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Thursday, December 30, 2010

गैर फिल्मी गीतों के कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 30-12-10

विविध भारती से गैर फिल्मी गीतों के दो कार्यक्रम प्रसारित हो रहे हैं - वन्दनवार और गुलदस्ता. एक भक्ति गीतों का दैनिक कार्यक्रम हैं और दूसरा गजलो का कार्यक्रम हैं जो सप्ताह में तीन बार प्रसारित होता हैं।

सुबह 6:00 बजे दिल्ली से प्रसारित होने वाले समाचारों के 5 मिनट के बुलेटिन के बाद 6:05 पर हर दिन पहला कार्यक्रम प्रसारित होता हैं - वन्दनवार जो भक्ति संगीत का कार्यक्रम हैं। इसके तीन भाग हैं - शुरूवात में सुनवाया जाता हैं चिंतन जिसके बाद भक्ति गीत सुनवाए जाते हैं। इन गीतों का विवरण नही बताया जाता हैं। पुराने नए सभी गीत सुनवाए जाते हैं। उदघोषक आलेख प्रस्तुति के साथ भक्ति गीत सुनवाते हैं और समापन देश भक्ति गीत से होता हैं। आरम्भ और अंत में बजने वाली संकेत धुन बढ़िया हैं।

शाम बाद के प्रसारण में जयमाला के बाद सप्ताह में तीन बार शुक्रवार, रविवार और मंगलवार को 7:45 पर 15 मिनट के लिए प्रसारित किया जाता हैं कार्यक्रम गुलदस्ता जो गजलों का कार्यक्रम हैं।

इस तरह हम गैर फिल्मी गीतों में भक्ति गीत, देश भक्ति गीत और गजल सुनते हैं। आजकल नए जमाने के गीतों में किस तरह का गीत-संगीत चल रहा हैं, इसका पता विविध भारती से नहीं चल रहा। हमारा अनुरोध हैं कि नए जमाने के गीतों का एक ऐसा कार्यक्रम भी शुरू कीजिए।

कुछ समय पहले तक शाम बाद के प्रसारण में जयमाला के बाद 7:45 पर 15 मिनट के लिए दो साप्ताहिक कार्यक्रम प्रसारित होते थे मंगलवार को बज्म-ए-क़व्वाली और शुक्रवार को लोक संगीत का कार्यक्रम हम अनुरोध करते हैं कि हमारी संस्कृति से जुड़े इन दोनों कार्यक्रमों को दुबारा शुरू कीजिए जिससे गैर फिल्मी गीतों के सिमटते समय को विस्तार भी मिलेगा और सबसे बड़ी बात श्रोतागण विशेष कर युवा पीढी संस्कृति से दूर नही होगी।

आइए, इस सप्ताह प्रसारित इन दोनों कार्यक्रमों पर एक नजर डालते हैं -

शुक्रवार को शुरूवात की गणेश वन्दना से - जय गणेश जय गणपति नायक सब विधि पूजत सब विधि नायक
उसके बाद प्रार्थना सुनवाई - हम जाने प्रभु या तुम जानो हमें तुमसे हैं प्यार कितना

भक्ति गीतों का समापन किया शबरी के इस भक्ति गीत से - राम जी आएँगे लक्ष्मण आएगे शबरी कि कुटिया को स्वर्ग बनाएगे

शनिवार को प्रार्थना और नाम की महिमा बताते भक्ति गीत सुनवाए गए - प्रार्थना श्री भगवान कीजिए जन जन का कल्याण

राम रमैया रटा करो कृष्ण कन्हैया रटा करो
भक्ति से मिल जाए दोनों
नाम उन्ही का लिया करो

रविवार को शुरूवात की रामचरित मानस के अंश से। मुकेश और साथियो के गाए इस अंश से जुड़ा यह भक्ति गीत भी सुनवाया - भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी

