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Friday, July 31, 2009

साप्ताहिकी 30-7-09

सुबह 6 बजे समाचार के बाद चिंतन में स्वामी रामतीर्थ, स्वरूपानन्द जैसे महर्षियों और महात्मा गांधी जैसे मनीषियों तथा कालिदास, प्रेमचन्द जैसे साहित्यकारों के कथन बताए गए। वन्दनवार में नए पुराने अच्छे भक्ति गीत सुनवाए गए जैसे -

कभी राम बनके कभी श्याम बनके
चले आना प्रभुजी चले आना

कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा। अच्छे देशगान सुनवाए गए जैसे -

बदला युग है बदली इक धारा है
आने वाला संसार हमारा है


पता नहीं इस गीत को किसने लिखा, किसने स्वरबद्ध किया और किस-किस ने गाया। विवरण तो कभी बताया ही नहीं जाता है।


7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में अधिकतर ऐसे गीत सुनवाए गए जो बहुत ही कम सुनवाए जाते है जैसे आँखें फ़िल्म का मुकेश और शमशाद बेगम का गाया गीत जिसके बोल कुछ इस तरह है -

मुझसे नैना मिलाने से पहले बी ए पास कर ले
मुझसे प्रीत लगाने से पहले बी ए पास कर ले


कुछ भूली बिसरी आवाज़े भी सुनी जैसे दुर्रानी साहब की कुछ भूली-बिसरी फ़िल्मों के गीत भी सुने जैसे फ़िल्म शीशम। मंगलवार को गीतकार राजा मेहेंदी अली खाँ को याद किया गया और उनके चुने हुए कुछ कम सुने और कुछ अक्सर सुने जाने वाले गीत सुनवाए गए जैसे अनपढ फ़िल्म की लोकप्रिय ग़ज़ल लताजी की आवाज़ में -


आपकी नज़रों ने समझा प्यार के क़ाबिल मुझे
दिल की ऐ धड़कन ठहर जा मिल गई मंज़िल मुझे


7:30 बजे संगीत सरिता में श्रृंखला रंजनि रूद्र वीणा समाप्त हुई जिसे प्रस्तुत कर रहे थे उस्ताद असअत अली खाँ जिनसे बातचीत कर रही थी निम्मी (मिश्रा) जी। रूद्र वीणा के तारों से निकलने वाले तीव्र, मध्यम और मन्द सुरों को बजा कर समझाया गया। रूद्र वीणा पर विभिन्न राग सुनवाए गए जैसे राग श्री, मेघ मल्हार, मियाँ की मल्हार। मृदंगम पर संगत कर रहे थे राधेश्याम शर्मा। अंतिम कड़ी से एक कड़वा सच सामने आया कि बहुत से वाद्यों से नई पीढी की पहचान नहीं हो पा रही है क्योंकि न तो सुनने के लिए रिकार्ड मिल रहे है और न ही संगीत की शिक्षा में इन्हें उचित स्थान मिल रहा है।
काँचन जी की एक और श्रृंखला आरंभ हुई - मदनमोहन के संगीत में शास्त्रीय संगीत। कुछ नई तरह की है यह श्रृंखला। इसे प्रस्तुत कर रही है डा अलका देव। मदन मोहन जी के चुने हुए गीतों को प्रस्तुत किया जा रहा है। यह भी बताया कि मदन मोहन जी का संगीत अनिल विश्वास और खेमचन्द प्रकाश जी से बहुत प्रभावित रहा है। यह चुने हुए गीत किन रागों पर आधारित है यह बताते हुए इन रागों की जानकारी भी दी जा रही है जैसे राग गौड़ सारंग। राग अलहया बिलावल पर आधारित यह गीत सुनवाया गया -


चंदा जा चंदा जा रे जा

शुरूवात में ही एक बहुत सही बात बताई अलका जी ने कि फ़िल्मों में 1950 से 1975 तक 25 सालों का फ़िल्मी संगीत ही बहुत बढिया है।


