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Friday, December 19, 2008

साप्ताहिकी 18-12-08

सप्ताह भर सुबह 6 बजे समाचार के बाद बाल गंगाधर तिलक, जवाहर लाल नेहरू, विनोबा भावे, बंगला भाषी साहित्यकार और विदेशी चिंतकों के साथ उपनिषदों से भी कथन बताए गए। मंगलवार को वन्दनवार की शुरूवात ऐसे नए भक्ति गीत से हुई जिसकी धुन मोहरा फ़िल्म के गीत तू चीज़ बड़ी है मस्त-मस्त की है। इस शिव भक्ति गीत के बोल कुछ इस तरह है -

भोले का पावन धाम, तू जप ले यह नाम

इस तरह के भक्ति गीत शहरों में गणेश ऊत्सव में अच्छे लगते है पर आजकल के संगीत के अनुसार ऐसे पैरोडीनुमा भक्ति गीत वन्दनवार में भी चल ही जाते है। सप्ताह भर अंत में सुनवाए गए देशगान भी अच्छे रहे जैसे - जननी जन्मभूमि है अपनी

एकाध बार विवरण भी बताया गया।

7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम रविवार को गीतकार शैलेन्द्र को समर्पित किया गया। शैलेन्द्र के बहुत लोकप्रिय गीत है पर इस कार्यक्रम में उनके भूले बिसरे गीतों को सुनवाया गया, गायक कलाकारों में भी भूले बिसरे नाम रहे जैसे सविता बैनर्जी, बिजाँय मुखर्जी। अन्य दिनों में भी एकाध लोकप्रिय गीत के साथ भूले बिसरे गीत बजते रहे। बहुत दिन बाद सुना यह गीत -

हम भी नए तुम भी नए देखो सँभलना

हर दिन समापन कुन्दनलाल (के एल) सहगल के गीतों से होता रहा।

बहुत दिन हुए सी एच आत्मा का गाया कोई गीत नहीं सुना।

7:30 बजे संगीत सरिता में श्रृंखला गंधार गुंजन जारी रही। इसके पहले खण्ड को जारी रखते हुए ख़्यात कलाकार पंडित शरद साठे जी ने शुद्ध और कोमल गंधार स्वर के रागों की श्रृंखला में पहले प्रातःकालीन फिर शाम में गाए जाने वाले रागों जैसे राग भैरव बहार, देव गंधार, हंसकेलि, जोल, जोल कौंस जो राग जोल और चन्द्र कौंस से मिलकर बना है, संपूर्ण यानि सातों सुरों वाले राग जयजयवन्ती की चर्चा की और बंदिशे तथा फ़िल्मी गीत भी सुनवाए। बहुत ही कम चर्चित राग जोगिया की भी जानकारी दी, यह राग इतना क्म चर्चित है कि इस पर आधारित फ़िल्मी गीत ढूँढने पड़ते है।

7:45 को त्रिवेणी में जीवन में पैसे को अनावश्यक महत्व देने की, ईर्ष्या नफ़रत की बात हुई और सोमवार को यातायात जैसे गंभीर विषय को भी रोचकता से प्रस्तुत किया गया और मज़ेदार गीत सुनवाए गए जैसे चलती का नाम गाड़ी का यह गीत -

