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Friday, July 10, 2009

साप्ताहिकी 9-7-09

सुबह 6 बजे समाचार के बाद चिंतन में उपनिषदो से, गुरू ग्रन्थ साहब से और स्वामी स्वरूपानंद, स्वामी विवेकानंद जैसे महर्षियों के कथन बताए गए। वन्दनवार में नए पुराने अच्छे भक्ति गीत सुनवाए गए जैसे -

भजगोविन्दम भजगोविन्दम

कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा।

7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में कुछ अच्छे गीत बहुत दिन बाद सुनवाए गए जैसे -

देखती ही रहो आज दर्पण न तुम
प्यार का ये मूहर्त निकल जाएगा

शनिवार को गीतकार भरत व्यास की पुण्य स्म्रृति पर उन्हें याद किया गया।

7:30 बजे संगीत सरिता में जारी रही श्रृंखला - राग परछाई जिसे प्रस्तुत कर रही है ख्यात गायिका विदुषी मंजरी आलिगाँवकर जिनसे बातचीत कर रहे है राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी। प्रस्तुति है, यह काँचन (प्रकाश संगीत) जी की. इसमें रागों की जोडियों की चर्चा की जा रही है. दो-दो रागों की जोडियों में एक मूल राग है और दूसरा राग इसकी परछाई है. इस सप्ताह चर्चा में रहे रागों की जोडिया है - शुद्ध सारंग - श्याम कल्याण, मिया मल्हार और बहार, तिलक कामोद और देस, कर्नाटक शैली के राग हंस ध्वनी - शंकरा. जोडी के दोनों रागो की पूरी जानकारी देते हुए दोनों रागो के लिए अलग-अलग बन्दिशे और फिल्मी गीत सुनवाए गए जैसे राग बहार पर आधारित गीत -

छम छम नाचत आई बहार

सामान्य जानकारी भी मिली की राग तिलक कामोद में लोकगीत बहुत होते है।

7:45 को त्रिवेणी में जिन्दगी की मंजिल की, सुख-दुःख की बात हुई। जीवन की अलग-अलग परिभाषा की भी चर्चा हुई और गीत भी उचित सुनवाए गए जैसे -

ओ माझी चल
तू चले तो छम छम बाजे लहरों की पायल

सोमवार को बारिश की बाते अच्छी लगी। लगातार बड़ी-बड़ी बाते सुनते रहने के बाद इस तरह की हलकी-फुल्की बाते सुकून देती है। गाने भी बारिश के अच्छे लगे।

दोपहर 12 बजे एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने एक ऐसा कार्यक्रम में शुक्रवार को कमल (शर्मा) जी लाए जवानी-दीवानी, दीवार, जिद्दी, इंतेक़ाम जैसी साठ सत्तर के दशक की लोकप्रिय फिल्मे। शनिवार की फिल्मे रही दो रास्ते, पैसा या प्यार. सोमवार को मौसम का असर रहा, फिल्मे भी कुछ ऎसी ही चुनी गई और श्रोताओं ने भी बारिश के गीत सुनने के लिए संदेश भेजे जैसे -

मौसम मौसम लवली मौसम (फिल्म - थोड़ी सी बेवफाई )

मंगलवार की फिल्मे रही - मेरा साया, ताजमहल। गुरूवार की फिल्मे रही लम्हे, ऐतबार। इस सप्ताह नई फिल्मे कम ही ली गई.

1:00 बजे शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम अनुरंजनि में शुक्रवार को भीमसेन जोशी का गायन सुनवाया गया - राग पूर्या धनाश्रयी और भैरवी। शनिवार को अमीर खां का गायन सुनवाया गया। सोमवार को पंडित बृज नारायण का सरोद वादन और वसंत राव देश पाण्डेय का गायन सुनवाया गया। मंगलवार को निर्मला देवी का गायन सुनवाया गया। बुधवार को सुलतान खान का सारंगी वादन सुनवाया गया।

1:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम में श्रोताओं की फ़रमाइश पर मिले-जुले गीत सुनवाए गए जैसे साठ के दशक की फिल्म फर्ज का यह गीत -

