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Thursday, March 17, 2011

गैर फरमाइशी फिल्मी गीतों के कार्यक्रमों की साप्ताहिकी 17-3-11

विविध भारती से गैर फरमाइशी फिल्मी गीतों के तीन कार्यक्रम सुने भूले-बिसरे गीत, गाने सुहाने और सदाबहार नगमें जिनमे से भूले-बिसरे गीत सुबह के पहले प्रसारण का और गाने सुहाने शाम में प्रसारित होने वाला दैनिक कार्यक्रम हैं तथा सदाबहार नगमें शनिवार को दोपहर बाद में प्रसारित होने वाला कार्यक्रम हैं।

आइए, इस सप्ताह प्रसारित इन तीनों कार्यक्रमों पर एक नजर डालते हैं -

सुबह 7 बजे से 7:30 बजे तक प्रसारित भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में दोनों ही तरह के भूले-बिसरे गीत सुनवाए गए यानि ऐसे गीत जो बहुत लोकप्रिय रहे और दूसरे वो गीत जो हमेशा से ही कम सुनवाए जाते हैं, कम लोकप्रिय हैं यानि हमेशा से ही भूले-बिसरे रहे हैं और अब इन बिसराए गीतों को याद कर लिया जा रहा हैं। कभी-कभी इनमे भी कुछ अच्छे गीत सुनने को मिलते हैं और सुन कर आश्चर्य होता हैं कि ये गीत लोकप्रिय गीतों की सूची में क्यों नही हैं।

शुक्रवार को अपने समय के लोकप्रिय गीत सुनवाए गए फूल बने अंगारे फिल्म से -

चाँद आहे भरेगा फूल दिल थाम लेगे
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेगे

इसके अलावा प्यासा, फिर सुबह होगी और पेइंग गेस्ट के गीत सुनवाए गए। हमारा वतन फिल्म का आशा जी का गाया यह गीत अच्छा लगा जो बहुत ही कम सुनवाया जाता हैं -

मेरी जिन्दगी में कोई आ गया
दिल में समा गया
आज मेरा नाचे जिया झूम के

ऐसा ही गीत पटरानी फिल्म से भी सुनवाया गया। फिल्म माशूका से मुकेश और सुरैया की युगल आवाजो में यह गीत भी शामिल था -

झिलमिल तारे करे इशारे सो जा राजदुलारे
इन युगल आवाजो में बहुत ही कम गीत हैं।

शनिवार को पचास के दशक के अधिकतर ऐसे गीत सुनवाए जो कम ही सुनवाए जाते हैं। 1956 में रिलीज फिल्म हीर, 1959 की एक ऎसी फिल्म का गीत सुनवाया जिसकी फिल्म के नाम के साथ अन्य नाम भी ऐसे हैं जिसे शायद ही कभी सुना हो, फिल्म का नाम - नेक खातून, संगीतकार जिमी और गीतकार कमर जमाल साहब, अभिनेता हीरालाल, अभिनेत्री चित्रा। इस फिल्म से लोकप्रिय गायिका गीता दत्त का गाया यह गीत सुनवाया -

आई हूँ दर पे तेरे बन के सवाली
गरीबो के दाता गरीबो के मालिक

गीत उतना अच्छा नही लगा, पर इस फिल्म और इससे सम्बंधित नामो का परिचय मिला जो अच्छी जानकारी रही। पहला पहला प्यार फिल्म का सुमन हेमाडी (जो बाद में सुमन कल्याणपुर के नाम से जानी जाने लगी) का गाया कम सुना गीत भी सुनवाया। इसके अलावा मदारी फिल्म से कमल बारोट और लता जी का गाया यह लोकप्रिय गीत सुनवाया - अकेली मोहे छोड़ न जाना

नया दौर फिल्म का यह बेहद लोकप्रिय युगल गीत सुनवाया - उडी जब जब जुल्फे तेरी

रविवार को निर्मला का रफी साहब के साथ गाया मुसाफिरखाना फिल्म का यह गीत सुनना अच्छा लगा क्योंकि इन युगल आवाजो में और वैसे भी गायिका निर्मला के गीत कम हैं, वैसे यह गीत अक्सर सुनवाया जाता हैं - झूठे जमाने भर के

