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Friday, October 30, 2009

प्यार-मोहब्बत के गानों की दुपहरियों की साप्ताहिकी 29-10-09

त्रिवेणी कार्यक्रम के बाद क्षेत्रीय प्रसारण तेलुगु भाषा में शुरू हो जाता है फिर हम दोपहर 12 बजे ही केन्द्रीय सेवा से जुडते है। रविवार को क्षेत्रीय प्रायोजित कार्यक्रम के कारण 12:30 बजे से जुड़ते है।

दोपहर 12 बजे एस एम एस के बहाने वी बी एस के तराने कार्यक्रम में हमेशा की तरह शुरूवात में 10-11 फ़िल्मों के नाम बता दिए गए फिर बताया गया एस एम एस करने का तरीका। पहला गीत उदघोषक की खुद की पसन्द का सुनवाया गया ताकि तब तक संदेश आ सके। फिर शुरू हुआ संदेशों का सिलसिला और इन संदेशों को 12:50 तक भेजने के लिए कहा गया ताकि शामिल किया जा सकें।

शुक्रवार को सत्तर अस्सी के दशक की यह फ़िल्में रही- बाबू, एक चादर मैली सी, आहिस्ता-आहिस्ता, मनचली, महबूबा, दुल्हन, गीत गाता चल, अपनापन, आपकी कसम, पलकों की छाँव में। इन फ़िल्मों के गीत सुनवाने आईं शहनाज़ (अख़्तरी) जी। शनिवार को नई फ़िल्में रही - चमेली, रेफ़्यूज़ी, अशोका, बेटा, परिणीता, चीनी कम, बीवी नं 1, विरासत, तेज़ाब, राम लखन, दिल तो पागल है, इन फ़िल्मों के गीत सुनवाने आईं रेणु (बंसल) जी। रविवार को नई फ़िल्में रही - ग़ुलाम, ओंकारा, हम, देवदास। सोमवार को कार्यक्रम विशेष रहा। इस दिन याद किया गया दो महान हस्तियों को शायर गीतकार - साहिर लुधियानवी और फ़िल्मकार व्ही शान्ताराम को साथ ही जन्मदिन पर याद किया अभिनेत्री रवीना टंडन और संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर को। इनकी फ़िल्में लेकर शहनाज़ (अख़्तरी) जी आई और श्रोताओं ने भी इनके लोकप्रिय गीतों के लिए संदेश भेजे -

साहिर लुधियानवी की नई पुरानी फ़िल्में लैला मजनूँ, काजल, कभी-कभी, गुमराह और हमराज़ का यह गीत -

न मुँह छुपा के जिओ और न सर झुका के जिओ

व्ही शान्ताराम की फ़िल्म नवरंग का यह गीत - आधा है चन्द्रमा रात आधी

अभिनेत्री रवीना टंडन की फ़िल्में - पत्थर के फूल, बड़े मियाँ छोटे मियाँ और उनका मोहरा फ़िल्म से यह लोकप्रिय गीत - तू चीज़ बड़ी है मस्त-मस्त

संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर की फ़िल्म लेकिन का यह लोकप्रिय गीत - यारा सिलीसिली

सुनवाया गया। व्ही शान्ताराम की दो आँखें बारह हाथ फ़िल्म को शामिल नहीं किया तो अच्छा नहीं लगा। उनकी दो-तीन फ़िल्में शामिल होती तो अच्छा लगता क्योंकि न केवल वो वरिष्ठ फ़िल्मकार है बल्कि सिनेमा के विकास में भी उनका योगदान है।

मंगलवार को सत्तर अस्सी के दशक की लोकप्रिय फ़िल्में रही - कटी पतंग, निकाह, बाबी, दूसरा आदमी, दिल है कि मानता नहीं, साजन, अभिमान, कर्ज़। इनके सीडी लेकर आईं मंजू (द्विवेदी) जी।

