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Tuesday, September 23, 2008

श्री क्रिष्णकांतजी का जन्म दिन
दि 15 सितम्बर, 2008 के दिन एक लम्बी सफ़ल फ़िल्मी सफर पूरी करके इन दिनों सुरतमें निवास कर रहे चरित्र अभिनेता और निर्देषक श्री क्रिष्णकांतजी का जन्म दिन था । रेडियो श्री लंका पर यह सूचना एक दिन देरी से प्राप्त होने के कारण उन लोगोने दि. 16 के दिन 15 तारीख़ के जन्म दिन का जिक्र करते हुए उद्दघोषीका श्रीमती ज्योती परमाराजीने उनके स्वस्थ आयु की कामना करते हुए, फिल्म पोस्ट बोक्ष नं 999 का उन पर फिल्माया हुआ गाना जोगी आया ले के संदेसा भगवानका प्रस्तूत किया ।
विविध भारती पर यह सुचना पिछले कई सालो से देने का मेरा सिलसिला हर वक्त उनके द्वारा गिनतीमें नहीं लिये जाने के कारण इस बार मैंनें इस बारेमें लिख़ना ठीक नहीं समज़ा ।
20 सितम्बर मरहूम क्लेरीनेट वादक मास्टर इब्राहीम (मास्टर अजमेरी) की पूण्य तिथी
इस दिन को भी रेडियो श्री लंकाने याद किया । इस मोके पर उनके द्वारा प्रस्तूत फिल्म बड़ी बहन की धून चले जाना नहीं ( जो मेरी एक मास्टर इब्राहीम पर एक पोस्टमें प्रस्तूत करने की कोशिश की थी पर सिर्फ़ गंगा जमूना की धून ही आप सुन पाये थे वह यहाँ नीचे पहेली धून पैश है । ( इस धूनमें बीच के और शुरूआती संगीतमेँ स्व केरशी मिस्त्री का पियानो है ।)

अब इसी धून को आप स्व. श्रीधर केंकरे से बाँसूरी पर सुनिये जो उनके साथी ही थे । :

मेरी एक पोस्टमेँ मैनें साझ पहेली के रूपमेँ स्व कल्याणजी की पूण्य तिथी पर उनके संगीत वाले गीत नींद न मूज़को आये ( फ़िल्म पोस्ट बोक्स नं 999-नहीं कि मेरी गलती अनुसार फ़िल्म सट्टा बाझार- ताजूब है कि किसीने मेरी इस गलती पर मूझे बताया नहीं-क्यों की किसीने पोस्ट में ऋची ही नही ली इस लिये मेरे ध्यान पर इस बात को आते हुए भी अब तक मैं शांत रहा और इंतेज़ार करता रहा ।) की तीन धून में पहेली धून स्वयं स्व कल्याणजी वीरजी शाह की क्ले वायोलीन पर दूसरी बाबला वाधवृंद पर (शायद सिंथेसाईझर पर विजय कल्याणजी शाह थे ), और तीसरी सुरेश यादव की सेक्सोफ़ोन पर (मेहमान वाध्यवृंद संचालक और एकोर्डियन वादक श्री एनोक डेनियेल्स) थी ।
एक दिन कई सालो पहेले रेडियो सिलोन की सुबह की सभा के कार्यक्रम सुन रहा था तब आज की लोकप्यिय उद्दघोषिका श्रीमती ज्योति परमार के पिताजी स्व. दलवीरसिंह परमार ने 10.30 से शुरू हो कर करीब रात्री एक बजे तक चलने वाले कई हिन्दी फ़िल्म संगीत पर आधारित कार्यक्रम के अलावा अरबी भाषामें समाचार की कुछ: बात आयी । उन दिनों रेडियो श्रीलंका की हिन्दी सेवा का रात्री प्रसारण 10 बजे के बाद 25 मीटर पर बन्ध हो कर 31 मीटर पर तबदील होता था पर क्यूं यह पता नहीं था । पर हम लोग 31 मीटर पर ट्यून कर लेते थे । पर उस दिन परमार साहब के बताये समय पर समय से पहेले ही फ़िर से 25 मीटर ट्यून किया, तब एक उस समय मेरे लिये अनजान उद्दघोषक श्री अब्दूल अजीझ मेमण उद्दघोषणा करते सुनाई पड़े । पर भाषामें सभा की जगह नसरियात और मुख़ातीब जैसे शब्द आने लगे । बादमें एक के बाद एक कार्यक्रम प्रस्तूत होते गये जो ज्यादा तर हिन्दी सभा के कार्यक्रम की प्रतिकृति थी, पर एक बात ख़ाश थी, कि आज के कलाकार (फनकार), और एक ही फिल्म से जैसे कार्यक्रम भी सिर्फ़ एक श्रोता के सुचन के अनुसार उस श्रोता का नाम बता कर प्रस्तूत किये जाते थे । पर श्रोता के नामो में भारत के नाम नहीं होते थे पर पूर्व और मध्य अफ़्रीका, गल्फ़ देशो तथा ओस्ट्रेलिया के भारतिय मूल के श्रोता होते थे ( एक नाम विषेष आता था-सिड़नी ओस्ट्रेलिया के विजय नागपाल) । बादमें अरबीमें समाचार भी होते थे जो समय बितने पर इंग्रेजीमें हो गये । जैसे हिन्दी सेवा के हमेशा जवाँ गीतो के फरमाईशी कार्यक्रम आप के अनुरोध पर में शिर्षक गीत लताजी का गाया हुआ अभी तो मैं जवान हूँ होता था, उर्दू सेवाके इसी तरह के कार्यक्रम में इसी शब्दो वाला शायद मल्लीका पोख़राज का गाया हूआ पाकिस्तानी गीत शिर्षक गीत के रूपमें एक अंश तक़ बजता था । और पूरानी फिल्मों के गीतो के यह दोनों फरमाईशी कार्यक्रम रात्री 10.30 से 11 बजे तक़ समांतर आते थे । शनिवार और रविवार अब्दूलजी की छूट्टी पर हिन्दी सेवा के सिंहाली मूल के उद्दघोषक श्री विजय शेखर हिन्दी की जगह उर्दू बोल कर प्रस्तूत होते थे और एक दो बार हिन्दी सेवा के अन्य सिंहाली मूल के उद्दघोषक श्री धरम दास भी उर्दू शब्दों के साथ प्रस्तूत हूए थे । बादमें हिन्दी सेवा का समय भी रात्री पहेले 10.30 तक़ और बाद में 10, 9.30 और 9 तक सीमीत होता गया । उसी तरह उर्दू सभा भी सीमीत होते होते बंध हो गयी ।
अभी रात्री 12.00 बजे यह पोस्ट लिख़ी है इस लिये मात्रा पर ज्यादा घ्यान दे नहीं पाया तो सागरजी से बिनती है कि जरूरी सुधार करें ।
पियुष महेता ।
सुरत-295001.

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