7:45 को त्रिवेणी में शुक्रवार को जीवन की बातें करते हुए गीत सुनवाया गया -

ये जीवन है इस जीवन का
यही है यही है यही है रंग रूप

यह गीत शायद पिया का घर फ़िल्म का है पर अंत में जब फ़िल्मों के नाम बताए गए तब यह नाम शामिल नहीं था। रविवार की प्रस्तुति अच्छी रही, बताया गया कि खूबसूरत दिखने की तमन्ना में डाइटिंग कर बहुत दुबले हो कर शारीरिक सौन्दर्य को कम ही कर रहे है। इसके अलावा घर बनाने की बातें अच्छी लगी। गुरूवार को पानी की मेघ की बातें हुई गाने भी अच्छे लगे पर आलेख सुन कर लगा कि यह गर्मियों के मौसम के लिए तैयार किया गया था, इसीसे कार्यक्रम अच्छा होते हुए भी कुछ अटपटा लगा।


दोपहर 12 बजे एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने कार्यक्रम में शनिवार को ज़ख़्म, सरदारी बेगम, वो लम्हे, चलते-चलते जैसी कुछ ही समय पहले की फिल्मे रही। सोमवार को त्रिशूल, अभिनेत्री जैसी सत्तर अस्सी के दशक की फ़िल्मों के गीतों के लिए भी श्रोताओं के संदेश मिले। मंगलवार को ज्वैल थीफ़, सीता और गीता जैसी लोकप्रिय फिल्मे रही। बुधवार को ओम शान्ति ओम जैसी नई फिल्मे रही। गुरूवार की फिल्मे रही मधुमती, गंगा जमना, संघर्ष जैसी सदाबहार फ़िल्में। इस तरह इस कार्यक्रम में पुरानी, बहुत पुरानी और नई यानि लगभग सभी समय की फ़िल्मों के लोकप्रिय गीत सुनने को मिलते है और हमारे जैसे श्रोताओं को बिना संदेश भेजे ही पसंदीदा गीत सुनने को मिल जाते है।

1:00 बजे शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम अनुरंजनि में शनिवार को पंडित रोनू मजूमदार का बाँसुरी वादन सुनवाया गया। सोमवार को निखिल बैनर्जी का सितार वादन सुनवाया गया। मंगलवार को पंडित विनायक राव पटवर्धन का गायन सुनवाया गया। बुधवार को पंडित देवेन्द्र मौलेश्वर का बाँसुरी वादन सुनवाया गया। गुरूवार को उस्ताद हफ़ीज़ खां का गायन और रघुनाथ सेठ का बाँसुरी वादन सुनवाया गया।


1:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम में श्रोताओं की फ़रमाइश पर मिले-जुले गीत सुनवाए गए जैसे अस्सी के दशक की फिल्म नमक हलाल का गीत - जवानी जानेमन

नई फ़िल्म दहक का यह गीत -

सावन बरसे तरसे दिल क्यों न निकले घर से
बरखा में भी दिल प्यासा है ये प्यार नहीं तो क्या है


