत्मा, पहाड़ी सान्याल, पंकज मलिक, सुरेन्द्र, श्याम, यहाँ तक कि तलत महमूद के गीत भी कम ही सुनवाए जाते है। अगर गीतों का चुनाव करते समय सिर्फ़ गायक कलाकारों पर ही ध्यान दिया जाए और भूली बिसरी आवाज़ों को सुनवाने का प्रयास किया जाए तो प्रस्तुति सही और सार्थक होगी।

मंगलवार को सुनवाई गई फ़िल्मी क़व्वालियाँ। रविवार और गुरूवार को राग-अनुराग में विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुने जैसे राग भीमपलासी पर आधारित कोहरा फ़िल्म का लताजी का गाया गीत।

8 बजे हवामहल में इस सप्ताह सुमन कुमार, एम एस बेग, विनोद रस्तोगी, कमल दत्त जैसे चर्चित और नए निर्देशकों की नाटिकाएँ सुनवाई गई।

9 बजे गुलदस्ता में गीत और ग़ज़लें सुनवाई गई।

9:30 बजे एक ही फ़िल्म से कार्यक्रम में मुग़ले आज़म, अक्सर, तराना, ये वादा रहा, दुलारी जैसी नई पुरानी लोकप्रिय फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

रविवार को उजाले उनकी यादों के कार्यक्रम में निर्माता निर्देशक शक्ति सामन्त से कमल (शर्मा) जी की बातचीत की अगली कड़ी प्रसारित हुई जिसमें फ़िल्म आराधना की बातें बताई गई। 10 बजे छाया गीत में शुक्रवार को कमल जी ने रात के अच्छे गीत सुनवाए जिसमें से यह गीत बहुत अच्छा लगा जो मुझे भी बहुत पसन्द है -

नैना बरसे रिमझिम रिमझिम

सभी गीत ऐसे थे जिन्हें रात में सुनना बहुत अच्छा लग रहा था।

10:30 बजे से श्रोताओं की फ़रमाइश पर गाने सुनवाए गए जिनमें बीच के समय की फ़िल्मों के गीतों की अधिक फ़रमाइश थी। 11 बजे समाचार के बाद प्रसारण समाप्त होता रहा।

3 comments:

सागर नाहर said...

चीटींग-चीटींग...
आज फिर विविध भारती ने चीटींग की, संगीत सरिता में कल सुनाई हुई ( पांचवी) कड़ी फिर से सुना दी।
:)
मजेदार साप्ताहिकी, पूरा का पूरा रिकॉर्ड है यहां तो।
:)

annapurna said...

सागर जी, आपकी पकड़ भी संगीत सरिता पर कुछ कम नहीं है।

कैसा रहेगा अगर संगीत सरिता की साप्ताहिकी इस सप्ताह से आप नियमित लिखे…

मैं इस कार्यक्रम को छोड़कर बाकी सब पर लिख लूँगी, आप शुक्रवार छोड़कर किसी भी दिन लिख लीजिए। इस तरह पाठको को भी मज़ा आएगा।

yunus said...

अच्‍छा सुझाव है ।
क्‍या कहते हैं सागर भाई

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