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Tuesday, July 28, 2009

रफ़ी साहब की आवाज़ में फ़लसफ़ा प्यार का

31 जुलाई को एक बार फिर रफ़ी साहब को याद किया जाएगा। वैसे रफ़ी साहब के लिए याद करना, भूलना जैसे शब्द बेमानी है। रोज़ कहीं न कहीं से उनका गाया कोई न कोई गीत सुनाई पड़ता ही है। कुछ गीत है जो कई-कई बार सुनवाए जाते है पर अब भी कुछ गीत ऐसे है बहुत दिन से नहीं सुने गए। आज एक ऐसा ही गीत याद आ रहा है।

फ़िल्म का नाम है - दुनिया। यह फ़िल्म 1968 के आसपास रिलीज़ हुई थी। इसमें मुख्य भूमिकाओं मे है देव आनन्द और वैजन्तीमाला। इस फ़िल्म में रफ़ी साहब का गाया यह गीत है जो कभी रेडियो के विभिन्न केन्द्रों से बहुत सुनवाया जाता था। गीत के जो बोल मुझे याद आ रहे है वो इस तरह है -

फ़लसफ़ा प्यार का तुम क्या जानो
तुमने कभी प्यार न किया
तुमने इंतेज़ार न किया

प्यार शीरीं ने किया प्यार ही लैला ने किया
प्यार राधा ने किया प्यार ही मीरा ने किया

प्यार हर रस्म ------------

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प्यार वो शय है -------
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पता नहीं विविध भारती की पोटली से कब बाहर आएगा यह गीत…

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