बुधवार को मुझ से शादी करोगी, ओम शान्ति, रब ने बना दी जोड़ी, सिंह इज़ किंग, जैसी नई फ़िल्मों के साथ आईं मंजू (द्विवेदी) जी। इस दिन 12:15 से क्षेत्रीय प्रायोजित कार्यक्रम प्रसारित हुआ फिर 12:30 बजे से हम केन्द्रीय सेवा से जुड़े। गुरूवार को लाल पत्थर, महल, अलबेला, किनारा, अभिलाषा, भूत बंगला, ममता, कश्मीर की कलि, नमक हराम - इनके सीडी लेकर आईं शायद राजुल जी

आधा कार्यक्रम समाप्त होने के बाद फिर से बची हुई फ़िल्मों के नाम बताए गए और फिर से बताया गया एस एम एस करने का तरीका। एक घण्टे के इस कार्यक्रम के अंत में अगले दिन की 10-11 फ़िल्मों के नाम बताए गए। इस कार्यक्रम में यह सप्ताह महिला सप्ताह रहा, हर दिन उदघोषिका (महिला उदघोषक) पधारी। आवाज़ों में विविधता होती तो अच्छा लगता एकरसता अच्छी नहीं लगी।

इस सप्ताह भी पुराने पचास के दशक से लेकर आज के दौर की फ़िल्में शामिल रही, यानि हर उमर के श्रोता के लिए रहा यह कार्यक्रम। अलग-अलग उम्र के श्रोता के लिए अलग-अलग दिन जैसे शनिवार, रविवार और बुधवार सिर्फ नए गाने, इस तरह हर दिन एक दौर के गाने। हर दिन के लिए अच्छी फिल्में चुनी गई।

अधिकतर संदेश लोकप्रिय गीतों के लिए आए इसीसे इन फ़िल्मों के कम लोकप्रिय गीत सुनवाए नहीं जा सके। कभी कुछ गीत लम्बे होने से 10 से कम गीत बजे। अधिकतर रोमांटिक गीत सुनवाए गए पर कुछ अलग तरह के गीतों के लिए भी संदेश आए जैसे -

आदमी मुसाफ़िर है आता है जाता है (फ़िल्म अपनापन)

नाम गुम जाएगा (किनारा)

इस सप्ताह लगा संदेशों की संख्या बढी, हर गाने के लिए औसत 8 संदेश आए। सप्ताह भर इस कार्यक्रम को प्रस्तुत किया विजय दीपक छिब्बर जी ने। तकनीकी सहयोग रहा प्रदीप शिन्दे, सुभाष कामले, सुनील भुजबल, विनायक तलवलकर…

यहां एक और बात, यह नई उदघोषिकाएं अपना नाम तक बताने में इतना शर्माती है कि ठीक से हम सुन नहीं पाते, अरे भई... अपना और साथियों का नाम जोर-शोर से बताया करो आखिर विविध भारती का प्रसारण पहुंचा रहे हो।

1:00 बजे शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम अनुरंजनि में शुक्रवार को वेंकटेश गौड़चिन्दी का गायन सुनवाया गया, राग मुल्तानी में ख़्याल, राग पूरिया और राग यमन में तराना सुनवाया गया जिसमें हारमोनियम पर संगत की मधुसूदन पंडित ने और तबले पर संगत की भावसाहब दीक्षित ने। शनिवार को विनायक पाठक का तबला वादन तीन ताल में, जगन्नाथ और साथियों का बजाया शहनाई वादन - राग अहीर भैरव और भैरव सुनवाया गया। रविवार को के जी गिंडे का गायन सुनवाया गया, राग भीमपलासी के बाद छोटी-छोटी बंदिशे सुनवाई गई - राग यमन में धुपद, धमाल, राग ललित में होरी धमाल की जिसके लिए हारमोनियम पर संगत की थी गुरूदत्त हेपलेकर और तबले पर लोकेश शमसी ने। सोमवार को पंडित बी वी पलोसकर का गायन सुना राग आसावरी, केदार, गौड़ सारंग, हमीर, मियाँ की मल्हार, मालकौंस, विभास में ख़्याल और राग तिलक कामोद में -