अगला भजन भी राम की महिमा का रहा, इसके बाद तुलसी दास द्वारा रचित यह पुराना लोकप्रिय भजन बहुत दिन बाद सुन कर अच्छा लगा - श्री रामचंद्र कृपालु भजमन

सभी रामभक्ति गीत सुनवाए गए जिसमे प्रमुख तुलसी की रचनाएं रही, ध्यान नही आ रहा यह क्या ख़ास दिन रहा।

सोमवार को शुरूवात की भक्ति गीत से -

जब यही हो लगन मन ये गाए मगन
मन पुलकित हुआ आनंदित हुआ
मन में प्रभुजी समाने लगे

जिसके बाद राम और कृष्ण भक्ति के गीत सुने - अवधपुरी ले चलो और माँ यशोदा जब कहे माखन चोर हैं ग्वाला

मंगलवार की शुरूवात अच्छी रही, गणेश स्तुति सुनवाई गई, मुझे याद नही आ रहा.... यह पहले॥ शायद ही मैंने सुनी हो। भक्ति गीत सुना -

गोविन्द के गुण गाइए गोपाल के गुण गाइए
द्वार मन के खोल कहिए आइए प्रभु आइए

बुधवार को शुरूवात हुई इस लोकप्रिय भक्ति गीत से -

सबकी नैय्या पार लगाइय्या कृष्ण कन्हैय्या सांवरे, राम धुन लागी गोपाल धुन लागी

इसके बाद सुनवाई गई कबीर की रचना। समापन कृष्ण भक्ति गीत से किया।

आज का कार्यक्रम ठीक नही रहा। शुरूवात की इस रचना से -

गोविन्द के गुण गाइए गोपाल के गुण गाइए
द्वार मन के खोल कहिए आइए प्रभु आइए

जो मंगलवार को सुनवाई गई थी। इसके बाद अनूप जलोटा का गाया भक्ति गीत सुना, इस सप्ताह अनूप जलोटा के गाए पहले ही दो-तीन भक्ति गीत सुनवाए जा चुके। इसके बाद कबीर की रचना सुनवाई जबकि कबीर की एक रचना कल ही सुनवाई गई थी।
इस तरह एक ही सप्ताह में एक ही रचनाकार के, गायक के भक्ति गीत बार-बार सुनवाए गए, और एक तो वही भजन दुबारा सुनवा दिया गया जबकि कई रचनाकारों और गायक कलाकारों के कई भक्ति गीत ऐसे हैं जो लम्बे समय से नही सुनवाए गए - जैसे रसखान की भक्ति रचनाएं, सूरदास के पद, प्रकाश कौर की आवाज में नानक की वाणी, जुतिका राय के गाए भक्ति गीत, आगे के समय की रचनाओं में वाणी जयराम के गाए मीरा भजन, अनुराधा पौडवाल की गाई स्तुतियाँ। यह अनुरोध हैं कि नए-पुराने सभी भक्ति गीत सुनवाइए। हमें पता हैं कि इतनी रचनाएं विविध भारती के संग्रहालय में हैं कि जल्दी-जल्दी दुबारा प्रसारण की आवश्यकता नही रहती हैं।

हर दिन वन्दनवार का समापन होता रहा देश भक्ति गीतों से, रविवार को नया देशभक्ति गीत सुनना अच्छा लगा -