बाबू समझो इशारे…
यहाँ चलती को गाड़ी कहते है
पोम पोम बाजू…

दोपहर 12 बजे एस एम एस एस के बहाने वी बी एस के तराने कार्यक्रम में शुक्रवार को पचास साठ के दशक की बेहतरीन फ़िल्में लेकर आईं रेणु (बंसल) जी, आम्रपाली, ज़िद्दी, शागिर्द, शिकार, लव इन टोकियो, तुमसा नहीं देखा, जाल और इन फ़िल्मों के बेहतरीन गानों के लिए एस एम एस आए। शनिवार को नींद हमारी ख़्वाब तुम्हारे, हमराज़, सूरज, सावन की घटा, यह रात फिर न आएगी जैसी लोकप्रिय फ़िल्में लेकर आईं सलमा जी। सोमवार को कमल (शर्मा) जी लाए साथी, दुल्हन एक रात की, बहारों के सपने, पूजा के फूल जैसी पचास साठ के दशक की लोकप्रिय फ़िल्में पर यह कार्यक्रम हमने 12:15 बजे से सुना क्योंकि 12 बजे से क्षेत्रीय भाषा तेलुगु में प्रायोजित कार्यक्रम का प्रसारण हुआ आकाशम मन दी (आकाश हमारा है) शीर्षक से। मंगलवार को आईं सलमा जी फ़िल्में रही हमराज़, किशन कन्हैय्या, दिलवाले, हीरो, दयावान, बेटा, इश्क, करण अर्जुन, हम दिल दे चुके सनम, बोल राधा बोल जैसी नई और कुछ समय पुरानी फ़िल्में। बुधवार को तूफ़ानी नग़में लेकर आए युनूस जी फ़िल्में रही शान, नसीब, खून पसीना, लावारिस जैसी अस्सी नब्बे के दशक की लोकप्रिय फ़िल्में। गुरूवार को आए राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी फ़िल्में रही प्रतीज्ञा, राम और श्याम, जानी मेरा नाम, रेशमा और शेरा, सीता और गीता, हम दोनों, मेला जैसी साठ सत्तर के दशक की लोकप्रिय फ़िल्में।

हर गाने के लिए संदेश भेजने वालों के नाम और शहर का नाम बताया जाता रहा। इस कार्यक्रम को विजय दीपक (छिब्बर) जी प्रस्तुत कर रहे है।

1:00 बजे म्यूज़िक मसाला कार्यक्रम में दर्दे रब रब एलबम से दलेर मेहदी का गाया गीत बहुर मस्त-मस्त रहा -

दिल सोणी सोणी करता है
पर प्यार करन को डरता है
रब ख़ैर करे

1:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम में साठ के दशक से अब तक की जैसे दो रास्ते, पवित्र पापी, ज़माने को दिखाना है, राजू बन गया जैंटलमैन, तेरे नाम फ़िल्मों के गीत श्रोताओं के अनुरोध पर सुनवाए गए।

क्षेत्रीय केन्द्र के ऐसे ही तेलुगु गीतों के कार्यक्रम जनरंजनी के संबंध में एक नई बात हुई। यह कार्यक्रम विभिन्न समयों पर होता है, दोपहर 2:30 से 3 बजे तक भी होता। इस दोपहर के कार्यक्रम की जानकारी 1 बजे झरोखा में देते समय शहरों के नाम बताए गए और कहा गया कि इन क्षेत्रों के श्रोताओं के फ़रमाइशी गीत सुनिए जनरंजनी कार्यक्रम में। ऐसा मैने पहली बार सुना और सुन कर अच्छा भी लगा, मेरे ख़्याल से ऐसे नए प्रयोग होते रहने चाहिए जिससे ताज़गी बनी रहती है।

3 बजे सखि सहेली में शुक्रवार को हैलो सहेली कार्यक्रम में फोन पर सखियों से बातचीत की शहनाज़ (अख़्तरी) जी ने। श्रोता सखियों से हल्की फुल्की बातचीत हुई जिससे यह जानकारी मिली कि यह सखियाँ विविध भारती के और कौन से कार्यक्रम सुनती है। अधिकतर कम शिक्षित सखियों के फोन आए जिनमें से अधिकांश घरेलु महिलाएँ थी। उनकी पसन्द के गीत सुनवाए गए जिनमें से नए गाने अधिक थे।

फोन इन कार्यक्रमों में चाहे हैलो सहेली हो या हैलो फ़रमाइश, छोटी उमर के श्रोता अक्सर पुराने गाने पसन्द करते है और बड़ी उमर के श्रोता नए गाने पसन्द करते जैसे दिल तेरा आशिक। विविध भारती के श्रोताओं का भी जवाब नहीं।