कोयलिया बोले अमवा की डाल पर

सुनकर वाकई आनन्द आ गया, मुझे तो बचपन की याद आ गई, मैनें बचपन में यह सीखा था। मंगलवार को वीरेश्वर गौतम का उप शास्त्रीय गायन सुनवाया गया। सबसे पहले सुनवाई गई राग मिश्र गारा में ठुमरी -

गुज़र गई रतिया पिया नहीं आए

उसके बाद हमने आनद लिया बारहमासी और दादरा का। वादक कलाकारों के नाम नहीं बताए गए।

बुधवार को शरत केलवडे का गायन सुनवाया गया, राग रस रंजनि में बोल थे - अबुहन आए पिया, राग मधु रंजनि में बोल थे - आए बलमा मोरे अंगना जिसके लिए हारमोनियम पर संगत की थी गुरूदत्त हेपलेकर और तबले पर विश्वनाथ मिश्र ने। गुरूवार को उप शास्त्रीय गायन सुनवाया गया - माधुरी देवलकर की आवाज़ में राग काफ़ी में ठुमरी जिसके बोल थे - होली खेलत गिरधारी और सविता देवी की आवाज़ में मिश्र काफ़ी में होरी - उड़त अबीर गुलाल।

सप्ताह में उप शास्त्रीय गायन और गायन में एक दिन में कम से कम तीन और अधिक से अधिक आठ प्रस्तुतियाँ रही। छोटी-छोटी बंदिशें सुनने में भी आनन्द आया। लेकिन एक बात अखर गई वादन केवल एक ही दिन सुनवाय गया।

1:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम जो प्रायोजित था। इस कार्यक्रम और अन्य कार्यक्रमों के केवल प्रायोजक के विज्ञापन ही प्रसारित हुए। पत्रों पर आधारित फ़रमाइशी गीतों में शुक्रवार को पुरानी नई फ़िल्मों के अधिक लोकप्रिय कम लोकप्रिय मिले-जुले गीत सुनवाए गए - कल आज और कल, प्रिंस, पराया धन, आदमी खिलौना है, हवालात, पत्थर के फूल, लुटेरे, बड़े मियाँ छोटे मियाँ। शनिवार को सत्तर अस्सी के दशक की लोकप्रिय फ़िल्मों जैसे शान, मर्यादा, अमर अकबर एंथोनी, प्रेमरोग और अंतिम दौर में दो-तीन नई फ़िल्मों जैसे क्यों हो गया न के गीत भी सुनवाए गए। रविवार को तलाश, दुश्मन, जुगनू, डिस्को डांसर, यादों की बारात, पराया धन, दूसरा आदमी, अलबेला, साथिया फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए। सोमवार की फ़िल्में रही - पिया का घर, पुलिस पब्लिक, पराया धन, हमजोली, ख़ानदान, जब वी मेट। मंगलवार को अधिकतर सत्तर अस्सी के दशक के गीत शामिल रहे - मस्ताना, देस परदेस, धर्मात्मा, मन मन्दिर, लगान, विजयपथ, हथकड़ी, हमराज़ और इस तरह एकाध नई फ़िल्म के गीत भी सुनवाए गए।

इस तरह पिछली सदी यानि सत्तर अस्सी के दशक के गीत सुनवाए गए एकाध गीत साठ और नब्बे के दशक से भी था। अंतिम दौर में दो-तीन नई फ़िल्मों के गीत भी सुनवाए गए।

