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Thursday, April 28, 2011

मशहूर रेडियो-प्रसारक श्री ब्रिज भूषणजी को जनम दिन की शुभ: कामना

आज पहेली बार इस मंच पर आवाझ की दुनिया की एक मशहूर हस्ती आदरणिय श्री ब्रिज भूषणजी को मैं याद फरमा रहा हूँ उनके जनम दिन के उपलक्षमें । मेरी उनसे श्री अमीन सायानी साहब के सौजन्य से दूर भाषी पहचान रही है और वह इस लिये की मुम्बई बहोत बड़ा शहर होने के कारण द्और बाहर से हंगामी रूपसे कुछ ही दिन गये लोगों के लिये अगर बहूत सी जगह जाना होता है तो कुछ एक या दोनों और के समय संजोग के कारण मुमकीन नहीं बनाया पाता हालाकि दोनों और से सैद्धांतीक रूप से मिलने की सहमती हो तो भी, पर इस वक्त तो उनकी तसवीर भी मेरे पास उपलब्ध नहीं है और मेरे मनमें भी इनकी काल्पनीक तसवीर ही बनी हुई है अपने हिसाबसे । नहीं तो आज उनका भी विडीयो इन्तर्व्यू इस स्थान से आप देख़ पाते ।
जहाँ तक मूझे याद है रेडियो श्री लंका से करीब 1960 में ज्न्हें फिल्म झूमरू के विज्ञापन और रेडियो प्रोग्रम में सुना था । यहाँ इस फिल्म के सप्ताहमें दो 15 मिनीट के कार्यक्रम आते थे, जिसमें बूधवार रात्री 9 बजे श्री अमीन सायानी साहब और रविवार दो पहर 12 बजे श्री ब्रिज भूषण साहब इसे प्रस्तूत करते थे । और अपना निज़ी व्यवसाय शुरू करने तक रेडियो सिलोन से अमीन सायानी साहब के सबसे अच्छे साथिदार के रूपमें लोगों की चाहना प्राप्त की थी, अन्य कार्यक्रमोमें शनिवार रात्री रेडियो कहानी और रविवार दो पहर 12.45 पर संगीत पत्रिका बारी बारी श्री कमल बारोट और स्व. शील कूमार वगैरह के साथ प्रस्तूत किये थे । उसके बाद विविध भारती से भी कई कार्यक्रम किये जो स्थानिय प्रसारणमें होने के कारण पूरे देशमें नहीं पहोंच पाये । जिसमें चेरि ब्लोसम नोक झोक उनके साथ उनकी पत्नी मधूरजी (झाहीरा) भी होती थी और इस कार्यक्रम की ओपनींग और क्लोझींग उन्होंने श्री अमीन सायानी साहब से करवाई थी,जो भी मशहूर रेडियो ब्रोडकास्टर रह चूकी है । जहाँ तक मूझे याद है उनका अंतीम रेडियो कार्यक्रम फेमीना की मेहफ़ील था और बादमें वे दृष्य माध्यम यानि टीवी की दुनियामें वोईस-ओवर कलाकार के रूपमें विज्ञापनोंमें ख़ास कर सक्रीय हो गये और रेडियो छूट गया जो श्री कमल शर्माजी के द्वारा उनकी मुलाकात आज के मेहमान अंतर्गत ली गई, तब जूडा ।
इस के अलावा हिन्दी फिल्मोमें संगीतकार के रूपमें उन्होंने फिल्म पठान ( उनके ससुर श्री आताउल्लह ख़ान की निर्मीत फिल्म जो उनका सम्बंध ज़ूड़ने से पहेले की थी सिर्फ एक गाना), मिलाप (दूसरी) एक नाँव दो किनारे, काम शास्त्र और संगदिल (दूसरी) संगीत दिया है ।
एक सुर पहेलू गायक के रूपमें फिल्म पूरब और पश्चीममें ओम जय जगदीश हरे के पहेले संस्कृत श्लोक कल्याणजी आनंदजीने ब्रिज भूषणजी से गवाये थे ।
डबींग कलाकार के रूपमें भी उन्होंनें फिल्म सरस्वती चन्द्रमें बंगाली भाषी कलाकार मनीष कूमार के लिये, फिल्म उपहारमें बंगाली भाषी कलाकार श्री स्वरूप दत्त के लिये और मन मेरा तन तेरा में कोलेज के प्रिन्सीपाल करने वाले कलाकार के लिये डबींग की है ।
श्री ब्रिज भूषण जी को रेडियोनामाकी और से लम्बे स्वस्थ और सक्रिय आयु की शुभ: कामनाएँ ।
पियुष महेता ।
सुरत ।

8 comments:

Ramgopal Vishwakarma said...

मशहूर रेडियो-प्रसारक श्री ब्रिज भूषणजी को हमारी ओर से जन्मदिन की हार्दिक-हार्दिक शुभकामनायें !!
आपने इस पोस्ट के माध्यम से पुरानी यादों को ताजा कर दिया हैं! बहुत-बहुत धन्यबाद !!

आपका रेडियो मित्र
रामगोपाल विश्वकर्मा
भोपाल (मध्यप्रदेश)
वेबसाइट :www.airlrgv.tk
ई-मेल : airlrgv@gmail.com

डॉ. अजीत कुमार said...

हमारी और से भी ब्रज भूषण जी को हार्दिक शुभकामनाएं.

annapurna said...
This comment has been removed by the author.
annapurna said...

बृज भूषण जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं !

yunus said...

हमने रेडियोनामा टीम की ओर से उन्‍हें व्‍यक्तिगत रूप से बधाईयां दीं। उनके घर जाकर। बड़ा अच्‍छा लगा।

डॉ. अजीत कुमार said...

युनुस जी, ये तो आपने बड़ी अच्छी बात की. क्या आप उनकी कोई तस्वीर ले पाए. अगर हो सके तो हमसे साझा करें.

PIYUSH MEHTA-SURAT said...

युनूसजी,
आज आप को एक लम्बे अरसे के बाद मेरी पोस्ट पर टिपणीकार के रूपमें पा कर बहोत बहोत बहोत खुशी हुई । आपकी व्यस्तता जरूर एक कारण है फ़िर भी आपने इस ब्लोग का जिक्र करते हुए इस ब्लोग की पूरी टीम की और से जनम दिन की बधाईयाँ प्रस्तूत की तो यहाँ तो सोने पे सुहागा हुआ । मेरी एक ही मनीषा रही है कि इस तरह के महान और एक हद तक़ नींव का काम करने वाले लोगों को लोगो के मन में कायम रख़ना है । आप इनकी एक तसवीर ला कर इघर आप के नाम के साथ चीपकाते तो ज़्यादा मझा आता । या अपने मोबाईलमें आप के इस मूलाकात का एक अंश विडीयो रिकोर्डींग कर के यहाँ प्रस्तूत करते तो भी चार चांद लग जाते । फ़िर भी आपकी भावना की कद्र है ।

Chidambar said...

स्पटिक स्पष्ट आवाज के धनी ब्रिज भूषण जी के बारे में पढ कर अच्छा लगा । अमीन सायानी जी की गैर मौजूदगी में वे कभी कभी बिनाका गीत माला भी प्रस्तुत किया करते थे ।


चिदंबर काकतकर
मंगलूर

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