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Friday, August 7, 2009

साप्ताहिकी 6-8-09

इस सप्ताह चार ख़ास बातें रही - रक्षा बन्धन, रफ़ी साहब की पुण्य तिथि, किशोर कुमार का जन्मदिन और फ्रेण्डशिप डे। यह सभी दिन विविध कार्यक्रमों में झलक आए।

सुबह 6 बजे समाचार के बाद चिंतन में चाण्क्य, वेद व्यास, महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानन्द जैसे मनीषियों, कीट्स जैसे साहित्यकारों के कथन बताए गए। वन्दनवार में नए पुराने अच्छे भक्ति गीत सुनवाए गए। शास्त्रीय पद्धति में ढले भक्ति गीत अच्छे लगे ख़ासकर कबीर को सुनना अच्छा लगा। कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा।

7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम शुक्रवार को रफ़ीमय रहा। विभिन्न कलाकारों के साथ गाए दोगाने भी सुनवाए गए जैसे मुकेश के साथ, शमशाद बेगम के साथ सावन फ़िल्म का यह गीत -

भीगा भीगा प्यार का समाँ
बता दे तुझे जाना है कहाँ

राखी को जाने-पहचाने राखी के गीत सुनने को मिले। सप्ताह भर अधिकतर कम सुने जाने वाले और कुछ अधिक सुने जाने वाले गीत सुनवाए गए।

7:30 बजे संगीत सरिता में श्रृंखला - मदनमोहन के संगीत में शास्त्रीय संगीत जारी रही। इसे प्रस्तुत कर रही है डा अलका देव मालवीकर। मदन मोहन जी के चुने हुए गीतों को प्रस्तुत किया जा रहा है जैसे -

रस्में उल्फ़त को निभाए तो निभाए कैसे (फ़िल्म दिल की राहे)
आपकी नज़रों ने समझा प्यार के क़ाबिल मुझे (अनपढ)
तू जहाँ जहाँ चलेगा मेरा साया साथ होगा (मेरा साया)
आज सोचा तो आँसू भर आए मुद्दते हो गई मुस्कुराए (हसते ज़ख़्म)

सभी गीतों को अलका जी ने गाकर सुनाया जिससे इन गीतों ग़ज़लों की शास्त्रीयता को समझना आसान हो गया।

7:45 को त्रिवेणी में शनिवार का अंक सावन की मस्ती में झूमा। बहुत दिन बाद सुना यह गीत -

आयो रे आयो रे आयो रे
ओ सावन आयो रे
ओ सावन आयो रे

गाना आए या न आए गाते है विषय पर प्रस्तुति मज़ेदार रही। गंभीर विषय - श्रम, भी अच्छा रहा।

दोपहर 12 बजे एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने कार्यक्रम शुक्रवार को मोहम्मद रफ़ी को समर्पित रहा। अजय (जोशी) जी फ़िल्में लेकर आए प्यार का मौसम, लोफ़र, एन ईवनिंग इन पेरिस। शनिवार को निकाह, डर जैसी अस्सी नब्बे के दशक की फिल्मे रही। सोमवार को रेणु (बंसल) जी हरे काँच की चूड़ियाँ, तीन देवियाँ, अभिलाषा जैसी लोकप्रिय फ़िल्में लेकर आई और श्रोताओं ने भी बहुत लोकप्रिय गीतों (मेरे पसंदीदा गीतों की सूची में ऊपर) के लिए संदेश भेजे। मंगलवार को शहनाज़ (अख़्तरी) जी ले आईं अगर तुम न होते, लगान, स्लम्डाग मिलिएनर जैसी नई पुरानी लोकप्रिय फिल्मे। बुधवार को निम्मी (मिश्रा) जी जोश, बंटी और बबली, जाने तू या जाने न, ओम शान्ति ओम जैसी नई फिल्मे लेकर आई। गुरूवार को आया सावन झूम के, राम तेरी गंगा मैली, सौतन जैसी सदाबहार फ़िल्में लेकर आए अमरकान्त जी। सप्ताह भर इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया विजय दीपक छिब्बर जी ने।