तुम से ओ हसीना कभी मोहब्बत न मैनें करनी थी
मगर मेरे दिल ने मुझे धोखा दे दिया

अस्सी के दशक की फिल्म लव स्टोरी का गीत -

देखो मैनें देखा है ये एक सपना
फूलों के शहर में है घर अपना

नई फ़िल्म रेफ्यूजी का यह गीत -

ऐसा लगता है अब दिल मेरा खोने को है

3 बजे सखि सहेली कार्यक्रम में शुक्रवार को हैलो सहेली कार्यक्रम में फोन पर सखियों से बातचीत की रेणु (बंसल) जी ने। इस बार पटना, कश्मीर, महाराष्ट्र से फोन आए। कुछ छात्राओं ने बात की। एक छात्रा ने अपने विषय इतिहास के बारे में बताया। कुछ शिक्षित और कम शिक्षित घरेलु महिलाओं ने भी बात की और नए पुराने गीतों की फ़रमाइश की जैसे पुरानी फिल्म कन्हैया का गीत और नई फिल्म जान तेरे नाम का गीत -

हम लाख छुपाए प्यार मगर

सोमवार को वेबसाईट पर सखियों द्वारा भेजे गए रसोई के नुस्के बताए। इसके अलावा मेथी दाने की सब्जी बनाना बताया गया। मंगलवार का अंक बहुत स्तरीय रहा. इस दिन गुरू पूर्णिमा थी. शुरूवात हुई गुरू वन्दना के श्लोक से जिसे रफी साहब ने फिल्म सिकन्दरे आजम के लिए गाया है। इसके बाद बताई गई सूर्य ग्रहण की बातें. बताया जा रहा है इस माह तीन सूर्य ग्रहण है जिसकी वैज्ञानिक दृष्टि से चर्चा की गई. चूंकि यह कार्यक्रम दूरदराज तक सुना जाता है विशेषकर कम पढी लिखी महिलाए सुनती है जिनके लिए यह उपयोगी होगा. बुधवार को स्वास्थ्य और सौन्दर्य के घरेलु उपाय बताए गए. कुछ जानकारी नई थी जैसे प्याज का रस लगा कर मुहासे दूर किए जा सकते है. एक और बात अच्छी लगी जिसकी कमी बहुत दिन से खल रही थी - गर्भवती महिलाओं और शिशु की देखभाल। जानकारी बहुत सतही रही. विस्तार से इस विषय पर बताने का अनुरोध है. गुरूवार को सफल महिलाओं के बारे में बताया जाता है. इस बार नोबल पुरस्कार प्राप्त स्वीडन की लेखिका सेलमा ओटिरयाना (शायद नाम लिखने में गलती हो) के बारे में बताया गया जो अपाहिज थी. इसके अलावा नोबल पुरस्कार के बारे में भी जानकारी दी कि इसकी शुरूवात एल्फैड नोबल ने की जो साहित्य, विज्ञान और विश्व शान्ति के लिए दिया जाता है. अब तक यह 650 से अधिक को यह पुरस्कार मिल चुका है. एल्फ्रेड नोबल ने 1890 में ही अपनी संपत्ति को इस पुरस्कार के लिए समर्पित कर दिया था.

सखियों की पसन्द पर सप्ताह भर नए पुराने अच्छे गीत सुनवाए गए जैसे पुरानी फिल्म ताजमहल का रफी साहब का गाया बहुत ही खूबसूरत गीत -

जो बात तुझमे है तेरी तस्वीर में नही

नई फ़िल्म कम्पनी का यह गीत सुनवाया गया -

आखो में रहो बाहों में रहो होठो में रहो या दिल में रहो
ये सारे घर है तुम्हारे

और बीच के समय की फिल्म सत्यम शिवम् सुन्दरम का पंडित नरेंद्र शर्मा का लिखा शीर्षक गीत भी सुनवाया।

शनिवार को सदाबहार नग़में कार्यक्रम गीतकार भारत व्यास की पुण्य स्म्रृति में समर्पित किया गया। उनके गीत सुनवाए गए जैसे पिया मिलन की आस, प्यार की प्यास और सती सावित्री का यह गीत -

जीवन डोर तुम्ही संग बांधी
क्या तोडेगे इस बंधन को
जग के तूफां आंधी रे आंधी

3:30 बजे शनिवार और रविवार को नाट्य तरंग में नाटक सुना - आरजू ही आरजू। जब भी विविध भारती पर विचारोत्तेजक रचनाओं की बात चली एक नाम सामने आया - रेवती सरन शर्मा। ये नाटक बहुत बड़ी बात सोचने पर मजबूर कर गया कि स्वर्ग पाने की कामना में संसार में हर चीज त्यागना चाहिए तो स्वर्ग पाने की इच्छा को भी क्यों नही त्यागना चाहिए ? निर्देशक है लोकेन्द्र शर्मा जी.