ऐसे ही जाने-पहचाने गीत सुनवाए गए फिल्म प्यार की जीत, नागिन, जन्म जन्म के फेरे, गूँज उठी शहनाई से और कठपुतली फिल्म का शीर्षक गीत। नागमणि फिल्म से कॉमेडियन सुन्दर और शेख का गाया यह हास्य गीत सुन कर मजा आ गया -

सारी दुनिया हैं बीमार दवा करो

सोमवार को शुरूवात की नागिन फिल्म के गीत से, इस फिल्म का गीत पिछले ही दिन सुनवाया गया था। इसके बाद अगला गीत सुनवाया प्यासा फिल्म से जिसका एक अन्य गीत शुक्रवार को सुनवाया गया था। ये दोनों ऐसे गीत हैं जो अक्सर सुनवाए जाते हैं, जिसमे लव मैरिज फिल्म का गीत भी शामिल था। ऐसे गीत सुनना अच्छा लगा जो कम ही सुनवाए जाते हैं, दिल्ली का ठग, मौसी फिल्मो के गीत और जंगल किंग फिल्म का सुमन कल्याणपुर और बाबुल का गाया यह गीत -

ये हसीं ऋत ये हवा कह रही हैं दिलरूबा
जिन्दगी में प्यार कर

इन युगल स्वरों में गीत शायद बहुत ही कम हैं। ऐसे ही चित्रगुप्त और शमशाद बेगम के युगल स्वरों में नवदुर्गा फिल्म का हास्य गीत भी सुनवाया गया जिसे शायद मैंने पहली ही बार सुना।

मंगलवार को शुरूवात की नौ दो ग्यारह फिल्म के अक्सर सुनवाए जाने वाले इस गीत से -

हम हैं राही प्यार के हम से कुछ न बोलिए

ऐसा ही गीत नई दिल्ली फिल्म से भी सुनवाया। जनम जनम के फेरे फिल्म का लोकप्रिय गीत भी सुनवाया, इस फिल्म का एक गीत रविवार को ही सुनवाया गया था। माशूका फिल्म का कम सुना जाने वाला गीत भी सुनवाया जिसका ऐसा ही गीत शुक्रवार को सुनवाया गया था। मिस्टर क्यू फिल्म से युसूफ आजाद की गाई क़व्वाली सुनवाई गई, यह क़व्वाली और फिल्म का नाम मैंने शायद पहली ही बार सुना। समापन किया हम पंछी एक डाल के फिल्म से बच्चो के गीत से जिसमे जंगल की कहानी हैं। अच्छा लगा यह बच्चो का गीत और क़व्वाली।

बुधवार को ऐसे गायक कलाकारों की आवाजे सुनी जो बाद के समय के गीतों में नही हैं। शुरूवात की सुरेन्द्र के गाए अनमोल घड़ी के गीत से -

वो याद आ रहे गुजरे हुए जमाने

शारदा, दिल्लगी, बाबुल, शगुन फिल्मो के गीत सुनवाए। बहुत दिन बाद पहाडी सान्याल की आवाज सुनी। धूपछांव फिल्म का यह युगल गीत सुनना अच्छा लगा - प्रेम की नय्या चली

शेर दिल फिल्म से मन्नाडे का गाया यह शीर्षक गीत मैंने शायद ही पहले कभी सुना हो - मैं हूँ शेर दिल

आज अधिकतर ऐसे गीत सुनवाए गए जिन्हें कम ही सुनवाया जाता हैं। शुरूवात की इस गीत से -

किसके लिए रूका हैं किसके लिए रुके हो
करना हैं जो भी कर लो

डाकू मंसूर फिल्म का गीत भी शामिल था और एक मेरा अरमान फिल्म से गीता दत्त का गाया शीर्षक गीत भी सुनवाया। हल्की-फुल्की जानकारी भी दी जैसे तलत महमूद का गाया दिले नादाँ फिल्म का गीत सुनवाते हुए यह बताया कि इस फिल्म में उन्होंने अभिनय भी किया हैं, हो सकता हैं यह गीत उन्ही पर फिल्माया गया हो।