पुरानी फ़िल्म ज़िद्दी का गीत -


ये मेरी ज़िन्दगी एक पागल हवा
आज इधर कल उधर


3 बजे सखि सहेली कार्यक्रम में सोमवार को बारिश के मौसम के लिए उपयुक्त पनीर के पकौड़े बनाना बताया गया। मंगलवार को लेखाकार यानि एकाउंटेसी में सर्टिफ़िकेट कोर्स कर करिअर बनाने की जनकारी दी गई। बुधवार को सौन्दर्य विशेषज्ञ रीता भारद्वाज से निम्मी (मिश्रा) जी की बातचीत की अगली कड़ी सुनवाई गई जिसमें विभिन्न अवसरों पर मेकअप करने का तरीका बताया और यह सुनना अच्छा लगा कि हमेशा मेकअप करना ज़रूरी नहीं है, बिना मेकअप के सादगी भी अच्छी लगती है। विभिन्न रंगत वालों को कैसे कपड़े पहनने चाहिए यह भी बताया गया। रीता जी ने बातें तो बहुत अच्छी बताई पर बताई बहुत तेज़ी से पूरे 100 की स्पीड से… गुरूवार को पूरी उम्मीद थी कि बीते समय की जानी मानी अभिनेत्री लीला नायडू को याद किया जाएगा और पहला गीत अनुराधा फ़िल्म से सुनवाया जाएगा, वैसे उनकी एक और बहुचर्चित फ़िल्म है - ये रास्ते है प्यार के। मुद्दा ये कि एक बेहद ख़ूबसूरत और बेहतरीन अभिनेत्री हमारे बीच से उठ गई और सखि-सहेली जैसे कार्यक्रम में उन्हें याद तक नहीं किया जबकि रफ़ी साहब को बाकायदा याद किया गया और कार्यक्रम उन्हें समर्पित किया गया। यहाँ तक कि विशिष्ट व्यक्तित्व राजमाता गायत्री देवी को भी स्मरण नहीं किया गया जबकि गुरूवार का दिन होता है सफल महिलाओं के बारे में बताने का। वैसे रफ़ी साहब पर कार्यक्रम अच्छा रहा, गीत भी अच्छे चुने गए। समझ में नहीं आ रहा कि गुरूवार के इस प्रसारण पर कमलेश (पाठक) जी को बधाई दे या नाराज़गी जताए।

सखियों की पसन्द पर सप्ताह भर नए पुराने अच्छे गीत सुनवाए गए जैसे श्री 420 का गीत -

रामय्या वस्तावय्या रामय्या वस्तावय्या
मैनें दिल तुझको दिया


कुछ पुरानी फिल्म ज़ख़्मी का यह गीत -


जलता है जिया मेरा भीगी भीगी रातों में
आजा गोरी चोरी-चोरी अब तो रहा नहीं जाए रे


नई फ़िल्म ओंकारा का गीत सुनवाया गया - नैना ठग लेंगे


शनिवार और रविवार को सदाबहार नग़में कार्यक्रम में सदाबहार गीत सुनवाए गए जैसे चाइना टाउन का रफ़ी साहब का गाया यह गीत -

बार-बार देखो हज़ार बार देखो
ये देखने की चीज़ है …


3:30 बजे नाट्य तरंग में सामाजिक नाटक सुनवाए गए। शनिवार को सुना नाटक मंगल दीप जिसकी लेखिका है वीणा शर्मा और निर्देशक है जयदेव शर्मा कमल। यह लखनऊ केन्द्र की प्रस्तुति थी। रविवार को अनूप सेठी द्वारा निर्देशित नाटक सुनवाया गया।


पिटारा में शाम 4 बजे रविवार को यूथ एक्सप्रेस में शास्त्रीय संगीतज्ञ गंगूबाई हंगल को श्रृद्धान्जलि दी गई। रफ़ी साहब को भी उनकी पुण्य तिथि पर याद किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा 22 जुलाई का पूर्ण सूर्यग्रहण और चन्द्रमा पर पहुँचने के चालीस वर्षों के अवसर पर खगोल शास्त्र से महत्वपूर्ण जानकारी। इसके अलावा हमेशा की तरह विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश की सूचना भी दी गई।


सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में कमर के दर्द जैसी आम बीमारी के संबंध में डा राजन बेलगाँवकर जी से राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी की ख़ास बातचीत सुनवाई गई। विस्तार से अच्छी जानकारी दी गई कि कई बार पीठ के दर्द को कमर का दर्द समझ लिया जाता है। ऐसी ही कई छोटी-छोटी ग़लतफ़हमियाँ है जिससे ठीक से हम इलाज नहीं करवा पाते है। ऐसे ही कार्यक्रमों से इस तरह की बातें स्पष्ट होती है। बुधवार को आज के मेहमान कार्यक्रम में अभिनेता प्रेम चोपड़ा से बातचीत की पहली कड़ी प्रसारित हुई. अभिनय क्षेत्र की यात्रा का आरंभ विस्तार से बताया कि कैसे कालेज के दिनों से यह यात्रा शुरू हुई। शनिवार, मंगलवार और गुरूवार को हैलो फ़रमाइश में श्रोताओं से फोन पर बातचीत हुई। श्रोताओं की पसन्द के नए पुराने गीत सुनवाए गए।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद सप्ताह भर फ़िल्मी हंगामा कार्यक्रम में फायर क्लब जैसी नई फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।