सोमवार को मटर का हलुआ और मीठा पनीर पराठा बनाना बताया गया। मटर का हलुआ तो ठीक है क्योंकि यह सामान्य जानकारी नहीं है पर मीठा पनीर पराठा… मैं तो समझती थी पराठा तो पराठा है, नमक डालकर बनाए या शक्कर, किसी भी चीज़ का बना ले तरीका तो वही होता है। मुझे नहीं पता था कि हर पराठे की विधि बताई जानी चाहिए ख़ैर हमें प्रतीक्षा है अगली कड़ियों में चाय बनाना, दूध गरम करना, आलू उबालना, अण्डे उबालना जानने की… बाद में टिप्स बताए गए जिनमें से अधिकतर पुराने थे उसके बाद सूची पढकर सुनाई गई विभिन्न राज्यों के व्यंजनों के नामों की। मंगलवार को करिअर बनाने के लिए एनिमेशन फ़िल्म बनाने के क्षेत्र की जानकारी दी गई साथ-साथ नए फ़िल्मी गीत सुनवाए गए। बुधवार को सौन्दर्य में इस बार भी वही खीरे, पपीते, संतरे, बर्फ़ से त्वचा की देखभाल विशेष कर फलों का रस त्वचा पर लगाने का नुस्का बताया गया। शहनाज़ (अख़्तरी) जी ने मुहावरा भी पुराना ही बताया An Apple par day keeps the Doctor away अरे भई… रोज़ एक सेप खाकर स्वस्थ रहने की बात अब पुरानी हो गई है। नए शोधों से पता चलता है बहुत अधिक पोषक तत्व अमरूद फल में होते है, इसके अलावा और भी फल है जो सेप से ज्यादा पौष्टिक है। इस दिन एक ही बात अच्छी लगी कि सुनवाए गए गीतों में सत्तर के दशक की फ़िल्म इम्तिहान का लता जी का गाया यह गीत बहुत दिन बाद सुना -

रोज़ शाम आती थी मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी मगर ऐसी न थी

गुरूवार को सफल महिलाओं की जानकारी देते हुए झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई के बारे में बताया गया। सखियों के फ़रमाइशी नई पुरानी फ़िल्मों जैसे तारे ज़मीन पर, बीस साल बाद के गाने सुनवाए गए।

शनिवार और रविवार को सदाबहार नग़में कार्यक्रम में लोकप्रिय फ़िल्मों के सदाबहार गीत सुनवाए गए।

3:30 बजे शनिवार और रविवार को नाट्य तरंग में इस बार भी बौद्धिक स्तर का नाटक सुनवाया गया।
पिटारा में शुक्रवार को पिटारे में पिटारा कार्यक्रम में चूल्हा चौका कार्यक्रम फिर एक बार प्रसारित किया गया जिसमें रेणु (बंसल) जी ने ऐसे विशेषज्ञ से बातचीत की जो ऐसे व्यंजन बनाना जानते है जो पूरी दुनिया में खाए जाते है। यह समझने वाली बात है कि ऐसे व्यंजनों की चर्चा दिसम्बर में ही कर सकते है जो क्रिसमस का महीना है। व्यंजन बताए गए कुकीस, विशेष तरह की ब्रेड बनाना। हम पहले भी लिख चुके है और आज फिर अनुरोध कर रहे है कि रेणु जी द्वारा प्रस्तुत पहले प्रसारित किया जा चुका कार्यक्रम चूल्हा चौका एक बेहतरीन कार्यक्रम है इसी के अंश सोमवार को सखि सहेली में सुनवाए जाए तो अच्छा लगेगा और उपयोगी भी रहेगा।

सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में डा विकास गुप्ते से निम्मी (मिश्रा) जी ने बातचीत की। विषय रहा स्लिप डिस्क। बहुत अच्छी और विस्तृत जानकारी रही। डाक्टर साह्ब ने यह भी बताया कि स्लिप डिस्क कहते किसे है। यह समस्या होने पर कमर में फिर पैरों में दर्द होता है। इस दिशा में गुप्ते जी ने सफल आपरेशन भी किए है। अपने काम की तरह डाक्टर साहब की फ़िल्मी गानों की पसन्द भी सुलझी हुई है जैसे मधुमती फ़िल्म का यह गीत सुनवाया -

सुहाना सफ़र और ये मौसम हँसी

बुधवार को आज के मेहमान कार्यक्रम में गायक कुमार शानू से रेणु (बंसल) जी की बातचीत सुनवाई गई। अच्छी बातचीत रही।