1:00 बजे शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम अनुरंजनि में शुक्रवार को अर्जुन शेचवाल का पखावज वादन और उल्लास बापट का संतूर वादन सुनवाया गया। शनिवार को सतीश व्यास का संतूर और आनन्दा चक्रवर्ती का तबला वादन सुनवाया गया। सोमवार को माधुरी देवकरे और हरिशचन्द्र भावसार का गायन सुनवाया गया। मंगलवार को बलराम पाठक का सितार वादन सुनवाया गया। बुधवार को भुवनेश्वर मिश्रा का वायलन वादन सुनवाया गया। गुरूवार को उस्ताद अमानत अली खाँ और उस्ताद फ़तेह अली खां का गायन सुनवाया गया।

1:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम में शुक्रवार को श्रोताओं की फ़रमाइश पर शुरूवाती आधा कार्यक्रम रफ़ी साहब को समर्पित रहा। श्रोताओं ने बहुत अच्छे गीतों के लिए फ़रमाइश भेजी ख़ासकर लताजी के साथ गाए युगल गीत। तुमसे अच्छा कौन है, कारवाँ, मेरा गाँव मेरा देश और मन का मीत फ़िल्म का यह गीत शामिल था -

ओ जाने वाले आ जा तेरी याद सताए

मंगलवार को किशोर कुमार के जन्मदिन के अवसर पर श्रोताओं की फ़रमाइश में से किशोर कुमार के गीतों को चुन कर सुनवाया गया जैसे अनुरोध, जवानी दीवानी, कल आज और कल, प्रेमनगर, अजनबी और चलती का नाम गाड़ी फ़िल्म का यह मस्त-मस्त गीत -

हम थे वो थी और समाँ रंगीन समझ गए न
जाते थे जापान पहुँच गए चीन समझ गए न
अरे याने याने याने प्यार हो गया
ओ मन्नू तेरा हुआ अब मेरा क्या होगा

लेकिन आराधना और कटी पतंग के गाने में थोड़ी तकनीकी गड़बड़ हुई।

बुधवार और गुरूवार को श्रोताओं के एसएमएस और ई-मेल से प्राप्त संदेशों पर फ़रमाइशी गीत सुनवाए गए। पुराने नए सभी तरह के गानों के लिए संदेश आए जैसे राखी के अवसर पर पुरानी फ़िल्म का गीत सुनवाया गया -

राखी धागों का त्यौहार

और नई फ़िल्म रब ने बना दी जोड़ी का गीत भी सुनवाया गया।

3 बजे सखि सहेली कार्यक्रम में शुक्रवार को हैलो सहेली कार्यक्रम में फोन पर सखियों से बातचीत की शहनाज़ (अख़्तरी) जी ने। देश के उत्तर, दक्षिण और मध्य भाग से ज्यादातर कस्बों, ज़िलों, गाँव से फोन आए। कुछ छात्राओं और कुछ घरेलु महिलाओं ने बात की। बातचीत से पता चला कि इलाहाबाद के कुछ स्थानों में सूखे की स्थिति है, बैंग्लौर में कुछ कम ही बारिश हुई है। मध्यप्रदेश में तहसील में अच्छी सुविधाएँ होने से आस-पास के गाँवों की लड़कियाँ वहाँ पढने आती है, वहाँ विकास कार्यक्रम भी अच्छे है जैसे आँगनवाड़ी से लड़कियों को पढने जाने के लिए साइकिलें दी जाती है। इस तरह अच्छी जानकारी मिली। नए पुराने गीतों की फ़रमाइश की गई। राखी पर्व पर भाई बहन का चंबल की कसम फ़िल्म का यह गीत सखियों की फ़रमाइश पर सुनवाया गया -

चंदा रे मेरे भैय्या से कहना बहना याद करे

सोमवार को फ्रेन्डशिप डे की शुभकामनाएँ दी गई, कार्यक्रम तो है ही सखियों-सहेलियों का। अगर ऐसा कोई गीत भी सुनवाया जाता तो मज़ा आ जाता… शायद ऐसा गीत बहुत ही कम या नहीं है… मुझे भी कुछ याद नहीं आ रहा जैसा कि पुरूषों के लिए शोले फ़िल्म का गीत है वैसा कोई गीत… इस दिन गोभी मन्चूरिया और अमरूद का मुरब्बा बनाना बताया गया। बुधवार को सखियों के भेजे गए सौन्दर्य संबंधी कुछ नुस्क़े बताए गए जिनमें से एकाध नुस्क़ा नया भी था। कुछ पुराने कुछ नए चुटकुले भी सुनवाए गए। ख़ास बात रही सखियों के अनुरोध पर राखी के भाई-बहन के रिश्ते के गीत सुनवाए गए। बहुत पुरानी फ़िल्म छोटी बहन का गीत शामिल रहा -