7 बजे जयमाला में शनिवार को विशेष जयमाला प्रस्तुत किया गायक अभिजीत ने। खुद के बारे में भी बताया और साथी कलाकारों के बारे में भी और लोकप्रिय गीत सुनवाए। सोमवार से एस एम एस द्वारा भेजी गई फ़ौजी भाइयों की फ़रमाइश पर गीत सुनवाए गए। गाने नए और पुराने दोनों ही सुनवाए जा रहे है जैसे नई फ़िल्म बंटी और बबली और पुरानी फ़िल्म दोस्ती का यह गीत -

जाने वालों ज़रा मुड़ के देखो इधर

नए गानों के लिए कुछ अधिक ही संदेश आ रहे है।


7:45 पर शुक्रवार को लोकसंगीत कार्यक्रम में इस बार ख़ासी और डोगरी लोकगीत सुनवाए गए। शनिवार और सोमवार को पत्रावली में निम्मी (मिश्रा) जी और कमल (शर्मा) जी आए। कुछ कार्यक्रमों जैसे गाने सुहाने के बंद होने की शिकायत की. कुछ पत्र ठीक से सुनाई नही देने की तकनीकी शिकायत के भी थे. कोई विशेष पत्र नहीं रहा पर श्रोताओं के पत्रों के उत्तर में एक विशेष जानकारी दी गई कि 31 जुलाई को रफ़ी साहब की याद में कुछ ख़ास होने वाला है। मंगलवार को सुनवाई गई फ़िल्मी क़व्वालियाँ जिसमें यह क़व्वाली सुन कर मज़ा आ गया -

शरमा के ये क्यूँ सब पर्दा नशीं आँचल को सँवारा करते है
कुछ ऐसे नज़र वाले भी है जो छुप-छुप के नज़ारा करते है


बुधवार को इनसे मिलिए कार्यक्रम में संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान के परियोजना अधिकरी डा जगदीश जी से बातचीत सुनवाई गई। इस बार बातचीत कुछ विषैली प्रजातियों पर हुई। राग-अनुराग में रविवार और गुरूवार को विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुनवाए। गुरूवrर को एक ही राग दरबारी पर आधारित गीत सुनवाए गए जैसे मुकेश का गाया आवारा फ़िल्म का यह गीत -

हम तुझसे मुहब्बत करके सनम रोते भी रहे हँसते भी रहे


8 बजे हवामहल में नाटिकाएँ सुनी जिनमें से अच्छी लगी झलकी - दरवाजे खुल गए

9 बजे गुलदस्ता में गजले और गीत सुनवाए गए।

9:30 बजे एक ही फ़िल्म से कार्यक्रम में आन मिलो सजना, राँकी, दो रास्ते जैसी लोकप्रिय फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।


रविवार को उजाले उनकी यादों के कार्यक्रम में अभिनेता शम्मी कपूर से बातचीत की अगली कडी प्रसारित हुई। संगीतकार रोशन को याद किया गया, ख़ासकर उनके क़व्वाली तैयार करने के अंदाज़ को।


10 बजे छाया गीत में सप्ताह भर लोकप्रिय गीत सुनने को मिले लेकिन विषय और प्रस्तुति में कुछ नयापन नहीं लगा। निम्मी जी पुराने गीत ही सुनवाती रही जैसे मुबारक बेगम की आवाज़ में - बेमुरव्वत बेवफ़ा… वाकई छाया गीत श्रोताओं के लिए ऐसा ही होता जा रहा है।

10:30 बजे से श्रोताओं की फ़रमाइश पर लोकप्रिय गीत सुनवाए गए। 11 बजे समाचार के बाद प्रसारण समाप्त होता रहा।

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