There was an error in this gadget

Friday, January 16, 2009

साप्ताहिकी 15-1-09

इस सप्ताह देश भर में अलग-अलग नाम और ढंग से मनाए जाने वाले पर्व मकर संक्रान्ति, पोंगल, लोहिड़ी, बीहू की झलक नज़र आई।

सप्ताह भर सुबह 6 बजे समाचार के बाद चाण्क्य, गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानन्द, रामकृष्ण परमहंस, विदेशी साहित्यकारों जैसे शेक्सपियर के विचार बताए गए। वन्दनवार में नए पुराने भजन सुनवाए गए जैसे हर दिन कार्यक्रम का समापन देशगान से होता रहा। कभी कभार विवरण भी बताया गया जैसे मीना कपूर और साथियों की आवाज़ों में जयशंकर प्रसाद की रचना -

अरूण यह मधुमय देश हमारा

7 बजे भूले-बिसरे गीत कार्यक्रम में सुमन हेमाणी और कृष्णा कल्ले का गाया कमल राजस्थानी का लिखा यह गीत लगभग हम भूल से गए थे, बहुत-बहुत दिन बाद इस भूले बिसरे गीत को सुनना अच्छा लगा -

गिरा मोरा कँगना सैंया के अँगना

हर दिन समापन कुन्दनलाल (के एल) सहगल के गीतों से होता रहा।

7:30 बजे संगीत सरिता में श्रृंखला गंधार गुंजन में तीसरे खण्ड में शाम के बाद गाए जाने वाले राग जैसे बागेश्री की चर्चा हुई और संगीत कार्यक्रमों की परम्परा के अनुसार समापन राग भैरवी से हुआ। इस श्रृंखला के चौथे खण्ड की शुरूवात हुई। चौथे खण्ड में ऐसे रागों की चर्चा की जा रही है जिसमें गंधार का प्रयोग नहीं होता है। आमंत्रित कलाकार है विख्यात गायिका शुभा जोशी जी जिनसे बातचीत कर रहे है अशोक (सोनावणे) जी। राग मदमाद सारंग, गोरख कल्याण, कम चर्चित राग नारायणी पर चर्चा हुई। हर राग पर बंदिशे भी प्रस्तुत की गई और फ़िल्मी गीत भी।
7:45 को त्रिवेणी में जीवन के अँधेरे की चर्चा हुई, एक दूसरे से अपनी बात कहने और सुनने की बात हुई, व्यक्तितत्व का नकारात्मक रूप भी बताया गया और सुनवाया गया यह गीत -

कुछ लोग यहाँ पर ऐसे है
हर रंग में रंग बदलते है

दोपहर 12 बजे एस एम एस एस के बहाने वी बी एस के तराने कार्यक्रम में शुक्रवार को आई सलमा (सय्यद) जी, फ़िल्में रही साहेब, डिस्को डाँसर, मि इंडिया, राम लखन, जाँबाज़, क़ुर्बानी जैसी अस्सी के दशक की लोकप्रिय फ़िल्में। शनिवार को रोज़ा, भूल भुलैंया, मेजर साहब, मैं हूँ न, गैंगस्टर, जेसलमर जैसी नई लोकप्रिय फ़िल्में लेकर आईं रेणु (बंसल) जी। सोमवार को युनूस जी लाए सत्तर के दशक के लोकप्रिय नग़में, फ़िल्में रही लैला मजनूँ, खेल खेल में, रफ़ूचक्कर, कर्ज़, हम किसी से कम नहीं, कभी-कभी। मंगलवार को सलमा (सय्यद) जी ले आईं नई फ़िल्में विवाह, गुप्त, चालबाज़, जोरू का ग़ुलाम, जैसी नई फ़िल्में। बुधवार को संक्रान्ति को ध्यान में रखकर चुनी गई पुरानी फ़िल्म भाभी जिसके अलावा फ़िल्में रही हम दिल दे चुके सनम, दिल चाहता है, जो जीता वो सिकन्दर, हनीमून ट्रैवल्स, बँटी और बबली जैसी नई पुरानी लोकप्रिय फ़िल्में। गुरूवार को पुरानी नई फ़िल्में लेकर हाज़िर हुई शहनाज़ (अख़्तरी) जी, फ़िल्में रही पारसमणि, दिल ने फिर याद किया, हिमालय की गोद में, कयामत से कयामत तक, मिशन कश्मीर