एक बात खटक गई, इस सप्ताह कुछ फिल्मो के दो गीत सुनवाए गए, हालांकि गीत अलग थे, फिर भी हम अनुरोध करते हैं कि एक ही फिल्म का दूसरा गीत सुनवाने के लिए भी कम से कम एक महीने का अंतर रखिए।

यह कार्यक्रम प्रायोजित रहा, प्रायोजक के विज्ञापन भी प्रसारित हुए। अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजको के विज्ञापन भी प्रसारित हुए।

शाम 5 बजे दिल्ली से प्रसारित होने वाले समाचारों के 5 मिनट के बुलेटिन के बाद 5:05 से 5:30 तक प्रसारित हुआ कार्यक्रम गाने सुहाने जिसमे हमेशा की तरह अस्सी के दशक और उसके बाद के गीत सुनवाए गए। लेकिन सत्तर के दशक के दो-तीन गीत भी शामिल थे।

शुक्रवार को शुरूवात की दामिनी फिल्म के इस गीत से - जब से तुमको देखा हैं सनम कितने हैं बेचैन

फिर ऐसे ही रोमांटिक युगल गीत जोश और सड़क फिल्मो से सुनवाए गए। अंतिम गीत दिल हैं कि मानता नही फिल्म से था। इस गीत को छोड़ कर सभी युगल गीत थे। एक बात खटक गई, सभी गीत समीर के लिखे थे। शनिवार को शुरूवात की पहेली फिल्म के इस गीत से -

कंगना रे कंगना रे किरणों से सब रंगना रे

इंटर्नेशनल खिलाड़ी, इश्क फिल्मो के गीत सुनवाए और जेंटलमैन फिल्म का यह गीत भी सुनवाया जिसे राजन खेरा ने लिखा हैं जो गीतकारो में बहुत जाना-पहचाना नाम नही हैं -

आशिकी में हद से गुजर जाने को जी चाहे

रविवार को ऐसे रोमांटिक गीत सुनवाए गए जो कम ही सुनवाए जाते हैं। शुरूवात की इस गीत से -

मेरा दिल जिस दिल पे फ़िदा हैं इक दिलरूबा हैं

ऐसे ही गीत अकेले हम अकेले तुम और बागबान फिल्मो से भी सुनवाए गए। दिल का रिश्ता फिल्म का लोकप्रिय गीत भी शामिल था।

सोमवार को शुरूवात की बादल फिल्म के गीत से जिसके बाद जब प्यार किसी से होता हैं फिल्म का यह गीत सुनवाया -

मदहोश दिल की धड़ंकन और चुप से तन्हाई

ये तेरा घर ये मेरा घर और हकीक़त फिल्मो के गीत भी सुनवाए गए।

मंगलवार को होगी प्यार की जीत, गुप्त फिल्मो के गीतों के साथ खिलाड़ी फिल्म का यह गीत भी शामिल था -

मस्त निगाहों में शोखी हैं शरारत हैं

बुधवार को दो बाते ख़ास हुई - सत्तर के दशक के गीत भी सुनवाए गए और उस दौर में चर्चित रही गायिका कंचन के गीत सुनवाए। शुरूवात की कंचन के मुकेश के साथ गाए धर्मात्मा फिल्म के इस गीत से -

तुमने किसे से कभी प्यार किया हैं

इसके बाद कंचन का दूसरा गीत सुना रफूचक्कर फिल्म से फिर तीसरा गीत सुना मनहर के साथ कुर्बानी फिल्म से। अच्छा तो रहा पर लगातार सुनवाने के बजाय एक-दो दिन के अंतराल से सुनवाते तो अच्छा लगता। बाद के समय के गीत भी सुनवाए, कसूर फिल्म से और दिल का क्या कसूर फिल्म का शीर्षक गीत।

