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Friday, August 14, 2009

साप्ताहिकी 14-8-09 और साप्ताहिकी का एक साल

आप सबको जन्माष्टमी और स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ !

साप्ताहिकी लिखते हुए मुझे एक साल हो गया है। बीच-बीच में कुछ सप्ताह मैं निजी कारणों से साप्ताहिकी नहीं लिख पाई। विविध भारती के उन्हीं कार्यक्रमों पर मैं लिखती हूँ जो एफ़एम पर हैदराबाद में सुनाई देते है, इसीसे कुछ कार्यक्रम साप्ताहिकी में शामिल नहीं हो पाते है। कुछ कार्यक्रम मैं पूरे नहीं सुन पाती हूँ, घर और आफिस की दौड़धूप में कोशिश करके भी कठिन हो जाता है ऐसे में कार्यक्रमों की सूचना अवश्य देने की कोशिश करती हूँ। कभी-कभार साप्ताहिकी लिखते समय कुछ कार्यक्रमों की कुछ बातें दिमाग़ से निकल गई और शामिल नहीं हो पाई जैसे परमाणु पनडुब्बी अरिहन्त की जानकारी दी थी युनूस जी ने यूथ एक्सप्रेम में जो साप्ताहिकी में शामिल नहीं हो पाई।

अब एक नज़र इस सप्ताह के कार्यक्रमों पर… इस सप्ताह ख़ास रहा सेहतनामा कार्यक्रम जिसमें स्वाइन फ़्लू पर चर्चा हुई।

सुबह 6 बजे समाचार के बाद चिंतन में स्वामी रामतीर्थ, स्वरूपानन्द जैसे महर्षियों और महात्मा गांधी, विनोबा भावे जैसे मनीषियों के कथन बताए गए। वन्दनवार में नए पुराने अच्छे भक्ति गीत सुनवाए गए जैसे -

भजमन रामचरण सुखदाई

कृष्ण भक्ति गीत अधिक सुनने को नहीं मिले और विषेषकर आज तो बढिया कृष्ण भक्ति गीत सुनने की आशा थी जो पूरी नहीं हुई। कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा। अच्छे देशभक्ति गीत सुनवाए गए जैसे -

प्यारी जन्मभूमि मेरी प्यारी जन्मभूमि
नीलम का आसमान है सोने की धरा है
चाँदी की है नदिया पवन भी शीत भरा है

सप्ताह में एकाध बार ही गीतों का विवरण बताया गया। कम से कम अगस्त के इन दिनों में तो हर देशभक्ति गीत विवरण के साथ सुनवाया जाना चाहिए।

7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में अधिकतर कम सुने जाने वाले गीत सुनवाए गए जैसे सुरेन्द्र का गाया अनमोल घड़ी का गीत, बहार फ़िल्म का किशोर कुमार का गाया गीत और कुछ अधिक सुने जाने वाले गीत सुनवाए गए जैसे अपने पराए फ़िल्म का शीर्षक गीत।

आज का कार्यक्रम पूरा कृष्ण भक्ति में रंगा रहा। बढिया प्रस्तुति, अच्छे गीतों का चुनाव जिसमें कान्हा के विभिन्न रूप समेटे गए जैसे मौसी फ़िल्म का गीत - मेरी गोदी में नन्दलाला

कृष्णराधा का मुग़ले आज़म का लोकप्रिय गीत - मोहे पनघट में नन्दलाल छेड़ गयो रे

और शास्त्रीय पद्धति में ढला कैसे कहूँ फ़िल्म का गीत - मनमोहन मन में हो तुम्हीं

7:30 बजे संगीत सरिता में श्रृंखला - मदनमोहन के संगीत में शास्त्रीय संगीत जारी रही। इसे प्रस्तुत कर रही है डा अलका देव मालवीकर। मदन मोहन जी के चुने हुए गीतों के साथ विभिन्न रागों जसे अहीर भैरव, पीलू, बागेश्री, रागेश्री पर चर्चा की गई। इन रागों पर आधारित गीत भी सुनवाए गए जैसे राग दरबारी कानड़ा पर आधारित गीत -