सपनों से प्यारे देश हमारे मिटने न देगे तेरी शान रे

यह लोकप्रिय गीत सुनवाए गए -

मिल के चलो, चलो भाई मिल के चलो

जय जय जय जन्म भूमि सकल दुःखहारी

यह भूमि हमारी वीरो की हम हिन्दो की संतान हैं

जननि जन्मभूमि प्रिय अपनी

जिन्हें बार-बार सुनवाया जाता हैं। बहुत से देशभक्ति गीत ऐसे हैं जिन्हें लम्बे समय से नही सुना जैसे सतीश भाटिया के स्वरबद्ध किए गीत, लक्ष्मी शंकर और अम्बल कुमार के गाए गीत। खासकर एक विशेष काल अवधि में लिखी गई हिंदी साहित्य की रचनाएं जैसे जयशंकर प्रसाद, सोहनलाल द्विवेदी, सुभद्राकुमारी चौहान की रचनाएं साहित्य की अनमोल धरोहर हैं जिसे संगीत में ढाल कर आकाशवाणी ने संगीत की अमूल्य निधि बना दिया। अगर इन रचनाओं को सुनवाने में तकनीकी असुविधा हैं तो इन रचनाओं को नए कलाकारों से गवाया जा सकता हैं।

इस सप्ताह भी वन्दनवार में फिल्मी भजन और फिल्मो से देश भक्ति गीत सुनवाए गए। हमारा अनुरोध है कृपया फिल्मी भजन और देश भक्ति गीतों का अलग कार्यक्रम रखिए, ऐसे समय जहां क्षेत्रीय कार्यक्रमों का समय न हो ताकि हम इन फिल्मी भक्ति गीतों का अलग से आनंद ले सके।

गुलदस्ता कार्यक्रम में शुक्रवार को रफी साहब के जन्म दिन पर यह कार्यक्रम उन्ही को समर्पित रहा। उनकी गाई विविध गजले सुनवाई गई। शुरूवात की इस मक़बूल गजल से, कलाम अंजान का जिसकी तर्ज बनाई श्याम सरन ने -

मेरे लिए तो वही पल हैं हसीं बहार के
तुम सामने बैठी रहो मैं गीत गाऊँ प्यार के

इसके बाद कैफी आजमी का कलाम सुना, तर्ज खैय्याम की जिसके बाद यह गजल सुनवाई गई पर इसके शायर का नाम नही बताया -

एक ही बात जमाने की किताबो में नही
जो गमे दोस्त में नशा हैं वो शराबो में नही

महफ़िल एक़तेदाम को पहुंची सबा अफगानी के कलाम से - हाल देखा जो बेकरारो का दिल लरजने लगा सितारों का

रविवार को शुरूवात हुई मोहम्मद हुसैन और अहमद हुसैन की युगल आवाजों में कतिल राजस्थानी के कलाम से -

दिल ने चाहा तो पैदा रास्ता जरूर होगा

जिसके बाद कतिल शिफाई को सुना अशोक खोसला की आवाज में - जब तेरे शहर से गुजरता हूँ तेरी रुसवाइयों से डरता हूँ

मंगलवार का गुलदस्ता बेहतरीन रहा। मशहूर कलाम सुनवाए गए और गुलोकार रहे गजल की दुनिया के सिरमौर। तीन गजले सुनी। मोमिन के कलाम से आगाज हुआ, गुलोकारा रही गजल की दुनिया की मलिका बेगम अख्तर -

वो जो हममे तुममे करार था, तुम्हे याद हो के न याद हो

उसके बाद सुना गजलो के सरताज मेहदी हसन की आवाज में यह मशहूर कलाम - पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने हैं

यहाँ एक बात खटक गई, शायर का नाम नही बताया गया। फिर शायर जानिस्सार अख्तर के कलम से निकली गजल जिसे प्रस्तुत किया लोकप्रिय गायक जोडी राजेन्द्र मेहता और नीना मेहता ने -

जब आँचल रात का गहराए और सारा आलम सो जाए
तुम मुझसे मिलने शमा जला कर ताजमहल में आ जाना

इस सप्ताह नए पुराने शायर, गुलोकार और गायिकी के अंदाज से खूब महका गुलदस्ता। इसकी शुरू और आखिर में बजने वाली संकेत धुन भी अच्छी हैं। सबसे अच्छा लगता हैं कार्यक्रम के अंत में यह कहना - ये था विविध भारती का नजराना - गुलदस्ता !

और ये थी इस साल की आखिरी साप्ताहिकी....

आप सबको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !

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