आज आ अब लौट चले, तेज़ाब फिल्मो के गीत और हम तुम्हारे हैं सनम फिल्म का शीर्षक गीत सुनवाया गया। यह गीत भी सुना जो बहुत कम ही सुनवाया जाता हैं -

ओ प्रिया सुनो प्रिया मेरे नैनो में रहो प्रिया

इस कार्यक्रम की विशेषता यह हैं कि इसमे हिन्दी सिने संगीत की जानी-मानी आवाजे यानि लता मंगेशकर, किशोर कुमार, आशा भोंसले, मोहम्मद रफी की आवाजों में गीत लगभग नही सुनवाए जाते। यहाँ उस दौर का संगीत सुनने को मिलता हैं जहां इनके अलावा अन्य आवाजे उभर कर आई और लोकप्रिय हुई। इस दृष्टि से यह कार्यक्रम ख़ास लगता हैं और इसमे अच्छे गीत भी सुनने को मिलते हैं।

शुरू और अंत में संकेत धुन सुनवाई गई, जो विभिन्न फिल्मी गीतों के संगीत के अंशो को जोड़ कर तैयार की गई हैं जिसके साथ कार्यक्रम का शीर्षक, उपशीर्षक के साथ बताया गया - दिलकश धुनों से सजे दिलकश तराने -गाने सुहाने। शीर्षक और उप शीर्षक दोनों अच्छे हैं। कार्यक्रम के दौरान अन्य कार्यक्रमों के प्रायोजको के विज्ञापन भी प्रसारित हुए।

शनिवार को आधे घंटे के लिए दोपहर 3 से 3:30 बजे तक प्रसारित सदाबहार नगमे कार्यक्रम मे साठ के दशक के लोकप्रिय फिल्मी गीत सुनवाए। इस कार्यक्रम का उपशीर्षक भी अच्छा हैं - फिल्म संगीत के कालजयी गीतों की पेशकश

शुरूवात की रफी साहब के गाए बहारे फिर भी आएगी फिल्म के इस गीत से जिसके लिए बताया गया कि ओ पी नय्यर के संगीत का विशेष अंदाज हैं -

आपके हसीं रूख पे आज नया नूर हैं
मेरा दिल मचल गया तो मेरा क्या कुसूर हैं

फिर अंदाज बदला और सुनवाया मन्नाडे का शास्त्रीय संगीत में पगा दिल ही तो हैं फिल्म का गीत जो साहिर लुधियानवी का लिखा हैं और जिसके भाव आध्यात्मिक हैं -

लागा चुनरी में दाग छुपाऊँ कैसे

रोमांटिक युगल गीत सुनवाए घर बसा के देखो, सुहागन फिल्मो से, सहेली, दोस्ती फिल्मो से उदास गीत सुनवाए, इस तरह अलग-अलग मूड के गाने सुनवाए गए। संकेत धुन भी अच्छी हैं जो विभिन्न गीतों के लोकप्रिय संगीत के अंशो को जोड़ कर बनाई गई हैं।

मुझे याद हैं वर्ष 2002 तक भूले-बिसरे कार्यक्रम में पचास के दशक के पहले के गीत सुनवाए जाते थे जिनमे मैंने स्नेहलता के गाए गीत भी सुने और एक बार इन्द्रसभा फिल्म का गीत भी सुना। यह ऐसे गीत हैं जिनमे गायकी प्रधान हैं, संगीत नही। कई गीतों में संवाद भी हैं। यह गाने उस पुराने सुनहरे दौर के संगीत का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे गीत आजकल नही सुनवाए जा रहे। यह सच हैं कि समय आगे बढ़ने के साथ इस कार्यक्रम में आगे के गीत प्रसारित हो रहे हैं। ऐसे में पचास के दशक के पहले के गीतों के लिए अलग कार्यक्रम रखने का अनुरोध हैं ताकि ये गीत हम भूले नही और साथ ही उस समय के संगीत का भी आनंद मिले।

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