अगर मुझसे मोहब्बत है मुझे सब अपने ग़म दे दो

रागों के चलन के साथ सामान्य जानकारी भी दी जा रही है जैसे राग बागेश्री और रागेश्री में बहुत समानता है। चर्चा में विभिन्न गीत रहे जैसे दस्तक के गीत -

माई री मैं कासे कहूँ पीर अपने जिया की

बय्या न धरो ओ बलमा

ग़ज़ल फ़िल्म से - रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ

7:45 को त्रिवेणी में धन-दौलत-ऐश्वर्य पाने की होड़ की बातें अच्छी लगी। रविवार को 9 अगस्त होने से आज़ादी के नग़में गूँजे जिसमें पुरानी फ़िल्म किस्मत का अमीर बाई कर्नाटकी, अरूण कुमार और साथियों का गाया यह गीत भी शामिल रहा -

दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है

यही गीत भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में भी सुनवाया गया था। एक घण्टे के भीतर एक गीत को दो बार सुनना अच्छा नहीं लगा जबकि इस विषय पर अन्य गीत है। सोमवार की प्रस्तुति मज़ेदार रही। गंभीर विषय धन-दौलत के मद का रिश्ते-नातों पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा अच्छी रही।

दोपहर 12 बजे एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने कार्यक्रम में शुक्रवार को अमरकान्त जी लाए दिल ही है तो है, संबंध, लव इन टोकियो जैसी लोकप्रिय फ़िल्में। सोमवार को यूनूस (खान) जी आए सनम तेरी कसम, कसमें वादे, खेल खेल में और इस दिन आज़ादी का रंह भी रहा उपकार फ़िल्म के गीत से। मंगलवार की फ़िल्में रही आशा, आँखों आँखों में, आखिरी ख़त, हथकड़ी, दो आँखें बारह हाथ जैसी नई पुरानी लोकप्रिय फिल्मे। बुधवार को यादों की बारात, आँधी, मिली जैसी कुछ पुरानी फिल्मे रही। गुरूवार को गीत, मर्यादा, दिल दिया दर्द लिया जैसी सदाबहार फ़िल्में रही। सप्ताह भर इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया विजय दीपक छिब्बर जी ने।

1:00 बजे शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम अनुरंजनि में शुक्रवार को तेजेन्द्र नारायण का सरोद वादन सुनवाया गया। शनिवार को बड़े ग़ुलाम अली खाँ का गायन सुनवाया गया। सोमवार को वी के दातार का वायलन वादन सुनवाया गया। मंगलवार को विदुषी ज़रीन दारूवाला का सरोद वादन सुनवाया गया। बुधवार को पंडित यशवन्त वी जोशी का गायन और सत्यदेव पवार का वायलन वादन सुनवाया गया। गुरूवार को सितार वादन और तबला वादन सुनवाया गया।

1:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम में सोमवार को आज़ादी का रंग नज़र आया जैसे फ़रमाइशी पत्र पर देशप्रेमी फ़िल्म का यह गीत सुनवाया गया -

मेरे देशप्रेमियों आपस में प्रेम करो

कुछ पुरानी फ़िल्म एक कली मुस्काई का रफ़ी साहब का गाया गीत सुनवाया गया -

ज़ुल्फ़ बिखराती चली आई हो
ऐ जी सोचो तो ज़रा बदली का क्या होगा

बुधवार और गुरूवार को श्रोताओं के ई-मेल से प्राप्त संदेशों पर फ़रमाइशी गीत सुनवाए गए जिसमें पुरानी फ़िल्म वक़्त के इस गीत के लिए भी संदेश आए -

कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी
दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी
कौन आया

और नई फ़िल्म कभी अलविदा न कहना के शीर्षक गीत के लिए भी संदेश आए।

ई-मेल की संख्या कम ही रही। एकाध गीत तो एक ही ई-मेल पर सुनवाया गया। अभी तो शुरूवात है, आगे जैसे-जैसे पता चलता जाएगा लगता है संख्या बढती जाएगी। इस तरह पत्रों और ई-मेल संदेशों दोनों से ही प्राप्त नई पुरानी फ़िल्मों के गीतों के अनुरोध पर सप्ताह भर मिले-जुले गीत सुनवाए गए।

