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Friday, September 19, 2008

साप्ताहिकी 18-09-08

इस सप्ताह दो दिन विशेष रहे - ओणम और हिन्दी दिवस। विविध भारती ने हिन्दी दिवस तो याद रखा पर ओणम को पूरी तरह भुला दिया।

केरल राज्य का सबसे बड़ा पर्व है ओणम। विविध भारती तो देश के कोने-कोने में पहुँचता है इस तरह केरल में भी विविध भारती पहुँचता है पर सुबह से रात तक विविध भारती के केन्द्रीय प्रसारण में ओणम का नाम तक नहीं लिया गया।

सुबह के प्रसारण में समाचारों के बाद चिंतन में विद्वानों के विचारों से वन्दनवार का शुभारंभ होता रहा। समापन में देश भक्ति गीत का विवरण केवल एक ही बार बताया गया।

7 बजे भूले-बिसरे गीत में सप्ताह भर कुछ लोकप्रिय गीत जैसे पड़ गय झूले सावन ॠत आई रे और कुछ भूले-बिसरे सुनवाए गए और समाप्ति के एल (कुन्दनलाल) सहगल के गीतों से होती रही।

7:30 बजे संगीत सरिता में प्रसिद्ध गायिका रीता गांगुली द्वारा प्रस्तुत श्रृंखला ठुमरी समाप्त हुई। नायिका के विभिन्न रूपों को बताते हुए ठुमरी गायन पर चर्चा हुई और इस सप्ताह भी बड़े कलाकारों को सुन कर आनन्द आया जैसे बरकत अलि ख़ाँ। मुझे लगता है जिस दिन विविध भारती से संगीत-सरिता कार्यक्रम बन्द हो जाएगा उस दिन से संगीत मे रूचि रखने वालों को क्या इतनी सहजता से पूरे स्पष्टीकरण के साथ यह बन्दिशें सुनने को मिलेगी ?

त्रिवेणी में हुई समझदारी की, जीवन के अंदाज़ की बातें हुई पर हिन्दी दिवस और ओंणम पर भाषा संस्कृति की बात नहीं हुई।

फ़रमाइशी फ़िल्मी गीतों के कार्यक्रम में हिन्दी और तेलुगु दोनों ही भाषाओं के क्षेत्रीय और केन्द्रीय सेवा के कार्यक्रमों में सामान्य रूप से फ़रमाइशी गीत बजते रहे। शुक्रवार को मन चाहे गीत में कार्यक्रम के लगभग बीच में दो फूल फ़िल्म का युगल गीत बजा लता मंगेशकर और महमूद की आवाज़ों में -

मुट्टी कोड़ी कवाड़ी हवा

यह गीत केरल की पृष्ठ्भूमि पर है। अगर इस गीत को सबसे पहले सुनवाते और बजाने से पहले ओणम की शुभकामनाएँ दे देते तो भी पर्याप्त था।

10:5 पर समाचारों के बाद से 10:30 बजे तक और रात में 8:45 से 9 बजे तक क्षेत्रीय प्रसारण में तेलुगु कार्यक्रम एक चित्र गानम में सुबह भले दोन्गलु जैसी लोकप्रिय फ़िल्म के गीत सुनवाए गए जिसमें उदित नारायण का गाया गीत भी था, दोन्गलु का अर्थ है चोर। रात में मा इद्दरू कथा (हम दोनों की कहानी), श्रावण मेघालु जैसी बीच के समय की फ़िल्मों गाने सुनवाए गए।

10:30 से 11 बजे तक जनरंजनि में फ़रमाइशी तेलुगु गानों के बाद 11 से 12 बजे तक प्रसारित होता है तेलुगु कार्यक्रम - हरि विल्लु जैसा कि आप जानते है हरि का अर्थ है ईश्वर। विल्लु का अर्थ है बाण इस तरह इस शीर्षक का अर्थ हुआ ईश्वर का बाण। क्या है ईश्वर का बाण ? हिन्दी में भी तो यही कहा जाता है - इन्द्रधनुष