हैलो फ़रमाइश में शनिवार को मंगलवार और गुरूवार को भी विभिन्न स्तर के श्रोताओं के फोन आए सभी से हल्की-फुल्की बातचीत होती रही और उनके पसंदीदा नए पुराने गीत बजते रहे।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद नए फ़िल्मी गानों के कार्यक्रम फ़िल्मी हंगामा में सुनवाया गया गीत - क्रेज़ी किया रे। यह गीत तो फ़रमाइशी कार्यक्रमों में भी सुनवाया जाता है। फ़िल्मी हंगामा में बिल्कुल ही नए गाने सुनवाए जाए तो ठीक रहेगा जिससे श्रोता नए गानों से परिचित हो सकेगें।

7 बजे जयमाला में सुनवाए गए गानों में नए पुराने अच्छे गीत सुनवाए गए। फ़िल्म सपनों का सौदागर से लता जी का गाया यह गीत बहुत दिनों बाद सुना -

नादाँ की दोस्ती जी की जलन
जाने न बालमा प्रीत की लगन

लोफ़र फ़िल्म के गाने का विवरण बताते समय फिर गड़बड़ हुई, यह गीत आशा भोंसले ने गाया है -

मोतियों की लड़ी हूँ मैं

जबकि लताजी का गाया बताया गया। यहाँ एक बात बताना चाहते है कि रविवार को भी जयमाला कार्यक्रम अन्य दिनों की तरह ही प्रसारित हो रहा है पर अब भी क्षेत्रीय केन्द्र से झरोखा में जयमाला संदेश बताया जाता है। शनिवार को विशेष जयमाला प्रस्तुत किया अभिनेता यशपाल शर्मा ने। खुद के बारे में कम बताया और इधर उधर की बातें की पर गाने नए पुराने दोनों अच्छे सुनवाए।

7:45 पर शुक्रवार को लोकसंगीत में लता जी और साथियों का गाया मराठी लोक गीत सुनवाया गया जिसे सुनकर मुझे बचपन की याद आई जब हमने स्कूल में मछुआरों का एक गीत प्रस्तुत किया था, बोल कुछ ऐसे ही थे। लेकिन पता नही यह गीत मछुआरों का ही था या कोई और, क्योंकि इन गीतों से विषय पकड़ना थोड़ा मुश्किल होता है। इसके अलावा प्रेमलता लांबा से नेपाली गीत भी सुना। शनिवार और सोमवार को पत्रावली में रेणु (बंसल) जी के साथ पधारे कमल (शर्मा) जी। इस बार पत्र विविध शिकायतों के थे जैसे तकनीकी समस्या कि एफ़ एम पर विविध भारती सुनाई नहीं देती, क्षेत्रीय केन्द्रों के प्रसारण से होने वाला व्यवधान जिसके समाधान में कोशिश करने का आश्वासन दिया गया। मंगलवार को बज्म-ए-क़व्वाली में धर्मा और ताजमहल फ़िल्म की क़व्वालियाँ सुनवाई गई। बुधवार के इनसे मिलिए कार्यक्रम में संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान के परियोजना अधिकारी जगदीश जी से बातचीत की अगली कड़ी सुनवाई गई। रविवार और गुरूवार को राग-अनुराग में विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुने, गुरूवार को छाया (गांगुली) जी की आवाज़ में गमन फ़िल्म की ग़ज़ल अच्छी लगी - आपकी याद आती रही रात भर

8 बजे हवामहल में सुनी हास्य झलकियाँ और दाँत उखड़ गए, विचित्र मित्र ( रचना एम ए लतीफ़ निर्देशक गंगा प्रसाद माथुर), एक और सच (निर्देशिका अनुराधा शर्मा) बहुत दिन बाद विविध भारती से अनुराधा शर्मा का नाम गूँजा, वैसे आवाज़ सुने बरसों हो गए।

9 बजे गुलदस्ता में सप्ताह भर में सबसे अच्छा लगा ग़ुलाम अली की आवाज़ में बहादुर शाह ज़फ़र का यह कलाम सुनना -

बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी
जैसी अब है तेरी महफ़िल कभी ऐसी तो न थी

यह कलाम किसी की भी आवाज़ में कभी भी सुने, ताज़ा ही लगता है। मैनें पहली बार यह कलाम बहुत साल पहले रूना लैला की आवाज़ में सुना था दूरदर्शन के आरोही कार्यक्रम में।