3 बजे सखि सहेली कार्यक्रम में शुक्रवार को हैलो सहेली कार्यक्रम में फोन पर सखियों से बातचीत की रेणु (बंसल) जी ने। पटना, रायगढ - मध्य प्रदेश, बिजनौर - इन्दौर, बरलापुरा - सतारा और कुछ अन्य भागों से सखियों ने बात की। इस बार भी ज्यादातर कस्बों, ज़िलों, गाँव से फोन आए। इस बार भी कुछ छात्राओं ने बात की अपनी पढाई और नौकरी की योजना के बारे में बताया और कुछ कम शिक्षित घरेलु महिलाओं ने भी बात की। बातचीत से पता चला कि गोदिया हरी भरी जगह है पर यह नहीं पता चला कि यह किस राज्य में है। सावन का महीना बीत गया, वैसे भी यह त्यौहारों का मौसम है जिनका गाँवों कस्बों में अलग ही रंग होता है, अगर कुछ बातें इस बारे में भी होती तो अच्छा लगता, कुछ नयापन आता।

युवा सखियों ने नई फ़िल्मों के गीत पसन्द किए जैसे दिल का क्या कसूर फ़िल्म का गीत -

आशिकी में हर आशिक हो जाता है मजबूर
इसमें दिल का मेरे दिल का
इसमें दिल का क्या कसूर

कुछ सखियों के अनुरोध पर पुराने गीत सुनवाए गए जैसे मिस्टर एक्स इन बाम्बे का गीत -

मेरे महबूब कयामत होगी
आज रूसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी

सोमवार को त्यौहारों को ध्यान में रखकर सखियों के पत्रों से मटर की खीर बनाना बताया गया। मंगलवार को डीटीपी (डेस्क टाप पब्लिशिंग) यानि कंप्यूटर साफ़्टवेयर पर काम करने के क्षेत्र में करिअर बनाने के लिए जानकारी दी गई। बुधवार को इस बार बारिश में बालों और त्वचा की देखभाल के बारे में बताया गया। बारिश में मेकअप न करने की या हल्का करने की और थोड़ा सा सिरका मिलाकर बाल धोने की सलाह दी गई। गुरूवार को सफल महिलाओं के बारे में बताया जाता है। इस बार दक्षिणी अमेरिका की पहली महिला साहित्यकार गैबरिला को उनकी काव्य कृति साँनेट आँफ़ डेथ पर मिले नोबुल पुरस्कार की जानकारी दी गई। उनके जीवन और साहित्य संसार पर विस्तार से बताया गया। इस दिन जन्माष्टमी की भी धूम रही। सामान्य बातों के साथ-साथ मथुरा नगरी के बारे में भी बताया गया। अमर प्रेम का गीत सुनवाया गया -

बड़ा नटखट है कृष्ण कन्हैया

और सखियों के अनुरोध पर शम्मी कपूर और रफ़ी साहब का वो गीत भी शामिल रहा जिसके बिना जन्माष्टमी की चर्चा फ़िल्मों गीतों के संदर्भ में अधूरी रहती है -

गोविन्दा आला रे आला
ज़रा मटकी सँभाल बृजबाला

सप्ताह भर सखियों के अनुरोध पर सुनवाए गए गीतों में नए पुराने गीत शामिल रहे जैसे बहुत पुरानी फ़िल्म दर्द का उमादेवी का गाया गीत -