बुधवार और गुरूवार को श्रोताओं के ई-मेल से प्राप्त संदेशों पर फ़रमाइशी गीत सुनवाए गए। इस सप्ताह भी कुछ पुरानी फ़िल्मों के गीत अधिक सुनवाए गए। ज्यादातर लोकप्रिय गीत सुनवाए गए। अधिकतर गीत एक-एक मेल प्राप्त होने पर ही सुनवा दिए गए, अभी भी मेल संख्या बढी नहीं है जबकि पत्रों की स्थिति पहले जैसी ही रही। देश के दूरदराज से कई फ़रमाइशी पत्र और हर पत्र में नामों की लम्बी सूची।

सप्ताह भर सुनवाए गए गीतों में ज्यादातर गीत रोंमांटिक ही रहे, और रोमांटिक गाने भी ऐसे…

चुपके से दिल दे दे नई ते शोर मच जाएगा

हाय रे हाय नींद नहीं आए चैन नहीं आए

कमाल की पसन्द है हमारे श्रोताओं की भी। मुझे याद आ गई फ़िल्म नरम-गरम जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा को स्वरूप सम्पत से प्यार हो जाता है और वो गैरेज काम-काज छोड़ कर विविध भारती के प्यार-मोहब्बत के गाने सुनते है।

हालांकि कई बढिया विषयों पर उम्दा गीत है फ़िल्मों में और कुछ श्रोता ऐसे गीतों के लिए अनुरोध भी करते है। जैसे बुधवार को संयोजन बड़ा अच्छा रहा - आपकी क़सम का यह गीत -

ज़िन्दगी के सफ़र में गुज़र जाते है जो मक़ाम
वो फिर नहीं आते

रोमांटिक गाना भी अच्छा रहा - फ़िल्म अँखियों के झरोके से का शीर्षक गीत। इसके अलावा इन फ़िल्मों के गीतों से विविधता बनी रही - दिल-ए-नादाँ, अर्पण, कटी पतंग, प्यार झुकता नहीं और नई फ़िल्मों में धड़कन और स्लम डाग करोड़पति का - जय हो

वैसे सप्ताह भर में एकाध गीत प्यार-मोहब्बत का बड़ा अच्छा भी सुनवाया गया, विजयपथ फ़िल्म से -

राह में उनसे मुलाक़ात हो गई
जिससे डरते थे वही बात हो गई

कम सुने गीत भी सुनवाए गए जैसे हवालात फ़िल्म से शैलेन्द्र सिंह का गाया यह गीत -

शायद तू मुझसे प्यार करती है
लेकिन ज़माने से डरती है

नोक-झोक, छेड़छाड़ के गीत भी शामिल थे जैसे -

बच के जाने न दूँगी दिलदार तेरी मेरी लागी शरत
खाली गाएगें नैनो के वार तेरी मेरी लागी शरत (फ़िल्म - प्रिंस)

गुरूवार को भी अच्छे मिलेजुले गीतों के लिए मेल आए जैसे नई फ़िल्म के लिए पंडित जसराज का गाया गीत और शारदा की आवाज़ में पुरानी फ़िल्म सूरज से -

देखो मेरा दिल मचल गया

चाहे ई-मेल हो, एस एम एस या पत्र एक बात देखी गई दोनों ही फ़रमाइशी गीतों के कार्यक्रम में देश के कई भागों से फ़रमाइश आई जैसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश

दोपहर के इस पूरे प्रसारण के दौरान संदेश भी बहुत बार प्रसारित हुए जिसमें यह बताया गया कि फ़रमाइशी फ़िल्मी गीतों के कार्यक्रम में अपनी पसन्द का गाना सुनने के लिए ई-मेल और एस एम एस कैसे करें।

दोपहर में 2:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम की समाप्ति के बाद आधे घण्टे के लिए क्षेत्रीय प्रसारण होता है जिसके बाद केन्द्रीय सेवा के दोपहर बाद के प्रसारण के लिए हम 3 बजे से जुड़ते है।

1 comment:

BAD FAITH said...

अच्छा आलेख.

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