जैसा नाम है वैसा ही है यह कार्यक्रम विविध रंगों से सजा यानि विविध कार्यक्रम होते है। आमतौर पर कार्यक्रमों की संकेत धुन होती है पर इस कार्यक्रम का शीर्षक गीत है -

आ आ आ आ आ आ ओ ओ
आकाशम लो हरि विल्लु
आनन्दनले पूर्ति ना कोदरिल्लु
अन्दमइना इ लोकम

कोदरिल्लु का अर्थ है थोड़ा सा, अन्दमइना का अर्थ है सुन्दर। गायिका का नाम मुझे पता नहीं। पर छोटा सा मधुर मुखड़ा है जिसे दो बार गाया जाता है।

शुक्रवार को इस कार्यक्रम में संगीतकार के वी महादेवन के संगीत से सजे गीत प्रस्तुत किए गए। इस संगीतकार को इस दिन के लिए चुनने का कारण है कि यह केरल के है। पहले मलयाली फ़िल्मों में संगीत दिया करते थे फ़िर कुछ तमिल फ़िल्मों में संगीत देने के बाद तेलुगु फ़िल्मों में संगीत देने लगे और यहीं बहुत लोकप्रियता मिली। एक घण्टे के इस कार्यक्रम में के वी महादेवन के जीवन और काम के बारे में जानकारी देते हुए उनके लोकप्रिय गीत सुनवाए गए। कुछ फ़िल्में ऐसी थी जो पहले तेलुगु में बनी और बाद में हिन्दी और दोनों ही भाषाओं में हिट रही। मूल रूप से तैयार गीतों में इन्ही का संगीत रहा और अधिकतर गानों की धुनें हिन्दी में लगभग वैसी ही रही। कुछ फ़िल्में है - तेलुगु और हिन्दी में एक ही नाम से बनी - प्रेमनगर (राजेश खन्ना, हेमामिलिनी), तेने मनसु (हिन्दी फ़िल्म - डोली - राजेश खन्ना, बबिता), दसरा बुल्लड़ु (रास्ते प्यार के - शबाना आज़मी, जितेन्द्र, रेखा), श्री श्री मुव्वा (सरगम - ॠषि कपूर, जयाप्रदा)

बुधवार को संगीतकार एल्लयाराजा के स्वरबद्ध किए गीत सुनवाए गए। संगीतकार के जीवन और काम के बारे में जानकारी दी गई। आपके संगीत में सजे कई लोकप्रिय फ़िल्मों के लोकप्रिय गीत है जिनमें से मुख्य है सागर संगमम। दोनों ही दिन कार्यक्रम को प्रस्तुत किया राजगोपाल जी ने।

सोमवार मंगलवार को यह कार्यक्रम छायागीत की तरह प्रस्तुत हुआ। सोमवार को जीवन में आशा और छोटी सी मुस्कान को विषय बना कर फ़िल्मी गीत प्रस्तुत किए गए। ऐसे गीत भी थे जिसमें बालकृष्ण की मोहक मुस्कान भी थी। रोज़ा फ़िल्म का यह गीत भी शामिल था -

चिन्नी चिन्नी आशा मुद्दू मुदू आशा
(चिन्नी का अर्थ है छोटी और मुद्दू का अर्थ है प्यारी)

इसका हिन्दी संस्करण है - दिल है छोटा सा छोटी सी आशा

मंगलवार को विभिन्न समय-बेला के गीत सुनवाए गए जैसे प्राःतकाल की बेला, संध्या बेला, रात्रि बेला आदि। आलेख अच्छा था कहा गया सुबह की बेला सोचने की होती है दोपहर की काम करने की शाम की अनुभव करने की और रात्रि की विश्राम की इसीलिए हर बेला एक जैसी नही होती और भी कई बातें कही गई काव्यात्मक अंदाज़ में - बहुत अच्छा आलेख, प्रस्तुति और गीतों का चुनाव। गुरूवार को विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुनवाए गए।