पिटारा में शाम 4 बजे रविवार को यूथ एक्सप्रेस में युवा दिलों की धड़कन माइकल जैकसन को श्रृद्धान्जलि दी गई। पहली जुलाई को मनाए जाने वाले डाक्टर्स डे के बारे में बताया गया. विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश की सूचना भी दी गई।

शुक्रवार को प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम पिटारे में पिटारा जिसमें हास्य व्यंग्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमे गद्य और पद्य रचनाए सुनवाई गई, शीर्षक रहा - बात इतनी से बात कुछ भी नही जिसमे रमणीक लाल प्रेम चतुर्वेदी जैसे जाने माने रचनाकारों ने अपनी रचनाए सुनाई। सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में मनोरोग चिकित्सक डा अंजली छाबरिया से राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी की बातचीत सुनवाई गई. पहले ही स्पष्ट किया गया कि मनोवैज्ञानिक और एक डाक्टर दो विभिन्न रास्ते है. एक मन की अवस्था जानकर मनोविश्लेष्ण करता है और दूसरा दवाईयों से इलाज करता है। अच्छी जानकारी मिली। बुधवार को आज के मेहमान कार्यक्रम में अभिनेता निर्माता निर्देशक टीनू आनंद से बातचीत हुई. सभी बातें बहुत आत्मीयता से बताई. फिल्म क्षेत्र की यात्रा को भी विस्तार से बताया. शनिवार, मंगलवार और गुरूवार को हैलो फ़रमाइश में श्रोताओं से फोन पर बातचीत हुई। श्रोताओं की पसन्द के नए पुराने गीत सुनवाए गए।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद सप्ताह भर फ़िल्मी हंगामा कार्यक्रम में नई फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

7 बजे जयमाला में शनिवार को विशेष जयमाला प्रस्तुत किया अभिनेत्री हेमामालिनी ने। पहले ही वाक्य में बताया कि भारतीय संस्क्रृति उनके रोम-रोम में बसी है और पूरा कार्यक्रम उसी अंदाज में प्रस्तुत किया. खुद के और दूसरो के भी लोकप्रिय गीत सुनवाए। सोमवार से एस एम एस द्वारा भेजी गई फ़ौजी भाइयों की फ़रमाइश पर गीत सुनवाए गए। गाने नए और पुराने दोनों ही सुनवाए जा रहे है। नए गीत अधिक ही रहे.

7:45 पर शुक्रवार को देश की प्रमुख बात का असर लोकसंगीत कार्यक्रम पर ही दिखाई दिया। रेल बजट का स्वागत करते हुए रिहाना मिर्जा की आवाज में सुनवाया लोकप्रिय राजस्थानी लोकगीत -

अंजन की सीटी में म्हारो मन डोले
गाडी चला हौले हौले

शनिवार और सोमवार को पत्रावली में निम्मी (मिश्रा) जी और महेन्द्र मोदी जी आए। श्रोताओं ने विभिन्न कार्यक्रमों की तारीफ़ थी। कुछ बाते वेबसाईट से ली गई। कोई विशेष पत्र नहीं रहा। मंगलवार को सुनवाई गई क़व्वालियाँ। बुधवार को इनसे मिलिए कार्यक्रम में कास्ट्यूम डिजाइनर लवलीन बेन से बातचीत की अगली कडी सुनवाई गई. राग-अनुराग में रविवार और गुरूवार को विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुनवाए गए।

8 बजे हवामहल में सुनी झलकियाँ - साझे की दुकान, अवशेष (निर्देशक पुरूषोत्तम दारवेकर), विश्व प्रेमी सम्मलेन (रचना मदन मोहन खन्ना निर्देशक दीनानाथ) और विजय दीपक छिब्बर द्वारा तैयार नई झलकी भी सुनी - बिना बांहों का स्वेटर - जिसकी रिकार्डिग की तस्वीरे वेबसाईट पर देखी जा सकती है।

9 बजे गुलदस्ता में गजले और गीत सुनवाए गए.

9:30 बजे एक ही फ़िल्म से कार्यक्रम में हसते जख्म, पवित्र पापी, खेल खेल में जैसी लोकप्रिय फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

रविवार को उजाले उनकी यादों के कार्यक्रम में अभिनेता शम्मी कपूर से बातचीत की अगली कडी प्रसारित हुई। 10 बजे छाया गीत में गीत तो बहुत लोकप्रिय सुनवाए गए। एकाध गीत ऐसा भी रहा जो बहुत समय बाद सुना पर प्रस्तुति का अन्दाज़ वही रहा।

10:30 बजे से श्रोताओं की फ़रमाइश पर लोकप्रिय गीत सुनवाए गए। 11 बजे समाचार के बाद प्रसारण समाप्त होता रहा।

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