1:00 बजे म्यूज़िक मसाला कार्यक्रम में इस सप्ताह अच्छा लगा कमल ख़ान की आवाज़ में सुनो तो दीवाना दिल एलबम का यह गीत -

सुनो तो दीवाना दिल कहता है
हमसे मिल जाना कभी न कभी
तो तू भी मिलके हमसे खिल जाना

1:30 बजे मन चाहे गीत कार्यक्रम में नए गीत अधिक सुनवाए गए।

3 बजे सखि सहेली में शुक्रवार को हैलो सहेली कार्यक्रम में फोन पर सखियों से बातचीत की शहनाज़ (अख़्तरी) जी ने। जौनपुर, अहमदाबाद, उत्तर प्रदेश जैसे विभिन्न स्थानों से फोन आए। छात्राओं और कामकाजी महिलाओं ने फोन किया। अपनी पढाई और अपने काम के बारे में बताया। पसन्दीदा रेडियो कार्यक्रम बताए और अपने शौक भी। जौनपुर का मौसम पता चला कि वहाँ सर्दी हो रही है। उनकी पसन्द के नए पुराने गीत सुनवाए गए।

सोमवार को लौकी का हलवा और काजू रोल बनाना बताया गया। काजू रोल नई चीज़ है, अच्छी लगी यह रेसिपी, इसे बनाया जा सकता है। अच्छा होता अगर सक्रान्ति को ध्यान में रखकर तिल की कुछ नई पुरानी मिठाई बताई जाती। इस दिन जवाब फ़िल्म का कानन देवी का गाया यह गीत बहुत दिन बाद सुन कर अच्छा लगा -

तूफ़ान मेल दुनिया ये दुनिया

मंगलवार को यह कार्यक्रम लोहड़ी के रंग में रंगा था। करिअर के लिए शिक्षा कभी-कभार पैसों की कमी के कारण नहीं हो पाती है। इस दिशा में बैंकों से मिलने वाले शिक्षा ॠण की जानकारी दी गई। गुरूवार को सफल महिलाओं की जानकारी दी जाती है। इस बार 15 जनवरी भारतीय थल सेना दिवस के अवसर पर पहली महिला लेफ़्टिनेंट जरनल सुनीता अरोड़ा के बारे में बताया गया।

रविवार को सदाबहार नग़में कार्यक्रम में लोकप्रिय फ़िल्मों के सदाबहार गीत सुनवाए गए।

3:30 बजे शनिवार और रविवार को नाट्य तरंग में नन्दलाल पाठक के मूल गुजराती नाटक ययाति का हिन्दी रेडियो नाट्य रूपान्तर सुनवाया गया।

शाम 4 बजे रविवार को यूथ एक्सप्रेस में स्वामी विवेकानद के जन्मदिन युवा दिवस को ध्यान में रखकर उनके जीवन और कार्यों से संबंधित वार्ता सुनवाई गई। सर्दी के इस मौसम में नैनीताल की पहाड़ियों की सैर करवाई गई। साथ ही विभिन्न कोर्सों के लिए प्रवेश की सूचना दी गई।

पिटारा में शुक्रवार को पिटारे में पिटारा कार्यक्रम में हमारे मेहमान कार्यक्रम में पहली महिला ट्रेन ड्राइवर सुरेखा यादव से युनूस जी की बातचीत प्रसारित हुई। पहले भी यह कार्यक्रम सुना था, फिर से सुनना अच्छा लगा। सोमवार को सेहतनामा कार्यक्रम में डा समीर पारिख़ से पेट के रोगों पर निम्मी (मिश्रा) जी की बातचीत प्रसारित हुई। हमेशा की तरह विस्तृत और अच्छी जानकारी मिली। हैलो फ़रमाइश में शनिवार, मंगलवार और गुरूवार को भी विभिन्न स्तर के श्रोताओं के फोन आए और उनके पसंदीदा नए पुराने गीत सुनवाए गए साथ ही हल्की फुल्की बातचीत होती रही।

5 बजे समाचारों के पाँच मिनट के बुलेटिन के बाद नए फ़िल्मी गानों के कार्यक्रम फ़िल्मी हंगामा में भूतनाथ, मेरे बाप पहले आप जैसी नई फ़िल्मों के गीत बजे।