सुहाना सफ़र में दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक सुनवाए जाने वाले विभिन्न संगीतकारों के गीतों में क्रम वही रहा - शुक्रवार को ए आर रहमान, शनिवार को आदेश श्रीवास्तव, रविवार को स्माइल दरबार, सोमवार को नए दौर के संगीतकारों के नए-नवेले गीतों में नुसरत फ़तह अलि ख़ाँ और बिरजू महाराज के संगीतबद्ध किए गीत सुनना अच्छा लगा, मंगलवार को जतिन-ललित, बुधवार को शिवहरि, गुरूवार को शंकर-एहसान-लाँय के संगीतबद्ध किए गाने बजे।

1 बजे म्यूज़िक मसाला में गाने सामान्य रहे।

3 बजे का समय मुख्यतः सखि-सहेली का होता है। शुक्रवार को फोन पर सखियों से बातचीत की शहनाज़ (अख़्तरी) जी ने और शुक्रवार को ही था ओणम। यह पर्व भी ऐसा है कि इसमें माना जाता है कि भगवान महाबलि धरती पर आकर घर-घर जाकर अपने श्रद्धालुओं से मिलते है इसीलिए इस दिन घर सजाए जाते है। बाहर रंगोली सजाई जाती है, भीतर फूलों, पत्तों से कलात्मक सजावट की जाती है। महिलाएँ सफ़ेद साड़ी छोटी लाल बार्डर की पारम्परिक तरीके से बाँध कर, कलश सजाकर समूह में नृत्य करती है। इसीलिए कम से कम सखि-सहेली में तो शुभकामनाएँ दी ही जा सकती थी।

सोमवार को सखि-सहेली में हिन्दी दिवस की चर्चा हुई। यह बताया गया कि विदेशों में पाठ्यक्रम में हिन्दी शामिल है। सखियों ने कहा कि रविवार को यह कार्यक्रम नहीं होता इसीलिए आज हिन्दी दिवस पर बात हो रही है पर इसी तरह ओणम पर भी बात की जा सकती थी। सोमवार होने के नाते रसोई की बातें हुई। केरल का कोई व्यंजन बता देते पर भुट्टे के राजस्थानी व्यंजन बताए गए। मंगलवार को करिअर मार्ग दर्शन में फिंगरप्रिंट विज्ञान के अध्ययन और इस क्षेत्र में काम की जानकारी दी गई।

शेष दिनों के कार्यक्रम में सामान्य काम की बातें भी होती रही जैसे रक्तदान का महत्व, बिजली की बचत आदि।

शनिवार को सदाबहार नग़में कार्यक्रम में लोकप्रिय गीत सुनने को मिले।

इसके बाद नाट्य तरंग में शनिवार और रविवार को दो किस्तों में नाटक सुना - अकेला गुलमोहर।

4 बजे पिटारा में शुक्रवार को पिटारा में पिटारा में सुना रेणु (बंसल) जी द्वार प्रस्तुत कार्यक्रम चूल्हा-चौका जिसमें बेकडिशस यानि सेक कर बनाए जाने व्यंजन बताए गए। इस कार्यक्रम में बड़े रेस्तराओं के पाक विशेषज्ञों को भी बुलाया जाता है। क्या ही अच्छा होता अगर केरल के कुछ व्यंजन बनाना बताया जाता।

रविवार को शाम 4 बजे यूथ एक्सप्रेस में हिन्दी दिवस का ध्यान रखा गया। वार्ता के अलावा किताबों की दुनिया में व्यंग्यकार प्रकाश जी से कमल जी की बातचीत सुनवाई गई। इसके अलावा खेल जगत से पुरस्कारों की जानकारी दी गई। और जैसा कि उम्मीद की जा रही थी शुरूवात हुई विज्ञान जगत के उस महाप्रयोग से जिससे धरती की शुरूवात का रहस्य खुलने की बात की जा रही है। अच्छी जानकारी दी युनूस जी ने। यही विषय आकाशवाणी के समाचार प्रभाग द्वारा शुरू किए गए नए फोन-इन-कार्यक्रम पब्लिक स्पीक का भी था।