भय्या मेरे राखी के बंधन को निभाना
भय्या मेरे छोटी बहन को न भुलाना

सत्तर के दशक की फ़िल्म रेशम की डोरी का भी गीत शामिल रहा -

बहनों ने भाई की कलाई पे प्यार बाँधा है
प्यार के दो तार से संसार बाँधा है

पर ऐसे नए गीत सुनने को नहीं मिले, शायद नई फ़िल्मों में राखी के और भाई-बहन के रिश्ते के गीत नहीं है।

गुरूवार को सफल महिलाओं के बारे में बताया जाता है। इस बार अँग्रेज़ी लेखिका पर्ल बग के बारे में बताया गया। उनके प्रसिद्ध उपन्यास गुड अर्थ के बारे में भी बताया गया। मुझे याद आ गए वो दिन जब मैं एम ए कर रही थी तब गुडअर्थ की तुलना प्रेमचन्द के गोदान से की जाती थी और इस संबंध में बहुत बहसें हुआ करती थी। सखियों की पसन्द पर सप्ताह भर नए पुराने अच्छे गीत सुनवाए गए जैसे संजोग फ़िल्म का गीत -

एक मंज़िल राही दो फिर प्यार न कैसे हो

शनिवार और रविवार को सदाबहार नग़में कार्यक्रम में सदाबहार गीत सुनवाए गए जैसे बीस साल बाद फ़िल्म का हेमन्त कुमार का स्वरबद्ध किया और गाया यह गीत -

ज़रा नज़रों से कह दो जी
निशाना चूक न जाए

3:30 बजे नाट्य तरंग में शनिवार को सुनावाया गया मूल मराठी नाटक - हम तुम्हें सच बोलते है जिसका हिन्दी रेडियो नाट्य रूपान्तर किया पुरूषोत्तम दारवेकर ने और निर्देशक है लोकेन्द्र शर्मा। रविवार को मौलियर की कहानी पर आधारित नाटक सुनवाया गया - पुराना मर्ज़ नया इलाज जिसका रेडियो रूपानतर और निर्देशन किया विनोद रस्तोगी ने।

पिटारा में शाम 4 बजे शुक्रवार को सुना कार्यक्रम पिटारे में पिटारा जिसमें रेणु (बंसल) जी द्वारा संयोजित किया गया कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया - चूल्हा चौका। इसमें सिन्धी व्यंजन बताए गए। भरवाँ भिंडी और आलू, कमल ककड़ी का व्यंजन, मैदे की पूरियाँ सभी नया सा लगा।

रविवार को यूथ एक्सप्रेस में किशोर कुमार को पूरे जोर-शोर से याद किया गया। उनके गाए गीतों के आ आ ऊऊ के विचित्र पर मज़ेदार सु्रों की लड़ी बना कर सुनवाई गई। आरंभ आराधना के गीत के सुर से हुआ। टुकड़ों को अच्छा जोड़ा गया, बधाई यूनूस जी ! किताबों की दुनिया में रविन्द्रनाथ टैगोर की चुनी हुई कहानियों की एक पुस्तक पर और हिन्दी के प्रसिद्ध कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला पर वार्ता प्रसारित की गई। इसके अलावा हमेशा की तरह विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश की सूचना भी दी गई।

सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में अस्थमा बीमारी के संबंध में डा सौमिल पवार से निम्मी (मिश्रा) जी की बातचीत सुनवाई गई। विस्तार से अच्छी जानकारी दी गई कि अस्थमा रोग इलाज से ठीक होता है। कुछ भ्रान्तियाँ भी दूर हुई इस जानकारी से कि अस्थमा के रोगी, खेल-कूद सकते है, परफ़्यूम की फूलों की सुगन्ध ले सकते है। इतना ही नही दवाई के साथ प्राणायाम भी कर सकते है। बुधवार को आज के मेहमान कार्यक्रम में अभिनेता प्रेम चोपड़ा से बातचीत की अगली कड़ी प्रसारित हुई जिसमें फ़िल्मी सफ़र की बातें हुई। शनिवार, मंगलवार और गुरूवार को हैलो फ़रमाइश में श्रोताओं से फोन पर बातचीत हुई। श्रोताओं की पसन्द के नए पुराने गीत सुनवाए गए।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद सप्ताह भर फ़िल्मी हंगामा कार्यक्रम में फिर मिलेंगें जैसी नई फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