7 बजे जयमाला में सुनवाए गए गानों में नए पुराने अच्छे गीत सुनवाए गए। नए गाने अधिक ही सुनवाए गए।

7:45 पर शुक्रवार को लोकसंगीत में अवधि गीत सुनने में अच्छा लगा पर अब लिखते समय बोल मैं भूल रही हूँ, पनिया भरन को जाना … कुछ ऐसे ही थे। चन्द्राणी मुखर्जी का मारवाड़ी गीत भी अच्छा लगा। शनिवार और सोमवार को पत्रावली में पधारे निम्मी (मिश्रा) जी और महेन्द्र मोदी जी। इस बार की पत्रावली में नए साल की शुभकामनाएँ थी और कुछ तकनीकी शिकायते थी जैसे राष्ट्रीय चैनल पर चौबीस घण्टे प्रसारण नहीं हो रहा जिसके लिए बताया गया कि डीटीहेच पर प्रसारण हो रहा है। मंगलवार को बज्म-ए-क़व्वाली में फिल्मी क़व्वालियाँ सुनवाई गई। बुधवार को गीतकार नुसरत बद्र से राजेन्द्र (त्रिपाठी) जी की बातचीत की अगली कड़ी प्रसारित हुई। रविवार और गुरूवार को राग-अनुराग में विभिन्न रागों पर आधारित फ़िल्मी गीत सुने जैसे राग किरवानी पर आधारित ब्रह्मचारी फ़िल्म का रफ़ी साहब का गाया गीत -

मैं गाऊँ तुम सो जाओ
सुख सपनों में खो जाओ मैं
गाऊँ तुम सो जाओ

8 बजे हवामहल में सुनी झलकियाँ चौखट से बाहर (रचना वीणा शर्मा निर्देशिका शकुन्तला पंडित) सुबह होने तक (रचना रेहाना निज़ामी निर्देशक गुरमीत) इस सप्ताह कुछ ऐसी झलकियाँ सुनवाई गई जो बहुत बार सुनी गई नहीं थी।

9 बजे गुलदस्ता में इस सप्ताह सबा अफ़गानी का यह कलाम अच्छा लगा जिसे आवाज़ दी जगजीत सिंह ने -

गुलशन की फ़कत फूलों से नहीं काँटों से भी रौनक़ है
ज़िन्दगी में ग़म की भी ज़रूरत है

9:30 बजे एक ही फ़िल्म से कार्यक्रम में परदेस, आनन्द आश्रम, लक्ष्य जैसी नई पुरानी फ़िल्मों के गीत सुनवाए गए।

रविवार को उजाले उनकी यादों के कार्यक्रम में निर्माता निर्देशक जे ओमप्रकाश से युनूस जी की बातचीत की अगली कड़ी सुनी। अपनी लोकप्रिय फ़िल्म आप की कसम के बारे में बताया कि यह फ़िल्म दक्षिण भारतीय कहानी पर आधारित है। यह भी बताया कि उनकी फ़िल्मों को उनसे ज्यादा दूसरों ने निर्देशित किया जैसे रघुनाथ झालानी। एक बात बड़ी अच्छी बताई कि उनकी फ़िल्मों में नायिका के पहारावे पर अधिक ध्यान रखा गया कि उनकी किसी भी फ़िल्म में किसी नायिका ने स्लीवलेस ब्लाउज़ भी नहीं पहना। मैं यह सुन कर चौंक गई। पहले ध्यान नहीं दिया पर अब जब भी उनकी फ़िल्में देखूँगी इस बात पर ध्यान दूँगी।

10 बजे छाया गीत में इस सप्ताह ही वही विषय और वही बातें रही। यहाँ एक बात मैं कहना चाहूँगी कि छाया गीत में रात की, चाँद तारों की बातें अच्छी लगती है पर दिन की, उजाले की बातें करने में हर्ज क्या है बशर्ते आलेख और गीत अच्छे हो।

1 comment:

mamta said...

बाप रे आप इतना सब कुछ कैसे याद रख लेती है । एक बढ़िया साप्ताहिकी प्रस्तुत करने के लिए बधाई ।

Post a Comment

आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद।

अपनी राय दें