अफ़साना लिख रही हूँ दिले बेकरार का
आँखों में रंग भरके तेरे इंतेज़ार का

नई फ़िल्म ओम शान्ति ओम का गीत सुनवाया गया

आँखों में तेरी अजब सी अजब सी अदाएँ है

शनिवार और रविवार को सदाबहार नग़में कार्यक्रम में सदाबहार गीत सुनवाए गए।

पिटारा में शाम 4 बजे शुक्रवार को सुना कार्यक्रम पिटारे में पिटारा जिसमें आरंभ में वर्षा ॠतु के गीत सुनवाए गए जिसके बाद सुनवाई गीतों भरी कहानी - अबके सावन घर आजा जिसके रचयिता है गंगा प्रसाद माथुर और निर्देशक गौरीशंकर। बहुत अच्छी कहानी जिसमें मुख्य स्वर ओम शिवपुरी का है। कहानी लम्बी है पर सुहाने मौसम के लोकप्रिय गीतों से सजी होने से अच्छी लगी जैसे प्यार का मौसम फ़िल्म का शीर्षक गीत। बताया गया यह कार्यक्रम 1970 में पहली बार प्रसारित किया गया था।

सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में स्वाइन फ़्लू के संबंध में डा जयराज थाणेकर से रेणु (बंसल) जी की बातचीत सुनवाई गई। विस्तार से अच्छी जानकारी और सलाह दी गई। बताया कि कैसे यह रोग फैल रहा है। इसके लक्षण भी बताए जैसे सर्दी, खाँसी, ज़ुकाम और तेज़ बुखार। अगर बुखार कम नहीं हो रहा है तो सरकारी अस्पताल में जाँच करवाए। अगर कोई विदेश से आए तो दूर ही रहे क्योंकि संक्रमण होने का अवसर रहता है। यह वायरस दो-तीन दिन तक रहता है इस बीच दूसरों को संक्रमण हो सकता है। अगर वायरस का प्रभाव रोगी में समाप्त हो जाता है तो उस रोगी को ठीक मान कर अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। यह भी बताया कि इस रोग को रोकने के लिए टीका विकसित करने पर तेज़ी से काम चल रहा है। यह भी नज़र रखी जा रही है कि दवा सभी राज्यों में उपल्ब्ध रहे।

बुधवार को आज के मेहमान कार्यक्रम में गायक अमित कुमार से युनूस (खान) जी की बातचीत की पहली कड़ी प्रसारित हुई। उसी दिन अमित कुमार जी का जन्मदिन भी था। हिन्दी सिनेमा के श्रोता शायद इसी भ्रम में है कि अमित कुमार का पहला गीत 1974 में रिलीज़ बालिका वधू फ़िल्म का है पर बातचीत से पता चला कि पहला गीत 1966 में गाया था और फ़िल्म रिलीज़ हुई थी 1969 में पर गीत फ़िल्म से निकाल दिया गया था। उसके बाद 1972 में दुर्गा पूजा के लिए गाए अमित जी के रिकार्ड किशोर कुमार और आशा जी जैसे गायको के होते एचएमवी से तीन में 6000 की संख्या में बिके। यह नई जानकारी अच्छी रही। पूरी बातचीत अच्छी रही जिसमें पिता किशोर कुमार को भी याद किया गया। इस रिकार्डिंग की तस्वीरें विविध भारती की वेबसाइट पर देखी जा सकती है। शनिवार, मंगलवार और गुरूवार को हैलो फ़रमाइश में श्रोताओं से फोन पर बातचीत हुई। श्रोताओं की पसन्द के नए पुराने गीत सुनवाए गए।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद सप्ताह भर फ़िल्मी हंगामा कार्यक्रम में नई फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

7 बजे जयमाला में शनिवार को विशेष जयमाला कार्यक्रम में गीतकार गुलशन बावरा को याद करते हुए उनके द्वारा 1984 में प्रस्तुत किए गए कार्यक्रम की रिकार्डिंग सुनवाई। बढिया प्रस्तुति। पी एल संतोषी जैसे पुराने दिग्गजों से लेकर साहिर लुधियानवी तक सबको याद किया और याद भी कुछ अनोखे अंदाज़ में किया, उनके बारे में एक-एक पंक्ति में ख़ास बात बताते हुए उनके लोकप्रिय गीतों की झलक सुनवा दी। इस तरह इस अंक में बहुतों को नमन किया गया। सोमवार से पत्रों और एस एम एस द्वारा भेजी गई फ़ौजी भाइयों की फ़रमाइश पर गीत सुनवाए गए। पुरानी फ़िल्म मिलन का यह गीत भी शामिल रहा -