सोमवार को सेहतनामा में डा उर्वशी अरोड़ा से कमल (शर्मा) जी ने रक्तचाप विषय को लेकर बातचीत की। यह बताया गया कि पहले 40 साल के बाद नियमित डाक्टरी जाँच की सलाह दी जाती थी पर अब बेहतर होगा 20-25 साल के बाद से ही नियमित जाँच करवाते रहे क्योंकि युवा वर्ग में भी रक्तचाप की समस्या देखी जा रही है। यह समस्या है भी ऐसी कि इसके लक्षण पहले से दिखाई नहीं देते और पता चलते-चलते देर हो सकती है। अच्छी जानकारी मिली।

हैलो फ़रमाइश में शनिवार, मंगलवार और गुरूवार को श्रोताओं के फोनकाल सुने, हल्की-फुल्की बातचीत के साथ उनके पसंदीदा गीत बजते रहे।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद नए फ़िल्मी गानों के कार्यक्रम फ़िल्मी हंगामा में सामन्य गाने रहे।

5:30 से 7 बजे तक क्षेत्रीय कार्यक्रम होता है जिसमें 6 से 7 तक जनरंजनि में तेलुगु फ़िल्मों से फ़रमाइशी गीत सुनवाए जाते है। 5:30 से 6 बजे तक सोमवार से शुक्रवार तक संध्या रागम कार्यक्रम में विभिन्न कार्यक्रम सुनवाए जाते है। पिछले चिट्ठे में मैनें इसकी पहली बार जानकारी दी थी और थोड़ी सी जानकारी ग़लत दे दी गई थी जिनमें से कुछ बातें मैनें बाद में संपादित कर दी थी पर बाद में मुझे लगा की दुबारा संपादन करने के बजाय अगले चिट्ठे में ठीक जानकारी दे देनी चाहिए। पिछले चिट्ठे की इस ग़लती के लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ। शुक्रवार को सारेगाम कार्यक्रम प्रसारित होता है जिसमें एक ही संगीतकार के स्वरबद्ध किए गीत सुनवाए जाते है। इस सप्ताह संगीतकार घण्टसाला (जो मुख्यतः गायक है) के संगीतबद्ध किए गाने सुनवाए गए जो पचास और साठ के दशक के लोकप्रिय गीत थे। सोमवार को गलम युगलम कार्यक्रम होता है जिसका अर्थ है एक और अनेक जिसमें इस सप्ताह वाणी जयराम के अन्य कलाकारों के साथ गाए गीत सुनवाए गए। मंगलवार को पद (शब्द) लहरी कार्यक्रम में पद (शब्द) था जाबिली (चन्द्रमा) और ऐसे गीत सुनवाए जाते है जिसके मुखड़े में जाबिली शब्द था। बुधवार को आ पाटा मधुरै (वो गीत मधुर है) शीर्षक से कार्यक्रम होता है जिसमें मधुर गीत सुनवाए गए। गुरूवार को कलम परिमलम में किसी एक गीतकार के गीत सुनवाए जाते है। इस सप्ताह गीतकार श्री श्री गारू के गीत सुनवाए गए। शनिवार और रविवार को हुए प्रायोजित कर्यक्रम।

शनिवार को संगीतकार हिमेश रेशमिया ने विशेष जयमाला प्रस्तुत किया। मुझे तो लगा था कि यह कार्यक्रम नई पीढी के नाम रहेगा पर मैं हैरान हो गई जब उन्होनें स्वस्थ मनोरंजन की बात की और संगीतकार रोशन की चर्चा करते हुए ताजमहल जैसी पुरानी लोकप्रिय फ़िल्म का गीत सुनवाया -