7 बजे जयमाला में शनिवार को विशेष जयमाला प्रस्तुत किया अभिनेता अनुपम खेर ने। खुद के बारे में भी बताया कि पहली फ़िल्म सारांश कैसे मिली। साथी कलाकारों के बारे में भी बताया और नए पुराने लोकप्रिय गीत सुनवाए। सोमवार से एस एम एस द्वारा भेजी गई फ़ौजी भाइयों की फ़रमाइश पर गीत सुनवाए गए। गाने नए और पुराने दोनों ही सुनवाए जा रहे है।

7:45 पर शुक्रवार को लोकसंगीत कार्यक्रम में इस बार मराठी, कश्मीरी लोकगीत सुनवाए गए। शनिवार और सोमवार को पत्रावली में निम्मी (मिश्रा) जी और यूनूस (खान) जी आए। इस बार वन्दनवार की तारीफ़ में भी पत्र आए। ई-मेल की संख्या कुछ बढती नज़र आई जिनमें से एक मेल मेरा भी था जिसमें मैनें खेत-खलिहान के लोकगीत सुनवाने की फ़रमाइश की, जवाब में निम्मी जी ने कहा कि अभी तो ऐसे लोकगीत उपलब्ध नहीं है और नए रिकार्डस आने पर सुनवाए जाएगें। इस बार भी कुछ पत्र ठीक से सुनाई नही देने की तकनीकी शिकायत के थे। मंगलवार को सुनवाई गई ग़ैर फ़िल्मी क़व्वालियाँ। राग-अनुराग में रविवार और गुरूवार को विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुनवाए।

8 बजे हवामहल में सुनी झलकियाँ - परीक्षा की मुसीबत (लेखक उमाशंकर मालवीय निर्देशक विनोद रस्तोगी), अभिशाप (निर्देशक गंगाप्रसाद माथुर), हैदराबाद केन्द्र की प्रस्तुति - एक पार्टी में (रचना अज़हर अफ़सर निर्देशक ज़ाफ़र अली खाँ), चोर ऐसे आते है (निर्देशक आनन्द दयाल) डायरी (निर्देशक पुरूषोत्तम दारवेकर)

9 बजे गुलदस्ता में गजले और गीत सुनवाए गए। ग़ुलाम अली की लोकप्रिय ग़ज़लें भी शामिल रही।

9:30 बजे एक ही फ़िल्म से कार्यक्रम में प्रेमचन्द को उनकी जयन्ती पर याद करते हुए गोदान फ़िल्म के गाने सुनवाए गए। इसके अलावा सप्ताह में अलबेला, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएगें, चंबल की कसम जैसी नई पुरानी लोकप्रिय फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

रविवार को उजाले उनकी यादों के कार्यक्रम में अभिनेता शम्मी कपूर से बातचीत की अगली कडी प्रसारित हुई। संगीतकार ग़ुलाम मोहम्मद को याद करते हुए अपनी फ़िल्म लैला मजनूँ को याद किया गया।

10 बजे छाया गीत में शुक्रवार को कमल (शर्मा) जी ने रफ़ी साहब को उन्हीं के गीतों से भावात्मक नमन किया। शुरूवात में सुनावाया गीत - मेरी आवाज़ सुनो, फिर तन्मय करने वाला भजन - मन तड़पत हरि दर्शन को आज। बढिया प्रस्तुति। अमरकान्त जी ने मोहब्बत के अच्छे नग़में सुनवाए। शहनाज़ (अख़्तरी) जी ने मौसम के गीत सुनवाए और राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी ने नए गीत सुनवाए। कुल मिलाकर सप्ताह भर अच्छा रहा पर खेद रहा कि मंगलवार को किशोर कुमार को याद नहीं किया गया।

10:30 बजे से श्रोताओं की फ़रमाइश पर लोकप्रिय गीत सुनवाए गए। 11 बजे समाचार के बाद प्रसारण समाप्त होता रहा।

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