बोल गोरी बोल तेरा कौन पिया

और आजकल की फ़िल्मों के गीत भी फ़रमाइश पर सुनवाए गए।

7:45 पर शुक्रवार को लोकसंगीत कार्यक्रम में इस बार नेपाली, बृज लोकगीत सुनवाए गए। शनिवार और सोमवार को पत्रावली में निम्मी (मिश्रा) जी और कमल (शर्मा) जी आए। सेहतनामा और कुछ अन्य कार्यक्रमों की श्रोताओं ने तारीफ़ की। एक पत्र में शिकायत थी कि एसएमएस के बहाने वीबीएस के तराने कार्यक्रम के बारे में सुना पर ठीक से सुनाई नही देने के तकनीकी कारण से कार्यक्रम कभी भी नहीं सुन पाए जिसके जवाब में डीटीएच के अलावा अन्य समाधान देखने की बात कही गई। एक बड़ी उपयोगी जानकारी दी गई कि विविध भारती के पूर्व निदेशक राजेश रेड्डी जी ने बशीर बद्र साहब के एक शेर से लिया है कार्यक्रम का शीर्षक - उजाले उनकी यादों के। मंगलवार को सुनवाई गई ग़ैर फ़िल्मी क़व्वालियाँ। राग-अनुराग कार्यक्रम में रविवार को एक ही राग चारूकेशी पर और गुरूवार को विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुनवाए।

8 बजे हवामहल में इस बार सुनी झलकियों में कुछ ऐसे नाम भी शामिल रहे जो कम सुने जाते है। झलकियाँ रही - आँगन में स्वर्ग (निर्देशन दुर्गा मल्होत्रा), नौकर और दामाद (रचना बी एम आनन्द निर्देशक कमल दत्त), स्वर्ग का चक्कर (रचना कमलेश खरबन्दा निर्देशन विजय चौहान), अच्छी लगी नाटिका गरम मसाला

9 बजे गुलदस्ता में गजले और गीत सुनवाए गए। वेलवेट वायस एलबम से हरिहरन की आवाज़ में खुमार बाराबंकी की रचना ज्यादा अच्छी लगी। वैसे तो पूरा ही गुलदस्ता महक रहा था।

9:30 बजे एक ही फ़िल्म से कार्यक्रम में मौसम, महल, बहारों के सपने, आप तो ऐसे न थे, संघर्ष जैसी लोकप्रिय फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

रविवार को उजाले उनकी यादों के कार्यक्रम में अभिनेता शम्मी कपूर से बातचीत की अगली कडी प्रसारित हुई। संगीतकार रवि को याद किया। वाकई कल्पना (शेट्टी) जी बधाई की पात्र है जिनके कारण हम एक कलाकार शम्मी कपूर जी की अभिनय यात्रा से अनेक सितारों के बारे में जान रहे है।

10 बजे छाया गीत में शुक्रवार को कमल (शर्मा) जी ने रात की तारों की बातें की। निम्मी (मिश्रा) जी ने भी रात की बात की और सुनवाया पाकिज़ा का गीत -

आज की रात बचेगें तो सेहर देखेंगे

राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने नए अच्छे चुने हुए प्यार भरे गीत सुनवाए। इसके अलावा इंतेज़ार पर प्रस्तुति और गीत भी अच्छे रहे।

10:30 बजे से श्रोताओं की फ़रमाइश पर लोकप्रिय गीत सुनवाए गए। 11 बजे समाचार के बाद प्रसारण समाप्त होता रहा।

3 comments:

संगीता पुरी said...

आपके लिए तो यह दिन कई दृष्टि से खास हो गया .. इस खास मौके पर बहुत बहुत बधाई और खुभकामनाएं !!

yunus said...

अन्‍नपूर्णा जी मुबारक हो ।
मुझे पता है कि ये आसान काम नहीं है ।
लेकिन जिस जतन से आप कर रही हैं वो काबिले तारीफ है ।

सागर नाहर said...

दूर हटो को तो हम बिना रुके दस बीस बार सुन सकते हैं। गीत को सुनते समय एक अलग सा अहसास होता है।

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