जो वादा किया वो निभाना पढेगा

बात यहीं पर नहीं रूकी, राजकपूर का गीत भी सुना - रामय्या वस्तावय्या (यह तेलुगु भाषा के बोल है जिसका अर्थ है रामय्या आता है क्या ?) साथ में सुना अभिमान का गीत तेरी बिंदिया रे और उनके अपने स्टाइल के गीत भी सुनवाए जैसे मुझसे शादी करोगी। कुल मिलाकर बढिया रहा कार्यक्रम।

रविवार को फ़ौजी भाइयों और उनके परिजनों के संदेशों के साथ गाने सुनवाए गए। इस कार्यक्रम के बारे में क्या कहे, अंग्रेज़ी में कहावत है - व्हेन हार्ट स्पीकस इट इज़ इन्डिसेन्ट टू कमेन्ट। शेष दिन नए और बीच के समय के गाने बजते रहे।

7:45 पर शुक्रवार को लोकसंगीत में सुनवाए गए भोजपुरी लोकगीत, आवाज़े थी संतराम रागेशी (शायद लिखने में ग़लती हो) और अन्य कलाकारों की। शनिवार और सोमवार को पत्रावली में विभिन्न कार्यक्रमों पर श्रोताओं ने अपनी पसंद और नापसंद बताई। एक महत्वपूर्ण सूचना दी गई कि स्वर्ण जयन्ति के अवसर पर अब तक हर महीने की 3 तारीख़ को मनाए जाने वाले मासिक पर्व के कार्यक्रम थोड़े से संपादित कर 26 सितम्बर से 2 अक्तूबर तक दोपहर 12 बजे से शाम 5:30 बजे तक दुबारा सुनवाए जाएगे। बुधवार को इनसे मिलिए कार्यक्रम में बहुआयामी व्यक्तितत्व गीता बलसारा से कमल (शर्मा) जी की बातचीत की अगली कड़ी सुनवाई गई जिसमें उनके मीडिया के व्यक्तित्व के अलावा शास्त्रीय संगीत से जुड़ने की बातें हुई। गुरूवार और रविवार को राग-अनुराग में विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुने।

8 बजे हवामहल में इस सप्ताह भी पुरानी झलकियाँ ही सुनवाई गई। रात 9 बजे गुलदस्ता में मेहदी हसन की गाई ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी जिसे उन्होनें ही संगीत से सजाया था। एकदम पारम्परिक बन्दिश। अन्य ग़ज़लों में आधुनिकपन झलकता रहा।

9:30 बजे एक ही फ़िल्म से कार्यक्रम में अजनबी, मैने प्यार किया जैसी लोकप्रिय फ़िल्मों के गीत बजे।

रविवार को उजाले उनकी यादों के कार्यक्रम में संगीतकार नौशाद से अहमद वसी की बातचीत की अगली कड़ी प्रसारित हुई। इसमें कार्यक्रम की परम्परा के अनुसार साथी संगीतकारों की चर्चा हुई।

10 बजे छाया गीत में फूलों की, प्यार की बातें हुई। यहाँ हम एक छोटा सा अनुरोध करना चाहेंगे कि स्वर्ण जयन्ति के इस अवसर पर एक सप्ताह विशेष छायागीत सुनवाइए जिसे वो उदघोषक प्रस्तुत करें जिनकी आवाज़े सुने अर्सा हो गया - बृजभूषण साहनी, राम सिंह पवार, मोना ठाकुर, अनुराधा शर्मा, भारती व्यास, अचला नागर…

2 comments:

Anonymous said...

annpurna ji aapne mere man ki baat keh di . purane udghosko ka chhayageet sunne ki ichha meri bhi hai aur mahender modi ji dwara parstut chhayyageet bhi sunna chahungi .aapki saptahik samiksha ka pure week intzaar rehta hai.bare achhe tarike se aap sare karyakrmo ke baare mein likhti hai. aap hi ke karn ab radionamaa ka safar jaari hai
MANJOT BHULLAR

डॉ. अजीत कुमार said...

बड़ी अच्छी जानकारी भरी साप्ताहिकी रही. आभार!

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आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद।

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