9:30 बजे एक ही फ़िल्म से कार्यक्रम में सप्ताह भर कुछ अच्छे गीत सुनने को नहीं मिले, ठीक-ठाक गीत ही सुनवाए गए। अंधा कानून, झूठा कहीं का, घराना, जिस्म, दो झूठ फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

रविवार को उजाले उनकी यादों के कार्यक्रम में अभिनेत्री माला सिन्हा से कमल (शर्मा) जी की बातचीत की अगली कड़ी सुनी। माला सिन्हा ने बताया कि वो बचपन से ही दिलीप कुमार जी की फैन रही। चार साल की उमर में देखी थी उनकी फ़िल्म नदिया के पार, जिसका गीत भी बड़ी मधुरता से गुनगुना कर सुनाया पर व्यस्तता के कारण उनके साथ काम करने का अवसर ही नहीं मिला। अब हम भी सोचने लगे है कि माला सिन्हा और दिलीप कुमार को साथ-साथ देखना कैसा लगता ? शायद बहुत अच्छा… मधुबाला को भी याद किया।

10 बजे छाया गीत में कुछ-कुछ नया-नया सा, तो था। प्रेम कहानियाँ कहते गीत सुनवाए गए -

एक था गुल और एक थी बुलबुल (फ़िल्म - जब जब फूल खिले)
प्रेम कहानी में एक लड़का होता है एक लड़की होती है (फ़िल्म - प्रेम कहानी)

इस बार भी अशोक जी अच्छे गीत चुन कर लाए बिल्कुल रजनीगन्धा के फूलों की तरह महकते हुए।

चलते चलते मंजोत भुल्लार जी की फ़रमाइश पूरी कर देते है। मंजोत जी ने पिछली साप्ताहिकी पर टिप्पणी की कि मैनें विविध भारती पर बहुत दिनों से नहीं सुने गए जिन गीतों की चर्चा की, उनके बोल बताऊँ। चलिए, हम हर साप्ताहिकी में ऐसा एक गीत याद दिलाएगें। इस बार यह गीत, साठ के दशक की शम्मी कपूर अभिनीत फ़िल्म लाट साहब, आवाज़ रफ़ी साहब की, संगीत शंकर जय किशन का, बोल है -

जाने मेरा दिल किसे ढूँढ रहा है इन
हरी भरी वादियों में

इस गीत के संगीत में घोड़े की चापों (पैरों की आवाज़) का बहुत सुन्दर प्रयोग हुआ है।

4 comments:

विनय said...

बढ़िया है!

yunus said...

हम्‍म । जे आखिरी वाला सिलसिला अच्‍छा है ।
और हां । अनुराधा जी अब इस संसार में नहीं हैं ।
कुछ बरस पहले उनका निधन हो गया ।
इसी तरह उषा साराभाई भी अब इस संसार में नहीं हैं । दरअसल रेडियो के सितारों के अवसान की खबरें नहीं बनतीं । चूंकि ये रेडियोनामा के शुरू होने से पहले की बातें हैं इसलिए यहां भी बात नहीं हो सकीं ।

annapurna said...

युनूस जी ! रेडियो के वो सितारे जिनकी आवाज़े आजकल नियमित नहीं सुनाई दे रही, उनके बारे में जानकारी आप और रेडियोनामा के अन्य सदस्य अगर दे सकें तो ठीक रहेगा। क्या ऐसा सिलसिला शुरू किया जा सकता है ?

Anonymous said...

annapurna ji paranthe ki vidhi batana mujhe theek laga . bahot se aise log bhi honge jo parantha banane ka sahi tareeka na jante ho.

monday ke prog bahot achhe rahe (15.12)pehle sms ke bahane mein kamal ji ne umda songs sunvae aur 2.30 baje fir se badia gaane le kar aaye . aur somwaar ka sakhi saheli bhi purane songs ke karan bahot achha lagta hai.

aapne meri farmaish to puri kar di ab dekhte hai vbs aapki farmaish kab puri karti hai

aur local stn ke prayojit karyakarm hame bhi preshaan karte hai . sunday aur monday ko to sms ke bahane ... 12.30 se shuru karte hai.aur baki din 12.15 baje

good post keep writing

manjot bhullar

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